मार्जिन ट्रेडिग क्या होती है?

ट्रेडिग एक जोखिम से भरा हुआ व्यवसाय है और इसे बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई ट्रेडर एक कंपनी के 10,00 शेयर खरीदना चाहता है जो ₹200 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे है तो उसे ₹2,00,000 की मूल राशि की आवश्यकता होती है, जो पूंजी की एक बड़ी राशि है।

और हम इस बात को भी अनदेखा नहीं कर सकते की इसमें बहुत जोखिम शामिल है क्यूँकि इस एक ट्रेडिग के साथ ट्रेडर अपनी पूरी पूँजी को खो भी सकता है. इसलिए एक व्यक्तिगत ट्रेडर के लिए ये चिन्ता का बड़ा क्षेत्र भी क्यूँकि ट्रेडिग करने के लिए उसके पास पर्याप्त पूंजी के साथ साथ गुंजाइश भी होनी चाहिए।

बड़े व्यापार संध और ट्रेडिग हाउज़ ही इस बड़े जोखिम को बड़ी पूँजी के साथ उठा सकते है, लेकिन यह उन ट्रेडर्ज़ के लिए उचित नहीं है जो इसमें ट्रेडिग के लिए अपने आजीवन निवेश का उपयोग कर रहे होते है।

यह वह मुद्दा है जहाँ मार्जिन ट्रेडिग प्रभाव में आती है।

मार्जिन ट्रेडिग स्टॉक ब्रोकर्स से ट्रेड करने के लिए उधारित धन का उपयोग करने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया का उपयोग करके ट्रेडरस अधिक प्रतिभूतियां (ऐसेट) खरीदने में सक्षम हो जाता है, जो वह किसी भी समय नहीं ख़रीद सकता। मार्जिन ट्रेडिग ट्रेडरस को आवश्यक लाभांश प्रदान करती है, हालांकि, उच्च लाभ और उच्च रिटर्न के साथ, इसमें भारी नुकसान की भी संभावना अधिक होती है।

एक मार्जिन ट्रेडर को इन दोनो पहलुओं के लिए अच्छी तरह से जागरूक और अच्छी तरह तैयार होना चाहिए।

ब्रोकरेज कंपनी जिसने कम दरों पर पैसा उधार लिया था लेकिन वे उसी पैसे को ट्रेडरस को उच्च दर पर उधार देकर मुनाफ़ा कमाते है और साथ ही साथ वे उनके द्वारा ख़रीदी गयी प्रतिभूतियों को गिरवी के रूप में अपने पास रखते है।

हालाँकि अंत में ट्रेडर को लाभ होगा इसकी भी कोई गरंटी नहीं होती है।

जिसके परिणामस्वरूप ट्रेडर को अनुमान से अधिक नुक़सान भी हो सकता है। बहुत रिस्क होने के कारण मार्जिन ट्रेडिग को सेबी जैसे विभिन्न संस्थो द्वारा नियंत्रित किया जाता है और उनके पास ऐसे कई नियम और क़ानून होते है जिन्हें हमें पालन करना होता है।  


मार्जिन ट्रेडिग की प्रक्रिया

अपने ट्रेडिग में मार्जिन (या लीवरेज) का उपयोग करने की पूरी प्रक्रिया के लिए आपको कुछ बुनियादी चरणों का पालन करना होगा। जो नीचे सूचीबद्ध हैं:

  • ट्रेडर अपने ब्रोकर के साथ एक मार्जिन खाता खोलता है और उसमें कम से कम धनराशि रखता है जिसे न्यूनतम मार्जिन पैसा कहा जाता है।
  • एक बार ये खाता शुरू होने पर ट्रेडर ट्रेडिग करना शुरू कर देता है और वह अधिक प्रतिभूतयो  को ख़रीदने के लिए ब्रोकर से पैसा भी ले सकता है। हालांकि, उसे खरीद मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत प्रारंभिक मार्जिन अपने और ब्रोकर के साथ खोले गए मार्जिन खाते में जमा करवाना होता है।
  • ट्रेडिग के दौरान, प्रत्येक सत्र के बाद ट्रेड किए हुए सभी शेयरों की ख़रीद और बिक्री को स्क्वेर ऑफ़ किया जाना चाहिए, इसका मतलब अगर अपने शेयर ख़रीदे है तो उन्हें प्रत्येक सत्र के अंत में बेचा जाना चाहिए और बेचे है तो ख़रीदे जाने चाहिए। इसी के साथ साथ लाभ या हानि के आधार पर शेयरों के रख़रखाव के मार्जिन को भी बनाए रखा जाना चाहिए जो ट्रेडरस को स्क्वेरिग ऑफ़ के बाद भी कुछ न्यूनतम राशि प्रदान करे।
  • यदि रखरखाव मार्जिन पूरा नहीं हुआ है, तो ब्रोकर द्वारा अपर्याप्त मार्जिन फंड के कारण ट्रिगर द्वारा मार्जिन कॉल किया जाता है।
  • ट्रेड के बाद प्रत्येक ऑर्डर को डिलीवरी में परिवर्तित कर दिया जाता है, जो सीधे ब्रोकर के खाते में यह सुनिश्चहित करने के लिए जाते है की उसके क़र्ज़ का भुगतान हो गया है। इसके बाद ब्रोकर के पास शेयरों को ख़रीदने तथा ब्रोकर की फीस और अन्य शुल्कों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन (कैश) होना चाहिए।

मार्जिन उदाहरण:

आइए वास्तविक जीवन से एक उदाहरण लेते है:

अवी, जो की मुंबई में एक मध्यवर्ती स्तर का ट्रेडर है और उसके पास ₹20,000/- है लेकिन अपनी सारी पूँजी और उधार लिए हुए ₹80,000/- रुपयों के साथ एक मार्जिन खाता खोलता है।  अब यहाँ ₹20,000 प्रारंभिक मार्जिन है, लेकिन वह अपनी खाते में रखे से ₹1,00,000 /- का उपयोग करके IBM के 500 शेयर ख़रीदता है जिनका मूल्य ₹ 170/- प्रति शेयर है। इ

स तरह वो ₹ 85,000/- का कुल निवेश करता है जो वह मार्जिन ट्रेडिग के बिना नहीं कर सकता था।

अब, पहले परिदृश्य में, यदि शेयरों की कीमत ₹190 प्रति शेयर तक जाती है, तो वह ₹10,000 का लाभ कमाता है जो कि अपने स्वयं के पैसे पर 50% का लाभ होता है।  जो की मार्जिन मनी का लाभ दिखाता है क्योंकि मार्जिन मनी के बिना वह अपनी परिस्थिति में इस उच्च मुनाफ़े को कमाने में सक्षम नहीं होता।

लेकिन दूसरे परिदृश्य में, यदि उसकी प्रतिभूतियों की क़ीमत ₹150/- प्रति शेयर हो जाती है तो भी वह मार्जिन कॉल प्राप्त होता है जिसे उसे ₹10,000/- का ही नुक़सान होगा। ये नुक़सान उसे ब्रोकर को उसकी फ़ीस और अन्य शुल्कों साथ देना होता है। यह  मार्जिन ट्रेडिग के नकारात्मक पक्ष को दिखाता है क्योंकि अगर उसने कम पैसा निवेश किया था तो उसे भारी नुकसान नहीं हुआ होगा।


मार्जिन ट्रेडिग के फ़ायदे

आइए मार्जिन ट्रेडिग के उपयोग से शेयर मार्केट में ट्रेडरस को होने वाले कुछ फ़ायदों की जाँच करते है:

  • मार्जिन ट्रेडिग अपने ट्रेडरस को मुनाफ़ा कामने के लिए सक्षम बनाने में बहुत उपयोगी साबित हुआ है। इसमें ट्रेडरस अपनी क्षमता से अधिक प्रतिभूतियों को ख़रीदने में सक्षम हो जाते है और फिर उन से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाते है।
  • इसमें ट्रेडरस अपने ट्रेडिग अवसरों का उपयोग कर सकते ही क्यूँकि उन्हें अपनी धन (कैश) संबंधी आवश्यकताओं के बारे में अधिक चिन्ता नहीं करनी पड़ती।
  • वे हेजिग (बचाव-व्यस्था)  द्वारा अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने में भी सक्षम होते हैं।

मार्जिन ट्रेडिग में ख़तरे

चलिए अब यह हम आपको मार्जिन ट्रेडिग से संबिधित कुछ चिन्ताओ से अवगत करवाते है:

  • अगर ट्रेडिग अच्छे से नही हो रही हो तो मार्जिन ट्रेडिग से बड़े नुक़सान हो सकते है।  
  • अगर प्रतिभूतियो की कीमत अचानक गिरती है और मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए ट्रेडर को नकदी (कैश) की व्यवस्था करनी पड़ती है तो उसे पहले मार्जिन कॉल का भुगतान करना आवश्यक होता है।
  • यदि ट्रेडर मार्जिन कॉल को पूरा करने में असमर्थ है, तो ब्रोकर सुरक्षा के रूप में रखी गई प्रतिभूतियों को उसी समय  बेचने की मांग की करता है फिर जिससे ट्रेडर को और नुकसान पहुंच सकता है।
  • ट्रेडर को उधार लिए हुए पैसों पर उच्च ब्याज दर का भी भुगतान करना पड़ता है।

अब आख़िरी निर्देश के रूप में, मार्जिन ट्रेडिग में बहुत रिस्क्स होते है जिसे एक ट्रेडर को अपने अपनी पूँजी, रिस्क लेने की क्षमता और निवेश के उदेशयों पर अच्छे से विचार करने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसका इस्तेमाल अनुभवी ट्रेडरस  द्वारा किया जाना चाहिए जो इसमें शामिल रिस्क्स और उच्च पूँजी निवेश के बारे में अच्छी तरह से अवगत हो और नुक़सान उठाने में समर्थ हो।

और हाँ मार्जिन ट्रेडिग का मार्ग चुने से पहले आपको बहुत सावधानी बरतनी होगी।

यदि आप अपने ट्रेड में मार्जिन का उपयोग शुरू करना चाहते है या बस एक डीमैट खाता खोलना चाहते हैं  तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना कुछ मौलिक विवरण भरें। जिसके बाद आपके लिए एक कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी:

स्टॉक ब्रोकर का सुझाव

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मार्जिन ट्रेडिग
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