2008 Stock Market Crash in Hindi

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स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 आज के मुक़ाबले स्टॉक मार्केट में होने वाली सबसे बड़ी गिरावटों में से एक थी। इस अवधि के दौरान लगातार हुई घटनाओं ने अधिकांश अमेरिकियों की सेवानिव्रत्ति बचत को ख़त्म कर दिया था और वहाँ की अर्थव्यवस्था को भी उसके प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया था।

इस सबसे बड़े क्रैश के कारण डॉव जोंस में एक ही दिन में होने वाली ट्रेडिग में 777.8 तक नीचे गिरना और फिर कांग्रेस द्वारा बैंक बैल आउट बिल को अस्वीकृति करना है। लेकिन मार्केट में इस क्रैश से पहले ही इसके संकेत दिखना शुरू हो गए थे।

1929 स्टॉक मार्केट क्रैश और 1987 ब्लैक मंडे की तुलना में 2008 स्टॉक मार्केट क्रैश सबसे ज्यादा ख़राब था, क्यूँकि इसमें डॉव जोंस अपने इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की थी। 

इस स्टॉक मार्केट क्रैश के कारण वित्तीय अव्यवस्था बढ़ गयी जैसे:

  • बड़े पैमाने पर नौकरी जाना
  • समय पर ऋण का भुगतान ना होना
  • निवेश कंपनियों का ख़त्म होना
  • कई वाहन निर्माताओं का दिवालिया होना

देखा जाए तो इस सभी स्टॉक मार्केट संकटो ने विश्व बैंक को समाप्ति की सीमा तक धकेल दिया था।

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लेकिन सबसे ज़रूरी सवाल ये है की यह स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 हुआ कैसे था?

तो यहा कुछ तथ्य, कारण और इस सबसे बड़े स्टॉक मार्केट के क्रैश के जुड़े प्रमुख प्रभाव है। जिसके लिए नीचे दी गई जानकारी को बढ़ें और जाने की इस तरह का संकट दोबारा होने पर आप अपनी बचत और प्रतिभूतियो को सुरक्षित कैसे रख सकते है।

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स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 के घटनाक्रम (समयावधि)

स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 अचानक से नहीं हुआ। असल में बीते हुए वर्षों में होने वाली लगातार घटनाओं और चेतावनीयो ने इसके संकेत देना शुरू कर दिए थे और उन्ही संकेतों की अनदेखी के कारण ऐसी क्रैश हो गई।

2007

सबप्राइम मोर्गेज क्राइसिस के बाद भी डॉव 12,459.54 पर खुला था (इस संकट की घटना के बारे में तब पता चला जब बैंको ने ऋण चुकाने के लिए सेकेंडरी मार्केट के माध्यम से बेचे जाने वाली गिरवी रखी हुई अपनी सिक्योरिटी को बेच दिया)।

जिसके बाद वर्ष की तीसरी तिमाही तक घरेलू उत्पाद की आय में 0.5% की वृधि हुई।

इसके अलावा आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो (ब्यारो ओफ़ एकनामिक्स ) ने भी अनुमान लगाया की विकास अधिक होगा और फिर उसी वर्ष के अंत तक डॉव 13,264 तक पहुँच गया जो उसकी अक्टूबर 2007 की क़ीमत के बराबर है।

मार्च 2008

2007 में ही बीईए द्वारा एक अध्ययन किया गया था जिसके अनुसार जीडीपी की वृधि के अनुमान का पता चला जैसे की 2007 की चौथी तिमाही में केवल 0.6% ही विकास हुआ था और साथ ही ये भी पता चला की 2004 से लेकर अब तक 17,000 नौकरियां ख़त्म हो चुकी है।

और डॉव भी मार्च 2008 तक 12,000 से 13,000 के बीच गिरता रहा।

जिसके बाद मार्च 17 से फ़ेडरल रिज़र्व सक्रिय हो गया और वित्तीय बैंक और बीयर स्टर्न्स जैसी कम्पनियों की रक्षा करने की दिशा में काम करने लगा क्यूँकि ये उस समय विफल हो रही थी।

डॉव भी 11,650.44 तक गिर गया था लेकिन जल्द ही ठीक हो गया और मई तक उसकी क़ीमत 13,000 तक हो गयी।

जुलाई 2008

जुलाई 2008 में दो सरकारी प्रायोजित एजेंसियाँ जिनका नाम फैनी मॅई और फ़्रेडी मैक इस संकट से बुरी तरह प्रभावित धिस और मार्केट से ख़ैरात की माँग कर रही थी।

फिर ऐसी एजेंसियों के मदद के लिए ट्रेज़री-डिपार्टमेंट ने उनके द्वारा लिए हुए $25 बिलियन ऋण की राशि का भुगतान किया और उनके स्टॉक किए हुए शेयरों को ख़रीदा जबकि फ़ेडरल अथॉरिटी ने भी उन्हें $300 बिलियन की वित्तीय मदद की पेशकश की थी।

मौजूदा परिस्थितियों के कारण, डॉव 10,924.54 तक गिर गया और फिर ग़र्मियो के लिए 11,000 पर स्थिर हो गया।

सितंबर 2008

सितंबर 2008 में लेहमन ब्रदरस के दिवालिया होने की ख़बर अचानक मार्केट में आ गई जिसके बाद उस दिन डॉव 504.48 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।

इसी परिदृश्य के साथ, 16 सितंबर, 2008 को एक और बड़ी खबर सामने आई, जिसमें अमेरिकन इंटरनेशनल ग्रुप की प्रतिभूतियों पर प्रकाश डाला गया। जिसमें 79.9% इक्विटी के लिए फेड ने $85 बिलियन डॉलर का ऋण देकर एआईजी से उसका स्वामित्व ले लिया था।

लेहमन ब्रदरस के दिवालिया होने के साथ $196 बिलियन डॉलर का नुक़सान भी हुआ जिससे कई व्यवसायों में घबराहट बढ़ गई और बैंको ने भी अपनी ब्याज दरें बढ़ा दी क्यूँकि वो मार्केट में पैसे उधार देने से डरने लगे थे। 17 सितम्बर 2008, तक डॉव 446.92 अंक तक गिर गया था।

19 सितंबर, 2008 को सप्ताह के अंत तक, फेड ने एसेट-बैकड कमर्शियल पेपर मनी मार्केट म्यूचुअल फंड लिक्विडिटी फैसिलिटी की स्थापना की, जो मनी मार्केट फंडस से कमर्शल पेपर खरीदने के लिए बैंकों को ऋण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध थी।

जिसके बाद उस दिन डॉव का मूल्य 11,388.44 पर समाप्त हुआ था।

फिर 20 सितंबर, 2008 को कांग्रेस द्वारा सचिव पॉलसन और फेडरल रिजर्व चेयर को बैंक बेलआउट बिल भेजा गया था जिसे वैश्विक मार्केट में घबराहट बढ़ गयी और इंट्राडे ट्रेडिग के दौरान डॉव 777.68 तक गिर गया था।

इस प्रचलित घबराहट की स्थिति के परिणाम निम्नलिखित हुए:

  • ब्राजील इबोवस्पा में 10% तक की गिरावट हुई।
  • लंदन के एफ़टीएसइ में 5.3% की गिरावट हुई।
  • सोने की क़ीमत बढ़कर $900 प्रति औंस हो गई।
  • तेल की क़ीमत गिर कर $95 प्रति बैरल हो गई।

अब वित्तीय स्थिरता को वापस लाने के लिए फ़ेड ने एक पहल की और यूरोप, इंग्लैंड और जापान सहित विभिन्न देशों के विदेशी केंद्रीय बैंकों के साथ मुद्रा स्वैप को दोगुना कर दिया।

अक्टूबर 2008

अक्टूबर 2008 में कांग्रेस ने बेलआउट बिल पारित किया।

जिसके बाद डॉव 800 अंक गिरा और 6 अक्टूबर, 2008 को 10,000 पर बंद हुआ।

फिर फेड ने फेड फंड की दरों को 1% तक कम कर दिया लेकिन लिबोर बैंक ने अपनी उधार दरों को 3.46% तक बढ़ा दिया। जिससे किसी तरह अर्थव्यवस्था को महीने के अंत तक अनुबंधित किया गया और साथ ही पूरे देश को मंदी का सामना भी करना पड़ा।

नवंबर 2008

नवंबर 2008 में प्रमुख वाहन निर्माताओ ने एआईजी $150 बिलियन की एक बड़ी संघीय खैरात के लिए कहा।

दिसंबर 2008

दिसंबर 2008 में डाव 8776.39 जो शुरुआत से 34% कम था।

2009

जनवरी 2009 में डॉव 9034.69 पर पहुंच गया और 24 जुलाई, 2009 तक डॉव अपने एक उच्च मूल्य पर पहुंच गया और 9093.24 पर बंद हुआ था जिसने स्टॉक मार्केट क्रैश 2009 को लगभग समाप्त कर दिया था।

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स्टॉक मार्केट क्रेश 2008 का ग्राफ 

स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 प्रतिकूल रूप से मार्केट की आथिक स्तिथि को लम्बे समय तक प्रभावित करता रहा। जैसे मार्च 2009 में एस एंड पी 500 अपनी सबसे कम क़ीमत पर बंद हुआ जबकि एस एंड पी 500 अपने 500 स्टॉक के साथ इंडेक्स के 1 नम्बर पर था।

उस समय के बाद 2009 की पहली तिमाही के दौरान स्टॉक सबसे निचले स्तर पर थे।

 

नीचे दिया गया चार्ट में NYSE की वर्ष 2008-09 के दौरान 52-सप्ताह के उतार चढ़ाव की पूरी सूची है। इस चार्ट में यह भी दर्शाया गया है कि अक्टूबर 2008 में एस एंड पी 500 अपने चरम पर था और मार्च 2009 में में अपने कम से कम मूल्य पर कैसे पहुँच गया।

stock market crash 2008

इसमें एस एंड पी 500 के अलावा और भी कई स्टॉक है जिनकी क़ीमत पूर्व के मुक़ाबले अब कम है। इसका एक उदाहरण नास्डैक 100 का है जो नवम्बर 2008 में अपनी सबसे कम क़ीमत पर पहुँच गया था।

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स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 के कारण

स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 विश्व की वित्तीय प्रणाली को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले सबसे बड़े झटकों में से एक था। यह कहने के पीछे कोई संदेह नहीं है, कि इस दु र्घटना ने बैंकिंग प्रणाली को समाप्ति की सीमा तक पहुँचा दिया था।

यह 2008 का क्रैश 29 सितम्बर, 2008 को हुआ था जब डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल औसतन 777.68 फ़ीसदी तक नीचे गिर गया था।

इस क्रैश की शुरूवात अमेरिका में हुई जो बाद में यूरोप में भी फैल गई थी जिसने यूरोप की कई वित्तीय फर्मों को बहुत बुरे तरीक़े से प्रभावित किया था।

17 नवंबर, 2006 को, अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने अक्टूबर में न्यू होम की अनुमति के बारे में चेतावनी के संकेत प्रस्तुत किए, जो कि एक साल पहले की तुलना में लगभग 28% कम थे।

हालांकि इसकी चेतावनी के संकेत स्पष्ट थे लेकिन कई अर्थशास्त्रियों ने उनकी अनदेखी की और मार्केट में अपनी गतिविधियों को जारी रखा।

और जब 15 सितंबर, 2008 को लेहमैन ब्रदर्स ने अपने दिवालिया होने के बारे में बताया तो उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने घोषणा की अब इनको कोई नही बचा सकता।

इसके साथ ही लगातार कई ऐसे कारण बने और घटनाएँ हुई जो स्टॉक मार्केट के इस क्रैश का कारण बनी।

 

स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 का मुख्य कारण 1999 में सबप्राइम मॉर्गेज मार्केट में शुरू हुई विस्फोटक वृद्धि है। हालांकि स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 के लिए सटीक कारक या कारण अभी भी एक रहस्य ही है, लेकिन कुछ सामान्य समझौते और घटनाओं के कारण इसको परिभाषित करते हैं।

इन दुर्घटनाओ के कुछ मुख्य कारण निम्मलिखित हैं :

  • फेडरल रिजर्व में हल्की मंदी

फेडरल रिजर्व सेंट्रल बैंक 2001 से ही एक हल्की मंदी का सामना कर रहा था। और मंदी के कारण मई 2000 से दिसंबर 2001 तक फ़ेडरल फ़ंडस क़ीमत 6.5 से घटकर 1.75 हो गई थी।

जिसकें बाद इसी कमी ने बैंको को कम प्राथमिक दर पर उपभोक्ता ऋण का विस्तार करने और सबप्राइम या उच्च जोखिम वाले ग्राहकों को उधार देने में सक्षम बनाया।

इस तरह के परिदृश्य ने बहुत से ऐसे ग्राहकों को आकर्षित किया जिनका क्रेडिट स्कोर कम था और वो पैसे उधार लेकर कुछ टिकाऊ वस्तुएँ मुख्य रूप से घर आदि ख़रीदना चाहते थे। जिसके कारण घर की दरों में बढ़ोतरी हो गई जिससे “हाउज़िग बबल” बन गया।

  • सबप्राइम ग्राहकों का कुछ गिरवी रख कर उन्हें ऋण देना

बैंको के बदलते परिदृश्य ने उन्हें ग़्राहको को सबप्राइम मोर्गिज ऋण की पेशकश करने में मदद की जो या तो बलून पेमेंट (बड़े भुगतान ऋण अवधि के ख़त्म होने तक या उसकी अंतिम तारिख निकट आने के कारण) या समायोज्य ब्याज दरों के साथ संरचित किया।

घरों की क़ीमतों में हुई वृधि ने विभिन्न विकल्पों द्वारा सबप्राइम उधारकर्ताओं को बढ़े हुए ऋण के भुगतान करने से बचाने में मदद की जैसे घरों के बढ़ी हुई क़ीमतों के अवज में उधार लेना या फिर अच्छे मुनाफ़े पर घर बेचना आदि।

ऐसे प्रचलित मामलों में बैंक आपकी गिरवी रखी सम्पत्ति को उसके मूल ऋण या उसकी तुलना में अधिक क़ीमत पर फिर से बेच सकता है।

इसने कई बैंको को ख़राब ऋण परिसंपत्तियों वाले ग्राहकों को सबप्राइम ऋण मार्केट में प्रोत्साहित किया है। क्यूँकि वे जानते थे कि वे ऋण चुकाने में सक्षम नहीं होंगे और वे उन्हें इसमें शामिल जोखिमों के साथ गुमराह कर सकते है।

बैंको की इन सभी गतिविधियो के परिणामस्वरूप 2004-2007 में सबप्राइम मॉर्गिज शेयर 2.5% से बढ़ कर 15% हो गया था।

  • सिक्यूरिटाइजेशन का व्यापक अभ्यास

सरल शब्दों में कहे तो सिक्यूरिटाइजेशन ग्राहकों द्वारा लिए गए विभिन्न प्रकार के ऋणो जैसे मोर्गिज और अन्य ऋणो को एक साथ इकेठा करके निवेशको को बॉंड के रूप बेचे जाने की एक प्रथा है।

यह ऐसे बॉंड होते है जिन्हें हम मॉर्गिज के तहत मॉर्गिज बैक्ट सिक्युरिटीज़ या फिर एमबीबीएस के रूप में जानते है।

इसमें सबप्राइम मॉर्गिज को ख़रीदना और बेचना एक अच्छा तरीक़ा माना जाता था।

सबप्राइम मॉर्गिज को बेचने की प्रक्रिया से मार्केट में लिक्विडिटी थोड़ी बढ़ी और जोखिम भरे ऋणो के जोखिम को कम किया, जबकि एमबीएसएस की ख़रीददारी ने बैंको की पैसा कमाने और पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद की।

घरों की बढ़ती क़ीमतों ने एमबीएसएस की प्रक्रिया को बहुत लोकप्रिय बना दिया था, जिसके अनुसार पूँजी मार्केट में भी उनकी वृद्धि हुई थी।

  • ग्लास-स्टीगल एक्ट (1933) का डिप्रेशन का दौर और नेट कैपिटल कमज़ोर पड़ना 

 2008 की दुर्घ टना का चौथा कारण डिप्रेशन-एरा और ग्लास स्टीगल एक्ट (1933) को पाया गया, जिसने बैंकों, सिक्युरिटी फर्मों और अन्य बीमा कंपनियों को एक-दूसरे के मार्केट में प्रवेश करने की अनुमति दी, जिसके परिणामस्वरूप बड़े बड़े बैंकों का गठन विफल होने लगा था।

इसके अलावा, 2004 में एसईसी, ने नेट कैपिटल की आवश्यकता को कमज़ोर करके बैंको को एमबीएस में अधिक धन निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया था।

हालाँकि एसईसी के द्वारा लिए गए निर्णयों से बैंको को भारी लाभ तो हुआ लेकिन इसने पोर्टफ़ोलियो में होने वाले एक महत्वपूर्ण जोखिम से भी अवगत कराया।

  • आर्थिक विकास में स्थिरता

लंबे समय से चली आ रही स्थिर आर्थिक स्थिति और ग्रेट-मॉडरेशन ने कई अमेरिकी अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों को आश्वस्त किया, जिससे नज़दीकी संकट के स्पष्ट संकेतों में छूट की बड़ी अनदेखी हुई थी।

इस प्रकार, सभी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने लापरवाह तरीक़े से ऋण देने, उधार लेने और प्रतिभूतिकरण की प्रथा को जारी रखी।


स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 के प्रभाव

  • बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत पर पहुंच गई

इसमें कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण सैकड़ों से हजारों नौकरियों का नुकसान हुआ जिसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी की दर 10 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।

  • कई बड़े वाहन निर्माता दिवालियापन की कगार तक पहुंच गए

जिसमें से तीन सबसे बड़े वाहन निर्माता अर्थात् जनरल मोटर्स कंपनी, क्रिसलर एलएलसी, फोर्ड मोटर है जो पूरे दिवालियापन के कगार पर थे।

इन तीनों में, दो नाम जनरल मोटर्स और क्रिसलर एलएलसी को फ़ेडरल सरकार द्वारा ख़रीद लिया गया था, जबकि फोर्ड मोटर कंपनी को टर्म एसेट-बैकेड सिक्योरिटीज लोन की सुविधा ख़ैरात में मिल गई।

  • घरों के काम की रफ़्तार कम होना

क्यूँकि घरों की क़ीमतें काफ़ी घट रही थी, इसलिए बिकने वालों घरों के मालिक ख़ुद को मॉर्गिज के उल्टी स्तिथि में पाए जा रहे थे। इस परिदृश्य में, कई लोगों को नौकरी के नुक़सान और मॉर्गिज भुगतान बढ़ने के कारण अपने घरों को खोना पड़ा।

  • आर्थिक विकास में गिरावट

घरों ने गिरते शेयरों के साथ साथ अपना मूल्य भी खोना शुरू कर दिया, जो कि प्रति अमेरिकी घराने में औसतन $100,000 का योगदान देते थे, धीमी आर्थिक विकास के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था लगभग $648 बिलियन तक पहुंच गई।

  • डॉव जोन्स निचले स्तर तक पहुंच गई

डॉव जोन्स 2009 की पहली तिमाही में अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया था। जिससे आकस्मिक भय की स्थिति बढ़ गई और आर्थिक गिरावट में तेजी आ गई


निष्कर्ष

2007 में हाउज़िग मार्केट को बहुत ही धीमी वृधि का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन फिर भी उस समय उत्पन्न हुए आसन्न मंदी के चेतावनी संकेतो को नज़रंदाज़ किया जा रहा था।

लेकिन जनवरी 2008 में विश्व बैंक ने इस स्थिति पर प्रकाश डाला जब क्रेडिट की कमी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होने लगी।

सीधा बोला जाए तो इस स्टॉक मार्केट क्रैश 2008 में लगातार होने बड़ी घटनाओं के अंत परिणामस्वरूप अमेरिका में कुछ सबसे बड़ी कंपनिया दिवालाया हो गयी।

इस वाक्य ने अलग-अलग आयु समूहों के हर दूसरे व्यक्ति को प्रभावित किया था और यहा तक की ये उनके सेवानिव्रत्ति फ़ंड्ज में घाटे का भी कारण बनी।

इस तरह के परिदृश्य को देखते हुए, निवेशकों के लिए अपने निवेश में विविधता लाना और बिना किसी जोखिम के शेयर मार्केट में निवेश करना सीखना बहुत महत्वपूर्ण है।


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