Equity Meaning in Hindi

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जब भी आपने टीवी या अखबार में शेयर बाजार को लेकर खबरें पढ़ी या सुनी होगी , तो आपने इक्विटी (Equity Meaning in Hindi)  शब्द के बारे में जरूर सुना होगा।

लेकिन, क्या आपको इक्विटी की शेयर बाजार में भूमिका के बारे में पता है? तो आइए जानें- Equity Meaning in Hindi (इक्विटी क्या होता है)?

कभी भी कोई किसी कंपनी के शेयर खरीदने की बात करता है, तो संभवत वहां इक्विटी शेयर के बारे में बात हो रही है।

आसान शब्दों में कहें तो इक्विटी को शेयर का ही एक प्रकार कहा जाता है।

इस प्रकार, यदि आप शेयर बाजार में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो इक्विटी को समझना बहुत जरुरी हो जाता है।

इस रिव्यु पोस्ट में, इक्विटी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।

इसमें इक्विटी शेयर, इक्विटी डिलीवरी, इक्विटी और शेयर के बीच अंतर, उदाहरण, और प्रकार सहित सभी विषयों के बारे में बताया गया है

आइये, अब इक्विटी को विस्तार से समझते हैं, जिसमें सबसे पहले Equity Meaning in Hindi के बारे में बात करेंगे।


इक्विटी क्या है 

परिभाषा – “इक्विटी मूल रूप से कंपनी में एक स्वामित्व यानी एक हिस्सेदारी को दर्शाता है !”

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि इक्विटी, शेयर का ही एक प्रकार है।

शेयर तीन प्रकार के होते हैं, जिसमें शामिल है:

  1. इक्विटी शेयर (Equity Share)
  2. प्रेफरेंस शेयर(Preference Share)
  3. DVR शेयर (Shares With Differential Voting Rights)

लेकिन, यहाँ हम बात इक्विटी की कर रहे हैं तो इसी विषय पर बने रहेंगे।

इक्विटी शब्द समानता या बराबर से निकल कर आती है।

जैसे, यदि मेरे पास इन्फोसिस का एक शेयर/ स्टॉक है और आपके पास भी है, तो इसका मतलब है कि हम दोनों की इन्फोसिस की एसेट या परिसंपत्तियों में एक इकाई का बराबर शेयर/हिस्सा है।

इस तरह से हमारे पास इंफोसिस कंपनी की एक ओनरशिप प्राप्त हो गई है।

इस स्वामित्व/ओनरशिप को दर्शाने लिए, हम दोनों के पास कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णयों (जैसे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर का चयन) में एक वोट देने का अधिकार प्राप्त होता है।

इस वोटिंग राइट्स को आमतौर पर कंपनी की वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) में लागू किया जाता है।

यदि आपके पास 10 स्टॉक हैं, तो आपको 10 वोट मिलते हैं। कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर, आपका लाभ या हानि भी प्रभावित होगी।

यदि आप किसी कंपनी के इक्विटी शेयर खरीदना चाहते हैं तो आप डीमैट खाता खोलकर ऐसे बिज़नेस में निवेश कर सकते हैं। 

इस तरह, आप कंपनी के मुनाफे के साथ खुद का मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं। 

हां, इस विचार में कुछ जोखिम भी है, लेकिन ज्यादातर एक स्थिर शेयर बाजार में, ब्लू चिप स्टॉक यानी बड़ी कंपनियों पर भरोसा किया जा सकता है।

यहाँ तक, आप समझ गए होंगे कि इक्विटी क्या होता है। अब बात करते हैं – इक्विटी शेयर (Equity Share) के बारे में।


इक्विटी शेयर (Equity Share Meaning in Hindi)

इक्विटी शेयर को आमतौर पर कॉमन स्टॉक या ऑर्डिनरी शेयर के रूप में जाना जाता है।

इक्विटी शेयर एक निवेश करने योग्य सिक्योरिटी (शेयर, बॉन्ड) है, जो कंपनी, पब्लिक के लिए जारी करती है।

यह एक खरीदार, जिसे शेयरधारक के रूप में भी जाना जाता है, उसको कंपनी का आंशिक स्वामित्व/ओनरशिप देती है।

इक्विटी शेयर के होल्डर को कंपनी में कई तरह के लाभ भी मिलते हैं। अब सवाल यह उठता है कि इक्विटी में निवेश कैसे शुरू करें?

भारत में, यदि आप इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं, तो आप एनएसई निफ्टी (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) या बीएसई सेंसेक्स(बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के माध्यम से शेयरों में निवेश कर सकते हैं। 

यह एक्सचेंज सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बॉर्ड ऑफ़ इंडिया) के साथ रजिस्टर्ड होते हैं। 

इसके अलावा, कुछ अन्य एक्सचेंज भी हैं लेकिन मुख्य रूप से ट्रेडर उपरोक्त लिस्टेड एक्सचेंज के माध्यम से निवेश करते हैं।

इक्विटी शेयर में निवेश करने के कुछ तरीके हैं:

  • आप प्राइमरी मार्केट के माध्यम से निवेश कर सकते हैं, जहां कंपनी आईपीओ के लिए आवेदन करती है और ट्रेडर, सब्सक्रिप्शन या सदस्यता के लिए बोली लगाते हैं।
  • आईपीओ के आवेदन करने के विभिन्न तरीके हैं, जिसमे ASBA के माध्यम से आईपीओ की पेशकश सबसे प्रमुख तरीकों में से एक है।
  • एक बार जब कंपनी एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हो जाती है, तो आप सेकेंडरी मार्केट में भी शेयर खरीद या बेच सकते हैं।
  • इन शेयरों की कीमत मांग और आपूर्ति की अवधारणा के आधार पर तय की जाती है।

आपको यह समझना जरुरी है कि, आईपीओ के लिए आवेदन करना और वास्तव में फंड का आवंटन होना एक जटिल विषय है।

आईपीओ आवंटन प्राप्त करने के लिए काफी कुछ आपकी किस्मत पर निर्भर करता है।

हालाँकि, आप जिस कंपनी के शेयरों को खरीदने में रुचि रखते हैं, उसके लिए आप सेकेंडरी मार्केट के माध्यम से आसानी से ट्रेड कर सकते हैं।

अब बात करेंगे, इक्विटी शेयर के साथ ट्रेड किये जाने वाले सेगमेंट के बारे में।


इक्विटी डिलीवरी

जब आप इक्विटी डिलीवरी में ट्रेडिंग करते हैं, तो इसका मतलब है आप किसी एक ट्रेडिंग सेशन में स्टॉक खरीदते है और फिर किसी दूसरे ट्रेडिंग सेशन में उस स्टॉक को बेचते हैं।

याद रखें, कभी भी किसी एक ट्रेडिंग सेशन में को शेयर खरीद कर नहीं बेचा जा सकता है।

उसके साथ ही, इक्विटी डिलीवरी फॉर्मेट में ट्रेडिंग करने पर खरीदे गए स्टॉक को आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है।

इसके आगे, जब आप शेयर बेचते हैं, तो उस शेयर को खरीददार के डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

यह आमतौर पर T + 2 Days में ट्रांसफर किया जाता है।

रिस्क के मामलें में, यह अन्य सेगमेंट की तुलना में कम जोखिमों से भरा है। क्योंकि आप मार्केट ट्रेंड, वोलैटिलिटी और अन्य रिलेटेड फैक्टर के अनुसार खरीदने या बेचने के निर्णय लेते हैं।

आप कभी भी अपने पोजीशन से एग्जिट कर सकते हैं।

हालाँकि, इस सेगमेंट में विभिन्न स्टॉकब्रोकर द्वारा प्रदान किया गया एक्सपोज़र (औसतन 2-5 गुणा) इतना अधिक नहीं है।

इसका कारण केवल यह है कि निवेशक लंबे समय तक अपनी पोजीशन में बना रहें और स्टॉकब्रोकर किसी को इतनी लंबी पोजीशन के लिए अपना पैसा रखना पसंद नहीं करते हैं।


इक्विटी इंट्राडे

यदि आप एक ही ट्रेडिंग सेशन के अंदर स्टॉक (या इसके विपरीत) को खरीदना और बेचना चाहते हैं, तो आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे हैं या इक्विटी इंट्राडे सेगमेंट में काम कर रहे हैं।

इस रूप में, ट्रेडर ट्रेड में एंटर करता है और कुछ घंटों, मिनटों और कभी-कभी कुछ सेकंड के अंदर एग्जिट कर सकता है।

मुख्य रूप से, इस सेगमेंट में फ़ोकस उन शेयरों का तकनीकी विश्लेषण पर होता है, जहाँ ट्रेडर प्रत्येक ट्रेड में जल्दी पैसा बनाना चाहता है और अधिक मात्रा में ट्रेड करने का विकल्प चुन सकता है।

इस तरह के ट्रेडिंग में, छोटे से प्रॉफिट मार्जिन के लिए बड़ी मात्रा में ट्रेडर शामिल होते हैं।

डिलीवरी सेगमेंट की तुलना में इस सेगमेंट में उपलब्ध मार्जिन आम तौर पर हाई (औसतन लगभग 20 से 60 गुना) होता है, क्योंकि ट्रेडर उसी दिन ट्रेडिंग से बाहर हो जाता है।

यदि आपने एक सेशन में इंट्राडे ट्रेड में एंटर किया है, तो आप उसी दिन अपनी पोजीशन से बाहर निकलने वाले हैं, अन्यथा यह ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म द्वारा स्वचालित रूप से स्क्वायर ऑफ (Square Off) कर दिया जाता है।


इक्विटी डेरीवेटिव

जब आप इक्विटी डेरिवेटिव के बारे में बात करते हैं, तो इसे डेरीवेटिव क्लास के रूप में देखा जाता है, जो कि अंडरलाइंग इक्विटी सिक्योरिटी से इसका मूल्य प्राप्त करता है।

इक्विटी डेरिवेटिव में सबसे अधिक इस्तेमाल फ्यूचर और ऑप्शन का किया जाता हैं।

शेयर बाजार में चल रहे कुछ लेटेस्ट कॉन्ट्रैक्ट पर नीचे एक आकड़ा दिया गया है:

  • इंडेक्स फ्यूचर: 2,01,667
  • इंडेक्स ऑप्शन: 94,57,609
  • स्टॉक फ्यूचर: 6,89,492
  • स्टॉक ऑप्शन: 7,61,005

इन कॉन्ट्रैक्ट का ओवरऑल वैल्यूएशन ₹72 7,72,268.07 की सीमा में है।

इक्विटी फ्यूचर (Equity Futures)

यह एक रोचक ट्रेडिंग सेगमेंट है। हालांकि, इस ट्रेड में अन्य ट्रेड की तुलना में ज्यादा जोखिम है, लेकिन निश्चित रूप से, इसमें अधिक लाभ कमाने के अवसर भी है।

जब आप इक्विटी फ्यूचर में ट्रेड कर रहे होते हैं, तो आप किसी विशेष वित्तीय उत्पाद में सीधे ट्रेड नहीं करते हैं।

यह पूरा ट्रेड एक ट्रेडिंग प्रोडक्ट की विशेष अंडरलाइंग एसेट जैसे कि इक्विटी स्टॉक, करेंसी पेअर, इंडेक्स, कमोडिटी आदि के एक कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित है।

यह कॉन्ट्रैक्ट दो पक्षों यानी खरीदार और विक्रेता के बीच होता है, जहां दोनों स्टॉक के समूह (जिसे लॉट कहा जाता है) में ट्रेड करते हैं।

जब दोनों पक्ष कॉन्ट्रैक्ट पर समझौता करते हैं, तो स्टॉक की कीमत और संबंधित पूरा करने की तारीख को भी तय किया जाता है।

उस तारीख पर स्टॉक की वैल्यू क्या होती है, इसके आधार पर संबंधित लाभ / हानि को मापा जाता है।

इक्विटी ऑप्शन (Equity Option)

इक्विटी ऑप्शन डेरिवेटिव का दूसरा रूप है, जहां ट्रेडर को किसी विशिष्ट सिक्योरिटी या स्टॉक को खरीदने या बेचने की आवश्यकता नहीं होती है।

यहां एक कॉन्ट्रैक्ट स्थापित किया जाता है और पूरा लेनदेन अंडरलाइंग एसेट पर होता है।

जब आप वास्तव में स्टॉक नहीं खरीदते हैं, तो यह एक किफायती विकल्प बन जाता है, क्योंकि आपको स्टॉक के लिए भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट के लिए भुगतान करते हैं।

आपके पास अपने विश्लेषण के आधार पर लॉन्ग-टर्म या शार्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट चुनने का विकल्प होता है और फिर आपको कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एक संबंधित खरीदार या विक्रेता को ढूँढना होता है।

यद्यपि, आप जिस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, वह आपको उसी एसेट पर विपरीत ब्याज के साथ ऐसी थर्ड पार्टी खोजने का प्रावधान देता है।

Learn More: Share Market Mein Nivesh Kaise Karen?


इक्विटी एक्सपोज़र (Equity Exposure)

हम इस समीक्षा में और इस वेबसाइट के विभिन्न लेखों के अन्य सेगमेंट में “एक्सपोज़र” शब्द का उपयोग करते आएं हैं।

इस मतलब बहुत ही आसान है!

यह एक ऋण/लोन का एक रूप है, जो आपके स्टॉकब्रोकर द्वारा आपके डीमैट खाते में आपके द्वारा दिए गए डीमैट खाते के मूल्यांकन के आधार पर प्रदान किया जाता है।

इस एक्सपोजर का उपयोग उस ट्रेडिंग खाते की पूंजी के ऊपर और उसके बाद के ट्रेड को रखने के लिए किया जा सकता है, जो आपके ट्रेडिंग अकाउंट बैलेंस में हैं।

एक ब्रोकर इस ऋण को एक विशिष्ट ब्याज दर (12% से 18% तक) प्रदान करता है और एक्सपोज़र के मूल्य ट्रेडिंग सेगमेंट के साथ भिन्न होते हैं।

हालांकि, विभिन्न स्टॉकब्रोकर अलग-अलग एक्सपोज़र वैल्यू की पेशकश करते हैं, यहां एक्सपोज़र की सीमा पर एक त्वरित आकड़े है जो आप इक्विटी सेगमेंट में उम्मीद कर सकते हैं:


इक्विटी हाइब्रिड फंड (EQUITY HYBRID FUND)

यदि आप एक शुरुआती स्तर के निवेशक हैं, तो यह आपके लिए इक्विटी हाइब्रिड फंडों में निवेश करने का सबसे अच्छा विकल्प है।

जब आप एक हाइब्रिड फंड में निवेश करते हैं, तो आप मूल रूप से अपना पैसा इक्विटी के मिश्रण के साथ-साथ डेब्ट सिक्योरिटीज में डाल रहे हैं, जहां डेब्ट सिक्योरिटीज अधिक स्थिर और प्रकृति में कम वोलेटाइल होते हैं।

यहां तक कि अगर आप जोखिम लेने के मामले में रूढ़िवादी हैं, तो इस तरह के फंडों में निवेश कर सकते है, क्योंकि आमतौर पर कम से कम 35% निवेश ऋण सिक्योरिटीज में होता है।


इक्विटी बनाम शेयर (Equity Vs Share) 

यद्दपि, शेयर समग्र बिज़नेस इक्विटी से संबंधित हैं, लेकिन ये दोनों शब्द एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। फिर भी, बहुत सारे उपयोगकर्ता दोनों टर्म्स के बीच भ्रमित हो जाते हैं।

आपके संदर्भ के लिए, यहां दोनों टर्म्स के बीच अंतर दिया गया हैं:


इक्विटी मूल्यांकन (Equity Valuation)

जब हम इक्विटी वैल्यूएशन शब्द कहते हैं, तो इसका मतलब है कि कंपनी की इक्विटी वैल्यूएशन क्या है।

इस मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान, कई कारकों पर विचार किया जाता है, जिसमें उद्योग का आकार, कंपनी की अपने साथियों के विरुद्ध स्थिति, व्यवसाय मॉडल, कंपनी के वित्तीय कारकों पर विभिन्न कारकों का प्रभाव आदि शामिल हैं।

जहाँ तक बिज़नेस के मूल्यांकन की गणना का संबंध है, यह एक विशिष्ट प्रक्रिया पर निर्धारित है:

  • विभिन्न मैक्रो और माइक्रो कारक को जानें, जो बिज़नेस को डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से प्रभावित करते हैं।
  • रेवेन्यू, टैक्स के बाद लाभ, वार्षिक वृद्धि आदि के संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक वित्तीयों को देखें और कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन का एक गणनात्मक पूर्वानुमान लगाएं।
  • कंपनी के व्यवसाय मॉडल के अनुसार किसी भी मूल्यांकन के तरीके को चुनें।
  • पहले चरणों में किए गए विश्लेषण के आधार पर मूल्यांकन की गणना करें।

यद्यपि, हमने मूल्यांकन के पूरे तंत्र को कुछ चरणों में रखने की कोशिश की है। हालांकि, इसकी पूरी प्रक्रिया थोड़ा मुश्किल है और कॉन्सेप्ट के गहन अध्ययन की आवश्यकता है।


डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो

प्रत्येक बिजनेस अपने व्यापार को विस्तार, विकास या कभी-कभी संचालन के प्रबंधन के लिए भी कर्ज लेता है। इसी समय, विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवसाय के पास स्वयं का भी फंड होता हैं।

डेब्ट कंपनी की लायबिलिटी का हिस्सा है और जब आप इसे ओवरऑल इक्विटी के साथ विभाजित करते हैं, तो आपको डेब्ट टू इक्विटी रेश्यो मिलता है।

इस विशेष संख्या को गणना किए जाने पर, आपको उस स्तर का पता लगेगा, जिसमें व्यवसाय कंपनी के स्वयं के नकदी की तुलना में लिए गए डेब्ट के माध्यम से अपने कैश फ्लो का प्रबंधन कर रहा है।

यह इस बात का भी संकेत देता है कि अपने लिए गए डेब्ट को चुकाने के लिए व्यवसाय में कितनी क्षमता है।

यह संख्या जितना कम होता है, उतना ही व्यवसाय के लिए बेहतर है। गणना के लिए, आप इन संख्याओं को सीधे बैलेंस शीट से ले सकते हैं।

ये भी पढे: बैलेंस शीट कैसे पढ़ें?

Equity Formula (इक्विटी फॉर्मूला)

इक्विटी फॉर्मूला को समझने के लिए, आपको समीकरण में अन्य मापदंडों (इक्विटी के अलावा) को समझने की आवश्यकता है।

सामान्य रूप में इक्विटी फॉर्मूला है:

इक्विटी = एसेट्स – लायबिलिटीज़

यदि किसी कंपनी की एसेट्स उसकी लायबिलिटी से अधिक है, तो इक्विटी पाॅजटिव होगा, जिससे मतलब है कि कंपनी का व्यवसाय अच्छा चल रहा है।

उसी समय, यदि किसी कंपनी की एसेट या संपत्ति उसकी ओवरऑल लायबिलिटी से कम है, तो इसका मतलब है कि बिज़नेस घाटे में है और इक्विटी घाटे की तरफ है।

इस प्रकार, फॉर्मूला का उपयोग करके, आप कंपनी के वित्तीय क्षमता के बारे में निष्कर्ष निकाल सकते हैं!


इक्विटी के उदाहरण (Equity Examples)

इक्विटी के उदाहरण कई प्रकार के होते हैं। उनमें से कुछ आपके संदर्भ के लिए नीचे सूचीबद्ध हैं:

  • कॉमन स्टॉक
  • प्रेफर्ड स्टॉक
  • एडिशनल पेड इन कैपिटल
  • सरकारी स्टॉक
  • रेटेनेड अर्निंग

ऊपर उल्लिखित इनमें से प्रत्येक इक्विटी उदाहरण की शेयर बाजार में निवेश की अपनी प्रासंगिकता है।


इक्विटी बनाम कमोडिटी (Equity Vs Commodity)

आमतौर पर शुरुआती स्तर के ट्रेडर विभिन्न प्रकार के निवेश उत्पादों के साथ भ्रमित होते हैं। उन भ्रमों में से एक इक्विटी और कमोडिटी के बारे में है।

हालाँकि, ये दोनों निवेश उत्पाद निम्नलिखित तरीकों से भिन्न हैं:

  • जहां इक्विटी किसी कंपनी या व्यवसाय में स्वामित्व को दर्शाती है, वहीं कमोडिटी एक बुनियादी फाइनेंशियल प्रोडक्ट है, जिसमे इन्वेस्टर पोजीशन ले सकते हैं।
  • आमतौर पर डिलीवरी के जरिए इक्विटी प्रोडक्ट को एक्सचेंज या फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के रूप में एक्सचेंजों की मदद से बेचा जाता है, लेकिन कमोडिटी ज्यादातर डेरिवेटिव प्रोडक्ट के रूप में सीमित है।
  • इक्विटी प्रोडक्ट में कमोडिटी की तुलना में अधिक लिक्विडिटी है।

डेब्ट बनाम इक्विटी (Debt Vs Equity)

इक्विटी और डेब्ट फंड पूरी तरह से अलग वित्तीय उत्पाद हैं। यहाँ दोनों के बीच कुछ त्वरित अंतर हैं:

  • निवेश किये फंड का नेचर विपरीत है। इक्विटी में निवेश करते समय आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं। हालांकि, डेब्ट फंड के मामले में, पैसा सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड आदि के पूल में निवेश किया जाता है।
  • फंड की तुलना में इक्विटी फंड अपेक्षाकृत जोखिम भरे होते हैं।
  • शॉर्ट-टर्म इक्विटी इन्वेस्टमेंट (एक वर्ष से कम) में 15% का टैक्स लगाया जाता हैं, जबकि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट (एक वर्ष से अधिक) में कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है। दूसरी ओर, डेब्ट फंड 3 साल की होल्डिंग अवधि के लिए 20% की सीमा में हैं।
  • इक्विटी, आमतौर पर, डेब्ट फंड की तुलना में अधिक रिटर्न लाता है।

इक्विटी बनाम म्यूच्यूअल फंड (Equity Vs Mutual Fund)

इक्विटी बनाम म्युचुअल फंड सबसे के बारे में सबसे ज्यादा लोग पूछते है। उनमें से कुछ पर यहां चर्चा की गई है:

  • आप व्यक्तिगत रूप से इक्विटी निवेश में शेयरों का चयन कर सकते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड में नहीं।
  • आप इक्विटी के मामले में अपनी सहूलियत के अनुसार किसी शेयर को बेच या खरीद सकते हैं, लेकिन यह म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में उस तरह काम नहीं करता है।
  • म्यूचुअल फंड इक्विटी की तुलना में एक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश उत्पाद है, लेकिन इक्विटी फंड की तुलना में कम रिटर्न लाता है।

इक्विटी, एक वित्तीय उत्पाद के रूप में, इसके आकर्षण और निश्चित रूप से अन्य साथी वित्तीय उत्पादों से अलग हैं।

यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि एक निवेशक या व्यापारी के रूप में आप इस वित्तीय वर्ग को कैसे देखते हैं।

आइये अब विभिन्न प्रकार के इक्विटी को समझते हैं जिसमें आप निवेश कर सकते हैं।


इक्विटी के प्रकार

सामान्य आधार पर, शेयर बाजार में 3 प्रकार के इक्विटी फंड होते हैं, अर्थात्:

लार्ज कैप इक्विटी फंड

ये फंड आमतौर पर बिज़नेस में बड़ी कंपनियों जैसे इन्फोसिस, SBI, HDFC से संबंधित हैं, जिनके पास अच्छा बिज़नेस मॉडल हैं।

हालाँकि, इसमें रिटर्न परसेंटेज इतना अधिक नहीं है, लेकिन यह लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए निरंतरता और निश्चित रूप से भरोसेमंद हैं।

मिड कैप इक्विटी फंड

ये फंड उन कंपनियों से संबंधित हैं जो आकार में मध्यम स्तर पर हैं और उन्होंने अपने मौद्रिक और प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन में उचित प्रगति दिखाई है।

इनमें से कुछ फंड में बॉट इंडिया, आदित्य बिड़ला फैशन इत्यादि शामिल हैं।

इनमें से जोखिम कारक लार्ज-कैप इक्विटी फंड की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है, हालांकि जोखिम स्तर अपेक्षाकृत अधिक है।

स्मॉल कैप इक्विटी फंड

स्मॉल-कैप सेगमेंट में आने वाले इक्विटी फंड शेष फंड प्रकारों की तुलना में जोखिम प्रतिशत के उच्चतम स्तर के साथ आते हैं।

हालांकि, जोखिम लेने वाले ट्रेडर के लिए, इस प्रकार के फंड अच्छी तरह से काम कर रहे हैं।

जबकि समझदार निवेशकों को आम तौर पर जोखिम भरे स्मॉल-कैप फंड से दूर रहना चाहिए। कुछ उदाहरणों में 5पैसा, 3आई इन्फोटेक, ऐस एक्सपोर्ट आदि शामिल हैं।

इस प्रकार, आपके जोखिम लेने की क्षमता और निवेश उद्देश्यों के आधार पर, आप इस तरह के धन के साथ एक समान विकल्प बना सकते हैं जिसमें आप अपना पैसा निवेश करना चाहते हैं।


इक्विटी के जोखिम

जब आप शेयर बाजार और विशेष रूप से इक्विटी सेगमेंट में निवेश करते हैं, तो विभिन्न प्रकार के जोखिम होते हैं। उन जोखिमों में से कुछ आपके द्वारा निवेश की गई कंपनियों की गतिशीलता के आसपास हो सकते हैं:

  • आपके द्वारा निवेश किए गए स्टॉक की कीमत में गिरावट का जोखिम।
  • जब आप नियमित लाभांश की उम्मीद करते हुए विशिष्ट शेयरों में निवेश करते हैं और कंपनी इसका भुगतान करना बंद कर देती है या इसका मूल्य कम करती है।
  • कंपनी में पाए जाने वाले किसी भी संभावित धोखाधड़ी के जोखिम का पर्दाफाश हो रहा है या बंद हो रहा है।

हालांकि, ऐसे विशिष्ट कारक हैं जिन पर ये इक्विटी जोखिम निर्भर करते हैं:

  • बाजार की अस्थिरता
  • उद्योग की प्रवृत्तियां
  • वैश्विक कारक
  • अंतर-उद्योग की गतिशीलता
  • कंपनी प्रबंधन स्थिरता

यह कहने के बाद, यह समझने की जरूरत है कि जब आप इक्विटी में निवेश करते हैं, तो याद रखें कि इक्विटी निवेश में अपेक्षाकृत उच्च जोखिम की चिंताओं के साथ उच्च रिटर्न की सकारात्मकता है।

इक्विटी डिलूशन (Equity Dilution)

यह अवधारणा तब चलन में आती है जब ‘X ’ शेयरों की संख्या वाली कंपनी अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए अतिरिक्त धन / निवेश जुटाने के लिए नए निवेशकों को अतिरिक्त शेयर जारी करती है।

जब यह स्थिति पैदा होती है, तो शेयरों की संख्या बढ़ जाती है जबकि कंपनी में समग्र हिस्सेदारी स्थिर रहती है। प्रत्येक हितधारक या निवेशक की संबंधित प्रतिशत हिस्सेदारी स्वचालित रूप से घट जाएगी। इसे ही इक्विटी डिल्यूशन कहा जाता है।

आइए इसे समझने के लिए एक त्वरित उदाहरण लें:

उदाहरण के लिए, एक कंपनी रबी सॉल्यूशंस के पास अपने वर्तमान 10 निवेशकों के पास कुल 1000 शेयर हैं, प्रत्येक निवेशक के पास 100 शेयर हैं। सरल शब्दों में, कुल 100% में से प्रत्येक शेयरधारक के पास कंपनी की इक्विटी का 10% होता है।

अब, अपने अगले फंडिंग या फंड बढ़ाने की प्रक्रिया में, कंपनी एक नए निवेशक को 100 शेयर आवंटित करती है। अब, 11 निवेशकों के पास समान मात्रा में शेयर रखने के साथ, समग्र इक्विटी को 11 भागों में विभाजित किया जाएगा।

इस निवेश के बाद, प्रत्येक शेयरधारक कंपनी में 100/11 यानी 9.09% इक्विटी शेयर रखेगा।

10% से 9.09% शेयरहोल्डिंग की इस गिरावट को इक्विटी डिल्यूशन के रूप में देखा जाता है।

इक्विटी टैक्सेशन (EQUITY TAXATION)

जब आप इक्विटी सेगमेंट में निवेश करते हैं और अपने निवेश से रिटर्न बनाते हैं, तो टैक्स की समान राशि का भी भुगतान करना पड़ता है।

जीएसटी के साथ, प्रत्येक ट्रेड जो आप शेयर बाजारों में ट्रेडिंग सेगमेंट में रखते हैं, आपको टैक्स के इस रूप को अपने स्टॉकब्रोकर को भुगतान करना होगा। आपका ब्रोकर फिर इसी टैक्स को संबंधित नियामक संस्था, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भुगतान करता है।

यह समझने के लिए कि जीएसटी की कितनी राशि ली जाएगी, आप इस सरल ब्रोकरेज कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं।

जीएसटी के अलावा, आपको लॉन्ग-टर्म कैपिटल टैक्स गेन (एलटीसीजी) के साथ-साथ अपने लॉन्ग-टर्म निवेश से निकलने वाले रिटर्न से भी भुगतान करने की आवश्यकता है।

टैक्स का यह रूप तब लागू होता है जब आपके द्वारा खरीदी गई इक्विटी को सिक्योरिटी खरीदने के एक साल बाद कभी भी बेचा जाता है।

इक्विटी रिसर्च (Equity Research)

यदि आप इक्विटी सेगमेंट में शाॅर्ट-टर्म या लाॅंग-टर्म के लिए निवेश करना चाह रहे हैं, तो आपको आवश्यक रिसर्च करना चाहिए। यदि आप ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो हो सकता है कि आप अपने निवेश का कुछ या अधिकांश हिस्सा खो सकते हैं।

अपने रिसर्च को करने के लिए, आपको यह पता लगाने की आवश्यकता है कि क्या आप शाॅर्ट-टर्म या लाॅंग-टर्म के लिए अपना निवेश करना चाहते हैं।

यह इस कारण से है कि आपको शाॅर्ट-टर्म की स्थिति में शेयरों के तकनीकी विश्लेषण और लाॅंग-टर्म के मामले में शेयरों के मौलिक विश्लेषण की आवश्यकता होगी।

तकनीकी इक्विटी रिसर्च करते समय, आप विभिन्न उपकरणों जैसे स्टॉक चार्ट, तकनीकी संकेतक, हीट मैप, स्टॉक एनालिटिक्स आदि का उपयोग करना चुन सकते हैं।

इसके साथ ही, मौलिक विश्लेषण के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करने के अलावा, आप कई रेश्यो का उपयोग कर सकते हैं जैसे पुट-कॉल रेश्यो, Debt to Equity Ratio, Earning Yield, Dividend Yield, Return on Capital Employed, Return on Equity आदि।

विभिन्न स्टॉकब्रोकर हैं जो अपने संबंधित ट्रेडिंग ग्राहकों को रिसर्च प्रदान करते हैं। उनमें से कुछ रिसर्च में शामिल हैं:


इक्विटी-संबंधित तथ्य

यहां इस व्यापारिक वर्ग से संबंधित कुछ दिलचस्प तथ्य हैं जिनके बारे में आपको अवगत होना चाहिए:

  • इक्विटी में निवेश करने के लिए, आप मोबाइल ऐप, टर्मिनल सॉफ़्टवेयर या वेब-ब्राउज़र एप्लिकेशन सहित किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
  • आप अपने स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से शेयर बाजार में अपना ऑर्डर देने के लिए कॉल और ट्रेड सुविधा का भी उपयोग करना चुन सकते हैं।
  • इक्विटी क्लास में, आप उसी दिन शेयरों को खरीद और बेच सकते हैं (जिसे इंट्रा-डे ट्रेडिंग कहा जाता है) या आज खरीदना और बाद में बेचना (डिलिवरी आधारित ट्रेड) चुन सकते हैं।
  • अपेक्षाकृत सुरक्षित होने के लिए, आप डेरिवेटिव्स (यानी,फ्यूचर और ऑप्शन) में ट्रेड करना चुन सकते हैं।
  • यदि आप केवल इंट्रा-डे आधारित ट्रेड करना चाहते हैं, तो आपको वास्तव में डीमैट खाता की आवश्यकता नहीं है और केवल एक ट्रेडिंग खाते की आवश्यकता है क्योंकि शेयर आपके खाते में वैसे भी संग्रहीत नहीं किए जाएंगे।
  • यदि आप डिलीवरी आधारित ट्रेड में खरीदते हैं और बेचते हैं, तो एक बार जब आप शेयर खरीदते हैं, तो स्टॉक टी + 2 दिनों के बाद आपके डीमैट खाते में संग्रहीत किया जाएगा जहां टी का अर्थ ट्रेड का दिन है।
  • गणितीय रूप से, इक्विटी मूल रूप से कंपनी की एसेट और देनदारियों के बीच अंतर है अर्थात इक्विटी = एसेट – देनदारियां

इक्विटी शेयर के लाभ

आप कमोडिटी,करेंसी, म्यूचुअल फंड जैसे अन्य निवेश वर्गों में निवेश करना चुन सकते हैं – फीर भी इक्विटी में निवेश करने के लिए आपको कुछ विशिष्ट लाभ मिलते हैं।

यहां सूचीबद्ध हैं:

  • पिछले वर्षों में, इक्विटी अन्य निवेश वर्गों की तुलना में तुलनात्मक रूप से उच्च प्रतिशत रिटर्न प्रदान करने में सक्षम रही है।
  • नियमित इक्विटी निवेश से आपको अपने इक्विटी पर अच्छा रिटर्न मिलता है। कुछ सूचीबद्ध कंपनियां अपने ग्राहकों को लाभांश भी प्रदान करती हैं, जो निवेशकों के लिए अतिरिक्त मौद्रिक मूल्य के रूप में कार्य करती हैं।
  • लाॅंग-टर्म निवेश की तलाश करने वाले निवेशक रियल एस्टेट या अन्य संबंधित निवेश की तुलना में ब्लू-चिप इक्विटी स्टॉक में से कुछ पर निश्चित रूप से अधिक निर्भर हो सकते हैं।
  • शाॅर्ट-टर्म त्वरित मुनाफे के लिए, ट्रेडर इंट्रा-डे ट्रेडिंग कर सकते हैं संभावित रूप से अपने निवेश पर दैनिक रिटर्न प्रापत कर सकते हैं।
  • जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों के लिए, इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प हैं जहां उपयोगकर्ता अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

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