Sebi Ka Full Form

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सेबी शेयर बजार में बहुत मत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो शेयर बजार में निवेश करने के तरीके को बेहतर और सुविधाजनक बनता है यदि किसी निवेशक को सेबी के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो सबसे पहले हम आपको बताएंगे की Sebi ka Full Form क्या है।  

विस्तार में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लेख को पूरा पढ़े।


सेबी फुल फॉर्म

सेबी की फुल फॉर्म (Sebi ka Full Formभारतीय सिक्योरिटीज एवं विनिमय बोर्ड है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) भारत में सिक्योरिटीज और कमोडिटी बाजार का नियामक है जो भारत सरकार के स्वामित्व में है।

सेबी ने कुछ शेयर बाजार के नियम निर्धारित करता है जो एक एक ट्रेडर और स्टॉक ब्रोकर को पालन करना होता है। 

यह नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करने वाले निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए भारतीय पूंजी और सिक्योरिटीज बाजार की निगरानी और विनियमन करता है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का मुख्यालय मुंबई में 1988 में भारत सरकार के संकल्प के तहत स्थापित किया गया था। बोर्ड को शेयर बाजार की गतिविधियों के अवलोकन की प्राथमिक भूमिका के साथ पेश किया गया था।

अंत में,  सेबी की स्थापना  31 जनवरी, 1992 को भारतीय सिक्योरिटीज और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के अनुसार वैधानिक निकाय के रूप में लागू हुआ।

अब, आप Sebi Ka Full Form तो समझ गए है, तो आगे बढ़ते है और सेबी का इतिहास के बारे में जानते है।


सेबी का इतिहास (Sebi History in Hindi)

भारतीय सिक्योरिटीज और विनिमय बोर्ड (SEBI) पहली बार 1988 में सिक्योरिटीज  बाजार को विनियमित करने के लिए एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। 

सेबी की स्थापना 12 अप्रैल 1992 को हुआ था।

उसके बाद यह एक स्वायत्त निकाय बन गया और भारतीय संसद द्वारा सेबी अधिनियम 1992 के पारित होने के साथ वैधानिक शक्तियां प्रदान की गईं। सेबी का गठन भारत सरकार के एक प्रस्ताव के तहत भारत में पूंजी बाजार के नियामक के रूप में किया गया था।

सेबी (Sebi Ka Full Form) का मुख्यालय मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में है जिसके  नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रीय में कार्यालय हैं। 

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सेबी के अस्तित्व में आने से पहले कैपिटल इश्यूज का नियंत्रक नियामक प्राधिकरण था; इसे कैपिटल इश्यूज़ (कंट्रोल) अधिनियम, 1947 से अधिकार प्राप्त हुआ।

लेकिन कुछ वर्षों बाद  शेयर बाजार में बढ़ती धोखाधड़ी के कारण ऐसी कंपनी स्थापित करने की आवश्यकता जताई जो ट्रेडर और निवेशकों की शिकायतों को सुनती है।

सेबी एक्ट 1992 (Sebi Act 1992)

भारत सरकार ने सेबी अधिनियम 1992 पारित किया जिसने गैर-वैधानिक सेबी को वैधानिक शक्तियों के साथ स्वायत्त निकाय में बदल दिया।

सेबी को 30 जनवरी 1992 को एक अध्यादेश(Ordinance) के माध्यम से वैधानिक अधिकार दिए गए थे।

सिक्योरिटीज  बाजार को  सुव्यव्स्थित और विकास को बढ़ावा देने वह निवेशकों के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 अप्रैल 1988 को भारतीय सिक्योरिटीज और विनिमय बोर्ड की स्थापना की गई थी।


सेबी के कार्य (Sebi Function in Hindi)

  • निवेशक को प्रोत्साहित करने के लिए: यह निवेशक को शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • ब्रोकर्स और निवेशकों को शिक्षित करने के लिए: यह शेयर बाजार के बारे में ब्रोकर्स और निवेशकों को शिक्षा प्रदान करता है।
  • निवेशकों के हितों की रक्षा: यह निवेशकों के हित को सुरक्षा वह  धोखाधड़ी के जोखिमों को कम करके बेहतर निवेश करने का विकल्प प्रदान करता है। 
  • शेयर और शेयर बाजारों का विकास: सेबी ने भारत में शेयर और शेयर बाजारों के विकास के लिए पहली पहल की है।
  • ब्रोकर्स को लाइसेंस प्रदान करना:  सेबी के पास ब्रोकर को लाइसेंस प्रदान करने की शक्ति है और यदि कोई डिफ़ॉल्ट है तो उसे रद्द कर सकता है।

निष्कर्ष 

यानि Sebi ka Full Form का निष्कर्ष  में  हम कह सकते है, की सेबी वह संस्था है,जो सिक्योरिटीज  बाजार (securities market ) में शयरों के खरीद और बिक्री को नियंत्रित करता है

यह शेयर बाजार की नियामक प्रणाली को मजबूत करता है। यह भारतीय प्रतिभूति बाजार में सशक्तिकरण लाता है जो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर अधिक निवेशकों को आकर्षित करता है।

सेबी एक शक्तिशाली निकाय है जो स्टॉक एक्सचेंजों और पूंजी बाजार में धोखाधड़ी के जोखिमों को कम करता है।

साथ ही यह निवेशकों के विकास और निवेश बेहतर बनाने के लिए उनके हितों की रक्षा करता है


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