इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग

जब प्रतिभूतियां को उसी दिन खरीदा और बेचा जाता है और ट्रेडिंग  की अवधि खत्म होने से पहले ही सारी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ कर दिया जाता है उसे  इंट्राडे ट्रेडिंग कहा जाता है; जबकि जब प्रतिभूतियां खरीदी जाती हैं और रात को रखी जाती है और डिलीवरी ली जाती हैं, तो उसे डिलिवरी ट्रेडिंग कहा जाता है।

बाजार में निवेश करने के लिए  यह दो तरीके हैं.

व्यापार के दोनों रूपों और शामिल जोखिमों और पूंजी के पीछे उद्देश्य या इरादा इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग में भिन्न होता है। इंट्राडे ट्रेडिंग  में प्रतिभूतियों  को बहुत कम अवधि के लिए रखा जाता है, यानी केवल एक दिन के लिए, जबकि डिलीवरी ट्रेडिंग में प्रतिभूतियां को बहुत अधिक समय तक के लिए रखा जाता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग की पसंद  ट्रेडर पर निर्भर करती है उसके इरादे, जोखिम लेने की शक्ति, उपलब्ध पूंजी और कई अन्य कारकों के आधार पर निर्भर करती है । व्यावहारिक रूप से, इंट्राडे ट्रेडिंग और डिलिवरी ट्रेडिंग निम्नलिखित मानकों पर भिन्न है:

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग का उद्देश्य/इरादा:

इंट्राडे ट्रेडिंग  के पीछे उद्देश्य या इरादा आम तौर पर जल्दी से लाभ कमाने का होता है। कारोबारी  दिन के अंत से पहले  सारी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ किया जाता है, इसलिए इंट्राडे ट्रेडर्स  बाजार में प्रतिभूतियों की कीमत में एक दिन के भीतर उतार चढ़ाव का लाभ उठाता है हैं और फिर लाभ कमाते हैं। हालांकि,  ट्रेडर जो डिलिवरी ट्रेडिंग में शामिल होते हैं, उनका इरादा  निवेश का होता है क्योंकि प्रतिभूतियां लंबे समय के लिए खरीदी जाती है।

यदि ट्रेडर्स  छोटे अंतराल के लिए बाजार पर अपना रुख बनाना चाहता है और इन निर्णयों को बनाने में मदद के लिए तकनीकी  टूल्स का भी उपयोग कर सकते है, तो इंट्राडे ट्रेडिंग एक अच्छा विकल्प है, हालांकि, यदि ट्रेडर्स प्रतिभूतियों के मौलिक आकलन कर दीर्घकालिक निवेश करना चाहता है, तो डिलीवरी ट्रेडिंग एक बेहतर अनुकूल विकल्प है।

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग के लिए आवश्यक पूंजी :

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए आमतौर पर कम  पूंजी की जरूरत होती है क्योंकि इंट्राडे ट्रेडिंग में कम मार्जिन का भुगतान किया जाता है। भारी लाभ अर्जित करने के लिए कम पूंजी का उपयोग किया जाता है और कम निवेश  से अधिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। यहां तक ​​कि यदि आपके पास कम पूंजी    है, तो आपके लिए पूंजी को कई बार लेनदेन करने से ज्यादा लाभ उठा सकते हैं।

दूसरी तरफ, डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए पूर्ण अग्रिम भुगतान किया जाता  हैं। प्रतिभूतियों का पूरी तरह भुगतान कर दिए जाने से भविष्य में अवसर उत्पन्न होने पर पूंजी समाप्त हो चुकी होती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग में शामिल जोखिम:

इंट्राडे ट्रेडिंग में, प्रतिभूतियां को बाजार समाप्ति के सत्र से पहले अपनी पोजीशन को  स्क्वायर ऑफ करना होता है, इसलिए जोखिम दिन के भीतर ही सीमित होता है, लेकिन  डिलीवरी ट्रेडिंग में  प्रतिभूतियों को लंबे समय के लिए खरीदा जाता है और वास्तव में महीनों और वर्षों के लिए, और इस तरह जोखिम जारी  रहता है।

हालांकि, इंट्राडे ट्रेडिंग इस पहलू में अधिक जोखिम भरा होता है कि लाभ या हानि केवल उस   प्रतिभूति के उतार-चढ़ाव के प्रदर्शन के आधार मिलता है और व्यापारी को प्रत्येक उतार चढ़ाव को  बहुत ध्यान से देखना होता है, जबकि डिलीवरी ट्रेडिंग में, भले ही प्रतिभूति बहुत अच्छी तरह से न काम नहीं करें, तो भी निवेशक को बोनस इशू , लाभांश भुगतान, राइट इशू आदि प्राप्त करने का लाभ मिलता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरेज शुल्क:

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए लगाए गए ब्रोकरेज हमेशा  डिलीवरी ट्रेडिंग  के ब्रोकरेज से कम होता है। कुछ ब्रोकर वॉल्यूम कारोबार के आधार पर ब्रोकरेज लेते हैं और अन्य,  वॉल्यूम कुछ भी होने के बावजूद,  ब्रोकरेज की एक फ्लैट दर चार्ज करते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग के लिए डीमेट खाते की आवश्यकता :

चूंकि इंट्राडे ट्रेडिंग में प्रतिभूतियों को खरीदा नहीं जाता  है और  ट्रेडिंग दिन के अंत से पहले ही पोजीशन को बंद कर दिया जाता है , इसलिए एक डीमैट खाता की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, डिलीवरी ट्रेडिंग में, प्रतिभूतियों को  ट्रेडर्स को वितरित किया जाता है, इसलिए एक डीमैट खाते की आवश्यकता होती है। यह वह खाता है जहां सभी प्रतिभूतियों को भविष्य के लिए संग्रहीत किया जाता है।

इस प्रकार, चर्चा के अनुसार,  वित्तीय बाजारों से निपटने के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग बनाम डिलिवरी ट्रेडिंग दो अलग-अलग  रणनीतियां हैं। प्रत्येक के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, इसलिए एक ट्रेडर को निर्णय लेने से पहले विचार करना चाहिए कि किस मार्ग पर जाना है।


इंट्राडे  ट्रेडिंग के लाभ

  1. कम पूंजी की आवश्यकता होती है और उच्च मार्जिन उपलब्ध होता  है; प्रतिभूतियों को पूरी राशि का भुगतान किए बिना खरीदा जा सकता है।
  2. कोई रातोंरात जोखिम नहीं हैं।
  3. निवेश का लाभ या नुकसान उसी दिन मिलता है।
  4. ट्रेडिंग अवधि  खत्म होने के बाद धन वापस  मिल जाता है, और इसका उपयोग अगले दिन भी किया जा सकता है।
  5. इंट्राडे ट्रेडिंग  की ब्रोकरेज हमेशा डिलीवरी ट्रेडिंग से कम होती है।
  6. शेयरों की शॉर्ट सेलिंग संभव है, यानी शेयर खरीदने से पहले भी बेचा जा सकता है, जो प्रतिभूतियों की कीमत गिरने के बावजूद मुनाफा कमाने में मदद करता है।

इंट्राडे  ट्रेडिंग के नुकसान

  1. कोई दीर्घकालिक लाभ नहीं है।
  2. उच्च जोखिमों के कारण, भारी नुकसान भी हो सकता है।
  3. इंट्राडे में  दिन के हर मिनट में  ट्रेडर को  निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
  4. प्रतिभूतियों की कीमत पर नुकसान का मतलब है पूंजी की स्पष्ट हानि;  इसकी कोई क्षतिपूर्ति नहीं है क्योंकि दिन के अंत में  सभी ट्रेडों को बंद करना होता है।
  5. दैनिक लाभ और हानि से डे- ट्रेडर के स्वास्थ्य पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता  हैं।

डिलिवरी ट्रेडिंग के लाभ

  1. कीमत बढ़ने के अलावा, बोनस, लाभांश,  राइट इशू इत्यादि के  दीर्घकालिक लाभ होते हैं। इससे उच्च रिटर्न मिलता है।
  2. प्रतिभूतियों को बेचने की कोई समय सीमा नहीं है।
  3. जब तक वे वांछित मूल्य तक पहुंचते नहीं  हैं तब तक प्रतिभूतियां  को रखा जा सकता हैं।
  4. इस सेगमेंट के तहत सभी प्रकार के शेयरों का कारोबार किया जाता है।

डिलिवरी ट्रेडिंग के नुकसान

  1. उच्च ब्रोकरेज का भुगतान किया जाता है।
  2. दीर्घकालिक निवेश बाजार जोखिम, व्यापार चक्र आदि के अधीन है।
  3. पूरा अग्रिम भुगतान किया  जाता है।

इसलिए, इंट्राडे ट्रेडिंग और डिलीवरी ट्रेडिंग दोनों बाजार से निपटने के लिए प्रभावी तरीके हैं। यह व्यापारी की आवश्यकता और उद्देश्य पर निर्भर करती  है कि उन्हें किस तरह की ट्रेडिंग करनी है। दोनों के  अपने लाभ और नुकसान है, जिन्हें एक कुशल व्यापारी द्वारा अच्छी तरह से प्रबंधित और संतुलित किया जा सकता है।

आदर्श रूप से, जो लोग तुरंत लाभ की तलाश में हैं और  उन्हें तकनीकी ज्ञान के साथ इंट्रा डे ट्रेडिंग करनी चाहिए, और दीर्घकालिक निवेश और मौलिक ज्ञान के इरादे से डिलीवरी ट्रेडिंग में  जाना चाहिए।


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