Option Trading Rules in Hindi

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बहुत से लोग सोचते हैं कि ऑप्शन ट्रेडिंग एक ऐसी चीज है जहां कोई भी आसानी से लाभ कर सकता है। पर वास्तविकता यह है कि अधिकतर लोग ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरुआती तीन महिनो में ही अपना 90% पैसा गवां देते हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण होता है ऑप्शन ट्रेडिंग के नियमों (option trading rules hindi) का पालन न करना। 

ऑप्शन ट्रेडिंग में सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है कि नए ऑप्शन ट्रेडर – और यहां तक कि अधिक अनुभव वाले भी – ऑप्शन ट्रेडिंग की कम समझी जाने वाली वास्तविकताओं को समझें।

सफल ऑप्शन ट्रेडर अविश्वसनीय रूप से अनुशासित होते हैं। वे उस नियम का पालन करते हैं जिसे मैं Option Trading Rules कहता हूं: नए ऑप्शन ट्रेडर पैसा बनाने के तरीकों के बारे में सोचते हैं। अनुभवी ट्रेडर पैसे न खोने के तरीकों के बारे में सोचते हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग के नियम 

एक ऑप्शन ट्रेडर के लिए ज़रूरी है की वह ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करते हैं उसकी पूरी प्रक्रिया को समझे लेकिन उसके साथ ज़रुरत है ट्रेड कर सही लाभ कमाने की जिसक लिए ऑप्शन ट्रेडिंग के नियमों का पालन करना काफी ज़रूरी हो जाता है।

नीचे दिए गले नियमो को समझे और ऑप्शन ट्रेडिंग करते हुए इनका सही से पालन करें

1. पोजीशन साइजिंग

सबसे पहले आपको यह समझना जरूरी है कि कितने पैसों से ट्रेड किया जाए क्योंकि जो नए ट्रेडर शेयर बाजार में आते हैं वह ऑप्शन को स्टॉक की तरह ट्रीट करते हैं जिसकी वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

अगर आपको लगता है कि कोई स्टॉक ऊपर जाने वाला है तब आप उसे एक्टिविटी में ना करके खरीदकर उसका ऑप्शन खरीद लेते हैं फिर अगर वो स्टॉक ऊपर भी चला जाता है लेकिन धीरे-धीरे तब भी आप मार्केट से पैसा नहीं बना सकते।

क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग में टाइम आपका सबसे बड़ा दुश्मन है, ऑप्शन खरीदते समय आप तभी पैसा बना सकते हैं जब वह कम समय में आपकी डायरेक्शन में चला जाए। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी पोजीशन साइजिंग को कम रखें यानी जितना नुकसान आप ले सकते हैं उसी पोजीशन साइजिंग में ट्रेड करे। 

अगर आप ज्यादा पैसो के साथ ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरुआत करते है तो इसका मतलब है कि आप कुछ ही महीनों में पूरी पूंजी को उड़ा देंगे और दुख की बात यह है कि 6 महीने के भीतर ज्यादातर ऑप्शन ट्रेडर अपने पैसे को गंवा देते हैं। इसलिए, यह जानना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक ट्रेड में क्या पोजीशन साइजिंग होनी चाहिए।

पोजीशन साइजिंग निर्धारित करने से पहले, एक ट्रेडर को पहले एक जो वो ट्रेड लेने बाला है उसका स्टोप लोस (stop loss meaning in hindi) क्या होगा और कहां पर अपनी ट्रेड निकालनी है तब वह अपने रिस्क के अनुसार पोजीशन साइजिंग करे। एक ट्रेडर के लिए, स्टॉप लेवल उन्हें जोखिम का निर्धारण करने में मदद करता है; आपके कैपिटल के आकार के आधार पर, आपको एक ट्रेड में  1% से 3% से ज्यादा जोखिम नही उठाना चाहिए।


2. इंवेट्स पर ट्रेड करने से बचें

एक और सामान्य गलती उन इंवेट्स पर ट्रेड करना है जहां परिणाम अज्ञात हैं, जो जुए के बहुत करीब है। याद रखें कि अधिकांश लोग कसीनो में हार जाते हैं क्योंकि वे जुआ खेलने और मौज-मस्ती करने के इरादे से प्रवेश करते हैं।

यदि आप अपनी ट्रेडिगं को एक व्यवसाय की तरह मानते हैं, तो आप कभी भी ऐसे ट्रेड में प्रवेश नहीं करना चाहेंगे जो जुआ की ओर ले जाए। इसलिए, मॉनिटरी पॉलिसी (Monetary policies), आने बाले स्टोक्सके परिणाम (Upcoming Stock Results), फिसकल पॉलिसी (Fiscal policies) आदि जैसे इंवेट्स के दिनों से बचना आम तौर पर एक अच्छा विचार है। इन इंवेट्स में, भले ही आपकी भविष्यवाणियां सही हों, फिर भी आप अस्थिरता (Volatility) से हार सकते हैं।


3. ऐसे स्टोक्स में ट्रेड करने से बचे जो न्युज में हो

अक्सर नए निवेशक सुने हुए ट्रेडिंग यानी ऐसे शेयरों में ट्रेड करने लगते हैं जो खबरों में रहते हैं। आम तौर पर, जैसा कि न्यूज़ चैनल पर बताया जाता है या उस स्टोक पर कोई बड़ी न्यूज़ है जो सकारात्मक भी सकती है और नकारात्मक भी हो सकती है।

अगर आप ऐसे स्टोक्स में ट्रेड करेंगे तो आपने जो ऑप्शन खरीदते समय प्रीमियम दिया उसकी वैल्यू बहुत तेजी से कम होने लगेगी क्योकि वो स्टोक न्यूज़ में है इस वजह से उसमें Volatility ज्यादा होगी। तो इस लिए ऐसे स्टोक्स से में ट्रेड न करे। 


4. होल्डिंग अवधि निर्धारित करना 

जब भी हम किसी भी स्टोक या इंडेक्स में ट्रेड करते है तब हमें पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि हम किस एक्स्पायरी को चुन रहे है। आपको सबसे पहले ये पता होना चाहिए की आप इंट्राडे ट्रेड करने वाले है या पोसिशनल ट्रेडिंग।

क्योकि जब भी आप ऑप्शन खरीदते है तो जैसे – जैसे वह ऑप्शन अपनी एक्स्पायरी के नजदीक जाता है उसकी वैल्यू थीटा डिके (Thetha Decay) के कारण कम होने लगती है और ऑप्शन जितना एक्स्पायरी के नजदीक होगा उतनी ज्यादा तेजी से ऑप्शन की कीमत कम होने लगेगी। इसलिए जब भी आप ऑप्शन खरीदे एक्स्पायरी से दूर का ऑप्शन खरीदे।

इससे  थीटा डिके (Thetha Decay) धीरे–धीरे होगा और आपको ऑप्शन ट्रेडिंग में ज्यादा जोखिम नही उठाना पड़ेगा।

और ऑप्शन ट्रेड्स बेहद कम अवधि के होने चाहिए इसलिए ब्रेकआउट/ब्रेकडाउन जोन में भाग लेना और ट्रेड से जल्दी बाहर निकलने चाहिए जिससे हमें ज्यादा थीटा डिके (Thetha Decay) का सामना न करना पड़े।


5. एक साथ ज्यादा ट्रेड न रखे

एक साथ कई ट्रेडों को मैनेज करना एक मुश्किल काम है, इसलिए ट्रेड लेने से पहले हमेशा खुद से पूछें कि क्या कोई ओपन ट्रेड है जिसे बदला जा सकता है? यदि हाँ, तो सबसे पहले उसे बदलने की कोशिश करे।

मेरा ये मानना है कि आपको एक साथ 2–3 ट्रेड से ज्यादा नही रखना चाहिए क्योकि उन्हे मैंनेज करने में दिक्कत होती है और कभी–कभी सही से मैंनेज न करने की बजह से हमें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 


6. जोखिम का प्रबंधन करने में सक्षम हो 

ऑप्शन ज्यादा जोखिम भरे होते हैं, और ट्रेडर्स के लिए यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि किसी भी समय उनके पास कितना जोखिम है। एक ट्रेड का अधिकतम नकारात्मक पहलू क्या है? अपनी ट्रेड पोजीशन साइजिंग को जाने?  आप कितनी पूंजी ट्रेड के लिए आवंटित कर रहे है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो ट्रेडर्स को हमेशा अपने मन में रखना चाहिए।

एक ऑप्शन ट्रेडर को भी एक धन प्रबंधक होना चाहिए। उन्हें अपनी पूंजी का बुद्धिमानी से उपयोग करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, अपनी पूंजी का 90% एक ही ट्रेड में लगा देना बुद्धिमानी नहीं होगी। आप जो भी ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीति (option trading strategy in hindi) अपनाएं, जोखिम प्रबंधन और धन प्रबंधन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


7. अनुशासन रखें 

सफल होने के लिए, ऑप्शन ट्रेडर्स को अनुशासित होना चाहिए। ट्रेड लेने से पहले अच्छे से अनलिसिस करना, अवसरों की पहचान करना, सही ट्रेड में एंट्री करना, रणनीति बनाना और उस पर टिके रहना, लक्ष्य निर्धारित करना और बाहर निकलने की रणनीति बनाना सभी अनुशासन का हिस्सा हैं।

अनुशासन से भटकने का एक सरल उदाहरण झुंड का अनुसरण करना है। अपनी खुद की रिसर्च किए बिना कभी भी किसी राय पर भरोसा न करें। आप अपनी खुद की रिसर्च करते नही और फिर मार्केट को दोष देते हैं। इसके बजाय, आपको एक स्वतंत्र ट्रेडिंग रणनीति तैयार करनी चाहिए जो एक सफल ऑप्शन ट्रेडर बनने में आपकी मदद करे।


8. रिकॉर्ड बनाए रखें

सबसे सफल ऑप्शन ट्रेडर अपने ट्रेडों का रिकॉर्ड रखते हैं। कि कव किया ट्रेड लिया, कितना नुकसान हुआ, कितना लाभ हुआ, ट्रेड क्यो किया, इस ट्रेड में अधिक जोकिम कितना था, क्या गलती की इस ट्रेड में और क्या सुधारने की जरुरत है।

रिकॉर्ड बनाए रखने से आपको अपनी गलतियों का पता लगता है कि आप कहां गलती कर रहे है। आपकी मदद करने के लिए उचित ट्रेड रिकॉर्ड बनाए रखना एक आवश्यक आदत है। आपके ट्रेड रिकॉर्ड का इतिहास भी आपकी सफलता की संभावना को बेहतर बनाने में आपकी मदद करता है।

टॉप ऑप्शंस ट्रेडर्स को अपने ट्रेडों की खोज करने और देखने से रोमांच मिलता है। निश्चित रूप से, आपको ऐसा नहीं करना है कि खेल देखे बिना ही सिर्फ स्कोर देखकर संतुष्ट हो जाएं, खेल प्रशंसकों की तरह, ऑप्शंस ट्रेडर्स को पूरे खेल को देखने में आनंद आता है, न कि केवल अंतिम स्कोर का पता लगाना।

ये विशेषताएँ ऑप्शंस ट्रेडिंग की दुनिया में आपकी सफलता की गारंटी नहीं देंगी, लेकिन ये निश्चित रूप से आपके अवसरों को बढ़ा देंगी। 


निष्कर्ष

ऑप्शन ट्रेडिंग आपको कम समय में हर तरह की मार्केट में लाभ कमाने का मौका देती है, बस ज़रुरत है तो हर एक पहलू को सही से समझना और ऑप्शन ट्रेडिंग टिप्स को फॉलो करना

तो अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग कर रहे है तो ये ध्यान रखें ज़रूरी है की क्या आप ऑप्शन ट्रेडिंग के नियमो (option trading rules hindi) का पालन कर रहे है। अगर नहीं आज ही अपनी ट्रेड रणनीतियों में इन नियमों को शामिल करे और ज़्यादा मुनाफा कमाए।


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