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]]>वैसे तो ये पैटर्न पोजीशन के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं बताता लेकिन अगर इस पैटर्न को ध्यान से समझदारी की साथ इस्तेमाल किया जाए तो ट्रेडर्स बड़ा मुनाफा कमा सकता है।
स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न एक असमंजस की स्थिति पैदा करने वाला पैटर्न है| जब भी ये सिंगल पैटर्न (Single Candlestick Pattern in Hindi) बनेगा मार्केट किस दिशा में जाएगी ये तय कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। हम यहां इस पैटर्न को पूरी तरह से समझेंगे की कैसे इसके सही इस्तेमाल से हम मुनाफा अर्जित कर सकते है।
स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न ज्यादातर ट्रेंड रिवर्सल के लिए जाना जाता है पर ये ट्रेंड रिवर्सल के साथ-साथ ट्रेंड को कंटिन्यू करने में भी उतना ही काम करता है।
तो एक ट्रेडर ऐसे में क्या निर्णय ले।
ऊपर दर्शाए गए चित्र से इस कैंडलस्टिक पैटर्न इन हिंदी में समझे। की बॉडी छोटी होती है और उसकी शैडो (Shadow) उसकी बॉडी से लगभग दो गुना बड़ी होती है, या इससे भी ज्यादा हो सकती है।
स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक में हरे या लाल रंग का कोई ख़ास महत्व नहीं होता है, ट्रेडर्स इसे दोनों रंगों में एक जैसा ही इस्तेमाल करते है।
ये पैटर्न डाउनट्रेंड के साथ-साथ अपट्रेंड और कंसोलिडेशन में भी बनता है, पर इसको इस्तेमाल करने के अलग-अलग तरीकों की वजह से इसको कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे की:
बुलिश स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बियरिश मार्केट (मंदी) में बनता है और उसके बाद मार्केट में रिवर्सल आने के अनुमान बढ़ जाते है। इसका तात्पर्य ये हुआ की अब बाज़ार में तेजी आएगी।
बियरिश स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बुलिश मार्केट (तेजी) में बनता है और उसके बाद मार्केट में रिवर्सल आने के अनुमान बढ़ जाते है। यानी अब बाज़ार में मंदी आएगी।
इसे नीचे दिए इस चित्र की सहायता से समझते है।
जब डाउनट्रेंड चल रहा हो और उसके बिलकुल बॉटम यानी नीचे स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बन जाए तो उसे बुलिश स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न कहा जाएगा।
चित्र में दिखाए अनुसार हम देख पा रहे है की बुलिश स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न डाउनट्रेंड में बन रहा है।
और जब अपट्रेंड चल रहा हो और उसके बिलकुल टॉप पर स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बन जाए तो उसे बियरिश स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न कहा जाएगा।
स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बनने के पीछे ट्रेडर्स का मनोविज्ञान ही काम करता है। मार्केट में जब बायर्स (खरीददार) और सेलर्स (बिकवाल) में मार्केट को अपने कंट्रोल में करने के लिए तनातनी होती है तब स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बनने के आसार होते है।
स्पिनिंग टोप को हम तीन हिस्सों में समझते है।
हम इसे एक चित्र की मदद से समझने का प्रयास करते है।
हम इस चित्र में आप देख पा रहे है की मार्केट खुलने के बाद खरीददार मार्केट को पूरा ऊपर तक लेकर गए और एक High बनाया, यानी की यहाँ खरीददार हावी थे और मार्केट को ऊपर की तरफ ले जा रहे थे।
परन्तु बिलकुल ऊपर जाने के बाद सेलर्स (बेचने वालों) ने मार्केट में अपना दबाव दिखाना शुरू किया और मार्केट को पूरा निचे Low तक ले आए। यहाँ मार्केट सेलर्स के कंट्रोल में आ चुकी थी।
यहाँ से फिरसे खरीददारों ने अपना दबाव दिखाना शुरू किया और मार्केट को सेलर्स के कंट्रोल से निकालकर उसी जगह के पास ले गए और Close की जहाँ से मार्केट Open हुई थी।
यहाँ हमें समझ आ रहा है की बायर्स और सेलर्स आपस में अपने कंट्रोल के लिए एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश कर रहे है पर कोई भी पूरी तरह से अपना कंट्रोल नहीं दिखा पाया।
अगर बायर्स अपना कंट्रोल जमा पाते तो मार्केट अपने High के आस पास क्लोज होती। और अगर सेलर्स अपना कंट्रोल जमा पाते तो मार्केट अपने Low के आस पास Close होती।
अब मार्केट दोनों के ही कंट्रोल में नहीं है। यहाँ स्थिती असमंजस की बनी हुई है और इसलिए अगली कैंडल देखकर ही जाना जा सकता है कि मार्केट किस दिशा में जा सकती है।
स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न को ट्रेड करने के लिए हमें देखना होगा की हम इसे कहाँ और किस दशा में ट्रेड करना चाह रहे है।
जैसा की हम जानते है की ये पैटर्न मार्केट को रिवर्स भी करता है और कंटिन्यू भी करता है तो हम इसे दोनों ही स्थितियों में ट्रेड कैसे किया जाता है ये देखेंगे।
जब मार्केट तेजी यानी की अपट्रेंड में होती है तो मार्केट में अगर स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बन जाए तो मार्केट में और ज्यादा तेजी या गिरावट दोनों हो सकती है।
अपट्रेंड के टॉप पर जब खरीददार और बिकवाल दोनों के बीच में कंट्रोल को लेकर जो स्थिति बनती है उससे स्पिनिंग टॉप का निर्माण होता है। स्पिनिंग टॉप बनने के बाद में मार्केट जिस तरफ भी ट्रेड करना शुरू करेगी मार्केट के उसी तरफ जाने का रुझान होगा।
यहाँ हम एक उदाहरण से समझते है।
ऊपर चित्र में दर्शाए अनुसार मार्केट में अपट्रेंड चल रहा है और यहाँ पर एक छोटा पुलबैक बना और उसी पुलबैक में स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बन गया।
इस कैंडल के बाने के मार्केट में ऊपर की तरफ मूव आई यानी की बायर्स और सेलर्स के बीच में जो कंट्रोल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी उसमें बायर्स हावी हुए और मार्केट अपट्रेंड में चली गई। यहाँ हम समझ पाए की मार्केट स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न की मदद से कैसे ट्रेंड को कंटिन्यू करती है।
यहाँ पर अगली कैंडल के ओपनिंग पर एंट्री लेकर आप अपट्रेंड मार्केट में पैसा कमा सकते है।
इसी तरह ऊपर दर्शाए गए चित्र में आप देख पा रहे है की मार्केट अपट्रेंड में चल रही है और अपट्रेंड में बिलकुल टॉप पर स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बना है और उसके बाद एक लाल कैंडल बनी, जिससे डाउनट्रेंड का सिग्नल मिला।
यहाँ पर स्पिनिंग टॉप के बाद दूसरी कैंडल पर शार्ट पोजीशन ली जा सकती है और साथ में जोखिमों को कम करने के लिए इस कैंडल के हाई पर स्टॉप लॉस (stop loss meaning in hindi) लगाया जाता है।
मार्केट के डाउनट्रेंड में चलते हुए जब भी स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बनता है तो हमारे सामने मार्केट में कंटिन्यू होने या उसके रिवर्स होने की दोनों स्थिति बनती है, पर मार्केट किस तरफ जाएगी ये तय कन्फर्मेशन कैंडल के आधार पर होता है।
जैसे की मार्केट में डाउनट्रेंड चल रहा हो और स्पिनिंग टोप कैंडलस्टिक पैटर्न बनने के बाद अगर रेड कैंडल बने जो स्पिनिंग टॉप कैंडल के नीचे क्लोज हो तो मार्केट डाउनट्रेंड जाने का संकेत देती है।
ऊपर दर्शाए गए चित्र के आधार पर मार्केट में डाउनट्रेंड चल रहा है, उसके बाद मार्केट में एक छोटा पुलबैक आया और उसी पुलबैक पर स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बन गया।
उसके बाद मार्केट उस स्पिनिंग टोप के नीचे बंद हुआ जिससे ये प्रतीत हुआ कि यहाँ सेलर्स को बायर्स के ऊपर हावी हो रहे है। और इसी सेंटिमेंट की वजह से मार्केट अपने डाउनट्रेंड को कंटिन्यू करने लगी।
ऊपर दर्शाए गए चित्र में आप देख पा रहे है की मार्केट में अपट्रेंड चल रहा है, और अपट्रेंड के बिलकुल ऊपर स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न बना है, और उसके बाद मार्केट स्पिनिंग टॉप के नीचे ट्रेड करने लगी, यहाँ ट्रेडर्स को ये कन्फर्मेशन मिलती है की मार्केट अब सेलर्स के कंट्रोल में है और उसके बाद मार्केट मंदी में चली गई।
Spinning Top vs Doji Candlestick Pattern in Hindi
स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न और डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न (doji candlestick pattern in hindi) के बनने का ट्रेडर्स का मनोविज्ञान तो एक ही होता है और इन दोनों कैंडलस्टिक के कार्य भी बिलकुल एक जैसे है। बस इनकी बनावट में थोडा अंतर होता है। जैसे की नीचे दिए इस चित्र में दर्शाया गया है।
स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न और डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न की बॉडी और शैडो में अंतर होता है, स्पिनिंग टॉप की बॉडी थोड़ी बड़ी होती है और शैडो भी बड़ी होती है।
परन्तु डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न की बॉडी बहुत छोटी होती है या होती ही नहीं है, डोजी ज्यादातर जहाँ पर Open होती है वहीं पर Close हो जाती है।
स्पिनिंग टॉप कैंडलस्टिक पैटर्न ट्रेडर्स के बीच काफी लोकप्रिय है क्योंकि ये ट्रेडर्स को अपने सोदे बनाए रखने और समय रहते अपने सोदे बेचकर मुनाफा निकालने में मदद करता है। शेयर बाज़ार में स्पिनिंग टॉप की तरह ही कुछ और भी पैटर्न है जो ट्रेडर्स को हर परिस्थिति में मुनाफा कमाने का मौका देते है।
यदि आप शेयर मार्केट ट्रेडिंग के साथ शुरुआत करना चाहते हैं, तो बस नीचे दिए गए फॉर्म में कुछ बुनियादी विवरण भरें।
आपके लिए एक कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी:
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]]>ये पैटर्न बियरिश मार्केट (मंदी) में बनकर मंदी को और आगे बढ़ाने में मदद करता है। एक तरह से ट्रेडर्स को उनके सेंटिमेंट को मंदी की और आगे बढ़ाने में मजबूती देता है। टेक्नीकल अनालिसिस में इस पैटर्न को बहुत तवज्जो दी जाती है।
जो ट्रेडर्स टेक्नीकल अनालिसिस की मदद से मार्केट में ट्रेड लेते है उनको इस पैटर्न से मार्केट में अपने बने बनाए ट्रेड्स को आगे बढ़ाने और नया ट्रेड लेकर मुनाफा कमाने में खूब मदद मिलती है।
फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न पांच कैंडलस्टिक से मिलकर बनता है। जिसमें पहली कैंडल बियरिश लाल रंग की होती है जो की बड़ी कैंडल होती है। उसके बाद तीन बुलिश हरे रंग की कैंडल बनती है, उनके बाद फिरसे एक बड़ी बियरिश लाल रंग की कैंडल बनती है।
आइये इसे नीचे दिए इस चित्र की सहायता से समझने का प्रयास करते है।
आप इस चित्र में देख पा रहे है की मार्केट में बियरिश रेड (मंदी) चल रही है, चलते हुए डाउनट्रेड में अचानक बड़ी बियरिश कैंडल बन रही है जो की मार्केट में और ज्यादा बिकवाली का संकेत है, उसके बाद मार्केट ने बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है यानी की तेजी में अपने आपको आगे बढ़ाने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाई।
इसके बाद फिरसे एक बड़ी बियरिश कैंडल बन गई, जिससे की पहले से ही डाउनट्रेंड में चल रहे ट्रेडर्स को अपने नए सोदे बनाने और नए ट्रेडर्स को भी मार्केट से मुनाफा कमाने का मोका मिल गया। इस पैटर्न के बाद मार्केट में मंदी का रुझान बढ़ जाता है।
यहाँ खरीददारों का बिकवालों के आगे कमजोर पड़ना दर्शाया गया है।
आप चित्र में देख सकते है की 2, 3 और 4 कैंडलस्टिक में बुलिश मुमेंटम आता हुआ दर्शाया गया है जो की अपने आपको आगे बढ़ा पाने में असमर्थ नजर आ रहे है, और उसके बाद कैंडल 5 ने फिरसे बिकवालों की मजबूती दिखाते हुए डाउनट्रेंड को आगे बढ़ा दिया।
Falling Three Method कैंडलस्टिक पैटर्न की पहचान कैसे करें?
इस कैंडलस्टिक पैटर्न इन हिंदी में पहचान करने के कुछ नियम है जो कुछ इस प्रकार है।
हमने ये तो समझ लिया की फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न बनता कैसे है, और इसके बनने के पीछे का कारण क्या है, अब हम ये जानेंगे की इस पैटर्न की मदद से सोदा कैसे लिया जाता है और मुनाफा कैसे निकाला जाता है।
आप इस चित्र में देख पा रहे है की मंदी के ट्रेंड में ये पैटर्न बना है और उसके बनने के बाद मार्केट मंदी में ही आगे बढ़ रही है। हम अपना सोदा तब लेंगे जब मार्केट इस पैटर्न की अंतिम कैंडलस्टिक के नीचे ओपन होगी।
यानी की हम शोर्ट सेल करेंगे। और अपना स्टॉपलोस ऑर्डर (stop loss meaning in hindi) इस पैटर्न के हाई के ऊपर रखेंगे।
जैसे की आप ऊपर दिए गए डेली टाइमफ्रेम का चार्ट देख पा रहे है। इसमें आपको एक स्ट्रोंग डाउनट्रेंड चलता हुआ दिखाई दे रहा है और इसके बाद फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न बना है जिसके बाद हमें फिरसे डाउनट्रेंड कंटिन्यू होता हुआ दिखाई दे रहा है।
Rising Three Methods Candlestick vs Falling Three Methods Pattern in Hindi
जैसे की फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न मंदी में बनकर मंदी को और आगे बढ़ाने का काम करता है उसी प्रकार राइजिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न तेजी में बनकर तेजी को और आगे बढ़ाने का काम करता है. इन दोनों पैटर्न में केवल ट्रेंड और बनावट का अंतर होता है।
यहाँ हम देख पा रहे है की फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न में पहली कैंडल बियरिश है। उसके बाद दूसरी, तीसरी और चोथी कैंडल बुलिश हरे रंग की है, और उसके बाद फिरसे बड़ी बियरिश कैंडलस्टिक बनी है।
राइजिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न में उसका विपरीत पहली कैंडल बड़ी बुलिश हरे रंग की बनी है। उसके बाद दूसरी, तीसरी और चोथी कैंडल बियरिश लाल रंग की बनी है, और उसके बाद फिरसे एक बड़ी हरे रंग की बुलिश कैंडल बनी है।
दोनों पैटर्न एक सामान होने के बावजूद शेयर मार्केट एनालिसिस (share market analysis in hindi) में अलग-अलग कार्य करते है।
निष्कर्ष
फालिंग थ्री मेथड कैंडलस्टिक पैटर्न कंटिन्यू ट्रेंड में ट्रेड करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, टेक्नीकल एनालिसिस के हिसाब से ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स इस पैटर्न को हमेशां पहले से ही लिए गए सोदों को आगे बढ़ाने, नए सोदे लेने, और नए ट्रेडर्स भी अपने नए सोदे लेने के लिए इसका बखूबी इस्तेमाल करते है।
कुछ कुछ ट्रेडर्स इस पैटर्न का अपने स्टॉप लोस ऑर्डर को ट्रेल करने में भी इसका इस्तेमाल करते है।
यदि आप शेयर मार्केट ट्रेडिंग के साथ शुरुआत करना चाहते हैं, तो बस नीचे दिए गए फॉर्म में कुछ बुनियादी विवरण भरें।
आपके लिए एक कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी:
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]]>इन अलग-अलग निवेश मार्गों के अस्तित्व का मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा निवेशक शेयर बाजार तक पहुंच सके । हालांकि, इतने सारे विकल्प मौजूद होने से निवेशक का भ्रमित होना संभव है कि कौन सा निवेश उनके लिए सबसे उपयुक्त होगा।
इसके सही उतर के लिए आपको बहुत सरे ऑप्शन दिए जाते है जिनमे से एक Angel One’s Website है जहाँ पर आप वित्तीय बाजार से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते है और अपने निवेश में एक नयी ऊँचाई को छू सकते है।
अब एक शुरूआती निवेशक के सामने सबसे बड़ी चुनौती आती है की वह कौनसे विकल्प में कितनी राशि के साथ निवेश करें, तो अगर आप भी इसी असमझस में है तो उसके लिए ज़रूरी है कुछ महत्वपूर्ण टिप्स का उपयोग करना जो आपको मार्केट में निवेश करने और अपनी पोर्टफोलियो में विविधिता लाने में काफी लाभदायक साबित होगी।
1. US Stock में निवेश करें
हाल के दिनों में कई निवासी भारतीयों के बीच US Market में निवेश करना काफी लोकप्रिय हो गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये निवेश आपको भारतीय शेयरों से आगे बढ़ने के लिए अपनी होल्डिंग्स में विविधता लाने की अनुमति देते हैं और आपके पोर्टफोलियो के सामने आने वाले समग्र जोखिमों को समायोजित करने में मदद करते हैं।
Vested1 के साथ Angel One के मिलाप ने भारतीय निवेशकों के लिए एंजेल वन के मोबाइल ऐप के माध्यम से US Stock और ETF में निवेश करना संभव बना दिया है।
यहां शून्य कमीशन निवेश संभव है, जिससे निवेशक बिना कमीशन के बाजारों में खरीद-बिक्री कर सकते हैं लेकिन निवेशक को वायर चार्ज शुल्क और विदेशी मुद्रा रूपांतरण लागू हो सकते हैं। हालांकि, निवेशकों के लिए fractional investing में भाग लेना संभव है जो उन्हें अत्यधिक कीमत वाले शेयरों तक प्रवेश प्राप्त करने की अनुमति देता है।
2. एक विविध पोर्टफोलियो बनाएं
यदि आपको लगता है कि आपके पास निवेश निर्णय लेने के लिए आवश्यक कौशल नहीं है और आप शेयरों का चयन अच्छी तरह से नहीं कर सकते हैं, तो आप एक ऐसे इंजन का उपयोग कर सकते हैं जो आपके लिए चुनिंदा शेयरों में मदद करता है।
इसके लिए आप एंजेल वन का rule-based tool, ARQ Prime2 का इस्तेमाल कर सकते है जो आपको बिना किसी फीस के स्टॉक टिप्स प्रदान करता है। स्टॉक बीटा का उपयोग कर यह इंजन आपके निवेश लक्ष्यों और जोखिम सीमा को ध्यान में रखते हुए विकास, गति, गुणवत्ता और मूल्य स्टॉक अनुशंसाएं प्रदान करता है। यह इंजन आपके पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करता है और उसमे एक बेहतर विविधिता प्रदान करता है।
3. स्टॉक्स के थीमैटिक बास्केट का लाभ उठाएं
यदि आप हमेशा थीमैटिक बास्केट में निवेश करने की आशा रखते हैं, तो Smallcase3 के साथ एंजेल वन का एकीकरण ध्यान देने योग्य है। यह आधुनिक निवेश उत्पाद निवेशकों को सस्ती कीमत पर अपना कम जोखिम वाला विविध पोर्टफोलियो बनाने में सक्षम बनाता है जिससे वे अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
पूर्व-निर्मित शेयरों में निवेश करने से समय और प्रयास की बचत होती है। इन बास्केट के घटकों की बार-बार समीक्षा की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निवेशकों के लक्ष्यों के अनरूप हों। Smallcase का उपयोग निवेश उद्देश्यों की एक श्रृंखला को पूरा करने के लिए किया जा सकता है और जोखिमों को कम करने के लिए सोने के निवेश, स्टॉक, निश्चित आय निवेश और ईटीएफ से बना होता है।
ऊपर बताए गए रणनीतिक निवेश साधनों ने निवेशकों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करना और द स्मार्ट रिपब्लिक ऑफ एंजेल वन का हिस्सा बनना संभव बना दिया है।यदि आप अपना खुद का निवेश सफर शुरू करना चाहते हैं तो आज ही एंजेल वन वेबसाइट पर जाएं ताकि आप बाजारों और उनके भीतर काम करने की रणनीतियों के बारे में अधिक जान सकें।
डिस्क्लेमर
1 एंजेल वन लिमिटेड की भागीदारी केवल रेफरल तक ही सीमित है। एंजेल वन लिमिटेड इस उत्पाद को सीधे ग्राहकों को पेश नहीं करता है। क्लाइंट की सहमति के साथ क्लाइंट का विवरण थर्ड पार्टी स्टॉकब्रोकर (निहित) के साथ साझा किया जाएगा। केवाईसी सहित सभी लेन देन सीधे क्लाइंट और एंजेल वन लिमिटेड के साथ तीसरे पक्ष के स्टॉकब्रोकर (निहित) द्वारा निष्पादित किए जाएंगे। कोई व्यक्तिगत वित्तीय देनदारी नहीं होगी।
2 ARQ एक एक्सचेंज स्वीकृत परिणाम नहीं है और इससे संबंधित किसी भी विवाद को एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर नहीं निपटाया जाएगा।
3 सेबी रजिस्टर्ड संस्था द्वारा दी जाने वाली स्मॉलकेस सुविधाएं एंजेल वन लिमिटेड केवल वितरण गतिविधि के संबंध में सभी विवादों के विक्रेता के रूप में कार्य कर रहा है और इसकी पहुंच नहीं होगी ।
4 यह ब्लॉग विशेष रूप से शैक्षिक उद्देश्य के लिए है।
5 प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं, निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। ब्रोकरेज सेबी द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होगा।. https://bit.ly/2VBt5c5
अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहते है तो अभी हमसे संपर्क करें और हम आपके एक सही स्टॉकब्रोकर को चुनने और उसके साथ डीमैट खाता खोलने में मदद प्रदान करेंगे।
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]]>अब इस पैटर्न से एक ट्रेडर क्या जानकारी प्राप्त कर सकता है उसके लिए इस सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न (Single Candlestick Pattern in Hindi) को सही से जाने।
अब कई बार ऐसा होता है की किसी शेयर में खरीदने और बेचने दोनों ही प्रक्रिया में काफी तेज़ी होती है जिसकी वजह से शेयर जिस प्राइस पर खुलता है उसी प्राइस पर बंद हो जाता है।
एक तरह से मार्केट किसी भी दिशा में नहीं जाती।
तो ऐसी स्थिति की जानकारी ट्रेडर को कैसे मिलेगी? जब भी मार्केट में उपर्युक्त स्थति बनती है चार्ट पर + के निशान जैसा एक कैंडलस्टिक पैटर्न (candlestick patterns in hindi) बनता है, जिसके डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न कहा जाता है।
एक तरह से मार्केट के खुलने पर बुलिश ट्रेडर शेयर के दाम को ऊपर लेकर जाते है लेकिन सेलर यानी की बारिश ट्रेडर सेल्लिंग शुरू करते है और प्राइस को नीचे धकेल कर ओपनिंग प्राइस के आस पास बंद कर देते है।
इसके विपरीत स्थिति भी हो सकती है जहाँ पर मार्केट के खुलते ही बेयरिश ट्रेडर प्राइस को नीचे गिराते है और बायर खरीदारी कर प्राइस को ऊपर की ओर लाते हुए क्लोजिंग प्राइस के आस-पास बंद कर देते है।
प्राइस का उतार चढ़ाव कैंडल की विक और ओपनिंग और क्लोजिंग वैल्यू से बॉडी बनती है जो एक पतली लकीर की तरह होती है।
अब ऐसी स्थिति से आपको मार्केट की दिशा के बारे में क्या पता चलता है?
एक तरह से कुछ भी नहीं। हां कुछ ट्रेडर ये मानते है कि खरीदार और विक्रेता मार्केट के ट्रेंड को जारी रखने के लिए मोमेंटम बना रहे है जिसकी वजह से डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न बना।
लेकिन अगर इस पैटर्न को दूसरे पैटर्न के साथ देखा जाए तो ये आने वाले रिवेर्स्ल की जानकारी देता है।
तो किस तरह से इस पैटर्न का इस्तेमाल किया जाए?
इसके लिए आप अलग-अलग प्रकार के डोजी को पहचान मार्केट में पोजीशन ले सकते है।
अब डोजी कैंडलस्टिक के मार्केट उसी दिशा में आगे बढ़ेगी या रिवर्स करेगी उसके लिए अलग-अलग प्रकार के डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न्स है:
जब खरीदारी और बेचने दोनों तरफ एक बराबर का दबाव हो तो इस तरह का पैटर्न बनता है जो गणित के + चिह्न की तरह दिखता है।
इस तरह के पैटर्न से आने वाली मार्केट स्थिति की जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती है।
जब सप्लाई और डिमांड तो लगभग बराबर हो और ऊपर और नीचे की तरफ ज़्यादा लम्बी विक हो तो इस तरह का डोजी पैटर्न देखने को मिलता है।
ये डोजी पैटर्न ऊपर की ओर एक लम्बी विक और सामान ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस के कारण एक पतली हॉरिजॉन्टल लाइन से प्रदर्शित की जाती है।
ये पैटर्न अपट्रेंड के अंत में देखने को मिलता है जिससे ट्रेडर को रेवेर्सल की जानकारी मिलती है।
Gravestone pattern के विपरीत ये पैटर्न डाउनट्रेंड में देखने को मिलता है जिसमे नीचे की ओर एक लम्बी विक और ऊपर की तरफ एक पतली हॉरिजॉन्टल लाइन होती है।
ये पैटर्न डाउनट्रेंड की समाप्ति और आने वाले अपट्रेंड की जानकारी देती है।
अब जानते है कि डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न किस तरह ट्रेड के लिए लाभदायक है।
इसका विवरण देने के लिए यहाँ पर Sunpharma के चार्ट में डोजी पैटर्न हाईलाइट किया गया है।
अब जैसे की बताया गया है कि डोजी पैटर्न अपने आप में ज़्यादा लाभदायक नहीं है लेकिन अगर ये किसी पैटर्न के साथ दिखे तो मार्केट के ट्रेंड और रेवेर्सल की जानकारी देता है।
अब ऊपर दिए गए चार्ट में डोजी पैटर्न के बाद बेयरिश एंगलफिंग (bearish engulfing) पैटर्न बन रहा है जो डाउनट्रेंड का संकेत देता है।
शेयर में आये अपट्रेंड के अंत में कंसोलिडेशन के बाद यहाँ पर ट्रेडर्स को रेवेर्सल का सिग्नल मिल रहा है जिससे मौजूदा लॉन्ग ट्रेडर प्रॉफिट बुकिंग और नए ट्रेडर्स शार्ट-सेल्लिंग की नई पोजीशन मार्केट में ले सकते है।
हां इस पैटर्न के साथ शेयर मार्केट इंडिकेटर (share market indicator in hindi) का इस्तेमाल कर ट्रेड को कन्फर्म ज़रूर करें।
अब एक तरह से डोजी पैटर्न मार्केट में ज़्यादा कोई संकेत नहीं देता है लेकिन अन्य इंडिकेटर के साथ उपयोग कर इससे मार्केट ट्रेंड और रेवेर्सल को पहचाना जा सकता है।
कैंडलस्टिक पैटर्न आपको आने वाली मार्केट की जानकारी देने में बहुत उपयोगी होते है बस उनकी सही पहचान और इस्तेमाल करना आना चाहिए।
क्या आप शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते है? अगर हां ! तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण भरे और हमारी टीम आपको जल्द संपर्क कर एक डीमैट खाता खोलने में मदद करेगी।
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]]>शेयर मार्केट के विश्लेषण (share market analysis in hindi) में सबसे लोकप्रिय पैटर्न में से एक हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न है। हैमर कैंडलस्टिक मार्केट में एक स्ट्रांग डाउनट्रेंड के बाद देखने को मिलता है और मार्केट में बुलिश रिवेर्स्ल का संकेत देता है।
अन्य टेक्निकल एनालिसिस टूल और शेयर मार्केट इंडिकेटर (share market indicator in hindi) के साथ ये ट्रेडर को शार्ट या लॉन्ग टर्म पोजीशन लेने में मदद करती है।
हैमर पैटर्न की एक लाल या हरे रंग की एक छोटी बॉडी और नीचे की तरफ लम्बी विक्स होती है जिसकी वजह से ये एक हथौड़े के आकर की दिखती है जिसकी वजह से इसे हैमर कैंडलस्टिक कहा जाता है।
यह सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न (Single Candlestick Pattern in Hindi) का एक प्रकार है और एक हैमर कैंडलस्टिक तब बनती है जब एक कैंडलस्टिक एक लंबी निचली विक्स के साथ एक छोटी बॉडी बनाती है। विक्स का आकार कैंडल की बॉडी से कम से कम दोगुना होती है जो इस पैटर्न को कन्फर्म करती है।
बुलिश हैमर कैंडल में नीचे की तरफ लम्बी विक्स ये इंगित करती है कि खरीदारों द्वारा स्टॉक प्राइस को ओपनिंग प्राइस ऊपर की ओर ले जाने से पहले सेलर ने प्राइस को काफी नीचे तक पंहुचा दिया। इसे ओपनिंग प्राइस से ऊपर धकेलने से पहले सेलर ने कीमत को नीचे धकेल दिया।
आसान भाषा में एक लम्बी विक्स इस बात का उल्लेख करती है कि उस शेयर में सेलर की वॉल्यूम ज़्यादा है, जिसकी वजह से शेयर प्राइस काफी नीचे तक गिर गया, लेकिन दूसरी तरफ बायर की बढ़ती गतिविधियों के कारण प्राइस ऊपर की ओर बंद हुआ।
इस तरह से ये कैंडलस्टिक पैटर्न (candlestick patterns in hindi) मार्केट में आने वाले रेवेर्सल की जानकारी देता है। बुलिश ट्रेंड को कन्फर्म करने के लिए इस पैटर्न के साथ के साथ स्टॉक के मोमेंटम की जानकारी लेना आवश्यक होता है जिसके लिए आप अलग-अलग इंडिकेटर जैसे की RSI इंडिकेटर (RSI indicator in hindi) का उपयोग कर सकते है।
हैमर कैंडलस्टिक (hammer candlestick pattern in hindi) के बनने के बाद अगली कैंडल के बनने का इंतज़ार करना चाहिए। अगर अगली कैंडल हैमर कैंडल से ऊपर क्लोज होती है तो ये रेवेर्सल को कन्फर्म करता है।
ऐसे में नए ट्रेडर मार्केट में लॉन्ग पोजीशन ले सकते है और वही शार्ट ट्रेडर मार्केट से एग्जिट करते है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए इस कैंडल को 5-मिनट और 15-मिनट के चार्ट में देखना चाहिए वही ट्रेंड की जानकारी के लिए hourly चार्ट का उपयोग किया जा सकता है।
इस पैटर्न के अनुसार हैमर कैंडल के लॉ पर स्टॉप लॉस लगाया जाता है।
हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न एक बुलिश रेवेर्सल पैटर्न है जो मार्केट में आने वाले अपट्रेंड की जानकारी प्रदान करता है, इसके साथ इस कैंडलस्टिक के कुछ महत्व निम्नलिखित है:
बुलिश हैमर के विपरीत ये कैंडल मार्केट में एक स्ट्रांग अपट्रेंड के बाद देखने को मिलती है। आकार में ये भी हथौड़े की तरह ही दिखती है लेकिन इसकी बॉडी का रंग हरा या लाल होता है। इस पैटर्न को आम भाषा में हैंगिंग मेन भी कहा जाता है।
शेयर के ऊपर जाती हुई दिशा में ये सेलर के बढ़ते हुए सेल्लिंग प्रेशर को दर्शाती है जिससे ये अनुमान लगया जा सकता है की शेयर में पुलबैक आने की सम्भावना है।
ऐसी स्थिति में ट्रेडर शार्ट पोजीशन ले सकते है।
Hammer candlestick pattern in hindi और Hanging man pattern मार्केट में आने वाले रेवेर्सल की जानकारी देते है। रंग और रूप में सामान दिखनी वाली ये दो कैंडल अलग-अलग पोजीशन पर बनने की वजह से अपट्रेंड या डाउनट्रेंड की जानकारी दे ट्रेडर को लॉन्ग या शार्ट पोजीशन लेने में मदद करती है।
यहाँ पर ज़रूरी है कि इस कैंडलस्टिक पैटर्न के साथ अन्य टेक्निकल विश्लेषण जैसे की मोमेंटम, वॉल्यूम आदि की जानकारी प्राप्त करके ही मार्केट में ट्रेड पोजीशन ली जाए।
अगर आपने अभी तक स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं किया है तो अभी शुरुआत करे और नीचे दिए गए फार्म में अपना विवरण भरे।
हम आपको एक सही स्टॉकब्रोकर चुनने में और डीमैट खाता निःशुल्क खोलने में मदद करेंगे।
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]]>स्टॉक मार्केट में शेयर कितने प्रकार के होते है जानने से पहले समझते है कि इक्विटी शेयर क्या होता है।
इक्विटी शेयर एक लॉन्ग-टर्म निवेश का विकल्प है जो कम्पनीज पूँजी एकत्रित करने के लिए स्टॉक मार्केट में इशू करती है। इक्विटी शेयर इशू होने से कंपनी के स्वामित्व कम होता है और निवेशकों को कंपनी में निवेश कर आंशिक स्वामित्व प्राप्त करने का का अवसर मिलता है, जिसके साथ वह भी कंपनी के शेयरहोल्डर की सूची में शामिल हो जाते है।
इक्विटी शेयर में निवेश करने से शेयरहोल्डर को पूँजी के मूल्य वृद्धि और डिविडेंड से हाई रिटर्न कमाने का मौका मिलता है, इसके साथ निवेशकों को मौद्रिक लाभ (monetary benefits) जैसे की वोटिंग राइट भी प्राप्त होते है।
इक्विटी शेयर के प्रकार (types of equity shares in hindi) की बात की जाए तो वह 4 प्रकार के होते है:
आइये इन सबकी विशेषताएं और लाभ को जाने।
साधारण शेयर, जिसे सामान्य शेयर भी कहा जाता है, एक कंपनी के शेयरों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो शेयरधारकों को कंपनी की बैठक में वोट देने का अधिकार देता है और कंपनी के मुनाफे से लाभांश के रूप में आय भी देता है।
एक निवेशक के स्वामित्व वाले साधारण शेयरों की संख्या कंपनी में उसके स्वामित्व के प्रतिशत के अनुपात में होती है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई कंपनी शेयर बाजार में अपने सभी 50 शेयर जारी करती है और आप उनमें से 30 के मालिक हैं। आपके पास कंपनी का 60% स्वामित्व होगा।
साधारण शेयर कई प्रकार के लाभों के साथ आते हैं। आपको न केवल शेयरधारकों से संबंधित विभिन्न मामलों पर कंपनी की बैठकों में वोट देने का अधिकार है, बल्कि आप कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर लाभांश यानी की डिविडेंड से पैसिव इनकम भी कमा सकते है।
साथ ही, सामान्य शेयरों में परिपक्वता तिथि नहीं होती है। इसका अर्थ है कि कंपनी में आपका स्वामित्व तब तक अप्रभावित रहता है जब तक कि कंपनी स्वयं को असूचीबद्ध करने का निर्णय नहीं लेती है या जब कोई अन्य कंपनी अधिग्रहण नहीं करती है।
प्रीफरेंस शेयर्स एक विशेष शेयर विकल्प है जो शेयरधारकों को इक्विटी शेयरधारकों से पहले कंपनी द्वारा घोषित लाभांश प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
प्रीफेरेद शेयर शेयरधारकों को कंपनी के जीवनकाल के दौरान लाभांश (dividend) का दावा करने का विशेष अधिकार प्रदान करते हैं, और कंपनी के बंद होने की स्थिति में पूंजी के पुनर्भुगतान का दावा करने का विकल्प भी प्रदान करते हैं।
इसे हाइब्रिड शेयर विकल्प माना जाता है क्योंकि यह डेब्ट और इक्विटी निवेश दोनों की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है। प्रीफेरेद शेयर जारी करके जुटाई गई पूंजी को प्रीफेरेद शेयर पूंजी के रूप में जाना जाता है और प्रीफरेंस शेयरधारकों को कंपनी का मालिक माना जा सकता है।
हालांकि, इक्विटी शेयरधारकों के विपरीत, उन्हें किसी भी प्रकार के वोटिंग अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
इक्विटी शेयर और प्रीफरेंस शेयर में काफी अंतर है जिसका उल्लेख difference between equity shares and preference shares in hindi में किया गया है।
राइट शेयर्स उन शेयरों के इश्यू को संदर्भित करता है जो एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारको को कम मूल्य में ऑफर करती है। कंपनी के शेयरधारक प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार रखते है।
अगर शेयरधारक इनमे निवेश करते है तो उन्हें एक न्यूनतम मात्रा में इस इशू के लिए आवेदन करना होता है।
कंपनी प्रत्येक शेयरधारक को अधिकार जारी करने के संबंध में सूचित करती है जिसमे शेयरधारकों को निर्धारित समय के भीतर नोटिस का जवाब देना होता है हालाँकि, उनके पास या तो पूरी तरह से या आंशिक रूप से राइट शेयर में सब्सक्राइब या आवहेलना करने का विकल्प होता है।
बोनस शेयर कंपनी द्वारा मौजूदा शेयरधारकों को मुफ्त में दिए जाने वाले अतिरिक्त शेयर होते हैं। तरलता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शेयरधारक इन शेयरों को स्टॉक मार्केट में खरीद और बेच सकते हैं।
ऐसी कुछ स्थितियाँ होती हैं जब एक लाभदायक टर्नओवर होने के बावजूद, लिक्विड फंड की संभावित कमी के कारण कंपनी नकद में लाभांश का भुगतान करने में असमर्थ होती है। ऐसे मामलों में, कंपनी नकद में लाभांश का भुगतान करने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों को बोनस शेयर जारी करती है।
कई बार लिक्विड फण्ड की कमी न होने पर भी कंपनियां बोनस शेयर जारी करती हैं जिससे वह डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स से बच सके।
क्योंकि बोनस शेयर कंपनी की पूँजी को शेयर कैपिटल में परिवर्तन किया जाता है इसलिए बोनस शेयर इशू करने पर मुनाफे का ‘पूंजीकरण’ होता है।
बोनस शेयर जारी करने के लिए कंपनी शेयरधारकों से शुल्क नहीं ले सकती है और इसलिए जो राशि बोनस इश्यू के मूल्य के बराबर होती है उसे लाभ या रिजर्व के विरुद्ध समायोजित किया जाता है, और फिर इक्विटी शेयर कैपिटल अकाउंट में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
Types of Equity shares में चार तरह के शेयर्स की जानकारी दी गयी है जो आपको मार्केट में मौजूदा होल्डिंग या नए निवेश से होने वाले फायदों की जानकारी प्रदान करता है।
इन सभी शेयर्स की विशेषताएं और लाभ की जानकारी ले आप स्टॉक मार्केट में निवेश कर सकते है।
अगर आपने अभी तक स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं किया है तो अभी शुरुआत करे और नीचे दिए गए फार्म में अपना विवरण भरे।
हम आपको एक सही स्टॉकब्रोकर चुनने में और डीमैट खाता निःशुल्क खोलने में मदद करेंगे।
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]]>लेकिन किस तरह से शुरुआत की जाती है और क्या-क्या बातो को ध्यान में रखकर आप अपने मुनाफे को बढ़ा सकते है, उसकी पूरी जानकारी के लिए लेख में दी गयी जानकारी को पढ़े।
अपस्टॉक्स एक डिस्काउंट ब्रोकर है और किसी भी सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले आपको ब्रोकर के साथ रजिस्टर कर अपना खाता खोलना होता है। इसके बाद आप एप में लॉगिन कर अपने अनुसार अलग-अलग विकल्पों जैसे की ट्रेडिंग, इन्वेस्टमेंट, रेफेर एंड अर्न के लिए उपयोग कर सकते सकते है।
ट्रेडिंग के लिए अपस्टॉक्स आपको इंट्राडे, फ्यूचर एंड ऑप्शन में ट्रेड करने का विकल्प प्रदान करता है। लेकिन किसी भी तरह से पैसा कमाने के लिए ज़रूरी है कि आप पूरी जानकारी ले।
जैसे की अगर आप ट्रेडिंग करना चाहते है तो किस स्टॉक को खरीदना है, कितनी अवधि के लिए होल्ड करना है और किस तरह से उसका विश्लेषण करना है, ये सभी जानकारी आपके पास होनी चाहिए।
इसके अलावे कोई अन्य सेवा का उपयोग करने से पहले उसे जुड़ी Upstox terms and conditions को ध्यान से पढ़े।
आइये अब आपको विस्तार में बताते है कि Upstox se paise kaise kamaye.
तो जैसे की बताया गया है कि अपस्टॉक्स की किसी भी सेवा का उपयोग करने के लिए सबसे पहले आपको ब्रोकर के साथ डीमैट खाता खोलना होता है। Upstox के साथ डीमैट खाता खोलने के लिए सबसे ज़रूरी है दस्तावेज़, जैसे की:
अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है तो आपको अपने माता-पिता के दस्तावेज साथ में अपलोड करने होंगे।
अकाउंट खोलने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। आपको बस नीचे दिए गए चरणों का पालन करना होगा और सभी जानकारी सही भरनी होगी:
अपस्टॉक्स खाता खोलने का शुल्क नहीं है लेकिन आपको हर महीने ₹25 एएमसी शुल्क देना होता है। तो अपस्टॉक्स से पैसे कमाने के साथ आपको उसके खर्चो की जानकारी भी होनी चाहिए।
अगर आपको अकाउंट खोलने के लिए किसी भी प्रकार का सहयोग चाहिए तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण भरे
अकाउंट खुलने पर आपको अपस्टॉक्स द्वारा एक ईमेल और मैसेज प्राप्त होगा जिसमे अपस्टॉक्स लॉगिन की जानकारी (User ID और Password) होगी। आप इस विवरण और 6-अंक के पिन का उपयोग कर एप में लॉगिन कर सकते है।
इसके बाद ब्रोकर की ट्रेडिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए आप एप में दिए अलग-अलग विशेषताओं का उपयोग कर पैसा कमा सकते है।
अपस्टॉक्स में आपको इक्विटी, कमोडिटी और करेंसी सेगमेंट में अलग-अलग ट्रेड के विकल्प प्रदान किये जाते है। ट्रेड करने के लिए सही स्टॉक का चयन करने के लिए एप आपको विश्लेषण करने के लिए एडवांस शेयर मार्केट चार्ट प्रदान करती है।
अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेडिंग (option trading in Upstox in hindi) के लिए ब्रोकर आपको एडवांस स्ट्रेटेजी और ऑप्शन चैन भी देता है, जिससे आप सही स्ट्राइक प्राइस पर ट्रेड पोजीशन ले सकते है।
इसके साथ अगर आप जानना चाहते है की अपस्टॉक्स में share kaise kharide aur beche तो उसके लिए निम्नलिखित चरण का पालन करें:
अगर आपके लिए हुए स्टॉक या ऑप्शन की वैल्यू बढ़ती है तो आप उसे स्क्वायर ऑफ या पोजीशन को क्लोज कर पैसा कमा सकते है। ये कमाया हुआ प्रॉफिट आपके ट्रेडिंग फण्ड में अनसेटलेड अमाउंट (unsettled amount in Upstox in hindi) के आगे दिखता है जो दो दिन बाद आपके फण्ड में जोड़ा जाता है।
स्टॉक मार्केट का नाम सुनते ही ट्रेडिंग से पैसा कमाने का ध्यान तो सभी को आता है लेकिन क्या आप जानते है कि अपस्टॉक्स में पैसा कमाने के लिए सिर्फ ट्रेडिंग का विकल्प ही नहीं रेफेर एंड अर्न जैसे फीचर भी है।
लेकिन क्या होता है Refer and Earn और इससे Upstox se paise kaise kamaye?
Upstox Refer and Earn के लिए अकाउंट खोलने के बाद एप में लॉगिन करें और निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
अपस्टॉक्स एक डिस्काउंट ब्रोकर तो ट्रेडिंग पर ब्रोकरेज शुल्क तो कम लेता ही है। इसके साथ अपने ग्राहकों को अलग-अलग माध्यम से पैसा कमाने के अवसर भी प्रदान करता है।
अगर आप भी अपस्टॉक्स के साथ जुड़ कर पैसा कामना चाहते है तो अभी ऑनलाइन डीमैट अकाउंट खोलने के लिए रजिस्टर करें।
शेयर मार्केट में निवेश के लिए अगर आपको स्टॉक ब्रोकर से जुड़ी को अन्य जानकारी प्राप्त करनी है तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण भरे। हमारी टीम जल्द ही आपको कॉल करके आपके प्रश्नो के उत्तर और अकाउंट खोलने में आपको सहयोग करेगी।
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]]>The post Option Trading in Upstox in Hindi appeared first on अ डिजिटल ब्लॉगर.
]]>अब किसी भी ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग करने के लिए सबसे ज़रूरी स्टेप होता है डीमैट खाता खोलना। लेकिन अपस्टॉक्स अकाउंट खोलने के बाद भी कई लोग उसका सही से इस्तेमाल नहीं कर पाते क्योंकि कई बार Upstox me trading kaise kare इसकी जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं होती।
लेकिन समझा जाए तो ये काफी आसान है। अकाउंट को खोलने पर आप अपस्टॉक्स एप में लॉगिन कर सकते है जहा पर आपको मार्केट और अलग-अलग स्टॉक्स की जानकारी चार्ट्स, वैल्यू और अन्य एनालिसिस टूल के आधार पर प्रदान की जाती है। यहाँ पर ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए अलग-अलग ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट (इंडेक्स, स्टॉक्स, कमोडिटी, करेंसी) की जानकारी भी डिटेल में प्रदान की जाती है।
लेकिन हां उससे पहले ज़रूरी है कुछ पहलूओं को समझना जैसे की:
इसके साथ मुनाफा कमाने के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग के नियम का पालन करें, जैसे की ओवरट्रेडिंग से बचे, ब्रोकर की एप में दिए स्ट्रेटेजी का उपयोग करें, न्यूज़ टिप्स से दूर रहे, आदि।
तो चलिए option trading in Upstox in hindi को विस्तार से समझने के लिए पॉइंट को समझे ।
अपस्टॉक्स डीमैट खाता खोलने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है सभी दस्तावेज़ का होना जैसे की आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो। और फ्यूचर और ऑप्शन में ट्रेड करने के लिए आपको इसके अतिरिक्त इनकम स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप भी जमा करने होते है।
अब आइये अपस्टॉक्स में अकाउंट खोलने की प्रक्रिया और स्टेप्स को विस्तार में जानते है:
अगर आपके सबमिट किये गए डाक्यूमेंट्स सही हैं, तो डॉक्यूमेंट वेरीफाई होते ही आपका डीमैट अकाउंट कुछ घंटो में खुल जाएगा। अकाउंट खुलने पर आपको आपका यूजर आईडी और पासवर्ड प्रदान किया जाएगा जिसका उपयोग कर आप अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेडिंग (option trading in Upstox in hindi) कर सकते है।
Upstox में फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट को एक्टिवेट करना बहुत आसान होता है। चलिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके जानते हैं की कैसे आपको Upstox App के जरिये, फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट को कैसे एक्टिवेट कर सकते है।
पर अगर आपकी करंट होल्डिंग 5000 रुपये से कम हाँ , तो आपको सेगमेंट को एक्टिवेट करने के लिए, आपको इनकम प्रूफ (6 महीने बैंक स्टेटमेंट जिसमे निम्न बैलेंस 10,000 होना चाहिए, ITR, 3 महीने की सैलरी स्लिप) को सबमिट करना होगा।
सेगमेंट एक्टिवेट होने पर आप अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेड (option trading in Upstox in hindi) कर सकते है।
अब सेगमेंट एक्टिवट होने के बाद आप अपस्टॉक्स लॉगिन कर ऑप्शन में ट्रेड कर सकते है, लेकिन हर ट्रेड की तरह इसमें भी आपको सही स्टॉक, इंडेक्स का विश्लेषण करना ज़रूरी होता है।
इसके लिए पहले निर्धारित करें की आपको ऑप्शन बायर की पोजीशन लेनी है या सेलर की।
इसके हिसाब से आप ट्रेडिंग के लिए ज़रूरी फण्ड को अपने अकाउंट में ट्रांसफर करें। यहाँ पर ऑप्शन बायर को प्रीमियम के बराबर और ऑप्शन सेलर को मार्जिन के अनुसार अपने अकाउंट में फण्ड ट्रांसफर करना होता है।
अगर आप पहली बार Upstox App का उपयोग कर रहे है तो यहाँ पर फण्ड ट्रांसफर का विवरण दिया गया है:
सही ऑप्शन के चुनाव के लिए आप ट्रेंड को देखे, अगर मार्केट अपट्रेंड में है तो आप कॉल ऑप्शन को खरीद या पुट ऑप्शन को बेच सकते है। दूसरी तरफ अगर मार्केट डाउनट्रेंड में है तो आप कॉल ऑप्शन को बेच और पुट ऑप्शन को खरीद सकते है।
अब ट्रेंड के अनुसार स्टॉक में कॉल/पुट ऑप्शन खरीदने या बेचने का निर्णय ले चुने हुए स्टॉक या इंडेक्स को सर्च कर watchlist में ऐड करे।
ऑप्शन का विश्लेषण करने के लिए ऑप्शन चैन को खोले और सही स्ट्राइक प्राइस का चयन करें।
इसके लिए आप होल्डिंग पीरियड को ध्यान में रख और अपने जोखिमों के अनुसार स्ट्राइक प्राइस को चुन सकते है। उदाहरण के लिए अगर आपको निफ़्टी 18000 का कॉल ऑप्शन खरीदना है तो Nifty OPT 18000 CE पर क्लिक करें।
अब अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेड (option trading in Upstox in hindi) करने के लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करें:
अगर आपका आर्डर मैच करता है तो आपका आर्डर एक्सेक्यूटे हो जायेगा नहीं तो आपका आर्डर मैच होने तक आपको इंतज़ार करना पड़ेगा।
अब आर्डर प्लेस करने के लिए आपको ब्रोकर के कुछ शुल्क होते हैं, उसे भी देने पड़ते हैं।
चलिए जानते है कि Upstox में ऑप्शन ट्रेडिंग में कितना चार्ज लगता है, ऑप्शन ट्रेडिंग करने के लिए आपको कितने चार्जेज देने होते हैं , उनके बारे में जान लेते हैं।
ऑप्शन ट्रेडिंग में ऑप्शन को खरीदने और बेचने के लिए ब्रोकरेज शुल्क देना होता है। क्योंकि अपस्टॉक्स एक डिस्काउंट ब्रोकर ये अपस्टॉक्स शुल्क काफी कम और प्रति ट्रेड के अनुसार लगता है।
अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेडिंग (option trading in Upstox in hindi) लिए 20 रुपये प्रति ट्रेड के अनुसार ब्रोकरेज लिया जाता है।
अपस्टॉक्स ऑप्शन ब्रोकरेज | |
ऑप्शन ट्रेडिंग ब्रोकरेज | 20 रुपये प्रति ट्रेड |
ब्रोकर के फायदे और नुकसान होते हैं। ये फायदे और नुकसान ही हैं , जो आपको ट्रेडिंग के लिए एक सही ब्रोकर को चुनने में मदद करता है।
चलिए अपस्टॉक्स में ऑप्शन ट्रेडिंग (option trading in Upstox in hindi) के फायदे जानते है।
ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए Upstox को चुनने पर कुछ नुक्सान सहने पड़ सकते हैं जिनका विवरण नीचे दिया गया हैं –
निष्कर्ष
Upstox , भारत का एक बहुत ही लोकप्रिय डिस्काउंट ब्रोकर है। और ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए बहुत सारे भारतीयों का ये चाहिदा ब्रोकर है। इसके फायदों के कारण ये आज इतनी तेजी से लोकप्रिय होता हुआ डिस्काउंट ब्रोकर है।
तो आप भी अगर ऑप्शन ट्रेडिंग लिए Upstox (option trading in Upstox in hindi) को चुनना चाहते हैं, तो अभी ब्रोकर के साथ डीमैट खाता खोले और फ्यूचर एंड ऑप्शन सेगमेंट को एक्टिवटे करें।
ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के साथ-साथ अगर आप जानना चाहते है कि Upstox se paise kaise kamaye तो आप अपस्टॉक्स रेफरल (Upstox refer and earn in hindi) का उपयोग कर सकते है।
इसके अंतर्गत आप अपस्टॉक्स डीमैट अकाउंट खोलने का लिंक अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है और उनके अकाउंट खोलने पर ब्रोकर आपको ₹500-₹1200 तक की कमीशन देता है।
अगर आप भी अलग-अलग ट्रेडिंग सेगमेंट में ट्रेड और निवेश कर पैसा कमाना चाहते है तो अभी नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण भरे और हमारी टीम आपको एक सही स्टॉकब्रोकर और उसके साथ डीमैट खाता खोलने में मदद करेगी:
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]]>टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए ये एक सर्वश्रेष्ठ इंट्राडे ट्रेडिंग इंडीकेटर (best indicator for intraday trading) में से एक है लेकिन ये क्या है, किस तरह से काम करता है और एक ट्रेडर किस तरह से इसका इस्तेमाल कर मार्केट में शेयर को खरीद और बेच सकते है, उसका विवरण आगे दिया गया है।
MACD इंडिकेटर ट्रेंड फॉलो करने वाला और मोमेंटम इंडिकेटर है। जिसका इन्वेंशन 1979 में “जेराल्ड एपेल” ने किया था। MACD इंडिकेटर का फुल फॉर्म Moving Average Convergence Divergence (मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स डाइवर्जेंस) है।
MACD एक प्राइस बेस्ड इंडिकेटर है। जो शेयर की कीमतों में हुए परिवर्तन को मूविंग एवरेज की सहायता से प्रदर्शित करता है। इसके मुख्य तीन पांइट्स होते हैं जिसमें से दो लाइन और एक हिस्टोग्राम होता है और इन्हीं तीनों को मिलकर MACD का निर्माण होता हैं।
MACD एक विश्वशनीय इंडिकेटर है, वैसे तो इस इंडिकेटर का इस्तेमाल अधिकतर इंट्राडे ट्रेड करने के लिए किया जाता है, लेकिन आप इस इंडिकेटर का इस्तेमाल शार्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए भी कर सकते है, क्योंकि बड़े टाइम फ्रेम में भी इस टेक्निकल इंडिकेटर की कैलकुलेशन अच्छी ही होती है।
यह शेयर इंडिकेटर मूविंग एवरेज से मिलकर बना होता हैं जिसमें दो लाइन होती हैं जो वेव फॉर्म में चलती है और कुछ समय के अंतराल पर ये आपस में क्रॉस करती है और इसी जगह पर हम किसी भी स्टॉक को खरीदने या फिर बेचने के लिए फैसले ले पाते हैं ।
मूविंग एवरेज , प्राइस के मूवमेंट से बनता है और MACD indicator मूविंग एवरेज से बनता है। इसलिए यह इंडिकेटर थोड़ा लेट से कोई सिग्नल देता हैं, लेकिन इसकी एक्यूरेसी किसी दूसरे शेयर मार्केट इंडिकेटर (share market indicator in hindi) के मुकाबले बहुत अच्छी होती हैं ।
जैसे की ऊपर बताया गया है MACD मूविंग एवरेज इंडिकेटर से मिलकर बनता है, तो यहाँ पर शुरूआती ट्रेडर को मूविंग एवरेज (moving average in hindi) की जानकारी होना आवश्यक है।
मूविंग एवरेज इंडिकेटर चुने हुए टाइम पीरियड के अनुसार पिछले क्लोजिंग प्राइस की गणना कर एक औसत प्राइस की जानकारी देता है। प्राइस अगर अपने औसत से ऊपर हो तो अपट्रेंड और नीचे होने पर डाउनट्रेंड का संकेत देता है।
इसकी कैलकुलेशन के लिए शेयर मार्केट का गणित समझे तो 1-डे चार्ट में 1-मिनट का टाइम फ्रेम में 9 पीरियड मूविंग एवरेज पिछले 9 मिनटों के क्लोजिंग प्राइस के अनुसार एक औसत प्राइस की जानकारी देता है।
अब MACD की गणना करने के लिए 12-पीरियड EMA (फ़ास्ट मूविंग एवरेज) से 26-पीरियड EMA (स्लो मूविंग एवरेज) को घटाया जाता है, जिससे फ़ास्ट मूविंग एवरेज MACD लाइन का निर्माण होता है।
दूसरी तरफ इसके साथ सिग्नल लाइन का उपयोग किया जाता है जो MACD लाइन का 9-पीरियड EMA होता है और एक स्लो मूविंग एवरेज की वैल्यू देता है। MACD वैल्यू से सिग्नल लाइन के एवरेज वैल्यू को घटाकर हिस्टोग्राम बनता है।
इस तरह से कैलकुलेट हुए MACD को 12,26,9 कहा जाता है, आप अपने अनुसार इस वैल्यू को बदल भी सकते है।
अब अगर MACD लाइन की वैल्यू एक पॉजिटिव नंबर हो तो ये लाइन ऊपर की और ट्रेंड करती है और नेगेटिव वैल्यू होने पर ये नीचे की और ट्रेंड करती है।
दूसरी तरफ MACD और सिग्नल लाइन को घटाकर अगर पॉजिटिव नंबर आता है तो पॉजिटिव हिस्टोग्राम (हरे रंग) बनता है और इसके विपरीत लाल रंग का हिस्टोग्राम बनता है जो मार्केट में बुलिश और बेयरिश ट्रेंड की जानकारी प्रदान करता है।
अब देखते है कि ये कैसे काम करता है।
इस इंडिकेटर में आपको 2 लाइन MACD और सिग्नल लाइन है जब MACD लाइन सिग्नल लाइन को नीचे से ऊपर की और काटती है तो ये बाय का सिग्नल देता है।
दूसरी तरफ ऊपर से नीचे आने पर सेल सिग्नल मिलता है।
इसके साथ एक ट्रेडर के लिए हिस्टोग्राम की चौड़ाई देखना भी बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि इससे आप करंट ट्रेंड की स्ट्रेंथ की जानकारी मिलती है। यहाँ पर अगर हिस्टोग्राम की चौड़ाई ज़्यादा हो (divergence) तो दोनों लाइन की दूरी बढ़ती है जो स्ट्रांग ट्रेंड का संकेत देता है।
इसके विपरीत अगर हिस्टोग्राम पास हो (convergence) तो वह वीक ट्रेंड का संकेत देते है और ऐसे में किसी भी तरह का ट्रेड निर्णय नहीं लेना चाहिए।
चलिए अब इस इंडिकेटर के फायदों की बात करते है:
अब हर टेक्निकल इंडिकेटर शेयर मार्केट के गणित पर निर्भर करता है और कई बार ये कुछ गलत संकेत भी दे देता है। ऐसे में MACD indicator की कुछ कमिया निम्नलिखित है:
निष्कर्ष:
किसी भी इंडीकेटर्स को समझने के लिए आपको उन्हें अच्छे से बार -बार समझना होगा। कोई भी इंडीकेटर्स एक्यूरेट सिग्नल नहीं दिखाते हैं। आपको अनुभव से पता चलेगा की कौन सा इंडीकेटर्स किस तरीके से काम करता है। तो इसलिए लगातार अभ्यास करते रहें। इंडिकेटर विश्वास बनाने और हमारी ट्रेडिंग में फेयरनेस (निष्पक्षता) बनाने के लिए एक महान टूल्स साबित हो सकते है׀
शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए अभी संपर्क करें और हम आपको एक सही स्टॉक ब्रोकर और उसके साथ डीमैट खाता खोलने में मदद प्रदान करेंगे:
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]]>इस लेख में हम ट्रेडर्स की कुछ चुनोतियों की बात करेंगे जो ज़्यादातर एक शुरुआती ट्रेडर के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग मुश्किल बना सकता है और साथ में हम बात करेंगे की किस तरह से आप सही समझ के साथ डे ट्रेड में मुनाफा कमा सकता है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में एक ही दिन में यानी कि शेयर मार्केट खुलने और बंद होने के बीच ही स्टॉक खरीदना और बेचना शामिल है। यहां पर हमारा मकसद निवेश करना नहीं बल्कि मुनाफा कमाना होता है। इस दौरान स्टॉक के चार्ट पर बारीकी से नजर रखनी होती है और स्टॉक में हो रहे उतार–चढ़ाव के आधार पर हमें निर्णय लेने होते हैं।
नए ट्रेडर के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग एक पेंचीदा और तकनीकी काम होता है इसलिए बिना पूरी जानकारी के इंट्राडे ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए। चार्ट के ट्रेंड को समझे बगैर आपके लिए इंट्राडे ट्रेडिंग मुश्किल और जोखिम भरा हो सकता है।
इसी मुश्किल को आसान बनाने के लिए Angel One आपके साथ है। एंजेल वन अपने शैक्षिक उपक्रमों स्मार्ट मनी और नॉलेज सेंटर के जरिए नए निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग की जानकारी देता है। इसके अलावा यहां पर आपको हर तरह के ट्रेडिंग की जानकारी भी मिलेगी। आपको इंट्राडे ट्रेडिंग करनी चाहिए या नहीं, यह जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।
किसी भी प्रकार के ट्रेडिंग में शामिल होने से पहले आपको उसके अधिकतम और न्यूनतम जोखिम के बारे में अनुमान होना चाहिए। इंट्राडे ट्रेडिंग में बहुत बड़े पैमाने पर स्टॉक की खरीद-बिक्री होती है। इसलिए जोखिम भी अधिक रहता है। नए निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग से पहले नीचे दिए गए पहलुओं ध्यान देने की जरूरत है।
1. शेयर बाजार की अस्थिरता
उन कारणों को जानना बहुत जरूरी है जो शेयर बाजार को अस्थिर करते हैं। हालांकि बाजार की अस्थिरता से ही इंट्राडे में लाभ कमाया जाता है।
नए निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग टाइम का अधिक ध्यान रखना चाहिए क्योंकि बाजार खुलते ही तुरंत ट्रेडिंग से बचना चाहिए। चार्ट के ट्रेंड को समझने के बाद अगले कुछ मिनटों या घंटों में बाजार की क्या स्थिति रहने वाली है इसका अनुमान लगाना चाहिए। बाजार की अस्थिरता को ध्यान रखते हुए हमें अपने नुकसान को नियंत्रित करने का हुनर भी होना चाहिए।
स्टॉप लॉस नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित करता है। इसलिए ऑर्डर के साथ ही स्टॉप लॉस भी लगाना चाहिए।
2. सीखें कैसे सुरक्षित रखें अपनी पूंजी
इंट्राडे ट्रेडिंग में लाभ कमाने के साथ ही सबसे बुनियादी और जरूरी काम होता है अपनी पूंजी सुरक्षित रखना। निगेटिव रिटर्न की स्थिति में हमारी पूंजी का कम से कम नुकसान हो यही इंट्राडे ट्रेडिंग की सफलता है।
ए निवेशकों को इंट्राडे में ट्रेड करने से पहले नुकसान के बारे आकलन कर लेना चाहिए। यह पहले से ही तय कर लेना चाहिए कि वह किसी शेयर में किस हद तक जोखिम उठाने की क्षमता रहता हैं। मुनाफे की स्थिति में भी आपने टॉरगेट को पहले से ही तय करना चाहिए।
इसके साथ साथ ये जानकारी भी होनी चाहिए की स्टॉक ब्रोकर्स के जरिये इंट्राडे ट्रेडिंग में कितना चार्ज लगता है (Intraday Trading me Kitna Charge Lagta hai)|
3. जानें नए निवेशक बाजार से कब दूर रहें
नए निवेशकों को सबसे ज्यादा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि इंट्राडे ट्रेडिंग कब नहीं करनी है। ट्रेडिंग के दौरान तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं। कब बेचना है, कब खरीदना है और कब ट्रेड नहीं करना है।
नए निवेशक तेजी से पैसा बनाने के चक्कर में जोखिम भरा कदम उठा लेते हैं। बाजार में जब अनियंत्रित उथल-पुथल रहती है तो इस समय नए निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग से बचना चाहिए।
एक शुरूआती ट्रेडर को निम्नलिखित बातो को ध्यान में रखकर ट्रेड करना चाहिए:
नए निवेशकों को हमेशा अपना ज्ञान बढ़ाने के संसाधनों पर फोकस करना चाहिए। यहां हम आपको सबसे बेहतर संसाधन के बारे में जानकारी देंगे।
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यह वेबसाइट नए निवेशकों को शेयर बाजार से जुड़ी शैक्षिक सामग्री प्रदान करती है। जैसे ‘नॉलेज सेंटर’ जो निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग और रणनीतियां बनाने के बारे में मदद करता है।
नए निवेशकों से इंट्राडे ट्रेडिंग में होने वाली गलतियों के बारे में यहां जानने को मिलता है। इसके अलावा ट्रेड पर लगने वाले टैक्स के बारे में बताया गया है। एंजेल वन के ‘नॉलेज सेंटर’ से मिलने वाली जानकारियां आपको साधारण निवेशक से अलग बनाने में मदद करती हैं।
इसके अलावा बाजार में कई इंट्राडे ट्रेडिंग की किताबें (intraday trading books in hindi) है जिनक अध्ययन कर आप ट्रेड करना सीख सकते है।
एंजल वन की वेबसाइट पर जाएं और इंट्राडे ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली और तकनीकों की जानकारी करें। यह सब आपको ‘नॉलेज सेंटर’ में मिलेगा। जब आप आप सभी ऑर्डर को समझ लेते हैं, तो आसानी से स्टॉप लॉस की गणना कर सकते हैं, रणनीतियां बना सकते हैं। यही ज्ञान ही शेयर बाजार में आपकी सफलता की सीढ़ी है।
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