Share Meaning in Hindi

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शेयर क्या है (Share Meaning in Hindi) – यह एक बहुत ही सामान्य भाषा में प्रयोग होने वाला शब्द है। शेयर को आम भाषा में अंश यानी हिस्सा को दर्शाने के लिए प्रयोग करते है। हमारा यह लेख शेयर बाजार से सम्बंधित है तो हम शेयर को स्टॉक मार्केट के संदर्भ में समझेंगे।

इस लेख में शेयर के प्रकार, वैल्यूएशन, शेयर कैसे खरीदे और संबंधित पहलुओं के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे।

आइये अब शेयर को Share Market in Hindi के संदर्भ में समझते हैं।


Equity Share Meaning in Hindi – शेयर क्या है

शेयर को स्टॉक मार्केट में कुछ दूसरे नामों से भी जानते हैं जैसे स्टॉक इक्विटी इस तरह शेयर, स्टॉक या इक्विटी का अर्थ एक ही होता है।

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“शेयर का अर्थ हिस्सेदारी से होता है। किसी कंपनी की समग्र पूँजी की सबसे छोटी इकाई को शेयर कहते है।”

आइये इसे एक वास्तविक उदाहरण से समझते हैं।

जैसे, किसी एक फर्म की कुल पूँजी 10 लाख हैं और फर्म अपनी कुल पूँजी को 1000 हिस्सों में एक सामान मूल्य पर बाँट देती है।

अब, कंपनी की पूँजी का बांटा गया प्रत्येक हिस्सा, कंपनी की पूँजी का सबसे छोटा हिस्सा है, जिसकी कीमत 100 रूपये है।

इस छोटे हिस्से को ही शेयर (Share Meaning in Hindi) कहा जाता है।

अब, यदि आप जितने हिस्से को खरीदने के लिए भुगतान करते हैं आप उतने हिस्से का मालिक बन जायँगे।

और शेयर खरीदने वाले व्यक्ति को शेयरधारक कहा जाता है। लेकिन शेयर खरीदने या बेचने से पहले आपको शेयर बाजार के नियम जरूर पढ़ना चाहिए।

नीचे दिए वीडियो के माध्यम से भी Share Meaning in Hindi को समझा जा सकता हैं।


शेयर क्या होता है- Share Meaning in Hindi के बाद इसके इतिहास को समझते हैं।

शेयर का इतिहास (Share History in Hindi)

वैसे, दुनिया के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब शेयर बाजार या ट्रेडिंग जगत की स्थापना की कोशिश की गई है। यह 1100 के दशक में फ्रेंच हो या 1300 के दशक में इटली के वेनिस शहर के ट्रेडर, लेकिन आधुनिक दुनिया के शेयर बाजार में उन सेट-अप की समानता बहुत कम थी।

वास्तव में, एंटवर्प (बेल्जियम) में पहली बार शेयर बाजार की स्थापना हुई और इसे बेउरजन (Beurzen) कहा गया। बहरहाल, एंटवर्प सेट-अप में भी स्टॉक सूचीबद्ध नहीं हुए थे, जो आज के शेयर बाजार की सिंगल एटॉमिक यूनिट है।

दुनिया में पहली ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना के पीछे एक दिलचस्प कहानी है।

विभिन्न व्यवसायों से संबंधित जहाजों को दुनिया भर में रवाना किया गया था, लेकिन उस समय समुद्री लूटेरों के हमलों, समुद्री तूफान आदि जैसे जोखिम थे। इसके परिणामस्वरूप बहुत कम जहाज वास्तव में अपने संबंधित तटों पर पहुँचते थे।

इस समस्या ने ट्रेडिंग- जोखिम के एक महत्वपूर्ण तत्व को जन्म दिया।

अब, बिज़नेस समुदायों ने अपने भार को कम करने के लिए कई जहाजों का उपयोग करना शुरू कर दिया, इसलिए की अगर कुछ जहाज तट  पर नहीं भी पहुँचते है तो भी उनको पूरा नुकसान ना हो।

इसी तरह, निवेशकों ने एक ही समय में अपने निवेश जोखिम को कम करते हुए इन व्यवसायों के कई जहाजों में निवेश करना शुरू कर दिया।

और इस तरह से शेयर बाजार, स्टॉक, रिस्क फैक्टर आदि का विचार पैदा हुआ, इन सब कारणों ने शेयर बाजार की स्थापना को आगे बढ़ाया और दुनिया भर में स्टॉक मार्किट की स्थापना हुई।

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शेयर के प्रकार (Types of Share in Hindi)

शेयर (Share Meaning in Hindi) के प्रकार को विभिन्न श्रेणियों में परिभाषित किया गया हैं।

सबसे पहले, शेयर को स्वामित्व(Ownership) के प्रकार के आधार पर बांटा गया हैं:

  1. कॉमन शेयर
  2. प्रेफरेंस शेयर
  3. क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर
  4. हाइब्रिड शेयर
  5. एम्बेडेड-डेरीवेटिव ऑप्शन कंटेनिंग शेयर

इसके बाद, स्टॉक को उनके संबंधित बाजार पूंजीकरण के आधार पर वर्गीकृत किया गया है, अर्थात:

  1. लार्ज-कैप स्टॉक
  2. मिड-कैप स्टॉक
  3. स्मॉल-कैप स्टॉक

एक और वर्गीकरण प्रॉफिट-शेयरिंग सेट-अप पर आधारित है:

  1. इनकम स्टॉक 
  2. ग्रोथ स्टॉक 
  3. वैल्यू स्टॉक 
  4. डिविडेंड स्टॉक

स्टॉक को उनके आंतरिक मूल्य (इन्ट्रिंसिक वैल्यू) के संदर्भ में भी परिभाषित किया जा सकता है:

इंडस्ट्री प्राइस ट्रेंड के अनुसार भी स्टॉक को परिभाषित करता है:

  • साइक्लिक स्टॉक
  • डिफेंसिव स्टॉक

अंत में, शेयर वर्गीकरण का एक और रूप मूल्य में उतार-चढ़ाव पर आधारित है:

इस प्रकार, विभिन्न प्रकार के वर्गीकरण हैं जिनके आधार पर शेयरों का विश्लेषण किया जा सकता है।

यदि आप शेयर मार्केट में निवेश करने की सोच रहे हैं तो आपको शेयर का चुनाव करने के साथ साथ मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव जैसे कि बुल मार्केट और बेयर मार्केट की समझ होनी चाहिए।


शेयर का उदाहरण (Share Example in Hindi)

आइये शेयर (Share Meaning in Hindi) की आवधारणा को एक उदाहरण से समझते हैं।

उदाहरण के लिए, आप “रॉकफेल म्युज़िक” नाम की एक कंपनी के मालिक हैं। आप कंपनी के एकमात्र मालिक हैं जो आपके राज्य में गायकों के संगीत एल्बम रिकॉर्ड करते हैं। अब, आप अपने बिज़नेस को “बॉलीवुड” में विस्तार करना चाहते हैं और इसके लिए 10 करोड़ पूँजी की आवश्यकता है!

लेकिन, आपके पास इस विस्तार योजना को पूरा करने के लिए कोई पैसा नहीं हैं।

तो आप क्या कर सकते हैं?

आप अपने बिज़नेस के वैल्यूएशन में मदद करने के लिए एक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म को नियुक्त करते हैं। कंपनी के वित्तीय विवरणों का मूल्यांकन करने के बाद, वे “रॉकफेला म्यूजिक” कंपनी को 50 करोड़ कीमत आंकते हैं।

वे इस मूल्यांकन को कुल ₹50 लाख शेयरों में विस्तार करने में सहायता करते हैं, जिसमें प्रत्येक शेयर का भाव 100 रूपये होता है।

अब, आप कुल मिलाकर ₹10 लाख शेयर (अपनी कंपनी की हिस्सेदारी का 20%) बेचने की खबर बाजार में फैलाते हैं और मान लें कि, 100 निवेशक, प्रत्येक 10,000 शेयरों को खरीदने और आपकी कंपनी में  10 लाख निवेश करने का आवेदन करते हैं।

इनमें से प्रत्येक “शेयरधारकों” को “रॉकफेल म्यूजिक” में 0.2% हिस्सेदारी मिलती है।

अब आगे बढ़ते है, मान लेते हैं कि आपकी कंपनी टिनसेल शहर में बहुत कामयाब रही और 2 साल के अंदर में कंपनी का मूल्यांकन ₹200 करोड़ तक पहुंच गया। 

जब ऐसा हुआ, तो प्रत्येक निवेशक का 10 लाख का प्रारंभिक निवेश ₹40 लाख तक पहुंच जाता है।

इस प्रकार, शेयर बाजार की यह पूरी अवधारणा है, और इसी तरह शेयर वास्तव में कंपनी के प्रदर्शन और निवेश को समानांतर प्रभावित करता हैं।

शेयर बाजार में निवेश

स्टॉक मार्केट में शेयर (Share Meaning in Hindi) खरीदने या बेचने के कुछ कारण हैं:

  • नियमित आधार पर डिविडेंड आय अर्जित करें।
  • खरीदे गए शेयरों के बढ़ते मूल्य के आधार पर लाभ कमाएं।
  • उपरोक्त दोनों।

साथ ही, कुछ कारण हैं कि एक कंपनी अपने शेयर बेचती है:

  • बिज़नेस विस्तार के लिए धन।
  • कंपनी के मौजूदा शेयरधारक कभी भी बाहर निकल सकते हैं।
  • व्यापार दृश्यता में सुधार और ग्राहक विश्वास प्राप्त करने के लिए।
  • कंपनी के लिए बाजार मूल्यांकन प्राप्त करने के लिए।
  • एक प्रतिस्पर्धी लाभ प्राप्त करने के लिए।

एक शेयर खरीदने के लिए, आपको एक डीमैट खाते की आवश्यकता होगी जिसे आमतौर पर पंजीकृत स्टॉक ब्रोकर द्वारा संचालित किया जाता है। यदि आप निवेश करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सबसे पहले आपके दिमाग में शेयर मार्केट को कैसे समझें जैसे प्रश्न होना चाहिए। 


अभी डीमैट खाता खुलवाने के लिये नीचे दिए गए फॉर्म को फॉर्म भर सकते हैं। 

अपनी मूलभूत जानकारी दर्ज करें और एक कॉलबैक व्यवस्था की जाएगी। 


शेयरों का मूल्यांकन (Share Valuation in Hindi)

मुख्य रूप से, ऐसे 3 तरीके हैं जिनके द्वारा शेयरों का मूल्य निर्धारण किया जाता है:

1. लागत दृष्टिकोण (Cost Approach) 

लागत दृष्टिकोण  कंपनी के वास्तविक संपत्तियों को मैन्युफैक्चरिंग प्लांट / रियल एस्टेट संपत्ति, उपकरण, फिजिकल मशीनों आदि पर विचार करता है। कंपनी का मूल्यांकन ऐसी सभी एसेट के कुल मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।

कंपनी की नेट लायबिलिटी से अधिक नेट एसेट की बुक की गणना की जाती है और फिर नेट वैल्यू की गणना की जाती है। लागत दृष्टिकोण का उपयोग करके शेयर मूल्य को पता करने के लिए, नेट कैपिटल वैल्यू को तब बकाया कुल शेयरों से विभाजित किया जाता है।

हालांकि इस दृष्टिकोण के साथ शेयर मूल्य की गणना की जाती है, लेकिन इस दृष्टिकोण के साथ कुछ खामियां भी है।

लागत दृष्टिकोण, कंपनी से जुड़ी किसी भी अवास्तविक संपत्ति पर विचार नहीं करता है जिसमें ब्रांड के नाम का मूल्य भी शामिल है।

मार्केट एप्रोच 

शेयर मूल्यांकन की गणना करने के लिए कुछ व्यवसाय बाजार दृष्टिकोण का उपयोग करना चुनते हैं।

यह एक अपेक्षाकृत जटिल दृष्टिकोण है और एक विशिष्ट संख्या तक पहुंचने के लिए विभिन्न मानकों की आवश्यकता होती है। स्टॉक की कीमत EPS या अर्निंग पर शेयर से विभाजित किया जाता है जो पी/ई रेश्यो देता है।

जितना अधिक पी/ई रेश्यो होगा, कंपनी का मूल्यांकन उतना ही ज्यादा होगा। यह उद्योग प्रकार पर भी निर्भर करता है, क्योंकि पी/ई रेश्यो अलग-अलग व्यवसाय डोमेन से आने वाली कंपनियों के लिए भिन्न होता है।

इनकम एप्रोच 

तीसरा, जब शेयर मूल्यांकन की गणना की बात आती है तो इनकम एप्रोच यानि आय दृष्टिकोण सबसे सरल तरीके से होता है। इस विधि में, विभिन्न रेवेन्यू धारकों से कंपनी की कुल संभावित इनकम के योग की गणना की जाती है। अब, नकदी प्रवाह (Cash Flow) इसी तरह रह सकता है या यह कम भी हो सकता है।

इसके आधार पर, जो आकड़े मिलते है वह कंपनी के बकाया शेयरों की संख्या से विभाजित होता है और शेयर के मूल्य की गणना की जाती है।


शेयर और डिविडेंड

जब आप किसी कंपनी के “X” नंबर शेयर के मालिक होते हैं, तो ऐसी संभावनाएं होती हैं कि कंपनी प्रति शेयर के आधार पर डिविडेंड की एक निश्चित राशि का भुगतान करने का निर्णय ले सकती है।

अब, डिविडेंड वास्तव में होता क्या है?

यह एक मौद्रिक राशि (Monetary Amount) है जो एक कंपनी अपने निवेशकों को बनाए रखने के लिए मासिक (Monthly), त्रैमासिक (Quarterly), अर्ध-वार्षिक (Half Yearly) या वार्षिक (Yearly) आधार पर अपने निवेशकों को भुगतान करने का फैसला करती है।

ये डिविडेंड राशि कंपनी के मुनाफे से ली जाती है और शेयरधारकों के बीच समान रूप से विभाजित की जाती है। कंपनी मोनेटरी अमाउंट के रूप में डिविडेंड वितरित करने या निवेशकों को अतिरिक्त शेयर आवंटित करने का निर्णय ले सकती है।

हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशकों के साथ डिविडेंड साझा करने वाली कंपनी उन कंपनियों से बेहतर है जो डिविडेंड नहीं देती है और कंपनी के आगे के विकास में इसे वापस निवेश कर रही है।

शेयर और डिबेंचर

जैसा कि ऊपर बताया गया है, शेयर (Share Meaning in Hindi) किसी कंपनी में स्वामित्व/हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए आपके द्वारा भुगतान किए जाने वाले राशि हैं। यहां रिटर्न शेयर की कीमत और डिविडेंड (वैकल्पिक) में वृद्धि के रूप में मिलता है।

हालांकि, डिबेंचर एक ऋण साधन उत्पाद हैं जहां आप एक कंपनी को ऋण/लोन के रूप में भुगतान करते हैं और आपको उस मूलधन पर ब्याज राशि मिलती है जिसे आपने भुगतान किया था। इस प्रारूप में, आप कंपनी के लेनदारों में से एक बन जाते हैं।

इन दोनों निवेश वर्गों के बीच बहुत से अन्य अंतर हैं, जैसे:

  • आपको शेयरों के लिए भुगतान तभी किया जाता है जब कंपनी मुनाफे में हो, जबकि डिबेंचर के मामलें में आपको इस तथ्य के बावजूद भी ब्याज भुगतान किया जाता है।
  • शेयरों में डिबेंचर की तुलना में जोखिम अधिक होता है लेकिन साथ ही शेयरों में रिटर्न भी अधिक होता है।
  • डिबेंचर धारकों को डिविडेंड भुगतान के मामलें में शेयरधारकों से ज्यादा प्राथमिकता मिलती है।

अंत में, यह ज्ञात होना चाहिए कि डिबेंचर की तुलना में इक्विटी शेयरों के निवेश के कुछ फायदे हैं।

स्टॉक स्प्लिट

जब एक सूचीबद्ध कंपनी द्वारा स्टॉक स्प्लिट/विभाजन होता है, तो जारी किए गए शेयरों की संख्या बढ़ जाती है और स्टॉक का संबंधित अंकित मूल्य घट जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि स्टॉक ABC का फेस वैल्यू ₹10 है और बकाया शेयरों की संख्या 1,00,000 है, तो 2: 1 के स्टॉक स्प्लिट/शेयर विभाजन के साथ, बकाया शेयरों की संख्या बढ़कर 2,00,000 हो जाएगी और स्टॉक का फेस वैल्यू घट कर ₹5 हो जाएगा।

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हालांकि, दोनों मामलों में, शेयर का बाजार पूंजीकरण समान रहता है यानी ₹10,00,000।

स्टॉक स्प्लिट शुरू करने का सामान्य कारण किसी कंपनी के बाजार शेयर मूल्य में वृद्धि करना है।

शेयर प्लेज्ड (Share Pledged)

Share Pledged का मतलब है शेयर को गिरवी रखना।

शेयरों को गिरवी रखना निवेशक के साथ-साथ सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर द्वारा भी की जा सकती है।

एक निवेशक जब डीमैट खाते से अपने शेयरों (Share Meaning in Hindi) को गिरवी रखता है, तो व्यक्ति को विशिष्ट ब्याज दर पर ब्रोकर से मार्जिन (या ऋण, सरल शब्दों में) मिलता है।

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यदि निवेशक क्लाइंट राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो ब्रोकर मार्जिन को रिकवर करने के लिए डीमैट खाते से गिरवी शेयरों को बेच सकता है।

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एक प्रोमोटर जब कंपनी में रखे गए शेयरों के रूप में उसकी / उसके गिरवी रखता है, तो वह व्यवसाय या व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए बैंकों या किसी अन्य वित्तीय संस्थान से ऋण प्राप्त कर सकता है। यदि प्रमोटर ऋण का भुगतान करने में विफल रहता है, तो बैंक ऋण की वसूली के लिए खुले बाजार में गिरवी रखे गए शेयरों को बेच सकता है।

इस प्रकार, शेयरों को गिरवी रखना एक जोखिम भरी अवधारणा के रूप में देखा जाता है और आदर्श रूप से इसका उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब आपके पास उचित जोखिम क्षमता हो।

विभिन्न वोटिंग अधिकार के साथ शेयर

एक अन्य शेयर-संबंधित अवधारणा डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स वाले शेयर हैं।

जब इस प्रकार के शेयर जारी किए जाते हैं, तो निवेशकों को कम या कोई वोटिंग अधिकार नहीं मिलता है। इस तरह के शेयरों का फायदा यह है कि निवेशक बेहतर डिविडेंड की उम्मीद कर सकता है।

इसी समय, ऐसे शेयरों को जारी करने वाले व्यवसाय के प्रमोटर को अपने वोटिंग अधिकारों में कोई भी उम्मीद नहीं करता है और किसी भी संभावित अधिग्रहण की संभावना को दूर रखा जाता है।


यदि आप शेयर बाजार में निवेश के लिए डीमैट खाता खुलवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना विवरण दर्ज करें और आपके लिए कॉलबैक व्यवस्थित किया जाएगा:

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