Positional Trading Meaning in Hindi

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के बारे में और भी

क्या आप शेयर मार्केट में लॉन्ग-टर्म ट्रेडिंग करना चाहते हैं? अगर आप भविष्य के लिए बेहतर मुनाफा कमाना चाहते हैं तो पोजिशनल ट्रेडिंग (Positional Trading Meaning in Hindi) एक उपयुक्त विकल्प है।

पोजिशनल ट्रेडिंग आपको इंट्राडे ट्रेडिंग की परेशानी के बिना शेयर मार्केट में निवेश करने में मदद करता है। 

लेकिन आपको पता होना चाहिए कि कोई भी ट्रेडिंग रिस्क फ्री नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसी रणनीतियां हैं जिनका पालन करके आप ट्रेडिंग रिस्क को कम कर सकते हैं।

इस पोस्ट में, आप Positional Trading Meaning in Hindi के बारे में समझ पाएंगे। साथ ही, यह पता लगाएंगे कि यह किस तरह के ट्रेडर या निवेशक के लिए उपयुक्त है। 

चलिए, जानते हैं कि पोजिशनल ट्रेडिंग क्या है?


What is Positional Trading in Hindi 

पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां ट्रेडर, स्टॉक्स को एक लम्बे समय तक होल्ड करके रख सकता है। 

इस सेगमेंट में आप शेयर को कुछ हफ़्तों, कुछ महीनों और ज्यादा से ज्यादा 1 साल तक अपने डीमैट खाते में होल्ड करके रख सकते हैं और फिर उन्हें बेच कर प्रॉफिट कमा सकते हैं।

इस ट्रेडिंग में ट्रेडर, स्टॉक में लॉन्ग और शॉर्ट टर्म के लिए उन्हें लगभग दो सप्ताह से लेकर लगभग एक वर्ष तक भी रख सकते हैं।

Positional Trading Meaning in Hindi को विस्तार से एक उदाहरण की मदद लेते हैं।

मान लीजिये किसी कंपनी के शेयर की करंट वैल्यू ₹1200 रुपये है। 

अब आपने उस कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस किया और आपको लगता है कि ये शेयर आने वाले 6 से 8 महीनों के अंदर ₹1300 रुपये तक जा सकता है।

इस स्थिति में, अगर आपने शेयर Buy कर लिया और 8 महीने बाद Sell कर दिया तो इसे ही पोजिशनल ट्रेडिंग (Positional Trading in Hindi) कहते हैं। 


क्या पोजिशनल ट्रेडिंग आपके लिए सही है ?

शेयर मार्केट में लगातार ट्रेडिंग करने के लिए एक “रणनीति” जरूरी है जो आपके व्यक्तित्व और लाइफस्टाइल को मैच कर सके।

यदि आप नौकरी, अपने परिवार, या किसी अन्य कारण से अपनी ट्रेडिंग के लिए ज्यादा समय नहीं बीता सकते हैं, तो पोजिशनल ट्रेडिंग आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

डे-ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग की तुलना में, पोजिशनल ट्रेडिंग में एक ट्रेडर के पास अपने फैसले लेने के लिए उपयुक्त समय होता है।

इसलिए, यदि आप अधिक तनाव की स्थिति में ट्रेड नहीं करना चाहते तो पोजिशनल ट्रेडिंग का विकल्प चुन सकते हैं।

पोजिशनल ट्रेडिंग आपके लिए सही है या नहीं, इस बात का अंदाजा लगाने में आपकी मदद करने के लिए कुछ रणनीतियाँ दी गई है।


पोजिशनल ट्रेडिंग बनाम इन्वेस्टमेंट 

एक नए इन्वेस्टर के लिए इन्वेस्टमेंट और पोजिशनल ट्रेडिंग एक जैसे ही लग सकते हैं। दोनों में लंबे समय के लिए स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट की उम्मीद की जाती है।

इन्वेस्टिंग में यह अंतर है कि इसमें निवेशक कई वर्षों तक स्टॉक को होल्ड करके रखना चाहते हैं और शेयर की कीमत बढ़ने के साथ डिविडेंड और कैपिटल प्रॉफिट कमाते हैं।

इसके अलावा, इन्वेस्टिंग में निवेशक को हर हफ्ते स्टॉक प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव की भी चिंता नहीं होती। अधिक जानकारी के लिए, शेयर मूल्य क्यों बदलते हैं की समीक्षा पढ़ सकते हैं। 

वहीं दूसरी ओर, एक पोजिशनल ट्रेडर स्टॉक प्राइस पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है। अगर स्टॉक उनके अनुसार नहीं चलता है तो वे जोखिम कम करने के लिए स्टॉप-लॉस का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही आप जान सकते हैं कि Stop Loss Kaise Lagaye?

निवेशक कंपनी के फंडामेंटल विश्लेषण पर अधिक भरोसा करते हैं, वहीं पोजीशनल ट्रेडर चार्ट पर अधिक भरोसा करते हैं।

क्या आप भी पोजीशन ट्रेडर और इन्वेस्टिंग के बीच निर्णय लेने की कोशिश कर रहे हैं?

आपको पता होना चाहिए कि पोजिशनल ट्रेडिंग में आप संभावित रूप से अपने जोखिम को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकते हैं। 

लेकिन इसके लिए आपको अपने स्टॉप-लॉस स्तर की जांच करने के लिए एक्स्ट्रा टाइम लगेगा।


पोजिशनल ट्रेडिंग बनाम स्विंग ट्रेडिंग

स्विंग ट्रेडिंग में आप स्टॉक्स को Buy और Sell करते हैं और अपनी पोजीशन को कुछ दिनों से कुछ हफ़्तों तक होल्ड करके रख सकते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग की रणनीतियां और तकनीक, पोजिशनल ट्रेडिंग के समान ही है। यहाँ ट्रेडर एंट्री और एग्जिट के लिए एक जैसे इंडिकेटर और चार्ट पैटर्न का उपयोग करते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि यह आपको पूरे वर्ष में अधिक स्विंग ट्रेडिंग सेटअप की अनुमति देती है। 

लेकिन पोजिशनल ट्रेडिंग में आपके कैपिटल को अन्य शेयरों के साथ लॉन्ग टर्म के लिए नहीं रखा जा सकता।

स्विंग ट्रेडिंग में एक कमी यह है कि इसमें स्टॉक को हर रोज चेक करना पड़ता है।


पोजिशनल ट्रेडिंग बनाम डे-ट्रेडिंग

डे ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है, जहां आप एक ही ट्रेडिंग सेशन के अंदर अपने ट्रेड को एक्सीक्यूट करके अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करना होता है।

यहां, आप सुबह में एक शेयर खरीदते हैं, फिर दोपहर के बाद जैसे ही आपके ट्रेड की कीमत 10% से 20% तक बढ़ती है तो आप इसे बेच सकते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग में हाई रिस्क के साथ-साथ परेशानी भी बहुत ज्यादा होती है। 

ट्रेडिंग से संबंधित किसी भी काम के लिए आपको वहां मौजूद होना जरूरी है। लेकिन ऐसा करना हर ट्रेडर के लिए संभव नहीं है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में वोलैटिलिटी बहुत है इसलिए इस रणनीति के लिए आपको सही निर्णय लेने की जरूरत है।


Position Trading Strategy in Hindi 

पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए कुछ रणनीतियां है, तो चलिए उन पर एक नज़र डालते हैं:

  • फंडामेंटल एनालिसिस

यदि आप किसी कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि आप देखें कि वह कंपनी क्या काम करती है। 

यह सब आप, कंपनी की अर्निंग रिपोर्ट, फाइनेंशियल रिकॉर्ड, सीईओ कमैंट्स, एसईसी फाइलिंग आदि से जान सकते हैं।

कंपनी की इन बुनियादी बातों से आप यह जान सकते हैं कि किसी कंपनी की परफॉर्मेंस, उसका प्रॉफिट क्या है और आगे चलकर वह कैसी रहेगी।

फंडामेंटल एनालिसिस, ट्रेडर्स को यह तय करने में भी मदद कर सकता है कि क्या स्टॉक प्राइस सही है?

यह जानने से ट्रेडर्स को मदद मिलेगी कि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर क्या सोच रहे हैं, और वे स्टॉक को कहां से खरीद या बेच सकते हैं।

एक फंडामेंटल एनालिस्ट बनने के लिए शेयर मार्केट की सही जानकारी हासिल करें।

  • टेक्निकल एनालिसिस

तकनीकी विश्लेषण का मतलब है किसी स्टॉक के प्राइस और मूवमेंट को स्टॉक चार्ट पैटर्न के द्वारा एनालाइज़ करना।

शेयर मार्केट चार्ट को पढ़ने के लिए आप एक चार्ट देख सकते हैं और जान सकते हैं कि स्टॉक अपट्रेंड या डाउनट्रेंड में है या नहीं। 

आप चार्ट्स को सिंपल पैटर्न से मुश्किल इंडिकेटर में पढ़ सकते हैं। यहाँ पर एक टिप्स दी गई है – KISS यानी Keep it Simple, Stupid. इसका मतलब है इसे आसान ही रखो।

अधिकतर ट्रेडर, मजबूत और सरल तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करते हैं।

तकनीकी विश्लेषण, बहुत वर्षों से है और उस समय में, हजारों चार्ट पैटर्न और ट्रेडिंग इंडिकेटर विकसित किए गए हैं।


पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए स्मार्ट टाइम फ्रेम

कई ट्रेडर्स ने चार्ट टाइम फ्रेम से संबंधित करके ट्रेडिंग स्टाइल पर चर्चा की।

उदाहरण के लिए, डे ट्रेडर पांच-मिनट के चार्ट को देखते हैं, स्विंग ट्रेडर एक-घंटे के चार्ट को देखते हैं, पोजीशन ट्रेडर, दैनिक-चार्ट को देखते हैं, और इन्वेस्टर साप्ताहिक चार्ट को देखते हैं।

आपके द्वारा आवश्यक जानकारी के लिए यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं 

  • शॉर्ट-टर्म पोजिशनल ट्रेडिंग

मान लीजिये, आप एक महीने के अंदर ट्रेड में एंट्री और एग्जिट पोजीशन लेना चाहते हैं तो अपने ट्रेड को एक्सीक्यूट करके उससे बाहर निकलना चाहते हैं।

आप वीकली चार्ट पर ओवरऑल ट्रेंड देख कर एक लॉन्ग टर्म के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लगाकर ट्रेड शुरू कर सकते हैं।

इसके बाद बेहतर जानकारी के लिए आप डेली चार्ट को मॉनिटर करें और पिछले एक या दो सप्ताह के चार्ट से कुछ प्रमुख बिंदुओं को निर्धारित करें। ओर फिर वन-हॉर चार्ट को देखें और अपनी एंट्री पोजीशन लें। 

  • लॉन्ग-टर्म पोजिशनल ट्रेडिंग

छह महीने की अवधि के दौरान कहीं और के लॉन्ग-टर्म ट्रेड की जाँच करें।

आप स्टॉक के मासिक चार्ट के लॉन्ग-टर्म व्यू को ध्यान में रखते हुए ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं, इसके साथ ही 10 साल या उससे अधिक समय के लिए प्राइस ट्रेंड की जांच कर सकते हैं।

यह देखते हुए कि स्टॉक, लॉन्ग टर्म अपट्रेंड में है तो आप साप्ताहिक चार्ट पर जाते हैं। यह वह जगह है जहाँ आप एक पुलबैक पैटर्न देखते हैं। 

आप कुछ प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस एरिया को मार्क करें।

उसके बाद आप चार्ट एंट्री के लिए डेली चार्ट देखते हैं। आप एक सिम्पल ब्रेकआउट पैटर्न देखते हैं, जो आपको एंट्री के लिए और आपके स्टॉप लॉस को लगाने के लिए भी जगह देता है।

यदि आप इन सभी चीजों को अच्छी तरह से एनालाइसिस करते हैं और स्टॉक प्राइस को भी स्टेप बाय स्टेप देखते हैं तो आप अपने आप को एक पोजीशन ट्रेडर के रूप में पायेंगें।


पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए 3 आसान टिप्स

अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए और लॉन्ग टर्म सेटअप के लिए यहाँ पोजिशनल ट्रेडिंग सीखने वाले शुरूआती ट्रेडर के लिए कुछ टिप्स दी गई है।

  • फंडामेंटल एनालिसिस को आसान बनाएं – 

एक समय पर महीनों के लिए स्टॉक रखने का मतलब अक्सर आपको कंपनी के फंडामेंटल का विश्लेषण करने की आवश्यकता होती है। 

लेकिन यह थोड़ा सा बोरिंग और परेशानी वाला हो सकता है।

फंडामेंटल एनालिसिस में सबसे महत्वपूर्ण चीज रेश्यो को समझना है। ये रेश्यो हैं: EPS, P/E Ratio, Dividend Yield Ratio, ROE.

ये रेश्यो ही हैं जो आपको कंपनी के बारे में एक स्पष्ट जानकारी प्रदान करता है।

आप इन सभी रेश्यो को समझने के लिए स्टॉक पाठशाला ऐप की सहायता ले सकते हैं, जहाँ आपको हर एक रेश्यो के बारे में वीडियो, पॉडकास्ट और आर्टिकल के माध्यम से समझाया गया है।

इसके अलावा, आप मार्केट एक्सपर्ट्स की सहायता से भी फंडामेंटल एनालिसिस को आसानी से समझ सकते हैं। 

  • ट्रेंड के साथ ट्रेड करें

शुरूआती निवेशकों के साथ सबसे आम चीज़ जो देखने को मिलती है वो यह है कि वे ट्रेंड के विपरीत ट्रेड करते हैं। 

 ट्रेंड के विपरीत जाने पर आपको नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए आपको ट्रेंड के अनुसार ही ट्रेडिंग करनी चाहिए।

ट्रेंड के साथ ट्रेड करने का मतलब है कि ओवरऑल मोमेंटम सही तरीके से काम कर रहा है। मार्केट को जितना अधिक हो सके हाई जाने दें और जितना नीचे जा सके उतना नीचे जाने दें। उसके बाद ही पोजीशन में प्रवेश करें।

  • पेनी स्टॉक्स पर ध्यान दें

स्टॉक मार्केट बहुत बड़ी है, जिसमें प्रत्येक दिन कई अलग-अलग प्रकार के स्टॉक का कारोबार होता है।

यदि आप एक स्मॉल अकाउंट वाले ट्रेडर हैं, तो आपको उन शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो ट्रेडिंग के लिए सबसे आसान हैं और जो आपको जल्दी से अपना अकाउंट बनाने की अनुमति दे सकते हैं।

यहाँ हम पेनी स्टॉक के बारे में बात कर रहे हैं। जो ऐसे शेयर हैं जिनकी कीमत ₹10 से भी कम होती हैं।

इन शेयर में लिक्विडिटी काफी कम होती है। 

कई बार छोटी कंपनियों का कारोबार बढ़ने लगता है और फिर उनकी गिनती सफल कंपनियों में होने लगी है।

  • पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए इंडिकेटर का उपयोग करें

आपको किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति के लिए इंडिकेटर इस्तेमाल करना आना चाहिए। चाहे वह कोई भी ट्रेडिंग जैसे कि पोजिशनल ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग आदि हो।

यदि आप इंडिकेटर के बिना ट्रेड करते हैं तो बहुत कम संभावना होती है कि उसमें अच्छा रिटर्न प्राप्त हो।

एक स्मार्ट ट्रेडर हमेशा सही इंडिकेटर का इस्तेमाल करता है। आप पोजिशनल ट्रेडिंग के लिए कुछ निम्नलिखित इंडिकेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • 200-day EMA
  • 50 day EMA
  • स्टोकैसटिक आरएसई

निष्कर्ष

यदि आप पूरे दिन ट्रेडिंग स्क्रीन के सामने बैठ कर ट्रेड नहीं कर सकते तो आप कम परेशानी वाली ट्रेडिंग को चुन सकते हैं।

यदि पोजिशनल ट्रेडिंग को अच्छी तरह से निष्पादित किया जाता है, तो यह ट्रेडिंग स्टाइल आपको स्टॉक प्राइस में बहु-सप्ताह और बहु-महीने मूवमेंट से प्रॉफिट प्राप्त करने की अनुमति दे सकती है।

आपको पता होना चाहिए कि कोई भी ट्रेडिंग, रिस्क फ्री नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसी रणनीतियां हैं जिनका पालन करके आप ट्रेडिंग में रिस्क को कम कर सकते हैं।


यदि आप आईपीओ में निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले डीमैट खाता खोलें:

डीमैट खाता खोलने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को देखें:

यहाँ अपना बुनियादी विवरण भरें और उसके बाद आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी।

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