इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर

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क्या आप सबसे अच्छे इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर  की तलाश कर रहे हैं? यहाँ कुछ ऐसे ट्रेडिंग इंडिकेटर हैं जो आपकी इस तलाश को पूरा कर सकते हैं।

लेकिन मार्केट में कई सारे इंडिकेटर है और इस वजह से ट्रेडर को नहीं पता लगता है कि कौन से इंडिकेटर उसके ट्रेड के लिए सही है और परिणामस्वरूप कई बार गलत इंडिकेटर के इस्तेमाल पर ट्रेड में नुकसान भी उठाना पड़ता है। 

इस प्रकार, एक ट्रेडर को इंट्राडे चार्ट, इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीतियों को बहुत सतर्कता के साथ इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, ताकि उन्हें उचित ट्रेडिंग इंडिकेटर पर इस्तेमाल किया जा सके।

जब आप इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं, तो ये सभी निर्णय बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

किसी भी इंट्राडे ट्रेडर को दी जाने वाली सबसे अच्छी टिप्स है कि वो हमेशा मार्केट ट्रेंड का पालन करे। 

फिर चाहे वह एक एक नौसिखिया या अनुभवी ट्रेडर हो, इसके लिए सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण ये सिखना होता है कि वो जिन सिक्योरिटीज में ट्रेड कर रहे हैं उनकी आने वाले समय में क्या कीमत होगी।

इंट्राडे ट्रेडर के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि बाजार कहां है या कहां जा रहा है।

यह तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करके किया जाता है।

टेक्निकल एनालिसिस एक ट्रेडिंग मैकेनिज्म है, जिसका इस्तेमाल सिक्योरिटीज के आगे के ट्रेंड का अंदाजा लगाने के लिए प्राइस मूवमेंट्स और वॉल्यूम के आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।

ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर शेयर बाजार की भविष्यवाणियां करने के लिए, इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर का उपयोग करते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर एक ऐसा टूल हैं जो ट्रेडर्स को अधिकतम रिटर्न देने के लिए ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी के साथ जोड़ कर उपयोग किए जाते हैं।

कुछ ट्रेडर एक साथ कई इंडिकेटर का उपयोग करते हैं, जबकि कुछ ट्रेडर कोई भी इंडिकेटर का उपयोग नहीं करते हैं।

हालांकि, हम आपको यही सलाह देंगे कि आप अपनी समझ से अपने लिए सबसे उचित और उपयुक्त इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर का ही उपयोग करें, जो आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगा।

ट्रेडिंग इंडिकेटर मार्केट ट्रेंड, मार्केट मोमेंटम, वॉल्यूम एनालिसिस के माध्यम से सिक्योरिटीज की लोकप्रियता और उन सिक्योरिटी में ट्रेडिंग करने के बाद होने वाले लाभ की संभावना के बारे में उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं।

ये इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर ट्रेडर्स को मार्केट के बारे में एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करता हैं।साथ ही ये ट्रेडर को बेहतर निर्णय लेने में मदद करते हैं जैसे किन सिक्योरिटीज में और कैसे ट्रेड करना चाहिए।

मार्केट में कई तरह के इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर उपलब्ध हैं। ये सभी इंडिकेटर अपनी ट्रेंड के समय सीमा के संदर्भ में एक अलग उद्देश्य प्रदान करते है।  

इसलिए, यह तय करना ट्रेडर के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय बन जाता है कि वह किस ट्रेडिंग इंडिकेटर का इस्तेमाल करना चाहता है।

हमेशा इंडिकेटर को सभी ट्रेडिंग रणनीतियों को अच्छे से समझने के बाद चुना जाना चाहिए जैसे वह कैसे काम करता है, वह किस तरह हिसाब करता है और वह हिसाब ट्रेडर के ट्रेडिंग करने के निर्णय को कैसे प्रभावित कर सकता है।

अब हम आपको सबसे अच्छे 10 इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर के बारे में बताएंगे, जिनका ज्यादातर उपयोग किया जाता है। 

इंट्रा डे ट्रेडिंग फॉर्मूला के रूप में भी आप इन इंडिकेटर का इस्तेमाल कर कर सकते हैं जो आपको ट्रेड सम्बन्धी सही जानकारी देगा।

इन इंडिकेटर का प्रयोग आप अकेले भी कर सकते हैं और कई इंडिकेटर को आपस में जोड़ कर भी कर सकते हैं।

इनका उपयोग आप कैसे कर सकते हैं वो निम्नलिखित है।


10 सर्वश्रेष्ठ इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर 

10 सर्वश्रेष्ठ इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर जो उपयोग किए जाते हैं, या तो अकेले या अन्य इंडिकेटर के साथ संयोजन के रूप में निम्नानुसार हैं:

मूविंग एवरेज

यह सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है। 

मूविंग एवरेज एक ऐसी सामान्य रेखा है जो किसी सिक्योरिटी के क्लोजिंग प्राइस को एक निश्चित अवधि के दौरान दर्शाती है। 

जैसे किसी सिक्योरिटी की सही दिशा को समझने के लिए औसत 100 दिन लगते हैं। 

इसे डे ट्रेडिंग फ्यूचर के लिए सर्वश्रेष्ठ इंडिकेटर में से एक माना जाता है, क्योंकि यह आपको उस स्टॉक की कीमत की पहचान करने में मदद करता है जिस पर आप ट्रेड करना चाहते हैं।

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यह अवधि जितनी लम्बी चलती है, हमारा किसी भी सिक्योरिटी की मूविंग एवरेज का अनुमान अधिक सटीक और भरोसेमंद हो सकता है।

यह ट्रेडर्स को करंट ट्रेंड की दिशा में ट्रेड के अवसरों का पता लगाने में मदद करता है और स्पष्ट तस्वीर देने के लिए बाजार की अस्थिरता को व्यापक रूप से एनालिसिस करता है।

यह मार्केट की पूरी जानकारी देता है जिसे जानना किसी भी इंट्राडे ट्रेडर के लिए बहुत महत्वपूर्ण और विशेष होता है। 

इसके माध्यम से ट्रेंड, रिवर्सल ऑफ़ ट्रेंड, स्टॉप लॉस और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस पॉइंट आदि का पता लगता है।

सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मूविंग एवरेज ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक कॉफमैन एडेप्टिव मूविंग एवरेज इंडिकेटर है।


मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स डाइवर्जेन्स (MACD)

MACD सबसे विश्वसनीय इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है। यह विशेषकर, मोमेंटम ट्रेडर के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। 

यह किसी भी सिक्योरिटी की मोमेंटम, ट्रेंड डायरेक्शन (रुझान की दिशा) और अवधि के बारे में जानकारी देता है। 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि MACD दो मूविंग एवरेज के कन्वर्जेन्स (Convergence) और डायवर्जेंस पर काम करता है। 

किसी भी दो मूविंग एवरेज के बीच का अंतर, जिसे आमतौर पर MACD स्प्रेड कहा जाता है, इसकी गणना 12 दिनों के EMA में से 26-Days EMA (एक्स्पोनेंशियल मूविंग एवरेज) घटाकर की जाती है। 

यह अंतर एक MACD लाइन को बनाने में मदद करता है। 

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MACD स्प्रेड का पॉजिटिव वैल्यू अपवर्ड ट्रेंड को दर्शाना होता है जबकि इसकी नेगेटिव वैल्यू डाउनवार्ड ट्रेंड को दर्शाती है, और इन दोनों का अंतर ही ट्रेंड की ताकत को दर्शाता है। 

सिग्नल लाइन 9-दिन EMA का इस्तेमाल करके भी बना सकते हैं।  

जब MACD लाइन इंडिकेटर रेखा से ऊपर चली जाती है तो खरीदने का संकेत (Buy Signal) उत्पन्न होता है। जब MACD लाइन सिग्नल लाइन से नीचे चली जाती है तो बेचने का संकेत (Sell Signal) उत्पन्न होता है।


बोलिंगर बैंड

बोलिंगर बैंड या BB सबसे उपयोगी ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है। बोलिंगर बैंड अधिक खरीदे गए (Overbought) और अधिक बेचे गए (Oversold) स्तर को निर्धारित करने में मदद करता है। 

इसमें तीन बैंड होते हैं:

  • मिडिल बैंड, जो 20 दिन के SMA पर होता है।
  • अपर बैंड, जो +2 स्टैंडर्ड डेविएशन पर होता है। 
  • लोअर बैंड, जो -2 स्टैंडर्ड डेविएशन पर होता है।

सामान्य रूप से सिक्योरिटीज की कीमत अपर बैंड और लोअर बैंड के अंतर्गत ही बढ़ती है।

जब मार्केट में वोलैटिलिटी ज्यादा होती है तो बैंड बढ़ जाता है और वहीं दूसरी ओर जब मार्केट में वोलैटिलिटी कम होती है तो बैंड के बीच का अंतर भी कम हो जाता है। 

इंट्राडे टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार, बोलिंगर बैंड का इस्तेमाल करके हम लगभग 80% तक सफलता प्राप्त कर सकते हैं। 

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इस रणनीति का इस्तेमाल तब किया जाता है जब सिक्योरिटीज की क़ीमत अपर बैंड के क़रीब होती है,जिससे सिक्योरिटीज महँगी हो जाती है और इसके इस्तेमाल से हम उन्हें उसी एवरेज पर वापिस लाने की कोशिश करते हैं। 

इस प्रकार, सिक्योरिटीज को मीडियम बैंड के प्राइस के लक्ष्य के साथ अपर बैंड के प्राइस पर बेचा जा सकता है या फिर 20 दिन के SMA पर। इसी तरह जब सिक्योरिटीज की कीमत लोअर बैंड के नजदीक हो तो सिक्योरिटीज सस्ती हो जाती है और फिर इसका इस्तेमाल करके उन्हें उसी एवरेज पर पहुँचने की कोशिश की जाती है, जिसे सिक्योरिटीज को मीडियम बैंड के मूल्यों के लक्ष्य के साथ लोअर बैंड के मूल्य पर खरीदा जा सके।


रिटेलिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI):

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI), ट्रेडिंग का एक ऐसा इंडिकेटर है जो कम कीमत और अधिक कीमत पर बेचने की अवधारणा का पालन करता है। 

यह ट्रेडिंग का सबसे आसान और उपयोगी इंडिकेटर है जो बताता है कि कब सिक्योरिटीज अधिक खरीदी गयी या कब अधिक बेची गयी या फिर कब इसका उल्टा हुआ। 

RSI अलग-अलग समय के अनुसार तय किया जा सकता है और इसकी वैल्यू 0 से 100 तक के बीच की वैल्यू हो सकती है। 

जिसमें 0 अधिक बेचने और 100 अधिक खरीदने का संकेत देता है। इनके बीच का मूल्य अपेक्षित ट्रेंड को दर्शाता है।

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यदि RSI का मूल्य 30 से कम है तो स्टॉक के ऊपर जाने की उम्मीद है और यदि RSI का मूल्य 70 से अधिक है तो शेयर घटने की उम्मीद है।RSI एक उत्कृष्ट मोमेंटम इंडिकेटर है और यदि किसी सिक्योरिटीज का मूल्य 30 या 70 तक के स्तर पर पहुँच जाता है तो ट्रेडर को सतर्क किया जाता है कि वो अपने ट्रेड को एक समान दिशा में थोड़ा रोक के रखे।


एडवांस-डिक्लाइन लाइन:

एडवांस-डिक्लाइन लाइन ट्रेडिंग के विस्तृत रूप से दिखाने वाले इंडिकेटर में से एक है। 

यह मार्केट सेंटीमेंट के आधार पर विश्लेषण करता है और नेट एडवांस की गणना करता है, जो एडवांस स्टॉक की संख्या और डिक्लाइन स्टॉक की संख्या के बीच का अंतर होता है।

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अगर एडवांस स्टॉक की संख्या डिक्लाइन स्टॉक से अधिक हो तो नेट एडवांस हमेशा पॉजिटिव होते हैं और अगर ना हो तो इसका उल्टा भी हो सकता है। 

एक Advance-Decline प्लॉट की जाती है और फिर मार्केट की बुलिश और बेयरिश डाइवर्जेन्स को देखा जाता है।

एक डाइवर्जेन्स किसी भी शेयर की भागीदारी में परिवर्तन दिखा कर उसके ट्रेंड रिवर्सल की भविष्यवाणी कर सकता है।


एवरेज डायरेक्शन इंडेक्स (ADX):

ADX भी इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है, जो न केवल ट्रेंड के बारे में जानकारी देता है, बल्कि ट्रेंड की ताकत के बारे में भी जानकारी देता है। 

यह इसकी एक महत्वपूर्ण खूबी है, क्योंकि एक बार ट्रेंड की ताकत ज्ञात हो जाने के बाद, एक मज़बूत ट्रेडर अपनी ट्रेडिंग की दिशा सुनिश्चित करके ट्रेडिंग में होने वाले नुकसान और जोखिमों को कम करके अपने लाभ कमाने की क्षमता को बढ़ा सकता है। 

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ADX प्लस डायरेक्शनल इंडिकेटर (+DI) और माइनस डायरेक्शनल इंडिकेटर (-DI) का उपयोग करता है, जो एवरेज को समझने में आसान करता है। 

इन दोनों के बीच का अंतर एवरेज डायरेक्शन इंडेक्स प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ADX 0 से 100 तक के बीच का मूल्य होता है और ट्रेंड की ताकत को दर्शाता है।


स्टोकेस्टिक ओसीलेटर (Stochastic Oscillator):

स्टोकेस्टिक ऑसीलेटर, ट्रेडिंग के मोमेंटम इंडिकेटर में से एक है। यह किसी सिक्योरिटीज के क्लोजिंग प्राइस की तुलना एक निश्चित अवधि के दौरान आए उसके सभी मूल्य के साथ करता है।

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स्टोकेस्टिक ऑसीलेटर प्राइस या वॉल्यूम का पालन नहीं करता है। इसके बजाए, यह मोमेंटम का पालन करता है,जो एक उपयोगी इंडिकेटर के रूप में कार्य करता है क्योंकि प्राइस से पहले मोमेंटम की दिशा बदलती है।

यह एक रेंज-बाउंड इंडिकेटर भी है, इसलिए इसका उपयोग अधिक खरीदी गई (Overbought) और अधिक बिकने वाली (Oversold) सिक्योरिटीज के बारे में जानकारी देने के लिए भी किया जाता है।


सुपरट्रेंड

सुपरट्रेंड ट्रेडिंग करने का एक उत्कृष्ट इंडिकेटर है जो मार्केट के रुझान के अनुसार सिक्योरिटीज को खरीदने के लिए स्पष्ट संकेत देता है। 

यह मूविंग एवरेज की तरह कीमतों का अनुसरण करता है, और लाइन का प्लेसमेंट करंट ट्रेंड को दर्शाता है।

यह दो मापदंड के अनुसार बना है: पीरियड और मल्टीप्लायर, और एवरेज ट्रू रेंज (Average True Range) का उपयोग करता है, जो इसकी मूल्य की गणना और प्राइस वोलैटिलिटी के स्तर को दर्शाता है। 

इसीलिए, अवधि ATR दिनों की संख्या होता है और गुणक वह मूल्य होता है जिसके द्वारा ATR को गुणा किया जाता है।

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जब सुपरट्रेंड क्लोजिंग प्राइस से ऊपर बंद हो जाता है तब एक खरीद संकेत (बाय सिग्नल) उत्पन्न होता है और जब यह क्लोजिंग प्राइस से नीचे बंद होता है तो सेल सिग्नल उत्पन्न होता है।


कमोडिटी चैनल इंडेक्स:

कमोडिटी चैनल इंडेक्स (CCI) कमोडिटी मार्केट में उपयोग होने वाला सबसे उपयोगी इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है। 

हालांकि, इसका इस्तेमाल शेयर मार्केट में भी किया जा सकता है। 

यह नए रुझानों की पहचान करने में मदद करता है और साथ ही गंभीर स्थितियों के बारे में चेतावनी भी देता है जिससे की निवेशक अपना नुकसान को काम कर सकते हैं ।

यह वास्तव में सिक्योरिटीज के मूल्य परिवर्तन और उसके परिवर्तन के बीच के अंतर को मापता है और इसमें 0, +100 और -100 के मूल्य होते हैं।

यदि CCI की वैल्यू पॉजिटिव होती है, तो वह शेयरों के अपट्रेंड की ओर संकेत करता है। इसी प्रकार, जब CCI की वैल्यू नेगेटिव होती है तो वह शेयरों के डाउनट्रेंड की ओर संकेत करता है।

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CCI को आमतौर पर ओवरसोल्ड सिक्योरिटीज और ओवरबॉट सिक्योरिटीज की स्थितियों पर जानकारी प्राप्त करने के लिए RSI के संयोजन के साथ प्रयोग किया जाता है। 

CCI की गणना विभिन्न समय और अवधि के अनुसार की जा सकती है, क्योंकि CCI बहुत अस्थिर होता है।


ऑन-बैलेंस वॉल्यूम (OBV):

OBV भी इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर में से एक है। 

यह सिक्योरिटीज के मूल्य में होने वाले परिवर्तन की भविष्यवाणी करने के लिए वॉल्यूम फ्लो का इस्तेमाल करता है। 

OBV अप-डे (Up Days) में वॉल्यूम को जोड़ता है, जबकि डाउन डे (Down Days) में मूल्यों को घटाता है जिससे हम खरीदने और बेचने के क्षमता को माप सकते हैं।

यदि सिक्योरिटीज का क्लोजिंग प्राइस पूर्व में होने वाले क्लोजिंग प्राइस से ऊपर है तो वर्तमान OBV पिछले OBV और उसकी वर्तमान वॉल्यूम का योग होता है। 

यदि सिक्योरिटी का क्लोजिंग प्राइस प्री-क्लोजिंग प्राइस से नीचे है तो वर्तमान OBV पिछले OBV और उसकी वर्तमान वॉल्यूम के बीच का अंतर है।

यदि क्लोजिंग प्राइस प्री क्लोजिंग प्राइस के समान ही है तो वर्तमान OBV पिछले OBV जैसा ही है।

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इसी प्रकार, मार्केट में विभिन्न प्रकार के टेक्निकल इंट्राडे ट्रेडिंग इंडिकेटर उपलब्ध हैं। 

लेकिन, ट्रेडर उनमें से प्रत्येक इंडिकेटर से क्या प्राप्त करते हैं और उनका संयोजन किस ट्रेडिंग रणनीति साथ करते है ये उनके फैसले पर निर्भर करता है।

हालाँकि, ट्रेडिंग में एक समय में केवल एक या दो टेक्निकल इंडिकेटर का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। 

अधिक जानकारी आपके निर्णय को अधिक जटिल और गलत बना सकती है।

यदि आप ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं, तो नीचे दिए फॉर्म में अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। 

जानकारी दर्ज करने के बाद, आपको शीघ्र ही हमारे बैकेंड टीम से कॉलबैक प्राप्त होगा। 

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