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]]>आइये जानते है!
किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले ज़रूरी है उसकी जानकारी होना। Wipro की बात करें तो इस कंपनी की स्थापना 1945 में हुई थी और 167 देशो में ये कंपनी टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग सर्विस प्रदान करती है। आज के समय में कंपनी का कुल रेवेन्यू 11 बिलियन डॉलर है।
कंपनी के शेयर NSE और BSE (Difference between NSE and BSE in Hindi) में लिस्टेड है और वर्तमान में कंपनी का शेयर प्राइस 382 रुपए है।
अब बात करते है कि इस कंपनी का शेयर कैसे ख़रीदे?
शेयर्स खरीदने (Share Kharidne Ka Tarika) के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट (Demat vs Trading Account in Hindi) की आवश्यकता होती है। डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के लिए निम्नलिखित कागजात की आवश्यकता होती है।
इन सभी कागजात से डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट आसानी से खोल सकते हैं और ट्रेडिंग के लिए किसी भी लिस्टेड कंपनी के शेयर्स खरीद सकते हैं।
हां लेकिन सही कीमत पर शेयर खरीदने के लिए और ज़्यादा से ज़्यादा रिटर्न प्राप्त करने के लिए Wipro कंपनी की मौजूदा स्थिति और मौलिक विश्लेषण (Fundamental Analysis of Stocks in Hindi) करना न भूले।
यहाँ पर कुछ ज़रूरी डाटा प्रदान किया गया है, जिससे आप कंपनी की वित्तीय स्थिति को जान सकते है:
Wipro मार्केट कैप – 1,99,79,364.46
Wipro P/E रेश्यो – 17.09
Total शेयर्स – 5,22,19,98,029
Share प्राइस – 382.
ब्रोकिंग एप जैसे की Groww (Groww App in Hindi) या अन्य स्टॉक ब्रोकर एप से आप डीमैट खाता खोलने (Demat Account Kaise Khole) के बाद शेयर खरीद सकते है। ग्रो एप से विप्रो के शेयर्स खरीदने की प्रक्रिया इस प्रकार है।
ट्रेडर्स स्टॉक ब्रोकर के ट्रेडिंग प्लेटफार्म से Wipro के शेयर्स आसानी से खरीद सकते हैं। शेयर्स खरीदने के लिए ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट की आवश्यकता होती है। सही और पूरी जानकारी के साथ ही किसी कंपनी के शेयर ख़रीदे और साथ में स्टॉक ब्रोकर की विश्वसनीयता का भी ध्यान रखे।
निवेश के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अगर आप इच्छुक है तो निचे दिए गए फॉर्म को भरे और हमारी टीम की सहायता से फ्री में डीमैट अकाउंट खोलें |
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इन सभी कम्पनीज में निवेशकों की पसंदीदा कम्पनीज और उनके शेयर प्राइस कुछ इस प्रकार है
S. NO. | Tata स्टॉक Name | Tata स्टॉक Price |
|
TCS | 3391 Rs. |
|
TATA STEEL | 119 Rs. |
|
TATA MOTOR | 648 Rs. |
|
Tata Chemicals | 965 Rs. |
|
Tata Power | 251 Rs. |
|
Indian Hotels | 400 Rs. |
|
TItan | 3275 Rs. |
|
Air India | 55.70 Rs. |
अब टाटा ग्रुप के कम्पनीज के शेयर्स खरीदने के लिए शेयर मार्केट में डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है, डीमैट अकाउंट (Demat Account in Hindi) में शेयर्स रख सकते हैं और ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account Meaning in Hindi) में शेयर्स की खरीद सकते हैं।
स्टॉक ब्रोकर से डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खोलने के लिए डाक्यूमेंट्स इस प्रकार हैं।
अकाउंट खोलने के बाद आप स्टॉक ब्रोकर की एप में लॉगिन करें और उसके बाद निम्नलिखित चरणों का पालन कर Tata ke share kharide.
यहाँ पर हमने Groww app (Groww app in Hindi) का उदाहरण लिया है, सभी स्टॉक ब्रोकर की एप में ये प्रक्रिया लगभग एक सामान होती है:
निष्कर्ष
डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करने के बाद शेयर्स खरीदने का तरीका (Share Kharidne ka Tareeka) काफी आसान है। आप किसी भी ब्रोकर की एप से आसानी से टाटा कंपनी के शेयर्स खरीद सकते हैं।
यहाँ पर ध्यान रहे की अगर आप लम्बे समय के लिए शेयर को खरीद रहे है तो कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis in Hindi) ज़रूर करें और वही शार्ट टर्म के लिए टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis of Stocks in Hindi) कर शेयर को खरीद सकते है।
अगर आप भी निवेश की दुनिया में नए हैं तो हमारी टीम आपको फ्री में डीमैट अकाउंट खोलने में मदद कर सकती है | इसके लिए बस आपको नीचे दिए हुए फॉर्म को भरना होगा | उसके बाद हमारी टीम आपसे जल्द ही संपर्क करेगी |
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Groww में ऑप्शन ट्रेडिंग करने के लिए एक ट्रेडर को डीमैट खाता (Demat Account in Hindi) के साथ F&O सेगमेंट को भी एक्टिवेट करना होता है।
इसके लिए आपको KYC दस्तावेज़ों के साथ-साथ इनकम स्टेटमेंट और ITR भी अपलोड करनी होती है।
सेगमेंट एक्टिव होने के बाद आप आसानी से Groww app me option trading कर सकते है।
अपने ग्रो अकाउंट में लॉगिन ID से लॉगिन करें, Explore ऑप्शन पर क्लिक करें।
ऊपर बताए गए स्टेप्स को फॉलो करके ग्रो एप से आसानी से ऑप्शन ट्रेडिंग कर सकते हैं।
ग्रो ऍप में ऑप्शन ट्रेडिंग खरीदने और बेचने के लिए ब्रोकरेज देना पड़ता है। ग्रो एप में ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए चार्जेज (Option Trading Charges in Hindi) का भुगतान करना पड़ता है।
ग्रो एप ऑप्शन ट्रेडिंग ब्रोकरेज चार्जेज | |
इक्विटी ऑप्शन | करेंसी ऑप्शन |
20 ₹ प्रत्येक आर्डर पर | 20 ₹ प्रत्येक आर्डर पर |
ऑप्शन ट्रेडिंग काफी प्रचिलित है लेकिन एक शुरूआती ट्रेडर के लिए बड़े नुकसान का कारण भी बन सकती है। Groww काफी आसान user interface प्रदान करता है जिससे कोई भी ट्रेडर आसानी से ऑप्शन ट्रेड कर सकता है, लेकिन नुकसान से बचने के लिए ज़रूरी है कि सही जानकारी और समझ के साथ ही ऑप्शन में पैसा लगाए।
हमें उम्मीद है की आपको पूरी तरह समझ आया होगा कि ग्रो में ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करते है और इसमें कितना चार्ज लगता है |
अगर आप निवेश की दुनिया में शामिल होना चाहते हैं तो आज ही अपना डीमैट अकाउंट खोलें | ऐसा करने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को भरें | हमारी टीम जल्द ही आपसे संपर्क करेगी और इस सन्दर्भ में आपकी मदद करेगी |
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ग्रो एप से निम्नलिखित विकल्प में निवेश कर सकते हैं।
नीचे कुछ स्टेप्स बताये गए हैं जिससे ग्रो एप से शेयर्स में आसानी से निवेश कर सकते हैं।
ग्रो एप से आसानी से म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds in Hindi) में भी निवेश कर सकते हैं।
नीचे कुछ स्टेप्स बताए गए हैं जिससे ग्रो एप से म्यूच्यूअल फंड्स में आसानी से निवेश कर सकते हैं।
ग्रो एप से फिक्स्ड डिपाजिट में भी आसानी से निवेश कर सकते हैं।
ग्रो एप निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच काफी पॉपुलर है | इस पोस्ट में आपने जाना कि ग्रो ऐप में कैसे निवेश करें | ग्रो एप से आसानी से फिक्स्ड डिपाजिट, शेयर्स, म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं।
इन सभी विकल्पों को चुनने से पहले ज़रूरी है कि आप सही तरह से कंपनी और प्रोडक्ट का विश्लेषण करें और उसके बाद उसमे इन्वेस्ट करें।
अगर आप निवेश की दुनिया में शामिल होना चाहते हैं तो आज ही अपना डीमैट अकाउंट खोलें | ऐसा करने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को भरें | हमारी टीम जल्द ही आपसे संपर्क करेगी और इस सन्दर्भ में आपकी मदद करेगी |
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ग्रो एप से पैसे निकालने के लिए कुछ आसान से स्टेप्स का अनुसरण करना पड़ता है, जिससे ग्रो एप वॉलेट का पैसा आसानी से बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है।
ग्रो एप से शेयर मार्केट (Share Market in Hindi), SIP, म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Funds in Hindi), डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं, अलग – अलग निवेश के विकल्प में निवेश किए गए पैसों को निकालने की प्रोसेस अलग है।
अब आपने किसी शेयर में कुछ समय पहले निवेश किया था और उसमे अच्छा-ख़ासा मुनाफा भी कमा लिया, लेकिन अब इन पैसो को कैसे निकालें, आइये जानते है।
ग्रो एप वालेट में पैसे प्राप्त करने के बाद आसानी से बैंक अकाउंट में प्राप्त कर सकते हैं, ग्रो एप (Groww app in Hindi) निवेश के जरिए पैसे कमाने के अलावा रेफरल से भी पैसा कमाने का विकल्प प्रदान करता है, रेफरल से कमाए गए पैसे ग्रो एप वॉलेट में आता है, जिसे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
ग्रो एप वॉलेट से बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए वालेट में कम से कम 100 रुपये होने चाहिए।
ट्रेडर्स और निवेशक पैसे कमाने के लिए शेयर्स के अलावा अन्य सेगमेंट जैसे म्यूचयल फण्ड, फिक्स्ड डिपाजिट, SIP (SIP Meaning in Hindi), डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं।
शेयर्स में निवेश किए गए पैसे के अलावा अलग-अलग निवेश के ऑप्शन से पैसे निकालने की प्रोसेस लगभग समान है। ट्रेडर्स और निवेशक अपने निवेश किये गए धन को वापस ग्रो एप वालेट में आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
अनुभवी ट्रेडर्स शेयर मार्केट में ज्यादा लाभ कमाते हैं, अनुभवी ट्रेडर्स के पास सारी जानकारी जैसे शेयर्स की खरीद बिक्री, शेयर मार्केट में निवेश किए गए पैसे कैसे निकालें के बारे में पूरी जानकारी होती है।
Groww एप से आप कभी भी पैसे निकाल सकते है हां लेकिन न्यूनतम राशि 100 रुपये की होनी चाहिए।
अगर आपको निवेश करने के सफर में पहला कदम उठाना है तो इसके लिए आपको डीमैट अकाउंट की जरूरत होगी | हमारी टीम इस सन्दर्भ में आपकी सहायता कर सकती है | उसके लिए बस आपको निचे दिए गए फॉर्म को भरने की जरूरत है |
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BO ID का फुल फॉर्म बेनेफिशियल ओनर इडेंटीफिकेशन नंबर (Beneficial Owner Identification Number) है, BO ID 16 अंकों का होता है, पहले की 8 अंक DP ID होती है और अंतिम की 8 अंक ग्रो एप की Client ID होती है। BO ID में डीमैट नंबर भी होता है जो सीडीएसएल (CDSL) में पंजीकृत नंबर भी।
उदाहरण के तौर पर,
1 | 3 | 0 | 1 | 0 | 8 | 0 | 0 | 1 | 5 | 5 | 3 | 6 | 8 | 9 | 1 |
BO ID ( Beneficial Owner Identification Number) – 1301080015536891 (16 अंक )
DP ID – 13010800 ( पहले का 8 अंक)
Client ID – 15536891 ( अंत के 8 अंक)
अब क्योंकि हर एक निवेशक का डीमैट अकाउंट (Demat Account in Hindi) नंबर अलग-अलग होता है इसलिए BO ID भी अलग होती है।
कुछ आसान से स्टेप्स का अनुसरण करने के बाद आसानी से ग्रो एप में BO ID प्राप्त कर सकते हैं।
सारे स्टेप्स फॉलो करने के बाद यूनिक BO ID न. प्राप्त कर सकते हैं। BO ID No. के साथ DP ID यानी डिपॉजिटरी प्रतिभागी (Depository Participant in Hindi) ID और Client ID न. भी प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आपको अपने Groww डीमैट अकाउंट (Groww Demat Account in Hindi) से जुड़ी किसी भी शिकायत या जानकारी लेनी होती है तो उसके लिए BO ID की जानकारी होना आवश्यक है। ऊपर दिए गए तरीके से आप पता लगा सकते है की आपकी Groww Boid kya hai |
अगर आप अपने ID भूल जाते है तो आसानी से एप में देख सकते है या कस्टमर केयर को फ़ोन कर अपने रजिस्टर्ड नंबर की जानकारी दे प्राप्त कर सकते है।
अगर आप भी निवेश की दुनिया में प्रवेश करना चाहते है तो जल्द से जल्द निचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण दें | हमारी टीम आपका डीमैट अकाउंट खोलने में पूरी मदद करेगी |
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]]>अब वैसे तो आज के डिजिटल समय में शेयर खरीदना और बेचना बहुत ही आसान हो गया है लेकिन एक ट्रेडिंग प्लेटफार्म को पूरी तरह से समझकर ट्रेड करना काफी ज़रूरी है।
तो आइये जानते है की आप Groww ट्रेडिंग एप (Groww App in Hindi) में शेयर की खरीदारी कैसे कर सकते है।
Groww एक डिस्काउंट ब्रोकर है जो NSE और BSE (Difference Between BSE and NSE in Hindi) के साथ रजिस्टर्ड है और इसके साथ आपको स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कम्पनीज के शेयर खरीदने और बेचने के लिए प्लेटफार्म प्रदान करता है।
इस प्लेटफार्म का उपयोग कर आप मार्केट में इंट्राडे, डिलीवरी और साथ ही साथ ऑप्शन में भी ट्रेड कर सकते है। अब शेयर खरीदने के लिए सबसे पहले आपको Groww के साथ एक डीमैट खाता (Demat Account in Hindi) खोलना होगा।
डीमैट खाता खोलने के बाद आप लॉगिन कर शेयर को खरीद और बेच सकते है। यदि आप ग्रो एप्प के जरिये किसी कंपनी जैसे टाटा के शेयर खरीदने (Tata ke share kaise kharide) के बारे में सोच रहे है तो इसकी प्रक्रिया बहुत आसान है |
आइये इसे पूरे विस्तार में जाने।
डीमैट खाता खोलने के बाद आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर ग्रो ऐप से शेयर खरीद सकते है:
अपने आर्डर की जानकारी के लिए ‘Position’ पर क्लिक करें। अगर आपके दर्ज़ वैल्यू पर सेलर होगा तो आर्डर एक्सेक्यूट हो जाएगा अन्यथा आपकी चुनी हुयी वैलिडिटी के अनुसार कैंसिल हो जाएगा।
अब तक आपने जाना कि Groww ऐप में शेयर कैसे खरीदें और कैसे मौलिक विश्लेषण से आप सही शेयर्स का चुनाव कर सकते है | अब बात करते हैं ग्रो ऐप में शेयर खरीदने पर कितना भुगतान करना पड़ता है |
बात करें चार्जेज की Groww में ट्रेड करने की फीस काफी कम है। इंट्राडे और डिलीवरी में न्यूनतम फीस 0.05% है वही अधिकतम ट्रेडिंग भुगतान मात्रा 20 रुपये का है। ग्रो एप के चार्जेज कुछ इस प्रकार हैं:
चार्जेज के प्रकार | चार्ज |
अकाउंट ओपनिंग और AMC चार्जेज | 0 |
इक्विटी ब्रोकरेज | Rs 20 या 0.05 % एक आर्डर के लिए (जो काम हो ) |
फ़्यूचर्स और ऑप्शंस | Rs 20 (प्रति ऑर्डर) |
प्लेज | Rs 0 |
रेगुलेटरी और स्टटूटोरी चार्जेज
इक्विटी | फ़्यूचर्स और ऑप्शंस | |||
इंट्राडे | डिलीवरी | फ़्यूचर्स | ऑप्शंस | |
STT (सिक्योरिटीज ट्रांसक्शन टैक्स) | 0.025% (Buy) |
0.1% (Buy/Sell) |
0.0125% (Sell) |
0.0625% (Buy) |
स्टाम्प ड्यूटी | 0.003% (Buy) |
0.015% (Buy) |
0.002% (Buy) |
0.003%
(Buy) |
एक्सचेंज ट्रांसक्शन चार्जेज | NSE:0.00325% BSE: 0.00375% (Buy/Sell) |
NSE:0.00325% BSE: 0.00375% (Buy/Sell) |
NSE:0.0019% BSE:0.00% (Buy/Sell) |
NSE:0.05% BSE:0.0375% (Buy/Sell) |
SEBI टर्नओवर चार्ज | 0.0001% (Buy/Sell) |
0.0001% (Buy/Sell) |
0.0001% (Buy/Sell) |
0.0001% (Buy/Sell) |
DP चार्ज | 0 | 13.5 (प्रति कंपनी) | 0 (Buy/Sell) |
0 (Buy/Sell) |
इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड ट्रस्ट चार्ज | NSE:0.0001% (Buy/Sell) |
NSE:0.0001% (Buy/Sell) |
0.0001% (Buy/Sell) |
0.0005% (Buy/Sell) |
शेयर्स मार्केट (Share Market meaning in Hindi) में मुनाफा कमाने के लिए स्टॉक मार्केट की सारी जानकारी होना आवश्यक है। शेयर मार्केट में जानकारी के अभाव में कई बार नुकसान का सामना करना पड़ता है।
इस पोस्ट में ग्रो ऐप से शेयर कैसे खरीदे के विषय पर पूरी जानकारी प्रदान की गयी है, जिससे नए ट्रेडर्स या निवेशक आसानी से शेयर मार्केट में मुनाफा कमा सकते हैं।
शेयर्स खरीदने के लिए एप डाउनलोड करने के बाद जरुरी डाक्यूमेंट्स सत्यापित करने, अकाउंट एक्टिवट होने और ग्रो एप वॉलेट में पैसे ऐड करने के बाद पोस्ट में बताए गए जानकारी से आसानी से ग्रो एप में निवेश (Groww App Me Invest Kaise Kare) कर सकते हैं।
अक्सर निवेशकों और ट्रेडर्स के मन में सवाल आता है की क्या ग्रो एप्प सुरक्षित है या नहीं (Groww App Safe or Not in Hindi)| तो हम आपको बता दे की ग्रो अप्प का इस्तेमाल बिलकुल सुरक्षित है |
तो देर किस बात की | आज ही अपने डीमैट अकाउंट खोलें और कूद पड़ें स्टॉक मार्किट की दुनिया में | नीचे दिए गए फॉर्म को बाहर कर आप हमारी टीम की मदद से जल्द से जल्द अपना डीमैट खाता चालू कर सकते है |
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]]>स्टॉक मार्किट में आपने वोलैटिलिटी के बारे में तो सुना होगा, बाज़ार के तेजी से ऊपर और नीचे जाने को वोलैटिलिटी से पर्दर्शित किया जाता है।
ऑप्शन चैने के अंदर कॉल और पुट (call and put option in Hindi) दोनों साइड में IV डाटा दिया होता है, हर एक स्ट्राइक प्राइस का अलग-अलग IV होता है।
ऊपर दर्शाए गए चित्र में हम देख पा रहे है की Volume और LTP (LTP Meaning in Stock Market in Hindi) के कोलम के बीच में IV का कोलम दिया गया है।
IV की मदद से ये पता नहीं किया जा सकता की बाज़ार किस तरफ को जाएगा, पर ऊपर या नीचे कितनी रेंज तक जा सकता है इस बात का पता लगाया जा सकता है।
इम्प्लाइड वोलैटिलिटी ऑप्शन चैन में ट्रेडर को उसकी चुनी हुई स्ट्राइक प्राइस (Strike Price in Hindi) पर जो प्रीमियम है उसके ऊपर जाने और नीचे जाने की गति को बताता है। इम्प्लाइड वोलैटिलिटी प्राइस के इतिहास यानी की उसके हिस्टोरिकल डाटा की और वर्तमान के डाटा की गणना करके निकाली जाती है।
IV की मदद से बाज़ार के पर और नीचे जाने की रेंज का पता लगाया जा सकता है पर ये बिलकुल पुख्ता नहीं होता की इतनी ही रेंज होगी। इससे एक नजरिया बनाया जा सकता है। और उस नजरिये को आधार बनाकर ऑप्शन में ट्रेडिंग की जा सकती है।
मान लो की किसी स्टॉक या ऑप्शन का प्राइस 100 रुपये है और उसकी वोलैटिलिटी 10 है तो वो स्टॉक
100 से लेकर 110 रुपये के बीच में ऊपर की तरफ ट्रेड कर सकता है और 100 से 90 रुपये के बीच नीचे की तरफ ट्रेड कर सकता है। यानी की 90 रुपये से लेकर 110 रुपये के बीच में प्राइस मूव कर सकता है।
इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में एक रेंज होती है जिससे पता चलता है की बाज़ार कितना ऊपर और कितना नीचे जा सकता है जिसे High IV और Low IV से दर्शाया जाता है। इसलिए ऑप्शन चैन में IV का उपयोग कर इस बात का भी पता लगाया जा सकता है की अभी ऑप्शन के प्रीमियम महंगे है या सस्ते।
High IV: हाई इम्प्लाइड वोलैटिलिटी से मतलब है की बाज़ार अपने करंट प्राइस से कितना ऊपर जा सकता है। यानी की अगर करेंट मार्केट प्राइस अभी 100 रूपये है और हाई इम्प्लाइड वोलैटिलिटी 5 रुपये है तो अगर बाज़ार ऊपर की तरफ जाएगा तो 100+5 = 105 तक जा सकता है।
जिस स्ट्राइक प्राइस की इम्प्लाइड वोलैटिलिटी हाई होती है उसके प्रीमियम हाई होते है और उसके प्रीमियम और ज्यादा हाई होने की संभावना कम ही होती है, यहाँ सेलर यानी की ऑप्शन राइटर मोके का फायदा उठाकर ऑप्शन को राईट करते है और जब प्रीमियम गिरता है तो वो मोटा मुनाफा कमाते है।
Low IV: लो इम्प्लाइड वोलैटिलिटी से मतलब है की बाज़ार अपने करंट प्राइस से कितना नीचे जा सकता है।
यानी की अगर करेंट मार्केट प्राइस अभी 100 रूपये है और लो इम्प्लाइड वोलैटिलिटी 7 रुपये है तो अगर बाज़ार नीचे (बियरिश) की तरफ जाएगा तो 100-7 = 93 रुपये तक जा सकता है।
लो इम्प्लाइड वोलैटिलिटी सेलर्स से ज्यादा बायर्स को फायदा पहुचाती है, क्योंकि यहाँ प्रीमियम सस्ते होते है जिन्हें बायर्स पसंद करते है और जैसे-जैसे इम्प्लाइड वोलैटिलिटी बढ़ेगी उसके साथ-साथ प्रीमियम भी बढेगा तो बायर्स को फायदा होगा।
इम्प्लाइड वोलैटिलिटी एक मैथमेटिकल फोर्मुला (सूत्र) की मदद से निकाली जाती है। ऑप्शन चैन में IV का उपयोग करके ट्रेडर इन तीन चीजों का पता लगा सकता है :
आजकल इम्प्लाइड वोलैटिलिटी हर प्लेटफार्म या सॉफ्टवेयर में खुदबखुद दी होती है। जैसे की NSE की ऑप्शन चैन में दी होती है।
एक ऑप्शन सेलर के नजरिये से देखा जाए तो वो यही तय करके ऑप्शन को सेल करता है की एक्सपायरी आने पर उसके ऑप्शन में कोई भी प्रीमियम नहीं बचेगा यानी की वो OTM (Out The Money) होगा जो की ITM (in The Money) नहीं हो पाएगा और जीरो हो जाएगा और उसका सारा प्रीमियम ऑप्शन सेलर को मिल जाएगा।
एक ऑप्शन सेलर का प्रॉफिट ऑप्शन बायर के द्वारा भुगतान किया गया प्रीमियम ही तो होता है। एक्सपायरी आने पर अगर ऑप्शन बायर का प्रीमियम ITM (इन द मनी) ना हुआ तो उसकी वैल्यू अपने आप जीरो हो जाएगी और वो प्रीमियम ऑप्शन सेलर का हो जाएगा।
हालांकि ऑप्शन के भाव को कम या ज्यादा होने में ऑप्शन ग्रीक जैसे की वेगा, थीटा, गामा और रो भी अपनी भूमिका निभाते है।
जिस स्टॉक या इंडेक्स की वोलैटिलिटी लो होती है उन स्टॉक्स के प्रीमियम सस्ते होते है और जिनकी वोलैटिलिटी ज्यादा होती है उनके प्रीमियम महंगे होते है।
ऑप्शन चैन में इम्प्लाइड वोलैटिलिटी के बारे में जाना की बाज़ार के उतार और चढाव में इसका कितना और किस प्रकार से योगदान है और ये ऑप्शन के प्रीमियम पर कितना असर डालती है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में IV के साथ साथ कई अन्य जरूरी चीजें भी होती है जिनके बारे में एक ट्रेडर को जानना चाहिए ताकि वो ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading Basics in Hindi) को अच्छे से समझ सके और ट्रेडिंग में आने वाले मोकों को समझकर उनसे मुनाफा निकाल सके।
IV के अलावा लॉन्ग बिल्डउप, शोर्ट बिल्डउप, शोर्ट कवरिंग जैसी चीजों के बारे में भी आपको पता होना चाहिए, इनकी मदद से भी बाज़ार में आने वाले उतार चढ़ाव का पता चलता है।
ऑप्शन चैन के फंडामेंटल डाटा और टेक्नीकल अनालिसिस को मिलाकर ट्रेड के लिए निर्णय लेने में सुगमता होती है। और ट्रेड के गलत होने का जोखिम कम होता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग में टेक्नीकल अनालिसिस का और ऑप्शन चैन जैसी टूल्स का खूब इस्तेमाल किया जाता है, एक ट्रेडर टेक्निकल एनालिसिस को अच्छे से सीखकर अच्छा मुनाफा कमा सकता है।
टेक्नीकल अनालिसिस सीखने के लिए आप नीचे दिए गए फॉर्म में अपना जरूरी विवरण भरिये, हमारी टीम आपसे संपर्क करके आपको इसमें मदद करेगी।
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]]>The post इंट्राडे के लिए स्टॉक कैसे चुने? appeared first on अ डिजिटल ब्लॉगर.
]]>वैसे तो शेयर मार्केट में हज़ारो कम्पनीज है लेकिन उनमे से कुछ ही कम्पनीज के शेयर में इंट्राडे ट्रेडिंग कर मुनाफा कमाया जा सकता है तो आइये जाने ऐसे कौनसे कारक है जो इंट्राडे के लिए शेयर चुनने के लिए महत्वपूर्ण है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयर का चुनाव करने के लिए कुछ पहलुओं को ध्यान में रखना होता है जैसे की :
किसी भी शेयर को इंट्राडे ट्रेडिंग में खरीदने से पहले इन चारों पहलुओं पर सही होना जरूरी है, आइये इन चारो पहलूओं को विस्तार में समझते है:
इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading Meaning in Hindi) यानी की आज ही ट्रेड ली और आज ही मार्केट के बंद होने से पहले अपनी ट्रेड को क्लोज कर दिया।
अब इंट्राडे में लिक्विडिटी की जरूरत कुछ इस तरह है की ट्रेड लेने के लिए शेयर की पर्याप्त क्वांटिटी होना जरूरी होता है|अगर उसमें ज्यादा क्वांटिटी में शेयर ट्रेड हो रहे होंगे तभी तो ट्रेडर सोदे में ज़्यादा मुनाफा कमा पायेगा।
Liquidity की जानकारी वॉल्यूम (What is Volume in Share Market in Hindi) से ली जाती है जो ये संकेत देता है कि कितने ट्रेडर मार्केट वैल्यू पर शेयर को बेचने और खरीदने में इच्छुक है।
जितने ज़्यादा ट्रेडर की वॉल्यूम उतना मुनाफा कमाने का अवसर।
उदाहरण के लिए, मान लो की अगर आपने किसी शेयर को 1000 रुपये के भाव पर खरीद लिया लेकिन उसमे लिक्विडिटी कम है तो ऐसे में स्क्वायर ऑफ करते समय आपको कम सेलर होने की वजह से सही सौदा नहीं मिलेगा और कई बार नुक्सान के साथ आपको अपनी पोजीशन से बाहर निकलना होगा।
इसके साथ वॉल्यूम की जानकारी से हम ट्रेंड को भी जान सकते है:
वॉल्यूम | प्राइस | ट्रेंड |
Increases | Increases | Bullish |
Increases | Decreases | Bearish |
Decreases | Increases | Bullish Trend will end soon |
Decreases | Decreases | Bearish Trend will end soon |
इंट्राडे के लिए बेस्ट स्टॉक चुनने के लिए लिक्विडिटी के बाद वोलैटिलिटी पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होता है। वोलैटिलिटी यानी की अस्थिरता, अगर किसी शेयर में अस्थिरता रहेगी तभी तो वो दिन के दौरान ऊपर नीचे जाएगा और ट्रेडर उस ऊपर नीचे जाने की स्थिति में सोदा लेकर मुनाफा बना पाएगा।
शेयर की वोलैटिलिटी को उसके ऊपर नीचे होने की दशा में मापा जाता है, जितनी अच्छी वोलैटिलिटी उतने अच्छे सोदा लेने के मौके।
आइये इसे एक उदाहरण से समझते है।
मान लो की किसी शेयर की कीमत ₹100 चल रही है और उसकी volatility 1% है इसका मतलब वह ज़्यादा से ज़्यादा 101 तक ऊपर जा सकता है और 99 की वैल्यू तक नीचे गिर सकता है।
ऐसे में अगर आपने सपोर्ट पर इस शेयर को खरीद भी लिया तो ज़्यादा मुनाफा नहीं कमा पाओगे।
वही अगर शेयर में 4% की वोलैटिलिटी हो तो वह मुनाफा कमाने का अवसर भी है लेकिन उसके साथ कई तरह के जोखिम भी है।
मार्केट में वोलैटिलिटी की जानकारी के लिए बोलिंजर बैंड इंडिकेटर (bollinger band indicator in hindi) का उपयोग कर सकते है। यह शेयर मार्किट इंडिकेटर (Share Market Indicator in Hindi) की सूची में वोलैटिलिटी इंडिकेटर में विभाजित है |
रेंज बाउंड मार्किट या कंसोलिडेशन मार्किट: इसमें भाव एक छोटी रेंज में ऊपर निचे होता रहता है और ट्रेडर ज्यादातर इसके झांसे में फंसकर अपनी पूंजी गँवा देता है।
ऊपर दर्शाए चार्ट में देखिये की एक रेंज बनी हुई है और भाव बार बार उस रेंज में ऊपर निचे जा रहा है, अब नए और अनुभवहीन ट्रेडर इस रेंज में सौदा तो ले लेते है और उनका टारगेट नहीं आ पाता।
कारण होता है की शेयर ट्रेंड में नहीं होता और जब भी वो सौदा लेता है तो उसको आगे ग्रोथ मिलने की बजाए रेंज का ऊपरी बैंड मिल जाता है जो की शेयर को वापस निचे धकेल देता है।
जब तक बाज़ार इस रेंज से निकलकर ट्रेंड नहीं पकड़ लेता तब तक ट्रेड करना जानबूझकर जोखिम उठाना कहलाएगा।
ट्रेंड के सहारे ट्रेडिंग: इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेंड की बहुत ज्यादा आवश्यकता होती है। ट्रेंड से ट्रेडर ये तय कर पाता है की खरीददारी करनी है या बिकवाली करनी है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए स्टॉक का चयन करने के लिए ये एक जरूरी पहलु है |
ऊपर दर्शाये चार्ट में एक घंटे का टाइम फ्रेम और उसमें तेजी यानी की बुलिश मार्केट दिखाई दे रही है। इसमें भाव मूविंग एवरेज के साथ साथ मूमेंटम करता हुआ दिखाई दे रहा है। अब देखने वाली बात ये है की एक घंटा जो की एक बड़ा टाइमफ्रेम है तो छोटे टाइम फ्रेम में मूमेंटम के आधार पर ट्रेड करना आसान होता है।
दूसरी तरफ 15 मिनट के टाइमफ्रेम वाले चार्ट में देखा जा सकता है की एक घंटे की मूविंग एवरेज (Moving Average in Hindi) पर जब भाव आता है तो वहां से दोबारा मूमेंटम के साथ ऊपर चला जाता है, एक ट्रेडर के लिए इस तरह ट्रेंड के साथ ट्रेड करना आसान होता है और मुनाफा निकालना भी आसान होता है।
क्योंकि ज्यादातर टाइम शेयर का भाव अपने ट्रेंड के अनुरूप ही जाता है तो अपट्रेंड में बुलिश सौदा लेने की बजाए बियरीश सौदा लेना अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।
ट्रेंड के साथ चलने में गलत होने की संभावना कम हो जाएगी।
मूमेंटम यानी की तेजी की स्पीड यानी गति, किसी भी चीज की गति को मूमेंटम के सहारे समझा जा सकता है। जैसे की गाडी जब चलती हुई धीरे धीरे और तेज गति के साथ चलने लगती है।
तो उसे कहा जाएगा की गाडी ने मूमेंटम पकड़ ली है। बिलकुल उसी प्रकार शेयर जब बुलिश ट्रेंड में चल रहा हो और जब वो बुलिश ट्रेंड में ही और तेज गति पकड़ ले तो उसे कहेंगे की शेयर ने मूमेंटम पकड़ ली है।
टेक्निकल अनालिसिस के सहारे उस मूमेंटम को समझा जा सकता है और ट्रेड भी किया जा सकता है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में टेक्निकल अनालिसिस का ही उपयोग होता है, क्योंकि इंट्राडे ट्रेडिंग की समय सीमा केवल एक ही दिन की होती है तो वो फंडामेंटल अनालिसिस (Fundamental Analysis in Hindi) या किसी अन्य प्रकार के अनालिसिस की मदद से कर पाना संभव नहीं होता।
हमने लिक्विडिटी (तरलता), वोलैटिलिटी (अस्थिरता) और ट्रेंड के बारे में समझ लिया, जब कोई शेयर इन तीनों चीजों के आधार पर सही हो और ट्रेड करने लायक हो तो अंतिम चरण बचता है टेक्निकल अनालिसिस, जो ट्रेडर को बताएगा की कहाँ पर सोदा लेना है और कहाँ पर बेचना है।
अब जो भी शेयर ट्रेडर के टेक्निकल अनालिसिस के आधार पर खरीदने लायक हो उन्हें खरीदा जा सकता है, इसके लिए कुछ कैंडलस्टिक पैटर्न (Candlestick Pattern in Hindi), चार्ट पैटर्न, इंडिकेटर और रणनीतियां है जिनकी मदद ली जा सकती है।
ट्रेडर को टेक्निकल अनालिसिस के जरिये इंट्राडे में अच्छी लिक्विडिटी, अच्छी खासी वोलैटिलिटी, और ट्रेडिंग शेयर को ही खरीदना चाहिए।
इस पोस्ट में आपने जाना की इंट्राडे के लिए स्टॉक कैसे चुने | आपको बता दें की इंट्राडे ट्रेड करना जितना मुश्किल है उतना ही आसान भी है बस फर्क है प्लानिंग करने और बिना प्लानिंग के ही इंट्राडे ट्रेडिंग करने की कोशिश करना।
अगर प्लानिंग के साथ इंट्राडे करेंगे तो आप पहले बड़े टाइमफ्रेम के सहारे ट्रेंडिंग स्टॉक्स को खोजेंगे उसके बाद उन खोजे हुए स्टॉक्स में टेक्निकल अनैलिसिस की मदद से सौदा बनाएँगे। ऐसा करने पर मुनाफा कमाने की संभावनाएं बढ़ जाएगी।
टेक्निकल अनालिसिस, ये शब्द जितना पुराना है उतना ही प्रभावशाली है। एक ट्रेडर को अच्छी तरह सोच विचार करने के उपरान्त सही पहलुओं के अनुरूप इंट्राडे में स्टॉक चुनने के बाद टेक्निकल अनालिसिस की मदद से शेयर को खरीदना चाहिए।
अगर आप शेयर मार्किट में इंट्राडे ट्रेडिंग के जरिये पैसा कमाना चाहते है तो नीचे दिए गए फॉर्म को भरिये | हमारी टीम जल्द ही आपसे संपर्क करके आपका डीमैट अकाउंट खोलने में मदद करेगी |
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]]>ROC इंडिकेटर की मदद से ट्रेंड की गति को समझा जा सकता है, की क्या ट्रेंड गति यानी की स्पीड पकड़ रहा है या ट्रेंड की स्पीड कम हो गई है या वो अपनी स्पीड को उसी स्थिति में बनाए हुए है। यानी की ये इंडिकेटर मूमेंटम बताएगा।
क्योंकि ये इंडिकेटर मूमेंटम को दर्शाता है तो शेयर मार्किट इंडिकेटर (Share Market Indicator in Hindi) की सूची में इसे मूमेंटम टेक्निकल इंडिकेटर भी कहते है।
आइये समझते है की आर ओ सी इंडिकेटर को स्टॉक मार्केट में इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
ROC इंडिकेटर को जीरो से शुरू किया जाता है,
रेट ऑफ़ चेंज संकेतक का गणित:
ROC = [(क्लोज – क्लोज n समय पहले) / (क्लोज n समय पहले)] * 100
इस गणना के जरिये ही ROC ट्रेंड का हिसाब किताब बता पाता है।
अगर भाव बढ़ा है तो ROC की वैल्यू पॉजिटिव होगी और अगर भाव गिरा है तो ROC की वैल्यू नेगेटिव होगी।
ROC इंडिकेटर को अपर बाउंड और लोअर बाउंड के आधार पर देखा जाता है, इसकी वैल्यू नीचे गिरवाट में -100 तक जा सकती है पर इसके नीचे नहीं जा सकती। और इसके विपरीत अपर बाउंड में इसकी कोई लिमिट नहीं होती।
ROC पीरियड के आधार पर चलता है, यानी की पिछले कितने दिनों में क्या हुआ। इसलिए इसमें पीरियड को बदला भी जा सकता है और ROC की वैल्यू निकाली जा सकती है।
अगर आप पिछले 20 दिनों के आधार पर ROC की वैल्यू निकालना चाहते है तो आप इंडिकेटर की सेटिंग में पीरियड को बदलकर 21 दिन कर सकते है और अगर आप 7 दिनों के पीरियड को समझना चाहते है तो आप इसमें सेटिंग बदलकर 7 दिन कर सकते हो।
ऊपर दर्शाए गए चार्ट में आप देख सकते है की ROC इंडिकेटर लगाया गया है और उसमें 21 दिनों के ROC पीरियड की सेटिंग की गई है।
कैंडलस्टिक चार्ट (Candlestick Charts in Hindi) में ये भी दर्शाया गया है की ROC की वैल्यू अपनी जीरो लाइन से ऊपर उठ रही है | जब भी ROC की वैल्यू जीरो लाइन से ऊपर उठती है तब ट्रेंड को पोजिटिव माना जाता है और जब भी लाइन आगे बढ़ना बंद कर देती है और एक रेंज में चलती रहती है तब पता चलता है की ट्रेंड अब स्लो हो गया है।
और जब लाइन जीरो लाइन से नीचे आ जाती है तो पता चलता है तो इसका मतलब होता है की ट्रेंड ने अपनी गति खो दी है और अब वो नेगेटिव ट्रेंड यानी की डाउन ट्रेंड में चल रहा है।
ROC इंडिकेटर की मदद से ट्रेडर को ट्रेड करना काफी आसान होता है, क्योंकि ये इंडिकेटर मूमेंटम बताता है तो ट्रेडर को मूमेंटम देखकर और किसी ट्रेंड कन्फर्म करने वाले इंडिकेटर की मदद से ट्रेड करनी चाहिए।
ऊपर दर्शाए चार्ट में डाउनट्रेंड चलता हुआ दर्शाया गया है और उसके साथ साथ 10 और 20 पीरियड की मूविंग एवरेज (Moving Average in Hindi) दर्शाई गई है|
इसके साथ साथ दोनों मूविंग एवरेज का क्रोसओवर होता हुआ दिखाई दे रहा है और प्राइस उनके ऊपर ट्रेड करना शुरू कर रहा है तब ट्रेंड बदल रहा है, और इसी वक्त ROC इंडिकेटर की लाइन जीरो से ऊपर आती हुई दिखाई दे रही है।
दोनों इंडिकेटर EMA और ROC ट्रेंड के बदलने को पुख्ता कर रहे है। इसे कांफ्लुएंस ट्रेडिंग करना भी कहते है।
ट्रेडिंग करने के लिए टेक्निकल अनालिसिस बहुत जरूरी है और इंडिकेटर ट्रेडर को सही निर्णय लेने में मदद करते है।
ROC Indicator in Hindi के विषय पर ये कहना गलत नहीं होगा की ये संकेतक ट्रेडर को अपने निर्णय को पुख्ता करने में मदद करता है |
इसका प्रयोग करने के साथ साथ अनुभवी ट्रेडर हमेशां से यही सलाह देते है की कांफ्लुएंस पॉइंट्स का इस्तेमाल करो। जिसमें एक से ज्यादा तकनीकों का इस्तेमाल होता है।
हमें उम्मीद है की आपको हमारी ये जानकारी पसंद आयी होगी और आपका स्टॉक मार्किट की तरफ रुझान बढ़ा होगा |
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