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]]>इसके लिए पहले आपको यह ध्यान रखना होगा कि ब्रोकरेज शुल्क कितना भुगतान करना होगा। इस आर्टिकल में, हम जेरोधा ऑप्शन शुल्क (Zerodha Option Charges) के बारे में सभी आवश्यक जानकारी साझा करेंगे ताकि आपको ट्रेडिंग करने में कोई परेशानी ना हो।
इसके बारे में विस्तार से बात करने से पहले, आइए पहले जेरोधा के बारे में जानें।
जेरोधा भारत में प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर में से एक है। साथ ही, इस ब्रोकर के सह लगभग 3.4 मिलियन एक्टिव कस्टमर है।
जेरोधा के पास अपने इनबिल्ट फीचर्स और प्लेटफॉर्म हैं, जो आपको ऑप्शन ट्रेडिंग करने में मदद करती है।
इसलिए, यदि आप जेरोधा डीमैट खाता खोलने की सोच रहे हैं, तो ब्रोकर द्वारा लिए जाने वाले ऑप्शन शुल्क के बारे में जानना आवश्यक है।
ऑप्शन ट्रेडिंग (option trading in hindi) एक बायर को अपने चुने हुए प्राइस (स्ट्राइक प्राइस) पर एक निर्धारित डेट पर ट्रेड करने का अधिकार देता है लेकिन इसके बाध्य नहीं करता।
ज़ेरोधा में, आपको विभिन्न प्रकार के ऑप्शन ट्रेडिंग में निवेश करने के अवसर मिल सकते हैं जैसे कमोडिटी ऑप्शन, इक्विटी ऑप्शन, करेंसी ऑप्शन हर सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए आपको अलग-अलग ब्रोकरेज चार्ज देने पड़ते हैं।
हालांकि, जब आप ऑप्शन में ट्रेड कर रहे होते हैं, तो आपको दो बार ब्रोकरेज शुल्क का भुगतान करना पड़ता है: पहला, जब आप ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट में कोई विशेष स्टॉक, कमोडिटी या करेंसी खरीद रहे हों और दूसरा जब आप उन्हें ऑप्शन में बेच रहे हों।
अगले सेक्शन में, हम इक्विटी, करेंसी और कमोडिटी के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग में कितना चार्ज लगता है उसके बारे में विस्तार में बात करेंगे।
अब आप जेरोधा काइट के साथ इक्विटी ऑप्शन में ट्रेड कर सकते हैं। हालांकि, काइट पर ट्रेडिंग शुरू करने के लिए, पहले आपको जेरोधा कंसोल में ऑप्शन ट्रेड को एक्टिवेट करने के लिए एक्टिवेशन रिक्वेस्ट डालना होगा।
इसके बाद ही, जेरोधा में ऑप्शन ट्रेडिंग कर सकते हैं। अब खर्चों पर आते हैं।
जेरोधा प्रत्येक निष्पादित ऑर्डर पर फ्लैट ₹20 का शुल्क लेती है. इस प्रकार, चाहे आप जितना शेयर खरीदे, आपको प्रत्येक लॉट के लिए केवल ₹20 ही ब्रोकरेज देना होगा.
निम्नलिखित इक्विटी के लिए लगने वाले जेरोधा ऑप्शन शुल्क को टेबल में दर्शाया गया है:
जेरोधा ऑप्शन शुल्क | |
ऑप्शन ट्रेडिंग शुल्क | इक्विटी ऑप्शन |
ब्रोकरेज शुल्क | ₹20 प्रति निष्पादित ऑर्डर |
STT / CTT | बिक्री पर 0.05% (प्रीमियम पर) |
ट्रांजैक्शन शुल्क | NSE: 0.053% (प्रीमियम पर) |
GST | ब्रोकरेज और ट्रांजेक्शन शुल्क पर 18% |
सेबी शुल्क | ₹5 प्रति करोड़ |
स्टाम्प शुल्क | खरीद पर 0.003% या ₹300 प्रति करोड़ |
उदाहरण के लिए, मान लीजिये आपने 10 लॉट 100 प्रति शेयर के भाव से खरीदा है तो आपको बाय या सेल ऑर्डर पूरा करने के लिए 20X10 यानी ₹200 रुपये ब्रोकरेज का भुगतान करना होगा।
इक्विटी के बाद, अब कमोडिटी पर आते है जहाँ आप कॉल या पुट ऑप्शन बाय या सेल कर सकते हैं। यहां आपके द्वारा प्रत्येक ट्रेड के लिए, आपसे 0.03% या ₹20 प्रति निष्पादित ट्रेड (जो भी कम हो) का शुल्क लिया जाएगा।
जेरोधा कमोडिटी शुल्क | |
ऑप्शन ट्रेडिंग शुल्क | कमोडिटी ऑप्शन |
ब्रोकरेज शुल्क | बिक्री पर ₹20 या 0.03% प्रति निष्पादित ऑर्डर (प्रीमियम पर) |
STT / CTT | बिक्री पर 0.05% |
ट्रांजैक्शन शुल्क | एक्सचेंज टैक्सेशन शुल्क: 0 |
GST | ब्रोकरेज और ट्रांजेक्शन शुल्क पर 18% |
सेबी शुल्क | ₹10/प्रति करोड़ |
स्टाम्प शुल्क | खरीद पर 0.003% या ₹300 / करोड़ |
उदाहरण के लिए, आप ऑप्शन कमोडिटी में 100 लॉट के 10,00,000 शेयर खरीदते हैं। अगर आप 100 लॉट का 0.03 गणना करते हैं तो ब्रोकरेज ₹3 रुपये निकल कर आता है. इस प्रकार, यहां आपको ₹20 के बजाए ₹3 रुपये ब्रोकरेज देना होगा.
लेकिन, अगर आप लॉट की संख्या 100 से बढ़ाकर 1000 कर देते हैं तो ब्रोकरेज 1000 का 0.03% यानी ₹30 हो जाएगा। चूँकि, आप न्यूनतम ब्रोकरेज का भुगतान कर सकते हैं तो आपको ₹30 रुपये के बजाय ₹20 रुपये देना होगा।
जेरोधा ऑप्शन कमोडिटी के समान ही करेंसी के लिए शुल्क लेता है यानी 0.03% या ₹20 / निष्पादित ऑर्डर (जो भी कम हो).
उदाहरण के लिए, यदि आपने ₹50,000 में 50 लॉट खरीदा है। तो अगर आप 50 का 0.03 प्रतिशत गणना करते है तो यह 1.5 होता है। आपको केवल ₹1.5 रुपये ब्रोकरेज ही देना पड़ेगा क्योंकि यह कम है।
बैंक निफ्टी ऑप्शन के लिए जेरोधा ऑप्शन शुल्क – आपको 0.03% या ₹20 / निष्पादित ऑर्डर (जो भी कम हो) का भुगतान करना होगा।
मान लीजिए, आप 5,00,00 बैंक निफ्टी ऑप्शन का एक लॉट खरीदते हैं. यदि आप 5,00,00 का 0.03% गणना करते हैं तो यह ₹150 रुपये होगा.
यहाँ जेरोधा ब्रोकरेज निफ्टी शुल्क अभी भी ₹20 रुपये ही रहेगा क्योंकि ऊपर उल्लेख किया गया है कि केवल न्यूनतम ब्रोकरेज शुल्क लागू होगा.
जेरोधा में इंट्राडे के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग शुल्क निम्नलिखित है:
जेरोधा इंट्राडे इक्विटी ऑप्शन के लिए, आपके प्रत्येक एक्सेक्यूटेड ऑर्डर पर फ्लैट ₹20 रुपये का शुल्क लेता है. साथ ही ब्रोकरेज शुल्क और लेनदेन शुल्क पर GST 18% लगाया जाता है.
कमोडिटी में इंट्राडे के लिए, ब्रोकर प्रत्येक एक्सेक्यूटेड ऑर्डर पर टर्नओवर का फ्लैट ₹20 रुपये या 0.03% (जो भी कम हो) शुल्क लेता है.
जेरोधा ब्रोकरेज कैलकुलेटर में देख सकते हैं कि ब्रोकरेज कैलकुलेटर की मदद से जेरोधा ऑप्शन शुल्क की गणना की जाती है.
इसमें सभी सेगमेंट के ब्रोकरेज की गणना की जा सकती है।
यदि आप जेरोधा ऑप्शन ट्रेडिंग शुल्क की गणना करना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले ट्रेड (ऑप्शन) का विकल्प चुनना होगा।
इसके बाद आपको सभी सरकारी शुल्कों जैसे सरकारी टैक्स, सेबी शुल्क, क्लीयरिंग अमाउंट, एक्सचेंज टैक्सेशन शुल्क, टर्नओवर इत्यादि सभी के बारे में दिखाया जाएगा, जो आपको ऑप्शन के लिए भुगतान करना होता है।
मान लीजिए आप कोई ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट करना चाहते हैं, तो आपको कुछ जानकारी दर्ज करनी होगी,जैसे खरीदने और बेचने का मूल्य, लॉट साइज, इत्यादि. इन जानकारी के दर्ज करने बाद आपको उस एसेट्स पर लगने वाले ब्रोकरेज शुल्क की पूरी जानकारी प्राप्त होगी।
निष्कर्ष
इस लेख में, हमने जेरोधा ऑप्शन शुल्क की पूरी जानकारी है. डिस्काउंट ब्रोकर होने के कारण, जेरोधा ऑप्शन ट्रेड पर न्यूनतम ₹20 शुल्क लेता है और आपको विभिन्न सेगमेंट में ट्रेड करने की अनुमति देता है, जिसमे कमोडिटी और करेंसी शामिल हैं।
तो आप भी देर मत कीजिए जल्दी से डीमैट खुलवाएं और जेरोधा के साथ न्यूनतम ब्रोकरेज शुल्क के साथ ऑप्शन ट्रेडिंग से मुनाफा कमाएं।
अभी डीमैट खाता खुलवाने के लिए नीचे दिए फॉर्म को भरें।
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]]>आज कल हर व्यक्ति सेविंग्स के माध्यम से पैसा कमाना चाहता है। बाजार में सेविंग्स के साथ ब्याज के रूप में कमाई करने के कई विकल्प भी उपलब्ध हैं, जैसे कि बैंक में पैसा जमा करना, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि।
आज हम आपको ऐसे ही एक और विकल्प “सिप यानी सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान” के बारे में बताएगें।
अगर आप एक निवेशक हैं तो फिर आपको SIP Meaning in Hindi के बारे में बेसिक जानकारी जरूर होगी। लेकिन, ऐसे कई लोग हैं जो सिप यानी सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान के बारे में नहीं जानते। इस लेख के माध्यम से हम आपको सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान से संबंधित सारी जानकारी साझा करेंगे।
इस आर्टिकल में, आप SIP Kya Hai, SIP फुल फॉर्म, SIP में निवेश कैसे करें के साथ फायदे और नुकसान इत्यादि के बारे में समझ पाएंगे।
चलिए, शुरुआत से SIP (Systematic Investment Plan) को समझते हैं।
अक्सर आप निवेश करने के बारे में सोच कर घबरा जाते हैं कि आपको बड़ी राशि निवेश करना पड़ेगी। लेकिन SIP के साथ ऐसा नहीं है, सिप में जरुरी नहीं कि निवेश करने के चक्कर में अपनी आर्थिक स्थिति पर बोझ डालें।
सिप में कम जोखिम के साथ निवेश कर बेहतर रिटर्न प्राप्त करने का अच्छा विकल्प है। इसका मतलब हुआ कि आपको हर महीने या नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि पर निवेश करना होगा।
SIP (सिप) के माध्यम से आपको एक निश्चित अवधि में निश्चित रकम शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करना होता है।
सिप इंवेस्टमेंट प्लान में एक बार में एक बड़ी राशि निवेश करने के बजाए एक छोटी राशि निवेश की जाती है, जिसके रिजल्ट में हाई रिटर्न मिलता है।
आमतौर पर, यह इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए होता है। यहाँ पर इक्विटी का अर्थ है वह फण्ड जिसमे कंपनी के शेयर्स मौजूद होते है।
हालांकि, SIP में निवेश करने पर अनुशासन का विशेष ध्यान देना होता है। आपको शेयर बाजार में मंदी या तेजी के विपरीत तय अंतराल पर निवेश को बनाए रखना होता है।
एक बार जब आप एक या अधिक SIP Plan के लिए अप्लाई करते हैं, तो उतनी राशि ऑटोमेटिक रूप से आपके बैंक खाते से डेबिट हो जाती है।
इसके बाद पहले से तय टाइम इंटरवल पर आपके द्वारा खरीदे गए म्यूचुअल फंड में निवेश हो जाता है।
दिन के अंत में, आपको म्यूचुअल फंड की नेट एसेट्स वैल्यू (NAV) के आधार पर म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को अलॉट किया जाएगा।
भारत में SIP Plan में हर निवेश के साथ, मार्केट रेट के आधार पर आपके अकाउंट में एडिशनल यूनिट जोड़ी जाती हैं।
हर इन्वेस्टमेंट के साथ, जो अमाउंट दोबारा इन्वेस्ट होती है वह पहले से अधिक हो जाती है और इसलिए उन इंवेस्टमेंट पर रिटर्न भी अधिक मिलता है।
अंत में, यह निवेशक के विवेक पर है कि वह SIP से मिलने वाले रिटर्न सिप पीरियड के बीच में या फिर अंत में लेना चाहता है ।
आइये इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं।
मान लीजिए कि आपको म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना है। आपने इन्वेस्टमेंट के लिए ₹1 लाख अलग से सेव किया हुआ है।
अब आपके पास इन्वेस्टमेंट करने के दो विकल्प सामने होंगे।
पहला, आप म्यूचुअल फंड में एक बार में ही ₹1 लाख रुपये का निवेश करेंगे। या फिर, आप सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान या SIP का विकल्प चयन करेंगे।
आपको SIP में इन्वेस्ट शुरू करने के लिए एक अमाउंट सेट करना होगा।
मान लीजिये, आप ₹500 निवेश करना चाहते हैं।
फिर, हर महीने एक निश्चित तिथि पर आप जिस म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, उसके लिए आपके खाते से ₹500 रुपये डेबिट किये जाएंगे।
यह पूरे SIP पीरियड तक जारी रहेगा।
एक इन्वेस्टर कभी भी मिनिमम रिस्क और सबसे अच्छे सिप प्लान के साथ इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकता है।
निवेशक के लिए वह स्कीम चुनना बहुत जरूरी है जो उसके लॉन्ग-टर्म गोल को अच्छी तरह से सूट करता है।
इसलिए, SIP इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू करने के लिए कोई उपयुक्त समय सीमा नहीं है। एक इन्वेस्टर जितना जल्दी शुरू हो सकता है उसे इन्वेस्ट शुरू कर देना चाहिए।
निम्नलखित SIP के प्रकार हैं:
यह सिप आपको अपनी इन्वेस्टमेंट अमाउंट को समय-समय पर बढ़ाने की अनुमति देता है। इस प्रकार, जब आपके पास अधिक अमाउंट उपलब्ध होगा तो आप उसी हिसाब से अपनी इन्वेस्टमेंट अमाउंट भी बढ़ा सकते हैं।
यह नियमित अंतराल पर सबसे अच्छा और हाई परफॉर्मेंस करने वाले फंड में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है।
जैसा कि नाम से पता चल रहा है, इस प्लान में इन्वेस्टर को इन्वेस्ट करने की फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
एक निवेशक अपनी निवेश क्षमता के अनुसार, निवेश की राशि को बढ़ा या कम कर सकता है।
यह SIP प्लान, आपको मैंडेट डेट के बिना निवेश करने की अनुमति देती है।
आम तौर पर, एक सिप प्लान 1 वर्ष, 3 वर्ष या 5 वर्षों के लिए रहता है।
इसलिए, निवेशक अपनी इच्छा अनुसार या अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निवेश की गई राशि को वापस निकाल सकता है।
सिप में निवेश करने के कई फायदे है। उनमें से कुछ निम्नलिखित है:
अगर आपके पास अच्छी वित्तीय जानकारी नहीं है जैसे मार्केट कब ऊपर नीचे होता है, तो फिर सिप इन्वेस्टमेंट प्लान आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
आपको सही समय पर निवेश करने का समय का पता लगाने के लिए विश्लेषण करने की आवश्यकता नहीं होगी।
चूँकि, सिप में अकाउंट से पैसे ऑटोमेटिक डेबिट होकर म्यूचुअल फंड में चले जाते हो जाते है तो फिर आपको कोई फिक्र की जरूरत नहीं।
सिप के साथ रुपये की औसत लागत (Rupee Cost Averaging) का भी लाभ आता है।
चूँकि, आपका इन्वेस्टमेंट अमाउंट लंबी अवधि के लिए स्थिर है तो SIP के बाद से रुपये की औसत लागत के साथ आप बाजार की अस्थिरता (Volatility) का लाभ उठा सकते हैं।
SIP के माध्यम से आपके द्वारा निवेश की गई निश्चित राशि प्रत्येक यूनिट के वैल्यू को एवरेज करती है।
इस प्रकार, जब मार्केट नीचे जाए तो आप अधिक यूनिट खरीद सकते हैं और जब मार्केट हाई तो कम यूनिट खरीद सकते हैं, जो एवरेज कॉस्ट पर यूनिट को कम करेगा।
सिप में इन्वेस्टमेंट करने के लिए अनुशासन में रहना महत्वपूर्ण है जो आपको निरंतर इन्वेस्टमेंट ग्रोथ करने करने में मदद करता है।
इसका ऑटोमैटिक प्रोसेस यह सुनिश्चित करता है कि आपका इन्वेस्टमेंट एकमुश्त निवेश के विपरीत भी बढ़ता है जहाँ आप कभी-कभी निवेश करना भूल सकते हैं।
सिप में निवेश करने के फायदे के साथ-साथ कुछ कमियां भी है, जो निम्नलिखित हैं:
दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको SIP Meaning in Hindi का लेख पसंद आयी होगी। इस लेख में चर्चा की गयी कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
अगर आप सिप में निवेश करने का सोच रहे है तो आपके पास डीमैट खाता होना अनिवार्य है। इसलिए सिप में अभी निवेश करने के लिए अभी डीमैट खाता खोले।
अभी डीमैट अकाउंट खोलने के लिए, निम्नलिखित अकाउंट में नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें
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]]>पोजिशनल ट्रेडिंग आपको इंट्राडे ट्रेडिंग की परेशानी के बिना शेयर मार्केट में निवेश करने में मदद करता है।
लेकिन आपको पता होना चाहिए कि कोई भी ट्रेडिंग रिस्क फ्री नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसी रणनीतियां हैं जिनका पालन करके आप ट्रेडिंग रिस्क को कम कर सकते हैं।
इस पोस्ट में, आप Positional Trading Meaning in Hindi के बारे में समझ पाएंगे। साथ ही, यह पता लगाएंगे कि यह किस तरह के ट्रेडर या निवेशक के लिए उपयुक्त है।
चलिए, जानते हैं कि पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है?
पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां ट्रेडर, स्टॉक्स को एक लम्बे समय तक होल्ड करके रख सकता है।
इस सेगमेंट में आप शेयर को कुछ हफ़्तों, कुछ महीनों और ज्यादा से ज्यादा 1 साल तक अपने डीमैट खाते में होल्ड करके रख सकते हैं और फिर उन्हें बेच कर प्रॉफिट कमा सकते हैं।
इस ट्रेडिंग में ट्रेडर, स्टॉक में लॉन्ग और शॉर्ट टर्म के लिए उन्हें लगभग दो सप्ताह से लेकर लगभग एक वर्ष तक भी रख सकते हैं।
Positional Trading Meaning in Hindi को विस्तार से एक उदाहरण की मदद लेते हैं।
मान लीजिये किसी कंपनी के शेयर की करंट वैल्यू ₹1200 रुपये है।
अब आपने उस कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस किया और आपको लगता है कि ये शेयर आने वाले 6 से 8 महीनों के अंदर ₹1300 रुपये तक जा सकता है।
इस स्थिति में, अगर आपने शेयर Buy कर लिया और 8 महीने बाद Sell कर दिया तो इसे ही पोजिशनल ट्रेडिंग (Positional Trading in Hindi) कहते हैं।
शेयर मार्केट में लगातार ट्रेडिंग करने के लिए एक “रणनीति” जरूरी है जो आपके व्यक्तित्व और लाइफस्टाइल को मैच कर सके।
यदि आप नौकरी, अपने परिवार, या किसी अन्य कारण से अपनी ट्रेडिंग के लिए ज्यादा समय नहीं बीता सकते हैं, तो पोजिशनल ट्रेडिंग आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
डे-ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग की तुलना में, पोजिशनल ट्रेडिंग में एक ट्रेडर के पास अपने फैसले लेने के लिए उपयुक्त समय होता है।
इसलिए, यदि आप अधिक तनाव की स्थिति में ट्रेड नहीं करना चाहते तो पोजिशनल ट्रेडिंग का विकल्प चुन सकते हैं।
पोजिशनल ट्रेडिंग आपके लिए सही है या नहीं, इस बात का अंदाजा लगाने में आपकी मदद करने के लिए कुछ रणनीतियाँ दी गई है।
एक नए इन्वेस्टर के लिए इन्वेस्टमेंट और पोजिशनल ट्रेडिंग एक जैसे ही लग सकते हैं। दोनों में लंबे समय के लिए स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट की उम्मीद की जाती है।
इन्वेस्टिंग में यह अंतर है कि इसमें निवेशक कई वर्षों तक स्टॉक को होल्ड करके रखना चाहते हैं और शेयर की कीमत बढ़ने के साथ डिविडेंड और कैपिटल प्रॉफिट कमाते हैं।
इसके अलावा, इन्वेस्टिंग में निवेशक को हर हफ्ते स्टॉक प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव की भी चिंता नहीं होती। अधिक जानकारी के लिए, शेयर मूल्य क्यों बदलते हैं की समीक्षा पढ़ सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, एक पोजिशनल ट्रेडर स्टॉक प्राइस पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है। अगर स्टॉक उनके अनुसार नहीं चलता है तो वे जोखिम कम करने के लिए स्टॉप-लॉस का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही आप जान सकते हैं कि Stop Loss Kaise Lagaye?
निवेशक कंपनी के फंडामेंटल विश्लेषण पर अधिक भरोसा करते हैं, वहीं पोजीशनल ट्रेडर चार्ट पर अधिक भरोसा करते हैं।
क्या आप भी पोजीशन ट्रेडर और इन्वेस्टिंग के बीच निर्णय लेने की कोशिश कर रहे हैं?
आपको पता होना चाहिए कि पोजिशनल ट्रेडिंग में आप संभावित रूप से अपने जोखिम को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकते हैं।
लेकिन इसके लिए आपको अपने स्टॉप-लॉस स्तर की जांच करने के लिए एक्स्ट्रा टाइम लगेगा।
स्विंग ट्रेडिंग में आप स्टॉक्स को Buy और Sell करते हैं और अपनी पोजीशन को कुछ दिनों से कुछ हफ़्तों तक होल्ड करके रख सकते हैं।
स्विंग ट्रेडिंग की रणनीतियां और तकनीक, पोजिशनल ट्रेडिंग के समान ही है। यहाँ ट्रेडर एंट्री और एग्जिट के लिए एक जैसे इंडिकेटर और चार्ट पैटर्न का उपयोग करते हैं।
स्विंग ट्रेडिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि यह आपको पूरे वर्ष में अधिक स्विंग ट्रेडिंग सेटअप की अनुमति देती है।
लेकिन पोजिशनल ट्रेडिंग में आपके कैपिटल को अन्य शेयरों के साथ लॉन्ग टर्म के लिए नहीं रखा जा सकता।
स्विंग ट्रेडिंग में एक कमी यह है कि इसमें स्टॉक को हर रोज चेक करना पड़ता है।
डे ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है, जहां आप एक ही ट्रेडिंग सेशन के अंदर अपने ट्रेड को एक्सीक्यूट करके अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करना होता है।
यहां, आप सुबह में एक शेयर खरीदते हैं, फिर दोपहर के बाद जैसे ही आपके ट्रेड की कीमत 10% से 20% तक बढ़ती है तो आप इसे बेच सकते हैं।
इंट्राडे ट्रेडिंग में हाई रिस्क के साथ-साथ परेशानी भी बहुत ज्यादा होती है।
ट्रेडिंग से संबंधित किसी भी काम के लिए आपको वहां मौजूद होना जरूरी है। लेकिन ऐसा करना हर ट्रेडर के लिए संभव नहीं है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में वोलैटिलिटी बहुत है इसलिए इस रणनीति के लिए आपको सही निर्णय लेने की जरूरत है।
पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए कुछ रणनीतियां है, तो चलिए उन पर एक नज़र डालते हैं:
यदि आप किसी कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि आप देखें कि वह कंपनी क्या काम करती है।
यह सब आप, कंपनी की अर्निंग रिपोर्ट, फाइनेंशियल रिकॉर्ड, सीईओ कमैंट्स, एसईसी फाइलिंग आदि से जान सकते हैं।
कंपनी की इन बुनियादी बातों से आप यह जान सकते हैं कि किसी कंपनी की परफॉर्मेंस, उसका प्रॉफिट क्या है और आगे चलकर वह कैसी रहेगी।
फंडामेंटल एनालिसिस, ट्रेडर्स को यह तय करने में भी मदद कर सकता है कि क्या स्टॉक प्राइस सही है?
यह जानने से ट्रेडर्स को मदद मिलेगी कि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर क्या सोच रहे हैं, और वे स्टॉक को कहां से खरीद या बेच सकते हैं।
एक फंडामेंटल एनालिस्ट बनने के लिए शेयर मार्केट की सही जानकारी हासिल करें।
तकनीकी विश्लेषण का मतलब है किसी स्टॉक के प्राइस और मूवमेंट को स्टॉक चार्ट पैटर्न के द्वारा एनालाइज़ करना।
शेयर मार्केट चार्ट को पढ़ने के लिए आप एक चार्ट देख सकते हैं और जान सकते हैं कि स्टॉक अपट्रेंड या डाउनट्रेंड में है या नहीं।
आप चार्ट्स को सिंपल पैटर्न से मुश्किल इंडिकेटर में पढ़ सकते हैं। यहाँ पर एक टिप्स दी गई है – KISS यानी Keep it Simple, Stupid. इसका मतलब है इसे आसान ही रखो।
अधिकतर ट्रेडर, मजबूत और सरल तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करते हैं।
तकनीकी विश्लेषण, बहुत वर्षों से है और उस समय में, हजारों चार्ट पैटर्न और ट्रेडिंग इंडिकेटर विकसित किए गए हैं।
कई ट्रेडर्स ने चार्ट टाइम फ्रेम से संबंधित करके ट्रेडिंग स्टाइल पर चर्चा की।
उदाहरण के लिए, डे ट्रेडर पांच-मिनट के चार्ट को देखते हैं, स्विंग ट्रेडर एक-घंटे के चार्ट को देखते हैं, पोजीशन ट्रेडर, दैनिक-चार्ट को देखते हैं, और इन्वेस्टर साप्ताहिक चार्ट को देखते हैं।
आपके द्वारा आवश्यक जानकारी के लिए यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं
मान लीजिये, आप एक महीने के अंदर ट्रेड में एंट्री और एग्जिट पोजीशन लेना चाहते हैं तो अपने ट्रेड को एक्सीक्यूट करके उससे बाहर निकलना चाहते हैं।
आप वीकली चार्ट पर ओवरऑल ट्रेंड देख कर एक लॉन्ग टर्म के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लगाकर ट्रेड शुरू कर सकते हैं।
इसके बाद बेहतर जानकारी के लिए आप डेली चार्ट को मॉनिटर करें और पिछले एक या दो सप्ताह के चार्ट से कुछ प्रमुख बिंदुओं को निर्धारित करें। ओर फिर वन-हॉर चार्ट को देखें और अपनी एंट्री पोजीशन लें।
छह महीने की अवधि के दौरान कहीं और के लॉन्ग-टर्म ट्रेड की जाँच करें।
आप स्टॉक के मासिक चार्ट के लॉन्ग-टर्म व्यू को ध्यान में रखते हुए ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं, इसके साथ ही 10 साल या उससे अधिक समय के लिए प्राइस ट्रेंड की जांच कर सकते हैं।
यह देखते हुए कि स्टॉक, लॉन्ग टर्म अपट्रेंड में है तो आप साप्ताहिक चार्ट पर जाते हैं। यह वह जगह है जहाँ आप एक पुलबैक पैटर्न देखते हैं।
आप कुछ प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस एरिया को मार्क करें।
उसके बाद आप चार्ट एंट्री के लिए डेली चार्ट देखते हैं। आप एक सिम्पल ब्रेकआउट पैटर्न देखते हैं, जो आपको एंट्री के लिए और आपके स्टॉप लॉस को लगाने के लिए भी जगह देता है।
यदि आप इन सभी चीजों को अच्छी तरह से एनालाइसिस करते हैं और स्टॉक प्राइस को भी स्टेप बाय स्टेप देखते हैं तो आप अपने आप को एक पोजीशन ट्रेडर के रूप में पायेंगें।
अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए और लॉन्ग टर्म सेटअप के लिए यहाँ पोजिशनल ट्रेडिंग सीखने वाले शुरूआती ट्रेडर के लिए कुछ टिप्स दी गई है।
एक समय पर महीनों के लिए स्टॉक रखने का मतलब अक्सर आपको कंपनी के फंडामेंटल का विश्लेषण करने की आवश्यकता होती है।
लेकिन यह थोड़ा सा बोरिंग और परेशानी वाला हो सकता है।
फंडामेंटल एनालिसिस में सबसे महत्वपूर्ण चीज रेश्यो को समझना है। ये रेश्यो हैं: EPS, P/E Ratio, Dividend Yield Ratio, ROE.
ये रेश्यो ही हैं जो आपको कंपनी के बारे में एक स्पष्ट जानकारी प्रदान करता है।
आप इन सभी रेश्यो को समझने के लिए स्टॉक पाठशाला ऐप की सहायता ले सकते हैं, जहाँ आपको हर एक रेश्यो के बारे में वीडियो, पॉडकास्ट और आर्टिकल के माध्यम से समझाया गया है।
इसके अलावा, आप मार्केट एक्सपर्ट्स की सहायता से भी फंडामेंटल एनालिसिस को आसानी से समझ सकते हैं।
शुरूआती निवेशकों के साथ सबसे आम चीज़ जो देखने को मिलती है वो यह है कि वे ट्रेंड के विपरीत ट्रेड करते हैं।
ट्रेंड के विपरीत जाने पर आपको नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए आपको ट्रेंड के अनुसार ही ट्रेडिंग करनी चाहिए।
ट्रेंड के साथ ट्रेड करने का मतलब है कि ओवरऑल मोमेंटम सही तरीके से काम कर रहा है। मार्केट को जितना अधिक हो सके हाई जाने दें और जितना नीचे जा सके उतना नीचे जाने दें। उसके बाद ही पोजीशन में प्रवेश करें।
स्टॉक मार्केट बहुत बड़ी है, जिसमें प्रत्येक दिन कई अलग-अलग प्रकार के स्टॉक का कारोबार होता है।
यदि आप एक स्मॉल अकाउंट वाले ट्रेडर हैं, तो आपको उन शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो ट्रेडिंग के लिए सबसे आसान हैं और जो आपको जल्दी से अपना अकाउंट बनाने की अनुमति दे सकते हैं।
यहाँ हम पेनी स्टॉक के बारे में बात कर रहे हैं। जो ऐसे शेयर हैं जिनकी कीमत ₹10 से भी कम होती हैं।
इन शेयर में लिक्विडिटी काफी कम होती है।
कई बार छोटी कंपनियों का कारोबार बढ़ने लगता है और फिर उनकी गिनती सफल कंपनियों में होने लगी है।
आपको किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति के लिए इंडिकेटर इस्तेमाल करना आना चाहिए। चाहे वह कोई भी ट्रेडिंग जैसे कि पोजिशनल ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग आदि हो।
यदि आप इंडिकेटर के बिना ट्रेड करते हैं तो बहुत कम संभावना होती है कि उसमें अच्छा रिटर्न प्राप्त हो।
एक स्मार्ट ट्रेडर हमेशा सही इंडिकेटर का इस्तेमाल करता है। आप पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए कुछ निम्नलिखित इंडिकेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं:
निष्कर्ष
यदि आप पूरे दिन ट्रेडिंग स्क्रीन के सामने बैठ कर ट्रेड नहीं कर सकते तो आप कम परेशानी वाली ट्रेडिंग को चुन सकते हैं।
यदि पोजिशनल ट्रेडिंग को अच्छी तरह से निष्पादित किया जाता है, तो यह ट्रेडिंग स्टाइल आपको स्टॉक प्राइस में बहु-सप्ताह और बहु-महीने मूवमेंट से प्रॉफिट प्राप्त करने की अनुमति दे सकती है।
आपको पता होना चाहिए कि कोई भी ट्रेडिंग, रिस्क फ्री नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसी रणनीतियां हैं जिनका पालन करके आप ट्रेडिंग में रिस्क को कम कर सकते हैं।
यदि आप आईपीओ में निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले डीमैट खाता खोलें:
डीमैट खाता खोलने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को देखें:
यहाँ अपना बुनियादी विवरण भरें और उसके बाद आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी।
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]]>यदि नहीं, तो हम आपको नीचे दी गई जानकारी के माध्यम से इसे जानने की सलाह देते हैं ताकि आपको पता होना चाहिए कि स्पॉट प्राइस का मतलब क्या है और स्टॉक मार्केट में यह कितना महत्वपूर्ण है।
स्पॉट प्राइस मार्केट का करंट प्राइस होता है, जिस पर एक दी गई एसेट्स- जैसे कि सिक्योरिटीज, कमोडिटी, या करेंसी – तुरंत डिलीवरी के लिए खरीदी या बेची जा सकती है।
जबकि स्पॉट प्राइस समय और स्थान दोनों के लिए विशिष्ट होती हैं, ग्लोबल इकॉनमी में ज्यादातर सिक्योरिटीज या कमोडिटीज स्पॉट प्राइस दुनिया भर में एक्सचेंज रेट्स के हिसाब से काफी समान होती है।
यही नहीं स्पॉट प्राइस एक ट्रेडर या इन्वेस्टर को कमोडिटी की फ्यूचर कॉस्ट का पता लगाने की अनुमति भी देता है।
स्पॉट कॉस्ट को नियमित रूप से कमोडिटी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के संबंध में संदर्भित किया जाता है, जैसे कि गेहूं, सोना, या तेल के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए। यह इस आधार पर है कि स्टॉक लगातार मौके पर बदल रहे हैं।
इसके अलावा, स्टॉक और शेयरों के बीच अंतर को जानें। इसके लिए स्टॉक बनाम शेयर्स को विस्तार से पढ़ें।
वर्तमान बाजार लागत पर, आप स्टॉक खरीदते हैं या बेचते हैं, आगे नकदी के लिए स्टॉक का ट्रेड करते हैं।
आइए इसके अर्थ की समझ के साथ शुरुआत करते हुए मुख्य विषय पर गहराई से विचार करें।
जैसे की ऊपर बतया गया कि स्पॉट प्राइस मार्केट का करंट प्राइस होता है, जिस पर एक दी गई एसेट्स- जैसे कि सिक्योरिटीज, कमोडिटी, या करेंसी – तुरंत डिलीवरी के लिए खरीदी या बेची जा सकती है।
जैसे, यह वह लागत है जिस पर शेयर मार्केट के ट्रेडर और इन्वेस्टर ट्रेडिंग समय में एक एसेट तय करते हैं।
इस तथ्य के बावजूद कि स्पॉट प्राइस समय और भौगोलिक क्षेत्रों द्वारा बदल सकता है, यह अमाउंट वास्तव में फाइनेंसियल सर्विस सेक्टर में समान है।
ज्यादातर, स्पॉट प्राइस को फ्यूचर ट्रेडिंग कॉन्ट्रैक्ट के संबंध में माना जाता है।इस तरह के फाइनेंसियल एग्रीमेंट्स के गठन का एक कारण फ्यूचर में एक निश्चित तारीख में एक कमोडिटी के आदर्श स्पॉट मूल्य को “ठीक” करना है।
इस प्रकार, डेरिवेटिव के साथ “फिक्स” या “लॉक-इन” सुविधा का उपयोग करके सुरक्षित लागत संभवतः सबसे व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त तरीका है, जिसमें एक निवेशक जोखिम को कम कर सकता है और एक ही समय में बिना तनाव के ट्रेड कर सकता है।
शायद, ऐसा करने का प्राथमिक कारण यह है कि स्टॉक, शेयर या अन्य सिक्योरिटीज की कीमतें सिक्योरिटी मार्केट में उच्च उतार-चढ़ाव के कारण लगातार बदलती रहती हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं है, कि यह फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की लागत तय करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फ्यूचर कमोडिटी कॉस्ट में वोलैटिलिटी के बारे में अनुमान लगा सकता है।
स्पॉट प्राइस की एक और खासियत यह है कि वे लगातार बदल रहे हैं – वे बाजार की आपूर्ति और मांग के अनुसार उतार-चढ़ाव करते हैं।
फाइनेंसियल सर्विस सेक्टर में “स्पॉट” शब्द को याद रखने की कुंजी इसे “अभी” या “तुरंत” से संबंधित है।
एक विशेष एसेट का एक अलग स्थान और फ्यूचर प्राइस हो सकता है।
इसे एक उदाहरण की मदद से समझते हैं
मौजूदा समय में, गोल्ड की कीमत ₹49,000 जबकि इसकी फ्यूचर की कीमत ₹53,000।
इसी तरह, विभिन्न सिक्योरिटीज की कीमत को शेयर मार्किट और फ्यूचर मार्किट में विभिन्न श्रेणियों में ट्रेड किया जा सकता है।
उदाहरण
टीसीएल इंडिया के शेयरों या शेयरों को टेलीफोन कम्युनिकेशन लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है। शेयर बाजार में 1060 प्रति शेयर लेकिन इसके ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट पर स्ट्राइक प्राइस ₹960 हो सकता है। फ्यूचर मार्केट में , भयभीत ट्रेडर अपने फ्यूचर को लेकर ऐसी अवधारणाओं पर विचार कर सकते है।
कई लोग स्पॉट प्राइस और फ्यूचर प्राइस के बीच भ्रमित हो जाते हैं। यद्यपि वे समान दिखते हैं, वे एक दूसरे से बहुत अलग हैं।
एक तरफ, स्पॉट प्राइस वह फिक्स्ड प्राइस है जिस पर एकसिक्योरिटी, कमोडिटी, या करेंसी ट्रेड करने-खरीदने या बेचने के लिए तैयार होती है- तुरंत डिलीवरी के लिए, फ्यूचर प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स में कमोडिटी, करेंसी और सिक्योरिटी में ट्रेड शामिल होता है। फ्यूचर प्राइस के समय में हो रहे ट्रेड के डिलीवरी समय के दौरान तय की जाती है।
आइए यहाँ, स्पॉट प्राइस और फ्यूचर प्राइस में प्रचलित कुछ अंतरों पर एक नजर डालते हैं।
स्पॉट प्राइस और फ्यूचर प्राइस |
|
स्पॉट प्राइस | फ्यूचर प्राइस |
डिलीवरी ट्रेड के दौरान एसेट्स की कीमत पूर्व-निर्धारित होती है | सिक्योरिटी प्राइस फ्यूचर की तारीखों में तय की गई है |
फ्यूचर प्राइस से कम हाई | फ्यूचर प्राइस आम तौर पर अधिक होती हैं |
“स्पॉट पर” प्राइस के रूप में परिभाषित किया जा सकता है | “फ्यूचर” प्राइस के रूप में चिह्नित किया जा सकता है |
आइए कुछ और विवरण देखें।
स्पॉट प्राइस और फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट प्राइस के बीच का अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है। कॉन्टैंगो और बैकवर्डेशन केवल दो तरीके हैं जिनमें भविष्य की कीमत अलग है।
आइए एक टेबल में उन दोनों पर एक त्वरित नजर डालें:
कॉन्टैंगो | बैकवर्डेशन |
कॉन्टैंगो वह बिंदु है जिस पर फ्यूचर प्राइस कम स्पॉट प्राइस पर प्रदर्शित होती है। | बैकवर्डेशन सामान्य रूप से नेट लॉन्ग पोसिशन्स के पक्ष में होगा, क्योंकि प्युचर प्राइस स्पॉट प्राइस को पूरा करने के लिए बढ़ता है, जबकि कॉन्ट्रैक्ट समाप्ति पर होता है। |
कॉन्टैंगो छोटी स्थितियों को कम करता है और फ्यूचर प्राइस को खो देती है क्योंकि एग्रीमेंट एक्सपायर हो जाता है और लोअर स्पॉट प्राइस में परिवर्तित हो जाती है।
अब, स्टॉप प्राइस और स्ट्राइक प्राइस को समझने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है क्योंकी कई निवेशक, ट्रेडर या वित्तीय एजेंट यह मान सकते हैं कि समान ही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
वे एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं!
स्पॉट प्राइस: यह उस एसेट का करंट प्राइस है जिस पर ट्रेड तुरंत या फिलहाल चल रहा है।
Strike Price in Hindi: हालांकि, स्ट्राइक प्राइस, जिसे एक्सरसाइज प्राइस के रूप में भी जाना जाता है, स्टॉप प्राइस से अलग है क्योंकि यह वह मूल्य है जिस पर आप अंतर्निहित एसेट्स या सिक्योरिटीज पर ट्रेड कर सकते हैं, जब आप कॉल ऑप्शन का उपयोग करते हैं।
सिर्फ कॉल नहीं, आप पुट ऑप्शन का उपयोग करके अंतर्निहित सिक्योरिटी या एसेट्स बेचते समय इसका उपयोग कर सकते हैं।
स्टॉप प्राइस = “नाउ”
स्ट्राइक मूल्य = “यदि ऑप्शंस का प्रयोग किया जाता है”
यह स्टॉक मार्केट में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो किसी भी एसेट्स की वर्तमान लागत को निर्धारित करता है।
स्पॉट मूल्य की गणना करने के लिए, एक ट्रेडर और एक इन्वेस्टर एक अंतर्निहित एसेट्स या सिक्योरिटी के पिछले तीन से चार महीने की लागत का अध्ययन कर सकते हैं और उसी के स्पॉट मूल्य का अनुमान लगा सकते हैं।
Share Market में निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो आपको उसके लिए एक डीमैट खाता खोलना होगा।
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]]>आइये ऑफर फॉर सेल के बारे में विस्तार से जानते हैं।
अगर एक प्राइवेट कंपनी को अतिरिक्त फंड जुटाने की आवश्यकता होती है तो कंपनी सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO in Hindi) लेकर आती है।
कंपनी बाहरी निवेशकों को शेयर बेचती है, ताकि वह विभिन्न उद्देश्यों के लिए फंड प्राप्त कर सके। इसमें कंपनी का विकास और विस्तार शामिल है।
हालाँकि, कंपनी की वित्तीय जरुरत केवल आईपीओ से ही खत्म नहीं होती है। कभी-कभी कंपनी को अपने वित्तीय लक्ष्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त पूँजी की भी जरुरत पड़ती है।
इस स्थिति में, कंपनी ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale in Hindi) का रास्ता चुनती है।
आगे हम ऑफर फॉर सेल को विस्तार से समझेंगे।
OFS में, एक कंपनी का प्रमोटर अपने शेयर एक्सचेंज पर बेचकर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को कम कर सकता है। इसमें खुदरा निवेशक (Retail Investors), कंपनी, फॉरेन इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर (Foreign Institutional Investors), और क्वालिफाइड इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर (QIBs) जैसे कोई भी निवेशक निवेश कर सकता है।
OFS में, एक खरीदार को शेयर को प्राप्त करने के लिए एक बोली लगानी होती है। कंपनी एक “फ्लोर प्राइस” निर्धारित करती है।
खरीदार “फ्लोर प्राइस” से कम कीमत पर बोली नहीं लगा सकते। एक बार बोली लगाने के बाद, शेयरों को अलग-अलग खरीदारों को आवंटित किया जाता है।
OFS में भाग लेने के लिए कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। एक खरीदार OFS प्रक्रिया में किसी भी शेयर के लिए बोली लगा सकता है।
ऑफर फॉर सेल के आवेदन करने की प्रक्रिया में बात करने से पहले, आपको बताते चलें की OFS में केवल शेयर बाजार में प्रमुख 200 कंपनियों के लिए उपलब्ध है, जो मार्केट कैप पर आधारित है।
इसके अलावा, कंपनी को कम से कम दो दिन पहले OFS के बारे में स्टॉक एक्सचेंज को बताने की आवश्यकता होगी।
हलांकि, सेबी के पास यह है कि बिक्री प्रक्रिया के ऑफर में न्यूनतम 25 प्रतिशत शेयरों को बीमा और म्यूचुअल फंड फर्म के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। खुदरा निवेशकों / खरीदारों के लिए यह सिर्फ 10 प्रतिशत रिजर्व किया गया है।
यदि आप सोच रहे हैं कि OFS शेयरों के लिए आवेदन कैसे करें, तो ये पढ़ें-
कंपनियां अतिरिक्त पूंजी जुटाने और प्रमोटर्स की होल्डिंग्स को कम करने के लिए OFS रास्ते का इस्तेमाल करती हैं। पैसे जुटाने के अन्य रूपों की तुलना में यह बहुत आसान प्रक्रिया है।
अगर कंपनी की अच्छी रेपीटशन और भविष्य में अधिक विकास करना है तो ऑफर फॉर सेल में निवेश करना बिल्कुल सही है।
1 ) यह सुविधा केवल शेयर बाजार में शीर्ष 200 कंपनियों के लिए उपलब्ध है। यह रैंकिंग मार्केट कैपिटलाइजेशन पर आधारित है।
2 ) 10% से अधिक शेयर पूंजी वाले नॉन -प्रमोटर शेयरधारक भी OFS के माध्यम से शेयरों की पेशकश करने के लिए पात्र हैं।
3 )कंपनी को OFS से कम से कम दो दिन पहले स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित करना होगा।
4 ) सेबी ने यह आदेश दिया है कि ओएफएस में कम से कम 25% शेयर म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के लिए आरक्षित होने चाहिए।
5 ) इसके अलावा, खुदरा खरीदारों के लिए 10% आरक्षण दिया जाता है।
अब अगर अपने यहां तक इस आर्टिकल को पूरा पढ़ा है तो आपको थोड़ा तो समझ आ गया होगा की ऑफर फॉर सेल क्या है।
अब हम आगे ऑफर फॉर सेल क्या है में बात करेंगे की OFS और IPO\FPO में क्या अंतर है।
ऑफर फॉर सेल और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग (FPO) दो तरीके हैं, जिनसे कंपनी अतिरिक्त शेयर बेचकर पूंजी जुटा सकती है।
हालाँकि, इन दोनों विधियों के बीच अंतर हैं।
यदि ओएफएस के लिए आवेदन करने का प्रश्न आपके दिमाग में है, तो आप यह भी सोच रहे होंगे कि यह आईपीओ या फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर से कितना अलग है।
एक आईपीओ में एक गैर-सूचीबद्ध कंपनी है जो शेयर जारी करती है और सार्वजनिक होती है।
फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर में, कंपनी सूचीबद्ध है और यह नए या पहले से मौजूद शेयरधारकों के लिए शेयर जारी करती है। एफपीओ प्रक्रिया आईपीओ विकल्प लेने के बाद होती है।
दूसरी ओर,Offer for Sale In Hindi ज्यादा सरल है। क्योंकि कंपनी के लिए कोई औपचारिक कागजी कार्रवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
इसके अलावा, शेयरों की बिक्री में आमतौर पर केवल एक ही दिन का ट्रेड होता है। इसमें कोई फ्रेश शेयर जारी नहीं किए जाते।
जबकि आईपीओ और एफपीओ एक सुरक्षित और लॉन्ग प्रक्रिया में फंड जुटाने के बारे में है, क्योंकि इसमें प्रॉस्पेक्टस जारी करना, आवेदन प्राप्त करना और फिर शेयरों का आवंटन शामिल है, एक OFS त्वरित समय में होता है, यानी ट्रेड के एक सत्र में।
ऑफर फॉर सेल क्या है जानने के बाद यदि आप इसमें निवेश करने की सोच रहें है तो इसमें कुछ विशेष लाभ और हानियाँ भी शमिल है
जिसकी चर्चा नीचे की गई है
खुदरा निवेशकों को आमतौर पर ओएफएस के माध्यम से शेयर खरीदने पर फ्लोर प्राइस परडिस्काउंट दिया जाता है।
इन ऑफर्स में डिस्काउंट 5% की सीमा के आसपास है। डिस्काउंट प्राइसखुदरा निवेशकों के लिए ओएफएस के माध्यम से निवेश करने के प्रमुख लाभों में से एक है।
OFS की पूरी प्रक्रिया एक सिस्टम आधारित बिडिंग प्लेटफॉर्म है। रिजल्ट के लिए, निवेशक से न्यूनतम कागजी कार्रवाई आवश्यक है। यह OFS को एक सरल और कम समय लेने वाली प्रक्रिया बनाता है।
जब आप अपनी बोली ओएफएस के तहत लगाते हैं, तो कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होते हैं। केवल नियमित लेनदेन और प्रतिभूति लेनदेन की कॉस्ट (एसटीटी) जो पहले से ही इक्विटी निवेश के लिए लगाए जाते हैं, लागू होते हैं। यह OFS को इक्विटी में निवेश करने का एक प्रभावी तरीका बनाता है।
सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार, न्यूनतम 10% ऑफर खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होना चाहिए। सार्वजनिक उपक्रमों के मामले में, यह 20% तक जा सकता है।
हालांकि, यह आईपीओ के मामले में खुदरा निवेशकों के लिए 35% आरक्षण से काफी कम है।
OFS के लिए इश्यू पीरियड एक ही दिन के ट्रेड से अधिक नहीं है। इसकी तुलना में, एक FPO 3-10 दिनों के बीच कहीं भी खुला रह सकता है।
जारी करने वाली कंपनी को OFS से दो दिन पहले स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित करना होता है। यही कारण है कि एक अच्छे निवेश अवसर को खोने से बचने के लिए अपडेट रहना महत्वपूर्ण है।
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसा मैकेनिज्म है जो प्रमोटरों को सूचीबद्ध कंपनियों में पारदर्शी तरीके से अपनी हिस्सेदारी कम करने की अनुमति देता है।
प्रमोटरों द्वारा बेचे गए इन शेयरों को बोली प्रक्रिया के माध्यम से सीधे जनता को बिक्री के लिए पेश किया जाता है।
कोई भी खुदरा निवेशक (एक व्यक्तिगत निवेशक) एक OFS में भाग ले सकता है। लेकिन ऐसा करने के लिए, आपके पास एक ट्रेडिंग खाता और एक डीमैट खाता होना चाहिए।
आप अपने ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल के माध्यम से सीधे ओएफएस में बोली लगा सकते हैं या अपने डीलर की मदद से बोली लगा सकते हैं।
आईपीओ के विपरीत, ओएफएस में बोली लगाने के लिए किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती है। आपको केवल OFS इश्यू के लिए भुगतान करने के लिए तैयार Quantity और Price प्रदान करना होगा।
OFS में आवंटित किए गए शेयरों को प्राप्त करने के लिए, आपको Floor Price से अधिक कीमत पर बोली लगाने की आवश्यकता होती है।
एक फ्लोर की कीमत न्यूनतम प्राइस है जिस पर आप OFS में आवेदन कर सकते हैं। इस प्राइस से कम बोली Accept नहीं की जाती है।
OFS के शेयरों को आम तौर पर दो तरीकों से आवंटित किया जाता है:
1 ) सिंगल क्लीयरिंग प्राइस
2) मल्टीप्ल क्लीयरिंग प्राइस
सिंगल क्लीयरिंग प्राइस के मामले में, सभी निवेशकों को समान मूल्य पर शेयर आवंटित किए जाते हैं। लेकिन कई क्लीयरिंग प्राइस के मामले में; शेयरों को मूल्य प्राथमिकता के आधार पर निवेशकों को आवंटित किया जाता है।
उदाहरण के लिए, दो निवेशक अनिरुद्ध और गोविंद एक OFS के लिए आवेदन करते हैं। अनिरुद्ध 50 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाता है जबकि गोविंद 60 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाता है।
उदाहरण के लिए, दो निवेशक अनिरुद्ध और गोविंद एक OFS के लिए आवेदन करते हैं। अनिरुद्ध 50 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाता है जबकि गोविंद 60 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाता है। इस उदाहरण में, गोविंद को शेयर आवंटित किए जाने पर अनिरुद्ध को ज़्यादा वरीयता दी जाएगी।
रिटेल इन्वेस्टर्स को रिटेल औरनॉन-रिटेल केटेगरी (Non-Institutional Investors (NII) category) में बीड लगाने की अनुमति है।
सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार, कंपनियों को रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए न्यूनतम 10% आरक्षण की पेशकश करना अनिवार्य है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि खुदरा निवेशकों के लिए तय की गई बोली 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
दूसरे शब्दों में, एक एकल निवेशक एक एकल खाते का उपयोग करके OFS में कई बिड्स रख सकता है। यदि निवेशक द्वारा कई बीड में कुल राशि बोली 2 लाख रुपये से अधिक हो जाती है, तो बिड अयोग्य हो जाती हैं।
Offer for Sale In Hindi क्या है जानने के बाद अब हम पहुंचते है इसके निष्कर्ष पर तो ऑफर फॉर सेल को शार्ट फॉर्म में OFS भी बोला जाता है।
ऑफर फॉर सेल में कंपनी के शेयर बेचने का एक सरल तरीका है जिसमें सार्वजनिक कंपनियों में प्रमोटर अपने शेयर बेच सकते हैं।
बिक्री या OFS के लिए प्रस्ताव एक ऐसी विधि है जिसमें सूचीबद्ध फर्मों को एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के माध्यम से शेयर बेचने की अनुमति है।
OFS विधि को 2012 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा वापस लाया गया था ताकि सूचीबद्ध प्रपत्रों के प्रमोटरों को उनकी हिस्सेदारी को कम करने में सहायता के लिए एक सरल बनाया जा सके।
इसमें कोई भी इन शेयरों के लिए बोली लगा सकता है, चाहे वह विदेशी संस्थागत निवेशक, खुदरा निवेशक या कंपनियां हों।
हमारे द्वारा दी गई जानकारी के बाद भी यदि इस टॉपिक से जुड़ा पश्न जो आपको क्लियर नहीं हुआ हो तो आप हमें उस पश्न को कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।
यदि आप स्टॉक मार्केट में निवेश के साथ शुरुआत करना चाहते हैं, तो हमें आपको अगले कदम उठाने में सहायता करने दें।
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]]>आज इस लेख में शेयर मार्केट चार्ट की बेसिक नॉलेज (share market knowledge in hindi) के बारे में विस्तार में चर्चा करेंगे और ऐसे तमाम सवाल जो एक नए निवेशक या ट्रेडर के मन में आते है उनका देंगे।
आप शायद इस बात से भी सहमत होंगे कि स्टॉक मार्केट चार्ट पढ़ना आसान नहीं है। लेकिन आपके पोर्टफोलियो के लिए यह एक ज़रूरी स्किल है।
शेयर मार्केट चार्ट को कैसे समझें और स्टॉक्स का चयन करना बहुत मुश्किल काम है।
इसलिए, हमें शेयर मार्केट चार्ट और उसके प्रकार के बारे में जानना आवश्यक है।
चलिए, सबसे पहले जानते हैं कि शेयर मार्केट चार्ट क्या है?
शेयर मार्केट चार्ट या एक तकनीकी चार्ट (Technical Chart) हो, यह करंट ट्रेंड (Current Trend) और ट्रेंड रिवर्सल (Trend Reversal) की पहचान करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, इसका बाय और सेल सिग्नल (Buy and Sell Signal) को ट्रिगर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
चार्ट पैटर्न में एक स्पेसिफिक फार्मेशन (Formation) होता है, जो ग्राफिक (Graphical) के माध्यम से फ्यूचर में प्राइस मूवमेंट (Price Movement) में होने वाले ट्रेंड और ट्रेडिंग सिग्नल (Trading Signal) बनाता है।
यदि आप प्रत्येक दिन के स्टॉक के ट्रेड के लिए क्लोजिंग प्राइस (Closing Price) जानना चाहते हैं, तो यह आपको एक निर्धारित समय सीमा या एक साल के लिए शेयर की कीमतों (Share Price) के बारे में बताता है।
शेयर मार्केट चार्ट के इस आर्टिकल के भाग में शेयर मार्केट चार्ट के प्रकार और शेयर मार्केट चार्ट को कैसे पढ़ें सवालों के बार में बात करेंगें।
शेयर मार्केट में 5 प्रकार के शेयर मार्केट चार्ट हैं। जो इस प्रकार हैं:
चलिए, अब एक-एक करके इन पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
यह एक रिवर्सल चार्ट पैटर्न है और यह सिक्योरिटीज के मूवमेंट के बारे में सिग्नल देता है; यानी अगर यह पिछले ट्रेंड के विपरीत जाता है:
इस चार्ट पैटर्न के नाम से पता चलता है कि इसका आकार इंसान के दोनों कंधो और सिर जैसा होता है। यह पैटर्न शेयर मार्केट का अनुमान लगाने का एक प्रकार है जो तेजी से मंदी तक के ट्रेंड के उलट होता है।
यह या तो रिवर्सल पैटर्न या एक निरंतर पैटर्न हो सकता है।
टॉप: यह एक अपवर्ड मूवमेंट पर बनता है और संकेत करता है कि अपवर्ड ट्रेंड खत्म होने वाला है।
सबसे नीचे: इसे एक इनवर्स सिग्नल (Inverse Signal) और एक डाउनट्रेंड में रिवर्स के रूप में भी जाना जाता है।
यह ट्रेडर्स द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला चार्ट है। यह शेयर और उनकी कीमतों के बारे में विभिन्न महत्वपूर्ण ट्रेडिंग जानकारी प्रदान करता है। जैसे कि:
यहाँ, वर्टिकल लाइन उस रेंज को दिखाती है जब हॉरिजोंटल लाइन- लेफ्ट ओर सिग्नल देकर ओपनिंग प्राइस को दर्शाती है और राइट ओर सिग्नल देकर क्लोजिंग प्राइस को दर्शाती है।
यह एक चार्ट है जो दिन के क्लोजिंग प्राइस का रिकॉर्ड रखता है। यह एक दैनिक आधार पर प्लॉट किया जाता है और अंततः एक लाइन बनाता है।
लाइन चार्ट एक समय आधारित चार्ट है और यह सबसे आसान चार्ट में से एक है।
लाइन चार्ट को हर समय की क्लोजिंग प्राइस को जोड़कर एक लाइन द्वारा गठित किया जाता है।
लॉन्ग टर्म में ट्रेंड को देखने और हेड एंड शोल्डर और त्रिकोण जैसे चार्ट पैटर्न को देखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
यह एक अलग फॉर्मेट में प्राइस से संबंधित डेटा को दर्शाता है, इसे दो भागों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक प्राइस को एक लाइन द्वारा दर्शाया जाता है।
पतली वाली लाइन, हाई से लौ प्राइस को दिखाती है और रियल बॉडी एक वाइड एरिया दिखाता है जो ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस के बीच के अंतर की गणना करने में मदद करता है।
यह शेयर मार्केट चार्ट, स्टॉक की कीमतों को दर्शाता है। यह समय आधारित चार्ट की तरह कीमत नहीं दिखाता।
लेकिन यह चार्ट ‘एक्स’ और ‘ओ’ दिखाता है जहां ‘एक्स’ बढ़ती हुई कीमतों के बारे में और ‘ओ’ गिरती हुई कीमतों को दिखाता है।
आप यहाँ बताए गए 5 शेयर मार्केट चार्ट को पढ़कर शेयरों की कीमत के बारे में जान सकते हैं। इसके अलावा 7 प्रमुख इंट्राडे ट्रेडिंग चार्ट के बारे में भी जान सकते हैं।
चार्ट को पहचानें: चार्ट की पहचान करें और टॉप पर देखें जहां आपको टिकर या सिम्बल मिलेगा जो किसी कंपनी का एक छोटा अक्षर पहचानकर्ता है।
कंपनी की जानकारी के लिए एक सही प्रतीक की पहचान होना जरूरी है।
टाइम विंडो चुनें: यह दैनिक, साप्ताहिक मासिक या वार्षिक आधार पर किया जा सकता है लेकिन यह इस आधार पर उपयोग किया जा सकता है कि आप किस प्लेटफॉर्म पर इसको देख रहे हैं।
अलग-अलग टाइमस्केल को देखने से लॉन्ग और शॉर्ट टर्म ट्रेंड की पहचान करने और दोनों की जांच करने में मदद मिलेगी।
किसी भी दिन के प्राइस को याद रखें ओर बाद में दोनों कि जांच करें ओर देखें कि कीमत ऊपर गई है या नीचे।
समरी कि जांच करें: आपको समरी की जांच करनी चाहिए क्योंकि यह आपको चार्ट से संख्यात्मक वैल्यू की महत्वपूर्ण जानकारी देगा जिसे आप जल्दी से पढ़ सकते हैं।
यह समरी कम से कम आपको लेटेस्ट वैल्यू, प्राइस मूविंग एवरेज और वॉल्यूम ट्रेड की जानकारी प्रदान करती है।
यह भी पढ़ें: What is Volume in Share Market in Hindi
कीमतों पर नज़र रखें: इस चार्ट को दो वर्गों में बांटा गया है अपर ओर लोअर, जो आपको कीमतों के बारे में बताता है। अपर पार्ट, स्टॉक की कीमत में बदलाव को ट्रैक करता है।
इन कीमतों को अक्सर अलग-अलग रंगों के साथ दिखाया जाता है जैसे अगर किसी विशेष दिन स्टॉक बंद हो जाता है, तो मार्कर काला हो सकता है।
जबकि जिस कीमत पर स्टॉक बंद हुआ है, उसे लाल रंग में चिह्नित किया जा सकता है।
ट्रेड की गई मात्रा पर ध्यान दें: सबसे नीचे, आपको स्टॉक ट्रेड की मात्रा मिलेगी। यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि रंग-कोडित बार के साथ मार्केट में कोई विशेष मूवमेंट, सकारात्मक या नकारात्मक है।
यह कलर कोड फिक्स नहीं है। इसलिए इसे सावधानीपूर्वक पढ़ने की आवश्यकता है। यह रंग क्लोज़िंग प्राइस के साथ पिछले दिन के क्लोज़िंग प्राइस के अप्स ओर डाउन को बताता है।
मूविंग एवरेज देखें: यह स्टॉक, एवरेज प्राइस की गणना है जो लगातार समय के अनुसार समायोजित होती है, यह स्टॉक विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण टूल है।
शेयर मार्केट चार्ट में ये आम तौर पर चार्ट के पार होने वाली लाइनों द्वारा दर्शाए जाते हैं। यह एक ट्रेंड पैटर्न की पहचान करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसमें कुछ गैप या सकता है क्योंकि यह पिछली कीमतों को दर्शाता है।
आप ऊपर बताए गए शेयर मार्केट चार्ट पैटर्न को फॉलो करके इन चार्ट्स को पढ़ सकते हैं।
यदि आप भी शेयर मार्केट ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं तो अभी खाता खोलें।
खाता खोलने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को देखें:
यहाँ अपना बुनियादी विवरण भरें और उसके बाद आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी।
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]]>निवेशक को इसके लिए सिर्फ एक अच्छा इंटरनेट कनेक्शन, 3-इन -1 अकाउंट, मोबाइल बैंकिंग ऐप और बैंक खाते में पर्याप्त धन की आवश्यकता है।
आज के इस बढ़ती टेक्नोलॉजी के युग में, आप सभी व्यस्त पेपरवर्क मोबाइल स्क्रीन पर एक क्लिक या टच के जरिए कर सकते है। ट्रेड के लिए कई फ्री और पेड मोबाइल और वेब एप्लिकेशन और पोर्टल इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।
अगर ऑनलाइन ट्रेडिंग का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो शेयर ट्रेडिंग आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।
भारत में ऑनलाइन ट्रेडिंग की शुरुआत के बाद से निवेश करना सुविधाजनक हो गया है। शेयर मार्केट में निवेश करने से मार्केट में विभिन्न उतार-चढ़ाव चलता रहता है। जिसे निवेशक अपने फ़ोन पर देख सकते है
स्टॉक मार्केट में लॉन्ग-टर्म से मुनाफा कमाने की बात आती है तो ऑनलाइन ट्रेडिंग एक शानदार विकल्प है। हालाँकि, आपको इसमें अच्छा होने के लिए थोड़ा समय लग सकता है।
इसमें आप ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, रिसर्च रिपोर्ट, स्टॉक के मूल्य विश्लेषण, बाजार समाचार, आदि के लिए सुरक्षित वास्तविक समय तक पहुंच प्रदान करके सभी आवश्यक सहायता और सहायता प्रदान करते हैं।
यदि आपके पास ट्रेडिंग अकाउंट और इंटरनेट कनेक्शन है तो आप शेयर खरीद या बेच सकते हैं। इतना ही नहीं, आप एक ही ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से करेंसी, कमोडिटी आदि में ट्रेड कर सकते हैं।
प्लेटफ़ॉर्म आपको बिना किसी कठिनाई के ट्रेड करने में मदद करते हैं क्योंकि ये प्लेटफ़ॉर्म उच्च गति वाले ट्रेड को सक्षम करते हैं।
इन प्लेटफॉर्म ने ट्रेडिंग करने के तरीके में क्रांति ला दी है। आप बस इन्हें अपने सिस्टम या मोबाइल पर डाउनलोड कर सकते हैं और ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं।
लेकिन आप इन सभी तकनीक का सही तरह से तभी इस्तेमाल कर पाएंगे जब आपको Share Market Meaning in Hindi की पूरी समझ हो।
आपको शेयर बाजार में निवेश करने के साथ-साथ भविष्य में होने वाले उतार चढ़ाव के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरुरी है। Stock Market Prediction in Hindi में बाजार को लेकर कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताया गया है.
अब आप यहाँ इस टॉपिक में नीचे ऑनलाइन ट्रेडिंग के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें
आप अपने घर बैठकर अपनी मर्जी से ट्रेड ऑर्डर दे सकते हैं या ऑर्डर रद्द कर सकते हैं। यह आपको ब्रोकर के किसी भी हस्तक्षेप के बिना ट्रेड के संबंध में अपना निर्णय लेने की अनुमति देता है।
आप शेयर खरीद सकते हैं या आईपीओ में निवेश कर सकते हैं या म्यूचुअल फंड भी खरीद सकते हैं।
किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की मदद से ट्रेडिंग (खरीदने या बेचने) की प्रक्रिया को ही ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग कहते हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए प्रमुख सिक्योरिटीज में इक्विटी, कमोडिटी, और फॉरेक्स सेगमेंट शामिल है।
जबकि इक्विटी में कंपनियों के शेयर शामिल तो है कमोडिटी में गोल्ड, सिल्वर, क्रूड आयल, कॉपर इत्यादि शामिल है।
फॉरेक्स ट्रेडिंग में दो देशो के करेंसी पेअर के बीच ट्रेड की जाती है। इसमें INR-USD, INR- EURO, INR-YEN जैसे करेंसी पेअर शामिल है।
इसके साथ ही अगर आप इक्विटी और कमोडिटी के बारे में डिटेल में जानकरी लेना चाहते हैं तो आप Equity vs Commodity in Hindi लेख की समीक्षा करें।
इसके अलावा अगर आप लंबे समय तक बाजार में अपनी मौजूदगी बना कर लाभ अर्जित करना चाहते हैं तो आप पोजिशन ट्रेडिंग कि तरफ जा सकते हो। अगर आप पोजिशन ट्रेडिंग के बारे में अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो आप Positional Trading Meaning in Hindi की समीक्षा कर सकते हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग करने के लिए भी कुछ बुनियादी बातों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है
ऑनलाइन ट्रेडिंग किसी भी सेबी पंजीकृत ब्रोकर के साथ केवल डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलकर किया जा सकता है। खाता खोलने का काम 15 मिनट में किया जा सकता है।
इसके साथ खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज पैन कार्ड, एड्रेस प्रूफ, आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, बैंक स्टेटमेंट, रद्द किया गया चेक पत्ता और पासपोर्ट फोटोग्राफ हैं।
इसके साथ आती है कैपिटल तो एक शुरूआती ट्रेडर शेयर मार्केट में कितना पैसा लगा सकता है इसका आंकलन और जानकारी होना बहुत आवशयक है। ये राशि आपके लक्ष्य, जोखिम और चुनी हुई ट्रेडिंग सेगमेंट पर निर्भर करती है।
शुरुआत में सीखने पर ध्यान देकर आप कम राशि के साथ शुरुआत कर सकते है और धीरे कैपिटल और मुनाफा दोनों को बढ़ा सकते है।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के पीछे सफलता का राज एडवांस टेक्नोलॉजी रहा है। नयी टेक्नोलॉजी आने के बाद से एक ट्रेडर बिना स्टॉक ब्रोकर की मदद से भी ट्रेड कर सकता है।
यहाँ हमने एक सूची बनाई है जिसके मदद से एक निवेशक या ट्रेडर भी ट्रेड कर सकता है।
वेब ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म:
वेब ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने के लिए एक स्टेबल इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए।
आपको बस अपने सर्विस प्रोवाइडर की वेबसाइट पर जाना होगा और अपना लॉगिन और पासवर्ड दर्ज करना है।
इसके बाद कोई भी ट्रेडर अपना ट्रेडिंग अकाउंट की सारी एक्टिविटी को एक्सेस कर सकता है। वेब ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का बेहतर इस्तेमाल पर्सनल कंप्यूटर भी किया जा सकता है। जबकि इसे मोबाइल, टैबलेट पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
ये मूल रूप से स्लो इंटरनेट कनेक्शन वाले यूजर के लिए डिज़ाइन किया गया है।
डीलर-सहायक ट्रेडिंग
यह ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उनके लिए उपयुक्त है, जिनके पास अधिक समय नहीं होता है।
इसमें इन्वेस्टर पोजीशन लेने के लिए मार्केट एक्सपर्ट यानी डीलर की सहायता लेते है। ऐसे ट्रेडर ज्यादातर एक्टिव ट्रेडर नहीं होते और सेकेंडरी सोर्स के रूप में ट्रेड करते है।
ट्रेडिंग टर्मिनल
ऐसे ट्रेडर जो हाई क्वांटिटी में ट्रेडर करते है उनके लिए ट्रेडर टर्मिनल उपयुक्त है। ये विशेष रूप से डे-ट्रेडर द्वारा इस्तेमाल किया है।
यह एक ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर होता है जिसमे सभी जरुरी टेक्निकल इंडिकेटर, रिसर्च रिपोर्ट जैसे ऐड-ऑन शामिल है
मोबाइल ट्रेडिंग
ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोबाइल ट्रेडिंग बहुत लोक्रपिय है। यह ट्रेडर को ट्रेडिंग करने का अनुभव बहुत आसान कर दिया है।
इसके जरिए आप कहीं भी बैठ कर आसानी से ट्रेड कर सकते हैं। एक अच्छा अनुभव प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि आप एक सही मोबाइल एप का चुनाव करें।
इसके अलावा भी कई ट्रेडिंग टूल है जो आपको ट्रेडिंग एक्सपीरियंस को सुखद बनाती है। ये ट्रेडिंग टूल निम्नलिखित हैं:
1. सरल:
यह एक ट्रेडर को परेशानी मुक्त ट्रेड अनुभव करने में सक्षम बनाता है। कोई भी इन प्लेटफार्मों का उपयोग कर सकता है क्योंकि ऑनलाइन ट्रेडिंग करने के लिए Specific Skill की आवश्यकता नहीं होती है।
2. कम खर्चीला है:
यह ट्रेड के पारंपरिक मोड की तुलना में कम खर्चीला है। ब्रोकर ऑनलाइन ट्रेडिंग को भी बढ़ावा देते हैं क्योंकि यह ब्रोकर द्वारा किए गए रखरखाव और अन्य लागतों को कम करता है।
3. जल्दी और कम समय लेने वाला:
ट्रेड सहज तरीके से और कम समय में किया जा सकता है। ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के आने से पहले, ट्रेड एक जटिल प्रक्रिया थी, क्योंकि आपको ट्रेड के ऑर्डर्स को रखने या रद्द करने के लिए ब्रोकर से मिलने या अपने ब्रोकर को बुलाना पड़ता था।
अब, आप सरल तरीके से स्मार्टफोन के माध्यम से भी ट्रेडिंग कर सकते हैं।
4. पूर्ण नियंत्रण
यह आपको अपने पोर्टफोलियो पर पूरा नियंत्रण रखने की अनुमति देता है। आप कभी भी कहीं से भी ट्रेड के ऑर्डर दे सकते हैं। यह ऑनलाइन ट्रेडिंग के कारण आपको मिलने वाली फ्लेक्सीबिलटी है।
5. गलतियों की संभावना कम है
ट्रेडिशनल ऑफ़लाइन ट्रेडिंग के मामले में, ट्रेडर्स और ब्रोकर्स के बीच गलतफहमी के कारण गलतियों की अधिक संभावना थी।
लेकिन ऑनलाइन ट्रेडिंग में, आप ब्रोकर के हस्तक्षेप के बिना ट्रेड आर्डर दे सकते हैं या रद्द कर सकते हैं और इसलिए अपने आप से ट्रेड लेनदेन को मैनेज कर के भी रख सकते हैं।
6. हर समय निवेश की निगरानी करें:
आप कभी भी निवेश की निगरानी कर सकते हैं। आपके स्मार्टफोन में शेयर मार्केट एप को डाउनलोड किए जा सकते हैं, जो आपको बाजारों के संपर्क में रहने में मदद करते हैं और कभी भी आपके निवेश की निगरानी करते हैं और उसी के अनुसार उचित रणनीतिक जानकारी लेते हैं।
जोखिम वाले स्टॉक को हटाया जा सकता है और मार्केट मूव्स के तरीके को देखते हुए प्रॉफिट मेकिंग स्टॉक्स को आपके पोर्टफोलियो में जोड़ा जा सकता है।
7. एक्सेस रिसर्च रिपोर्ट
आप विभिन्न चार्टों के आधार पर शेयर की कीमत पर शीर्ष अनुसंधान सिफारिशों, रिपोर्ट, विश्लेषण तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं।
विभिन्न ब्रोकरेज वेबसाइटें हैं जिनके माध्यम से आप रिसर्च विशेषज्ञों के साथ भी चर्चा कर सकते हैं। आप वित्तीय सलाहकारों की मदद से भी सर्वश्रेष्ठ कदम उठा सकते हैं।
यदि आप ऑनलाइन ट्रेडिंग करते है या करना चाहते है तो यहां इसके साथ कई निवेश विकल्प उपलब्ध हैं और आप अपनी आवश्यकताओं और सुविधा के अनुसार उन्हें चुन सकते हैं।
लेकिन अगर आप अधिक मुनाफा कमाना चाहते है तो आपको अच्छा रिटर्न पाने के लिए कम उम्र से ही अपना निवेश शुरू करना होगा।
आज की व्यस्त दुनिया में, तकनीकी विकास ने निवेश की पूरी प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी के निवेश को शुरू करना आसान बना दिया है।
स्मार्टफोन के जरिए भी निवेशक निवेश की पूरी जानकारी रख सकता है। आप बाजार के साथ हमेशा जुड़े रह सकते हैं क्योंकि शेयरों में निवेश करने के लिए शेयर बाजार की निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है।
यदि अपने इस टॉपिक लास्ट तक पूरा पढ़ा है तो आप ऑनलाइन ट्रेडिंग के बारे में सारी जानकारी से अवगत हो चुके होंगे।
ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आपको एक डीमैट खाता खुलवाना होगा।
इसलिए यदि आप शेयर मार्केट में निवेश के लिए डीमैट खाता खुलवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण दर्ज करें और आपके लिए कॉलबैक व्यवस्थित किया जाएगा:
क्या मैं ट्रेडिंग अकाउंट ऑनलाइन खोल सकता हूँ?
जी हाँ, आप केवल 15 मिनट के अंदर अपना ऑनलाइन अकाउंट खोल सकते हैं।
ऑनलाइन अकाउंट खुलवाने के लिए क्या डॉक्युमेंट्स चाहिए?
क्या ऑनलाइन ट्रेडिंग करना जोखिम से भरा है?
ऑनलाइन ट्रेडिंग ट्रेड करने का सबसे सुरक्षित तरीका है और यह बहुत ही सरल और आसान भी है।
क्या मुझे ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू करने के लिए अनुभव प्राप्त करना होगा?
नहीं। आप सही समय पर सही कदम उठाने के लिए फाइनेंशियल एडवाइजरी और रिसर्च रिपोर्ट की मदद ले सकते हैं।
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]]>The post स्टॉक मार्केट ऑर्डर appeared first on अ डिजिटल ब्लॉगर.
]]>इसी वजह से कई बार ट्रेडर ऑर्डर निष्पादित करते समय परेशान दिखाई देते हैं। इसलिए यह सलाह भी दी जाती है कि share market meaning in hindi की सभी जानकारी के बाद ही ट्रेड करें।
तो चलिए, इन ऑर्डर्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।
जब आप ऑर्डर खरीदने वाले होते हैं, तो कई प्रकार के स्टॉक मार्केट ऑर्डर होते हैं जो आपकी ट्रेडिंग स्क्रीन पर दिखाई देते हैं।
इनमें से कुछ ऑर्डर तुरंत एक्सेक्यूट होते हैं जबकि कुछ एक विशेष प्राइस और समय पर पूरे होते हैं।
एक समय पर आकर ट्रेडर कंफ्यूज हो जाता है कि “किस प्रकार के ऑर्डर पर भुगतान की जाने वाली कीमत और रिटर्न में बड़ा अंतर होगा?”
शेयर मार्केट में दो प्रकार के स्टॉक होते है पहला लिस्टेड स्टॉक और दूसरा अनलिस्टेड स्टॉक एक अच्छे निवेशक का पहला यही गुण है कि उसको इन दोनों के बारे में जानकारी होनी चहिये।
यानी कि किस प्रकार के स्टॉक मार्केट ऑर्डर से उसे अच्छा और बड़ा रिटर्न मिलेगा।
आइए, आज इस लेख में हम समझते हैं:
स्टॉक मार्केट ऑर्डर केवल ट्रेडर द्वारा उनके ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से स्टॉक खरीदने या बेचने के लिए दिया गया निर्देश है।
एक ऑर्डर प्लेस करते समय आप नीचे दी गई इमेज में अपनी ट्रेडिंग स्क्रीन पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार के ऑर्डर देख सकते हैं।
स्टॉक मार्केट में एक एक्सपर्ट की तरह ट्रेड करने के लिए आपको स्टॉक मार्केट ऑर्डर को समझना और इसे अपने ट्रेड के दौरान सही ढंग से पालन करना जरुरी है।
स्टॉक मार्केट से अच्छा रिटर्न प्राप्त करने के लिए यह बहुत आवश्यक है।
आइए, अब हम विभिन्न प्रकार के स्टॉक मार्केट ऑर्डर के बारे में चर्चा करते हैं।
एक स्टॉक मार्केट ऑर्डर शेयर के करंट मार्केट प्राइस पर खरीदता है या बेचता है।
यहां, ट्रेडर या इन्वेस्टर का प्राइस पर कोई कंट्रोल नहीं होता है, लेकिन इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि ट्रेडर का ऑर्डर तुरंत निष्पादित हो जाएगा।
उदाहरण:
मान लीजिये, आप ABC Limited के 1000 शेयर को ₹100 रुपये प्रति शेयर के मार्केट प्राइस पर खरीदना चाहते हैं।
अब, यदि 500 शेयरों के लिए आस्क प्राइस ₹100 लगाया है और बाद में 500 शेयर के लिए ₹99 लगाया गया है।
यहाँ पर जिसका आस्क प्राइस सबसे अधिक होगा, उसे पहले ट्रेड किया जाएगा।
इस स्थिति में, जिसने 500 शेयर के लिए 100 रूपये का आस्क प्राइस लगाया है, पहले उसे ट्रेड किया जाएगा और बाद में ₹99 पर आस्क प्राइस को वरियता दी जाएगी।
लिमिट ऑर्डर वह ऑर्डर है, जहां ट्रेडर एक शेयर खरीदने या बेचने के लिए पहले से एक प्राइस को निर्धारित कर सकता है।
इस प्रकार के ऑर्डर उन ट्रेडर्स के लिए उपयोगी होते हैं, जो प्राइस मूवमेंट का सक्रिय रूप से पालन नहीं करते हैं और उनकी पूर्व निर्धारित कीमत होती है।
इस स्टॉक मार्केट ऑर्डर में ट्रेड का निष्पादन अचानक हो जाता है, यह तब तय किया जाएगा जब शेयर का प्राइस निर्धारित प्राइस पर पहुँच जाएगा।
उदाहरण
यदि आप किसी शेयर को खरीदने या बेचने का मूल्य ₹100 निर्धारित करते हैं तो शेयर का मार्केट प्राइस ₹100 होने पर वह से अपने आप निष्पादित कर देगा।
स्टॉप लॉस वह टूल है, जहां एक ट्रेडर ट्रेड से बाहर निकलकर अपने नुकसान को कम कर सकता है।
अगर शेयर, ट्रिगर प्राइस तक पहुंचता है।
यदि शेयर की कीमत अचानक बढ़ जाती है या अचानक नीचे चली जाती है, तो स्टॉप लॉस लगाकर आप खुद को भारी नुकसान से बचा सकते हैं।
स्टॉप लॉस ऑर्डर के प्रकार
“स्टॉप लॉस मार्केट ऑर्डर” स्टॉप लॉस के समान है, जहां ट्रेडर सर्वोत्तम उपलब्ध मूल्य पर ट्रेड से बाहर निकलने के लिए ट्रिगर प्राइस को निर्धारित करता है।
यहां, जैसे ही शेयर ट्रिगर प्राइस पर पहुंचने वाला होता है तभी एक मार्केट ऑर्डर जेनेरेट होता है और ऑर्डर तुरंत मार्केट रेट पर पूरा हो जाता है।
उदाहरण:
मान लीजिए कि शेयर ₹100 की सेल पोजीशन है।
स्टॉप लॉस के लिए ट्रिगर कीमत ₹95 रुपये रखी गई है। यदि स्टॉप लॉस ट्रिगर हो जाता है, तो शेयर बाजार में सबसे अच्छी उपलब्ध कीमत पर खरीदे जाएंगे।
यह एक ऐसा ट्रेड है, जहां ट्रिगर हिट होने के बाद ऑर्डर को एक्सचेंज को भेज दिया जाता है।
यह एक “स्टॉप लॉस लिमिट ऑर्डर” है, यानी यह ट्रेड प्राइस पहले से ही यूजर द्वारा निर्धारित होना चाहिए।
उदाहरण
मान लीजिए कि सेल पोजीशन ₹100 रखी गई है। स्टॉप लॉस के लिए ट्रिगर कीमत ₹95 रुपये रखी गई है।
यदि स्टॉप लॉस शुरू हो जाता है तो ऑर्डर एक्सचेंज को भेज दिया जाएगा और बाद में सेट प्राइस ₹95 पर ट्रेड को निष्पादित किया जाएगा।
“लिमिट स्टॉप लॉस” और “मार्केट स्टॉप लॉस” के बीच अंतर क्या है?
एएमओ (AMO) वे ट्रेड हैं जिन्हें बाज़ार बंद होने के बाद किया जाता है।
यह उन ट्रेडर्स के लिए बहुत आवश्यक है, जिनके पास शेयर मार्केट में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए समय नहीं है।
लेकिन वे धन बनाने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं।
नोट: एएमओ (AMO) को मार्केट प्राइस पर भी रखा जा सकता है।
उदाहरण
यदि आप एबीसी लिमिटेड के 500 शेयर सुबह 7 बजे खरीदना चाहते हैं, तो आप बस अपने ट्रेडिंग ऐप से ट्रेड कर सकते हैं और यदि शेयर निर्धारित मूल्य तक पहुंचता है, तो ट्रेड को मार्केट समय के दौरान निष्पादित किया जाएगा।
जैसा कि नाम से पता चलता है, जब आप आईओसी ट्रेड करते हैं तो एक्सचेंज पर ऑर्डर प्लेस करने के तुरंत बाद ट्रेड निष्पादित नहीं किया जाता तो यह कैंसल हो जाता है।
यदि आप अक्सर ट्रेड करते हैं और प्रत्येक ट्रेड की निगरानी करने में असमर्थ हैं, तो ट्रेडर्स के लिए आईओसी (IOC) ट्रेड उपयोगी है।
उदाहरण
यदि आप किसी कंपनी के 1000 शेयर, आईओसी(IOC) ट्रेड के लिए ऑर्डर करते हैं और उसका प्राइस ₹100 है।
तो जैसे ही ट्रेड में प्रवेश किया जाएगा और अगर 700 शेयर ₹100 पर उपलब्ध हैं, तो इसे निष्पादित किया जाता है और 300 शेयरों को कैंसल कर दिया जाएगा।
कवर ऑर्डर, स्टॉक मार्केट ऑर्डर में से एक है, जहां आप एक ही ट्रेड में स्टॉप लॉस के साथ एक पोजीशन में प्रवेश कर सकते हैं।
आप अपनी पसंद के अनुसार स्टॉप लॉस के ऑर्डर का चयन कर सकते हैं।
ब्रैकेट ऑर्डर एक ट्रेड है, जिसमें 3 ऑर्डर एक साथ होते हैं। यहां, आप टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस के साथ ट्रेड कर सकते हैं।
नोट: सभी ब्रैकेट ट्रेड लिमिट ऑर्डर हैं।
उदाहरण
अगर आप ₹100 में में शेयर खरीदते हैं, जिसका टारगेट प्राइस ₹110 है। उसका स्टॉप लॉस ₹95 है, इसका मतलब आप इसे 1 ट्रेड में ब्रैकेट ऑर्डर के साथ रख सकते हैं।
स्टॉकनेट ऐप के साथ ब्रैकेट ऑर्डर को आसानी से करने और मार्जिन की आवश्यकता को चेक करने के तरीके को जानने के लिए यह वीडियो देखें।
सीएनसी शब्द का मतलब “कैश एंड कैरी” है,जहाँ आप केवल शेयर की डिलीवरी खरीद और बेच सकते हैं।
ध्यान दें कि सीएनसी को “लिमिट प्राइस और मार्केट प्राइस” दोनों पर रखा जा सकता है।
यदि आप शेयर खरीदकर कुछ दिनों के बाद बेचना चाहते हैं, तो आपको सीएनसी को ऑर्डर प्रकार के रूप में उपयोग करना होगा ।
एमआईएस का मतलब मार्जिन इंट्रा डे स्क्वायर ऑफ है। एमआईएस (MIS) एक इंट्रा डे प्रोडक्ट है और इन्हें एक ही ट्रेडिंग दिन के दौरान स्क्वायर ऑफ करना होगा।
नोट: आप या तो मार्केट या लिमिट ऑर्डर पर एमआईएस का चयन कर सकते हैं।
इसके अलावा, आपके पास उस प्रकार के ट्रेड का चयन करने का विकल्प है, जो एक दिन का ऑर्डर याआईओसी (IOC) हो सकता है।
निष्कर्ष:
केवल इक्विटी में ही नहीं बल्कि करेंसी और कमोडिटी जैसे अन्य सेगमेंट में ट्रेड करते समय भी विभिन्न प्रकार के स्टॉक मार्केट ऑर्डर को जानना बहुत उपयोगी होता है।
अगर आप इक्विटी और कमोडिटी में के मध्य और अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो आप Equity vs Commodity in Hindi आर्टिकल को पढ़ सकते हैं।
आज, जब दुनिया डिजिटल है और अधिकांश ट्रेडर खुद ही ट्रेड करना पसंद करते हैं। ऐसे में डेब्ट मार्किट के बारे में पता होना न केवल आपको आसानी से ट्रेड करने में मदद करता है बल्कि आपके आत्मविश्वास के स्तर को भी बढ़ाता है।
हमें उम्मीद हैं कि आप विभिन्न प्रकार के स्टॉक मार्केट ऑर्डर समझ गए हैं, तो आप अपना पहला मार्केट ट्रेड शुरू कर सकते हैं!
यदि आप भी अपना ऑर्डर प्लेस करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपना डीमैट अकाउंट खोलें।
डीमैट अकाउंट खोलने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को देखें :
यहाँ अपना बुनियादी विवरण भरें और उसके बाद आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी।
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]]>The post Stop Loss Kaise Lagaye appeared first on अ डिजिटल ब्लॉगर.
]]>इनमें से प्रत्येक ऑर्डर की कुछ अपनी विशेषताएं होती हैं।
लेकिन, इसके अलावा भी एक अन्य ऑर्डर विकल्प है जो ट्रेड को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद कर सकता है – Stop Loss Order.
यह आपके मार्केट और लिमिट ऑर्डर में ट्रिगर प्राइस (Trigger Price) सेट करने में सहायता कर सकता है।
इस ब्लॉग में, हम Stop Loss Kaise Lagaye के बारे में बात करेंगे।
स्टॉप लॉस एक ऐसा प्राइस है जिसके इस्तेमाल से निवेशक या ट्रेडर अपने नुकसान को कम से कम करते है।
यह निवेशक को एक विकल्प देता है कि, वह किसी शेयर की करंट प्राइस पर उसमें एक संभावित लॉस की लिमिट सेट कर लेते है।
इसके इस्तेमाल का मुख्य कारक बाजार की अस्थिरता है। चूँकि, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत अधिक होता है इसलिए आपको जितना लाग हो सकता है उतना ही नुकसान भी हो सकता है।
और स्टॉप लॉस इसी नुकसान को कम करने का तरीका है।
मान लीजिये आपने कोई शेयर ₹200 रुपये में खरीदा है, लेकिन आपको ये भी डर है कि इसमें गिरावट भी आ सकती है। तो आपने यहाँ अपने ऑर्डर पर ₹195 रुपये पर स्टॉप लॉस आर्डर लगा देंगे।
इस प्रकार, अगर शेयर के दाम ₹195 रुपये से नीचे गिरता है तो उस स्थिति में आपको कोई नुकसान नहीं होगा। क्योंकि आपने उसे ₹195 पर बेच चुके हैं।
आप इसे केवल गिरावट के दौरान ही नहीं कीमतों में तेजी आने पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब, Stop Loss Kaise Lagaye के बारे में बात करें, उससे पहले आपको स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस (SL Trigger Price) के कॉन्सेप्ट को समझने की आवश्यकता है।
चूंकि, आप मार्केट और लिमिट ऑर्डर दोनों के लिए स्टॉप लॉस ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं। इसलिए, हम इन दोनों ऑर्डर के लिए स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस के बारे में बात करेंगे।
हमने इस पोस्ट में जेरोधा काइट के माध्यम से Stop Loss Kaise Lagaye के बारे में दिखाया है।
जब आप एक नॉर्मल Buy या Sell Order (मार्केट या लिमिट) प्लेस करते हैं, तो फिर स्क्रीन पर Buy या Sell का विकल्प आएगा।
जब आप इनमे से किसी एक विकल्प को चयन करते है तो अगले स्क्रीन पर “Stoploss order” सेट करने का ऑप्शन दिखाई देगा।
“SL-Stoploss Order” विकल्प का चयन करें और “SL trigger price” वैल्यू दर्ज करें।
इसके बाद जैसे ही लाइव प्राइस ट्रिगर प्राइस से हिट करेगा, आपका ऑर्डर पूरा (Execute) हो जाएगा।
आपको नीचे दिखाया गया है कि जेरोधा काइट मे Stop Loss Kaise Lagaye। आप जेरोधा काइट के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
अभी आपने ये देखा कि जेरोधा काइट में Stop Loss Kaise Lagaye. आइये अब ये देखें कि मार्केट और लिमिट ऑर्डर प्लेस करते हुए SL ट्रिगर कैसे इस्तेमाल करते है।
जब आप रेगुलर मार्केट ऑर्डर (Market Order) प्लेस करते हैं, तो आप कोई एक प्राइस सेट नहीं करते हैं, और ऑर्डर को करंट मार्केट प्राइस पर पूरा किया जाता है।
हालाँकि, मान लें कि आप वर्तमान मार्केट प्राइस पर खरीदना या बेचना नहीं चाहते है, तो आपके आगे दो परिदृश्य होंगे:
BUY ऑर्डर – मान लीजिये किसी शेयर का मार्केट प्राइस ₹100 रुपये है।
किसी कारण से, आप उस शेयर के लिए Buy Order देना चाहते हैं, जब मार्केट प्राइस ₹110 रुपये तक पहुंचता है।
रेगुलर मार्केट ऑर्डर के मामले में, यह तुरंत ही पूरा हो जाएगा, क्योंकि आप करंट मार्केट प्राइस की तुलना में स्टॉक के लिए अधिक कीमत का भुगतान करने के तैयार हैं।
हालांकि, यदि आप बाजार में स्टॉक प्राइस को ₹110 रुपये से बढ़ने तक का इंतज़ार करना चाहते हैं, तो आप ₹110 रुपये के ट्रिगर प्राइस पर एक मार्केट Stop Loss Trigger Order प्लेस कर सकते हैं।
एक बार लाइव प्राइस ₹110 रुपये हिट होता है तो यह ऑर्डर बाजार में नियमित रूप से मार्केट बाय का ऑर्डर बन जाएगा।
सेल ऑर्डर: मान लीजिये स्टॉक का लाइव प्राइस ₹100 रुपया है। आप एक स्टॉक के लिए सेल ऑर्डर देना चाहता हैं जब मार्केट प्राइस ₹95 रुपये को हिट करता है।
अब मार्केट सेल ऑर्डर शीघ्र ही पूरा हो जाएगा, चूँकि आप वर्तमान स्टॉक प्राइस से कम कीमत पर बेचने के लिए तैयार है।
हालाँकि, मान लीजिये कि आप स्टॉक को ₹95 रूपये के लिमिट पर बेचना चाहते है।
एक बार लाइव मूल्य ₹95 रुपये हिट होने पर यह ऑर्डर नियमित रूप से बाजार में बिकने वाला ऑर्डर बन जाएगा।
इस तरह से, मार्केट ऑर्डर के साथ Buy या Sell करने के लिए Stop Loss Order lagaye जाते हैं।
जब आप एक लिमिट ऑर्डर सेट करते हैं, तो आप एक कीमत तय करते है जिस पर ऑर्डर पूरा हो।
यह आपको उस प्राइस पर एक लिमिट निर्धारित करने की अनुमति देता है जिसे आप स्टॉक खरीदते या बेचते हैं।
अब बाय लिमिट ऑर्डर (Buy Limit Order) के मामले में, ऑर्डर को स्पेसिफिक लिमिट प्राइस या कम मूल्य पर पूरा किया जाता है, ताकि आपको सबसे अच्छी कीमत मिल सके।
इसी तरह, जब यह सेल लिमिट ऑर्डर की बात आती है, तो ऑर्डर को लिमिट प्राइस या उच्च मूल्य पर पूरा किया जाता है ताकि कम से कम नुकसान हो।
अब जब हम जानते हैं कि ऑर्डर के काम को कैसे लिमिट किया जाए, तो आइए देखें कि स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस की भूमिका क्या है। यहाँ फिर से दो संभावित परिदृश्य हो सकते हैं।
BUY ऑर्डर- बता दें कि किसी शेयर की लाइव मार्केट कीमत ₹100 रुपये है। आप ₹110 रुपये में एक लिमिट खरीद ऑर्डर देना चाहते हैं।
किसी कारण से, आप केवल तभी शेयर खरीदना चाहते हैं जब वह ₹110 रुपये को हिट करता है।
हालांकि, लिमिट ऑर्डर के मामले में, जैसा कि ऊपर बताया गया है, इसे सबसे अच्छी बाय प्राइस पर पूरा किया जाएगा, जो कि 100 रुपये होगा।
इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि बाय प्राइस ₹110 रुपये तक या उससे कम ना हो, तो आप ₹109.50 के ट्रिगर मूल्य पर एक स्टॉप लॉस लॉस ट्रिगर ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं।
एक बार लाइव मूल्य ₹109 रुपये पर हिट होने पर यह ऑर्डर बाजार में एक नियमित लिमिट खरीद ऑर्डर बन जाएगा और ₹110 रुपये के बेहतर खरीद मूल्य पर पूरा किया जाएगा।
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सेल ऑर्डर
यही अवधारणा यहां भी लागू होगी, मान लें कि एक शेयर की लाइव बाजार कीमत ₹100 रुपये है।
आप ₹90 रुपये पर एक लिमिट ऑर्डर प्लेस करना चाहते हैं।
इसका मतलब यह है कि ऑर्डर को मार्केट प्राइस पर तुरंत निष्पादित किया जाएगा, क्योंकि एक लिमिट सेल ऑर्डर में, ऑर्डर लिमिट प्राइस या अधिक पर पूरा हो जाता है।
हालाँकि, यदि आप विशेष रूप से उस ऑर्डर को निष्पादित करना चाहते हैं, जब वह ₹90 की सीमा से टकराता है, तो आप ₹90.50 के ट्रिगर प्राइस पर SL ट्रिगर ऑर्डर को सीमित कर सकते हैं।
यह ऑर्डर बाजार में एक नियमित लिमिट सेल ऑर्डर बन जाएगा, जब एक बार लाइव प्राइस ₹90.50 रुपये पर हिट करता है, तो इसे ₹90 रुपये या बेहतर सेलिंग प्राइस पर पूरा किया जाएगा।
रेगुलर ऑर्डर – मार्केट और लिमिट ऑर्डर दोनों ही मार्केट बुक में डायरेक्टली प्लेस होता है। दूसरी तरफ, एक स्टॉप लॉस ऑर्डर एक स्टॉप लॉस बुक में प्लेस होगी और जब लाइव प्राइस ट्रिगर प्राइस को हिट करेगी तो मार्केट बुक में जाएगी।
जैसा की नाम से पता लगता है, एक स्टॉप लॉस ट्रिगर ऑर्डर एक इंस्ट्रक्शन (निर्देश) है, जो निवेशक एक पूर्व-निर्धारित कीमत पर मार्केट / लिमिट ऑर्डर को ट्रिगर करने के लिए किया जाता है।
यदि आप BUY/SELL पोजीशन लेना चाहते हैं तो SL ऑर्डर प्लेस कर सकते है, यह तभी कर सकते है जब मार्केट आपके पसंद की ट्रिगर प्राइस पर पहुँच जाए।
इसके अलावा, स्टॉप लॉस ऑर्डर घाटे को सिमित करता है और रिस्क एक्सपोज़र को कम करता है।
जब आप स्टॉप लॉस ऑर्डर प्लेस करते है, तो आप अपने पसंद के स्टॉक प्राइस पर ट्रेडिंग पोजीशन से बाहर निकल कर नुकसान को कम करने की कोशिश करते हैं।
यह एक बहुत ही उपयोगी टूल है जिसका इस्तेमाल संभावित जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है, जब मार्केट आपके खिलाफ चला जाए।
केस 1: स्टॉप लॉस ऑर्डर जब आपके पास लॉन्ग पोजीशन हो:
मान लीजिए कि आपने ₹100 पर एक शेयर खरीदा है (नेट पोजीशन +1 है) और शेयर की कीमत बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।
हालाँकि, आप कोई भी बड़ा नुकसान नहीं उठाना चाहते हैं और आप यह फैसला करते है कि अगर कीमत ₹95 रुपये पर आ जाए, तो फिर बेच देना है।
यह सुनिश्चित करने के लिए, आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:-
मार्केट ऑर्डर – स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस सेट करें = 95.10
लिमिट ऑर्डर – स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस सेट करें = ₹95.10 और लिमिट प्राइस = ₹95.00
इसका मतलब यह होगा कि एक बार जब बाजार का लाइव प्राइस ₹95.10 तक पहुंच जाता है, तो बाजार में SL ऑर्डर खुलेगा। SL लिमिट / मार्केट सेल ऑर्डर, ऑर्डर की शर्तों के आधार पर पूरा किया जाएगा।
केस 2: SL ऑर्डर जब आपके पास शॉर्ट पोजीशन हो
मान लीजिये कि आपने 100 रुपये में एक शेयर बेचा है (नेट पोजीशन -1 है) और शेयर की कीमत गिरने की उम्मीद कर रहे हैं।
हालांकि, आप कोई भी अधिक नुकसान नहीं उठाना चाहते हैं और अगर कीमत ₹105 रुपये के पार जाती है तो इसे बेचने का फैसला करते है।
यह सुनिश्चित करने के लिए, आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं –
मार्केट ऑर्डर: SL ट्रिगर मूल्य निर्धारित करें = ₹104.90
लिमिट ऑर्डर: SL ट्रिगर प्राइस = ₹104.90 और लिमिट प्राइस = ₹105.00 सेट करें
इसका मतलब यह होगा कि एक बार लाइव मार्केट की कीमत ₹104.90 रुपये तक पहुंच जाएगी और स्टॉप लॉस ऑर्डर बाजार में खुलेगा। स्टॉप लॉस लिमिट / मार्केट बाय ऑर्डर, ऑर्डर के शर्तों के आधार पर पूरा किया जाएगा।
स्टॉप-लॉस ऑर्डर एक टूल है जो आपको बाजार में पहले से मनचाहे मूल्य पर ऑर्डर देने में मदद करता है। अपने ट्रेड को मैनेज करने के लिए इसे बुद्धिमानी से उपयोग करें!
उम्मीद है आपको Stop Loss Kaise Lagaye पोस्ट पसदं आया होगा।
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अगर आप शेयर बाजार में ट्रेड करना चाहते हैं तो फिर अगले कदम उठाने में हमारा साथ दें।
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]]>आज इस लेख में हम बात करेंगे की शेयर खरीदने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़े क्या है, कैसे इसकी शुरुआत करनी चाहिए और किस तरह से आप अलग-अलग माध्यम से स्टॉक मार्केट में शेयर को खरीद और बेच सकते है।
शुरुआत करते है की शेयर खरीदने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है, तो अगर आप एक शुरूआती ट्रेडर या निवेशक है तो सबसे पहले ये जानना ज़रूरी है की शेयर कहा से ख़रीदे?
एक रिटेल ट्रेडर और निवेशक सिर्फ रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से ही किसी कंपनी के शेयर खरीद और बेच सकता है तो यहाँ पर सबसे पहले ज़रूरी है की आप अपने लिए एक स्टॉक ब्रोकर चुने और उसके साथ अपना डीमैट खाता खोले।
ये प्रक्रिया काफी आसान होती है, आप ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से डीमैट खाता खोल सकते है। अकाउंट खुलने पर ब्रोकर आपको ट्रेडिंग एप को इस्तेमाल करने के लिए User ID और Password प्रदान करता है।
यहाँ तक का सफर तो काफी आसान होता है, इसके बाद सबसे चुनौतीपूर्ण चरण होता है सही स्टॉक को चुनना और उसमे ट्रेड या निवेश करना।
इसके लिए आपको ये निश्चित करना होता है कि आप स्टॉक को कितने समय के लिए खरीदना चाहते है और आपका लक्ष्य क्या है। जैसे की अगर आप एक अच्छे रिटर्न की अपेक्षा कर रहे है तो उसके लिए लॉन्ग टर्म निवेश की योजना के अनुसार आपको स्टॉक का चयन करना होता है।
लॉन्ग टर्म निवेश के लिए कंपनी और बिज़नेस की जानकारी लेना काफी आवश्यक है जिसके लिए आपको उस कंपनी के प्रॉफिट/लॉस, सेल्स, फ्यूचर प्लान आदि की जानकारी प्राप्त करना काफी आवश्यक होता है।
दूसरी तरफ अगर आप सिर्फ मार्केट और स्टॉक की वोलैटिलिटी से मुनाफा कामना चाहते है तो उसके इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday trading in hindi), या स्विंग ट्रेडिंग जैसे विकल्प आपको प्रदान किये जाते है। इसके लिए आप टेक्निकल एनालिसिस करनी होती है जिसके लिए आप चार्ट, चार्ट पैटर्न और टेक्निकल इंडिकेटर का उपयोग कर सकते है। मार्केट में कई तरह के इंडीकेटर्स है जैसे की:
इक्विटी के साथ आप डेरिवेटिव्स मार्केट में भी शेयर को खरीद और बेच सकते है जिसमे आप अपने मनचाहे प्राइस में फ्यूचर में ट्रेड कर सकते है। शेयर के साथ-साथ अगर आप जानना चाहते है कि Nifty 50 me invest kaise kare तो उसके लिए भी ऑनलाइन ट्रेडिंग में डेरिवेटिव्स का विकल्प आपको दिया जाता है।
इसके अनुसार आप स्टॉक की एक सूची तैयार कर पाएंगे। अब शेयर खरीदने के लिए आपके पास दो विकल्प होते है:
किस तरह से आप इन दोनों विकल्पों का इश्तेआल कर शेयर खरीद सकते है उसके बारे में विस्तार में बात करेंगे।
जैसे ऊपर बताया गया है की डीमैट अकाउंट खोलने पर स्टॉक ब्रोकर आपको ट्रेडिंग एप प्रदान करता है, अब इस ट्रेडिंग एप का उपयोग कर किसी भी कंपनी के online shares खरीद सकते है।
ये सभी जानकारी दर्ज़ करने के बाद Submit बटन पर क्लिक कर उसे कन्फर्म करें। आपकी आर्डर की सभी डिटेल एक्सचेंज में चली जाएगी जहाँ प्राइस मैच होने पर आपका आर्डर एक्सेक्यूटे हो जाएगा।
ऑनलाइन के साथ-साथ आपको ऑफलाइन शेयर खरीदने की सुविधा भी स्टॉक मार्केट में उपलब्ध करवाई जाती है। हालांकि ये भी आप अपने स्टॉक ब्रोकर की मदद से ही कर सकते है और इसलिए डीमैट खाता खोलना ट्रेड करने के लिए अनिवार्य होता है।
ऑफलाइन शेयर खरीदने के लिए आप ब्रोकर द्वारा प्रदान की गयी कॉल एंड ट्रेड सुविधा का उपयोग कर सकते है। अगर आपने एक फुल सर्विस स्टॉक ब्रोकर के साथ डीमैट खाता खोला है तो उसके लिए आप ब्रोकर की निकट ब्रांच में जाकर अपने आर्डर की जानकारी भी दे सकते है।
अब इसे करना कैसे है, उस पर चर्चा करते है।
कॉल एंड ट्रेड या ऑफलाइन शेयर खरीदने के लिए आपको अपने शेयर्स की जानकारी कॉल के माध्यम से अपने ब्रोकर को देनी होती है। ब्रोकर ट्रेडिंग टर्मिनल का इस्तेमाल कर आपकी ओर से स्टॉक को खरीदता है। अब इस ट्रेड में ज़्यादातर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट या स्विंग और पोसिशनल ट्रेडिंग ही संभव होती है।
शेयर मार्केट में आप किसी भी कंपनी के लिस्टेड शेयर खरीद सकते है जिसके लिए आपको स्टॉक ब्रोकर की आवश्यकता होती है, लेकिन अगर आप अनलिस्टेड शेयर खरीदना चाहते है तो वह आप बिना स्टॉक ब्रोकर के भी खरीद सकते है।
इसके लिए डायरेक्ट स्टॉक परचेस प्लान (DSPP) का उपयोग कर सकते है। इसमें निवेश करने के उद्देश्य से रिटेल निवेशक अपनी राशि लगता है और जो कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्टेड है उसी के अनलिस्टेड स्टॉक को खरीदता है। ये शेयर स्टॉक मार्केट के प्राइस से अलग होते है और ज़्यादातर कम दाम में उपलब्ध करवाए जाते है।
इसके साथ ही इस तरह से स्टॉक खरीदने के लिए एक निवेशक को सीधे कंपनी से संपर्क करना होता है और उनके द्वारा प्रदान किये गए नियमो का पालन कर शेयर को खरीदना होता है। क्योंकि इसके लिए कोई रेगुलेटरी बॉडी नहीं है तो ऐसे शेयर खरीदने में ज़्यादा जोखिम होते है।
उपरोक्त जानकारी के आधार पर आपको पता चल गया है कि शेयर कैसे खरीदते है, लेकिन क्या जानते हैं कि शेयर खरीदने के लिए एक निवेशक को किन किन नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। ये नियम इस प्रकार हैं:
अब शेयर खरीदने की प्रक्रिया तो आपने अच्छे से समझ ली अब जानते है कि अगर हमे ख़रीदे हुए शेयर को बेचना हो या फिर शार्ट सेल्लिंग करने के लिए सेल आर्डर लगाना हो तो कैसे कर सकते है। जैसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आप स्टॉक को खरीद सकते है, ठीक उसी तरह शेयर को बेचने के लिए भी आप दोनों विकल्पों का उपयोग कर सकते है।
यहाँ पर जैसे शेयर खरीदने के लिए मार्केट की जानकारी लेना काफी आवश्यक है ठीक उसी तरह कब और किस प्राइस में स्टॉक को बेचना है उसके लिए कुछ विश्लेषण करना काफी महत्वपूर्ण होता है।
लॉन्ग टर्म निवेश में हालांकि आप एक सही रिटर्न प्राप्त करने के बाद अपने शेयर को बेच सकते है, लेकिन शार्ट टर्म ट्रेड में एक सही प्राइस को निश्चित करना ज़रूरी होता है।
दूसरी तरफ अगर आप गिरती हुई मार्केट से ट्रेडिंग में मुनाफा कामना चाहते है तो आप शार्ट-सेलिंग का उपयोग कर शेयर को पहले बेच कर फिर खरीद सकते है।
सारी जानकारी दर्ज़ करने के बाद आप अपना आर्डर कन्फर्म करें, प्राइस मैच होते ही आपका आर्डर एक्सेक्यूटे हो जाएगा।
ये तो हुए ऑनलाइन प्रक्रिया, शेयर को ऑफलाइन बेचने के लिए आप उसी तरह से कॉल एंड ट्रेड सुविधा का उपयोग कर सकते है जैसे बाय आर्डर के लिए किया था।
Share kaise kharide aur beche की जानकारी के बाद ये जानना भी ज़रूरी है की एक निवेशक को कम से कम कितने पैसे से शेयर मार्केट में निवेश करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले एक निवेशक को अपने जोखिमों का आंकलन कर एक टारगेट यानी की वह मार्केट से मुनाफा कमाना चाहता है इसका विश्लेषण करना चाहिए।
साथ ही निवेशक को अपने लक्ष्य के अनुसार शेयर मार्केट में पैसा लगाना चाहिए।
तो एक तरह से निवेशक अपने अनुसार शेयर मार्केट में निवेश करने की राशि का निर्णय ले सकता है। तो अगर आप सोच रहे है कि क्या 100 रुपये से निवेश किया जा सकता है तो उसका जवाब हां है। एक शुरूआती निवेशक के लिए ज़रूरी होता है कि वह कम राशि के साथ निवेश कर मार्केट की गतिविधियों को जाने।
शेयर मार्केट की जानकारी (share market knowledge in hindi) के बाद आप अपने कैपिटल को धीरे धीरे बढ़ा सकते है। एक सही और सेफ निवेश के लिए Nifty 50 की कम्पनीज को चुन सकते है।
आज के समय में स्टॉक मार्केट में शेयर को खरीदना और बेचना काफी आसान हो गया है, बस ज़रूरी है तो सही स्टॉक को चुनना और सही प्राइस में उसे खरीदना और बेचना। सही जानकारी के साथ आप आसानी से स्टॉक मार्केट में ट्रेड कर सकते है।
यहाँ पर ऑनलाइन ट्रेडिंग करने के लिए ज़रूरी है कि आप सही स्टॉक ब्रोकर का चयन करें जो आपको एक सही और सुरक्षित एप प्रदान करें।
मार्केट में आज के समय में बहुत से विकल्प मौजूद है, अगर आप एक सही स्टॉक ब्रोकर के साथ अपने निवेश और ट्रेड के सफर को शुरू करना चाहते है तो अभी हमे संपर्क करें और हम आपका डीमैट खाता निःशुल्क खोलने में मदद करेंगे।
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