बुक बिल्डिंग इशू और निश्चित मूल्य इशू आईपीओ

यदि आप आईपीओ के बारे में जानना चाहते हैं और फिर शायद  निवेश भी करना चाहते हैं, तो आपको कुछ मूलभूत जटिलताओं को समझना होगा। इस संक्षिप्त समीक्षा में, हम आईपीओ के प्रकार और उनके बीच के अंतर के बारे में बात करेंगे।

यह महत्वपूर्ण इसलिए है कि यदि आप आगामी आईपीओ में निवेश करना चाहते हैं, तो अलग-अलग महत्वपूर्ण पहलुओं (आइपीओ के आसपास) को जानने से  आप आसानी से निर्णय लेने में सक्षम हो जाएंगे। इस समीक्षा में, हम विभिन्न प्रकार के आईपीओ और उन  के बीच का अंतर देखेंगे।

मुख्य रूप से दो प्रकार के आईपीओ होते हैं :

बुक बिल्डिंग इशू

ऐसी स्थिति तब होती है जब कोई कंपनी विशिष्ट कीमत पर अपने शेयरों को शुरुआती पेशकश के जरिए पेश करती है।

हालांकि, अगर कंपनी आईपीओ के लिए फाइलिंग करते वक्त कोई विशिष्ट कीमत नहीं बताती है, जिस पर उसे  अपने शेयरों को बाज़ार में पेश करना है , तो यह एक विशिष्ट मूल्य ‘सीमा’ के साथ अपने आईपीओ को पेश करती  है । इस  विशेष प्रक्रिया में  शेयरों की कीमत की खोज निवेशकों द्वारा बोली लगाने के माध्यम से की जाती है, इसे बुक बिल्डिंग इशू कहा जाता है।

यह एक आजमाई और परखी हुई  तकनीक है, जिसे दुनिया भर के प्रमुख एक्सचेंजों द्वारा अनुशंसित किया जाता है जहां आईपीओ प्रक्रिया के दौरान कीमत को अंतिम रूप दिया जाता है ।

इस कीमत सीमा (बैंड) के भीतर, सबसे कम कीमत को ‘फ्लोर प्राइस’  कहा जाता है, जबकि शेयर के  उच्चतम मूल्य को  ‘कैप प्राइस’ के रूप में जाना जाता है। अंतिम शेयर की कीमत निवेशक बोली और बोली समापन तिथि के बाद की समग्र मांग के आधार पर तय की जाती  है।


निश्चित मूल्य इशू

फिक्स्ड प्राइस इश्यू, जैसा कि नाम से पता चलता है, उन मामलों में लागू होता है जब कंपनी कीमत को लेकर  100% निश्चित होती है, तब वह आईपीओ को पेश करती है। किसी विशिष्ट मूल्य सीमा के लिए विस्तृत शोध, प्रतिस्पर्धी विश्लेषण, उद्योग बेंचमार्किंग आदि की आवश्यकता होती है।

बुक बिल्डिंग बनाम निश्चित मूल् इशू

यह  दोनों प्रकार के मुद्दे निम्नलिखित तरीकों से अलग हैं:

  • फिक्स्ड प्राइस  इशू में , निवेशकों को पहले  ही शेयरों की कीमत की जानकारी प्रदान की जाती है । दूसरी ओर, बुक बिल्डिंग  के मामले में कीमत बैंड साझा की जाती है , जो कि मूल रूप से मूल्य की एक सीमा है और कोई विशिष्ट संख्या नहीं है
  • जब किसी इशू  में खरीदे गए शेयरों का भुगतान करने की बात आती है, तो आपको अग्रिम भुगतान करना पड़ता है।  फिक्स्ड  प्राइस इशू के आवेदन के साथ आपको अग्रिम भुगतान  करना होता है। जबकि बुक बिल्डिंग इशू  में ऐसी कोई स्थिति नहीं होती है, शेयरों के आवंटन के बाद ही आपको भुगतान करना होता है।
  • फिक्स्ड  प्राइस इशू  में , कुल शेयर आवंटन का 50% ₹ 1 लाख से नीचे के आवेदन के लिए आरक्षित है (और अधिक मात्रा वाले आवेदनों के लिए शेष राशि)। हालांकि बुक बिल्डिंग के मामले में, आवंटन बोली लगाने की राशि पर नहीं  होकर , निवेशक की श्रेणी पर आधारित होता है  ।  50% शेयर योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए, खुदरा निवेशकों के लिए 35% और शेष के लिए 15% रखा जाता है।
  • एक बार जब फिक्स्ड  प्राइस इशू  बंद हो जाता है, तो प्रतिभूतियों की मांग की जानकारी आवंटन होने के बाद पता चलती है । हालांकि, बुक बिल्डिंग इशू   में, शेयरों की मांग हर दिन जानी जा सकती है।

वास्तविक जीवन उदाहरण – फेसबुक आईपीओ

आइए हम आईपीओ मूल्यांकन में बुक बिल्डिंग की प्रक्रिया के महत्व को समझने के लिए एक वास्तविक जीवन का उदाहरण लेते हैं और तय मूल्य  से यह कैसे अधिक विश्वसनीय है।

जब मई 2012 में फेसबुक (Facebook) अपने आईपीओ को लॉन्च करने जा रहा था , उसने निवेश बैंकर रखा ।  मॉर्गन स्टेनली ने एक विशिष्ट कीमत तक पहुंचने के लिए बुक बिल्डिंग की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। प्रारंभिक मूल्य बैंड $ 28 से $ 35 रखा गया था, बाद में  कुल मांग को देखते हुए , बैंड को $ 34 से  38 डॉलर कर दिया गया था। इन सब उलझनों   के कारण , शेयर लिस्टिंग के पहले दिन भारी  उतार – चढ़ाव देखा गया। यह अपने शुरुआती कारोबारी के पहले दिन के दौरान 45 डॉलर की कीमत तक पहुंच गया, लेकिन  आखिर में यह केवल 38.03 डॉलर पर बंद हुआ ।

इससे पता चलता है कि आपको इश्यू प्राइस को अंतिम रूप देने में शामिल विभिन्न पहलुओं को बहुत सावधानी से देखना चाहिए। यद्यपि, वर्तमान में फेसबुक  $ 178 की कीमत पर व्यापार कर रहा है।

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