Alligator Indicator in Hindi

बिल विलियम्स के आविष्कारों ने वर्तमान के ट्रेडिंग जगत में काफी योगदान दिया है। विलियम्स कई प्रसिद्ध इंडीकेटर्स के निर्माता हैं, जैसे कि एलीगेटर, फ्रैक्टल्स, और ओशिलेटर्स। इन इंडीकेटर्स को विलियम्स अपनी पुस्तक ‘ट्रेडिंग चाओस’ में पेश किया था। आजकल बहुत से ट्रेडर्स वित्तीय मार्केट में ट्रेड करने के लिए विलियम्स के आविष्कारों और ट्रेडिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं।

यह लेख Alligator Indicator in Hindi से संबंधित है। यह आपको किसी भी मार्केट का विश्लेषण करने और ट्रेंड की पहचान करने एंव ट्रेंडिंग की शुरुआत में एंट्री सिगनल को खोजने में मदद करता है, जिससे अधिकांश ट्रेडर्स को फायदा होता है।

विलियम्स एलीगेटर इंडिकेटर क्या है?

एलीगेटर या विलियम्स एलीगेटर एक तकनीकी ट्रेंड इंडीकेटर है जो मार्केट की स्थिति को परिभाषित करता है और प्राइस मूवमेंट की शुरुआत में ही एंट्री सिगनल उत्पन्न करता है।

विलियम्स एलीगेटर इंडेक्स, इक्विटी, कमोडिटी और कंरेसी, क्रिप्टोक्यूरेंसी मार्केट आदि सभी का विश्लेषण करता है। यह विभिन्न अवधियों के साथ मूविंग ऐवरेज पर आधारित एक तकनीकी इंडीकेटर है।

एलीगेटर के साथ ट्रेड करने के लिए सबसे अच्छा टाईमफ़्रेम डैली, चार घंटे और एक घंटे होता है। छोटे टाईमफ्रेम में एलीगेटर इंडिकेटर का उपयोग करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि प्राइस के फ्लकचुएशन के कारण ये आपको कई झूठे संकेत दे सकता है। इस लिए इस इंडीकेटर का उपयोग इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए न करे।

जैसा कि आप जानते हैं, मार्केट या तो ट्रेंडिंग या साईडवेज हो सकता है। एलीगेटर इंडीकेटर मार्केट की स्थिति की सटीक पहचान कर सकता है। ये हमें बताने में मदद करता है कि मार्केट ट्रेंडिंग है या साईडवेज।

एलीगेटर इंडिकेटर का एक अन्य लाभ यह है कि यह एंट्री सिगनल उत्पन्न करता है जब किसी स्टॉक में मोमेंटम की शुरुआत हो रही हो। स्टॉक मार्केट में प्रत्येक ट्रेडर अच्छी प्राइस पर ट्रेड में प्रवेश करना चाहता है और हायर प्राइस मूवमेंट पर बाहर निकलना चाहता है। एलीगेटर इंडिकेटर का उपयोग करके, आप स्टॉन्ग मार्केट मूव लेने और ट्रेंड के अंत में मुनाफा लेने में सक्षम होंगे।   

हालांकि, अकेले एलीगेटर इंडिकेटर अच्छे एंट्री सिगनल को खोजने के लिए पर्याप्त नहीं है। बिल विलियम्स ने स्वयं विकसित किए गए अन्य तकनीकी इंडीकेटर्स के साथ एलीगेटर को लागू किया था। विलियम्स द्वारा बनाए गए तकनीकी इंडीकेटर्स के संयोजन के आधार पर प्रॉफिटुनिटी ट्रेडिंग सिस्टम विकसित किया था।

ये ट्रेडिंग सिस्टम एंट्री सिगनल को परिभाषित करने के लिए अतिरिक्त फिल्टर के रूप में फ्रैक्टल्स और ओसीलेटर्स को लागू करता है। 

एलीगेटर इंडिकेटर कैसे काम करता है? 

स्टॉक मार्केट की स्थितियां लगातार ट्रेंड से साईडवेज की ओर बढ़ रही हैं और इसके समकक्ष। यह मार्केट की चाल का नियम है। ये अवस्थाएँ एक एलीगेटर के व्यवहार से मिलती जुलती हैं: 

जब आप एलीगेटर जैसे शेयर मार्केट इंडिकेटर (share market indicator in hindi) के साथ ट्रेड करते हैं, तो आपको मार्केट में लगातार तीन तरह के व्यवहार को देखना चाहिए। मार्केट कंडीशन के अनुसार ही एलीगेटर का इस्तेमाल करे। वह मार्केट कंडीशन है: 

1. मार्केट साईडवेज (Sideways) है: 

एलीगेटर इंडीकेटर में मूविंग एवरेज होते हैं। मूविंग एवरेज (moving average in hindi), जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है, एक निश्चित अवधि में ऐवरेज प्राइस को दिखाते हैं। इसलिए, यदि चार्ट पर मूविंग एवरेज एक ही स्थान पर हैं और अपनी ढलान के साथ कोई ट्रेंड नहीं दिखाते हैं, तो मार्केट में ट्रेंड नहीं है। दूसरे शब्दों में, मार्केट साईडवेज चल रहा है। 

2. मार्केट में ट्रेंड शुरू हो सकता है:

लिप लाइन (हरा) सबसे तेज मूविंग एवरेज है। प्राइस चार्ट में खरीदारों और विक्रेताओं के संतुलन में बदलाव पर प्रतिक्रिया देने वाला यह पहला संकेतक है। जब लिप लाइन (हरा) धीमी मूविंग एवरेज को पार करती है, तो हम मान सकते हैं कि ट्रेंड शुरू होने वाला है। 

जब तीनो मूविंग एवरेज लाईन एक ही दिशा में लाइन अप करते हैं, तो ट्रेडर तय करता है कि मार्केट में प्रवेश करना है या नहीं। जब अगली कैंडलस्टिक सभी मूविंग एवरेज से ऊपर या नीचे बंद हो जाती है, तो यह एक खरीद या बिक्री ट्रेड में प्रवेश करने का संकेत होता है।

आपको ध्यान देना चाहिए कि कुछ ट्रेडर्स एलीगेटर के साथ अतिरिक्त फिल्टर का उपयोग करते हैं, क्योंकि यह मार्केट की दिशा निर्धारित करने से पहले ट्रेंड के वारे में बहुत सारे झूठे संकेत भेजता है।

अतिरिक्त फिल्टर के रूप में, आप बिल विलियम्स द्वारा विकसित अन्य इंडीकेटर्स का उपयोग कर सकते हैं: ओसीलेटर और फैक्टल। मैं नीचे विस्तार से इनका उपयोग करने का तरीका कवर करूंगा।

3. ट्रेंड एक स्पष्ट दिशा के लिए फॉर्म हो चुका है

यदि अपट्रेंड है, तो मूविंग एवरेज की लाईनो को निम्न क्रम में व्यवस्थित किया जाता है: हरी वाली लाईन शीर्ष पर है; इसके बाद लाल लाईन आती है, और नीली रेखा सबसे नीचे होती है। तीनों पंक्तियों को ऊपर की ओर निर्देशित किया गया है। जैसे-जैसे प्रवृत्ति विकसित होती है, रेखाओं के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है।

डाउनट्रेंड में, लाइनों को विपरीत क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। जबड़े की रेखा सबसे ऊपर होती है, नीचे दांतों की रेखा होती है, और होंठ की रेखा सबसे नीचे होती है। इसी तरह, तीनों मूविंग एवरेज की लाईनो को नीचे निर्देशित किया जाता है। जैसे-जैसे डाउनट्रेंड विकसित होता है, लाइनों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है। 


विलियम्स एलीगेटर इंडिकेटर के साथ ट्रेड कैसे करें?

एलीगेटर तीन सिंपल मूविंग ऐवरेज लाइनो से बना है, जिसे विलियम्स ने लिप्स, टीथ और जैब्स कहा है। ये लाइने एक मगरमच्छ के शिकार की प्रक्रिया की नकल करती हैं। मूविंग ऐवरेज लाइने अलग-अलग अवधियों के साथ चलती हैं और भविष्य में स्थानांतरित हो जाती हैं।

कल्पना कीजिए कि एक मगरमच्छ कैसे शिकार करता है, मगरमच्छ के शिकार में व्यवहार के दो चरण होते हैं। पहले चरण में, मगरमच्छ शिकार को ऐसे देखता है जैसे वह सो रहा हो। दूसरे चरण में, मगरमच्छ अपना मुंह खोलता है और शिकार को पकड़कर खा जाता है। 

स्टॉक मार्केट भी इसी तरीके से कार्य करता है: 70% समय, यह साईडवेज रहता है, और 30% समय, यह ट्रेन्डिंग रहता है।

सबसे पहले, आपको मार्केट के चरण को परिभाषित करना चाहिए, चाहे वह साईडवेज हो या ट्रेन्डिंग।

एलीगेटर इंडीकेटर के द्वारा मार्केट में ट्रेंड शुरु होने से ठीक पहले आप नए ट्रेडों में प्रवेश करते हैं और मार्केट के साईडवेज होने से पहले सभी ट्रेडों से बाहर निकल जाते हैं। 

ट्रेड उस क्षण से शुरू होता है जब मार्केट का ट्रेंड शुरु होता है, और हरी लाईन ऊपर या नीचे बनने लगती है। फिर जैसे ही ट्रेंड की शुरुआत होती है – लाल रेखा सक्रिय हो जाती है और एक दिशा हासिल करना शुरू कर देती है।

फिर दिशा हासिल हो जाती है तो नीली रेखा भी उसी दिशा में चलने लगती है। इसका मतलव है कि ट्रेंड की शुरुआत हो गयी है और मार्केट अव मोमेंटम करेगी।

अब आपको एलीगेटर की सभी तीन लाईनो के ऊपर या नीचे ट्रेड शुरू कर सकते है और फिर आप खरीद या बिक्री की पोजिशन ले सकते हैं।

आपको अपनी पोजिशन के लिए एग्जिट संकेत तब मिलते है जब तीनों लाईने एक बिंदु पर मिलती हैं, क्योंकि उस समय ट्रेंड की दिशा स्पष्ट नहीं होती है, या जब ग्रीन लाईन ब्लु लाईन को पार करती है। इसका मतलब है कि मार्केट अव स्टॉर्न्ग नही रहा है और अब वह साईडवेज मार्केट होने बाला है। 


विलियम्स एलीगेटर इंडिकेटर की 3 लाईने:

एलीगेटर इंडिकेटर तीन मूविंग एवरेज से बना होता है, इनमें से प्रत्येक का एक अलग रंग होता है और मार्केट के एक विशेष चरण के लिए जिम्मेदार है। प्रत्येक का महत्व होता है।

हरी लाइन: यह सबसे कमजोर स्तर माना जाता है। हालांकि, प्राइस में बदलाव के लिए इसकी सबसे तेज प्रतिक्रिया होती है। यह मूविंग ऐवरेज मार्केट मार्केट में खरीदारों और विक्रेताओं की शक्ति संतुलन में परिवर्तन की प्रतिक्रिया को दर्शाने बाला पहला मूविंग ऐवरेज है।

ट्रेडिंग चार्ट में मजबूत मूवमेंट होने पर इस लाइन का उपयोग ट्रेंड के ऑपन पोजिशन में अधिक क्वांटिटी जोड़ने के लिए किया जाता है। ग्रीन लाईन 5 की डिफ़ॉल्ट अवधि के साथ सिंपल मूविंग ऐवरेज(एसएमए) है।

रेड लाइन: यह लाइन एवरेज स्ट्रांग सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस स्तर है। जब ट्रेंड ज्यादा स्ट्रांग नहीं होता है तो यह ट्रेडों में प्रवेश करता है। यदि ये एटीआर के भीतर है, तो वर्तमान ट्रेंड में ट्रेडों में प्रवेश करने के लिए रेड लाइन एक उत्कृष्ट मार्कर हो सकती है। रेड लाइन 8-अवधि का स्मूथ मूविंग ऐवरेज होता है।

ब्लु लाइन: ब्लु लाइन सबसे मजबूत लाइन होती है। ब्लु लाइन मध्यम अवधि की ट्रेंड की रेंज को प्रदर्शित करती है। यदि प्राइस इस ब्लु लाइन को तोड़ती है, तो आमतौर पर इसका मतलब है कि ट्रेंड विपरीत दिशा में बदल रहा है।

इसका उपयोग स्लो ट्रेंड या कंजरवेटिव ट्रेडिंग रणनीतियों में एंट्री प्वाइंट को खोजने के लिए किया जाता है, जब ट्रेडर्स केवल सबसे मजबूत स्तरों में ट्रेड करना पसंद करते हैं। ब्लु लाइन 13-अवधि की स्मूथ मूविंग ऐवरेज।

आपको ध्यान देना चाहिए कि मूविंग ऐवरेज ऐवरेज प्राइस((हाई+लो)/2) पर लागू होती है, न कि बार्स के ऑपन  या क्लॉजिंग प्राइस पर।

एलीगेटर इंडिकेटर को अलग-अलग टाईमफ़्रेम और मार्केट में अनुकूलित करने के लिए, आपको मूविंग ऐवरेज के पैरामीटर(पीरियड और शिफ्ट) को बदल – बदलकर देखना चाहिए। आप डिफ़ॉल्ट पैरामीटर के साथ भी ट्रेड कर सकते हैं, लेकिन, इस मामले में, आपको H4 से D1 तक लंबे टाईमफ़्रैम में ट्रेड करना चाहिए।

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