सेबी के कार्य

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानि सेबी(SEBI)  एक वैधानिक नियामक संस्था है जिसकी स्थापना 12 अप्रैल 1992 को हुई। सेबी का मुख्य कार्य यह है कि यह वित्तीय बाजार को मॉनिटर करे और निवेशक को निवेश के लिए सुरक्षित और पारदर्शी वातारण मुहैया कराए। 

हालांकि सेबी केवल एक रेगुलेटरी बॉडी के रूप में काम नहीं करती बल्कि यह भारत के वित्तीय बाजार के लिए एक अहम रोल निभाती है।

सेबी के कार्य इन हिंदी

सेबी के अधिकार की बात करें तो रेगुलेटरी बॉडी के पास वह सभी अधिकार है जिससे वह ट्रेडिंग, मार्जिन और ब्रोकर के कार्य को शुरू और रोक सकता है लेकिन इसके साथ सेबी के कार्यों को मुख्य रूप से तीन कैटेगेरी में बांटा जा सकता है..

  • सुरक्षात्मक कार्य
  • विकासात्मक कार्य
  • विनायमक कार्य

सेबी द्वारा निवेशक सुरक्षा उपाय

1.सुरक्षात्मक कार्य

सुरक्षात्मक कार्य के अंतर्गत सेबी वित्तीय बाजार में निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करता है। किसी भी वित्तीय बाजार में निवेशक सबसे अहम होते हैं इसलिए सेबी यह सुनिश्चित करती है कि निवेशक किसी भी ट्रेड धोखाधड़ी का शिकार न बने। 

इसके लिए सेबी नियमित अंतराल पर निवेशकों को जागररूक करने के लिए सेमिनार आयोजित करती है जिसके माध्यम से निवेशकों को उनके अधिकार के बारे में बताया जाता है। 

निवेशक अपने अधिकार के बारे में जानेंगे तो उनके साथ धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होगी।

सेबी में शिकायत कैसे करें?

 यदि निवेशक को किसी भी तरह की समस्या आ रही है तो वो आसानी से सेबी के वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा निवेशक टॉल फ्री नंबर 1800 266 7575 भी संपर्क कर सकते हैं।

पिछले 10 सालों की बात करें तो वित्तीय बाजार से जुड़ी धोखाधड़ी में कमी आई है। ये सेबी के सफलता की कहानी बयां करती है।

असीमित उतार-चढाव को नियंत्रित करना..

कॉर्पोरेट समूह द्ववारा लाए गए पूर्व नियोजित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना भी सेबी की जिम्मेदारी है जिससे निवेशकों को ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े। 

मीडिएटर के रूप में सेबी

सेबी फाइनेंशियल मीडिएटर के रूप में भी काम करती है। इसके अंतर्गत ये बाजार में हो रहे लेन-देन को मॉनिटर करती है और उसे सुरक्षित रूप से पूरा कराती है।

सेबी का विकासात्मक कार्य 

वित्तीय बाजार को सुचारू रूप से चलाने के लिए सेबी लगातार प्रयासरत रहती है। इसके लिए वो आवश्यकतानुसार नियमों में बदलाव, नए नियम आदि लाते रहती है। 

सेबी द्वारा किए गए इस प्रकार के कदमों की बात करें तो डीमैट अकाउंट की अनिवार्यता निवेशकों के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसके अलावा एक्सचेंज के माध्यम से आईपीओ की अनुमति देना भी एक बड़ा कदम है।

सेबी का निगरानी कार्य

कोई भी संस्था हो यदि उसे चलाने के लिए ठोस नियम और कानून न हो तो संस्थाएं बेलगाम हो जाती हैं। इसके लिए सेबी वित्तीय बाजार को रेगुलेट करती है। 

म्यूचुअल फंड के नियम पर सेबी की नजर

सेबी द्वारा लागू की गई गाइडलाइन को फाइनेंशियल मीडिएटर और कॉर्पोरेटर द्वारा मानना होता है। सभी स्टॉक ब्रोकर सेबी में रजिस्टर होते हैं। सेबी म्यूचुअल फंड के कामकाज और कंपनियों के अधिग्रहण को नियंत्रित करती है।


निष्कर्ष

इस प्रकार सेबी ट्रेडर और निवेशकों को वित्तीय बाजार में सुरक्षा के साथ-साथ पारदर्शिता प्रदान करती है जिससे निवेशक बिना डरे खुलकर अपने पैसों का निवेश कर सकते हैं। 

उन्हें यह विश्वास होता है कि उनके साथ कोई धोखाधड़ी नहीं होगी और अगर किसी तरह की धोखाधड़ी होगी भी तो उसके लिए सेबी मौजूद है।

इतना ही नहीं निवेशक डायरेक्ट सेबी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए आप यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि जहां आप अपना पैसा लगा रहे हैं वो सेबी पर पंजीकृत है या नहीं यदि नहीं तो फिर उससे दूर रहने में ही आपकी भलाई है।


अभी डीमैट अकाउंट खुलवाने के लिए नीचे दिए फॉर्म में अपनी जानकारी दर्ज करें।

यहाँ अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें और उसके बाद शीघ्र ही आपको एक कॉलबैक प्राप्त होगी।

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