एनएसडीएल

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जो ट्रेडर स्टॉक मार्केट में ट्रेड करते हैं उन्हें “एनएसडीएल” के बारे में पूरी जानकारी होगी। लेकिन शुरुआती स्तर के कुछ ऐसे निवेशकों के लिए यह “शब्द” बिल्कुल नया होगा। 

इसलिए, आइए एनएसडीएल को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं। जिससे अनुभवी और नए निवेशकों को ट्रेडिंग करने में आसानी हो और एनएसडीएल को समझने के लिए आप Stock Exchange Meaning in Hindi पर भी क्लिक कर सकते हैं। 

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NSDL Full Form in Hindi

“एनएसडीएल” का फुल फॉर्म नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड “ है।  यह एक ऐसा संगठन है जो सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रेड करने वाली होल्डिंग्स और सिक्योरिटीज (शेयर, बॉन्ड, कैश) को सुरक्षा प्रदान करता है।

आइए, इस आर्टिकल का गहन विश्लेषण करके समझने की कोशिश करते हैं कि एनएसडीएल भारत में स्टॉकब्रोकिंग के सिस्टम में कैसे काम करता है और आप एक ट्रेडर या निवेशक के रूप में इससे कैसे प्रभावित होते हैं।


NSDL Kya Hai – एनएसडीएल क्या है

“एनएसडीएल” देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी है। 

इसे 8 अगस्त 1996 को स्थापित किया गया था और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित पहली  ‘इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी’ थी।

यह संगठन,  सिक्योरिटीज को पुराने तरीकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखता है। जिसमें कागज़ों पर होने वाले लेन-देन जैसे- शेयर, बॉन्ड और अन्य प्रकार के फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स को सुरक्षित रखने का तरीका शामिल हैं।

जाहिर है कि इसके आने से आपके सिक्योरिटीज का प्रबंधन बहुत सरल और सुविधाजनक हो गया है।

साथ ही साथ यह सुरक्षित भी है!

इसकी तुलना ऐसे बैंकों से की जा सकती है जिसमें केवल इतना ही अंतर है कि बैंक में निवेशक के पैसे रखे हैं और ‘एनएसडीएल’ में स्टॉक्स, बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज रखे जाते हैं।

भारत में बहुत सारे स्टॉकब्रोकर डिपॉजिटरी के साथ जुड़े हुए हैं ताकि उनके ग्राहकों की सिक्योरिटीज को एनएसडीएल में “सुरक्षित” रखा जा सके। 

साथ ही, एक निवेशक के रूप में आपको अपना खाता खोलने से पहले किसी भी डिपॉजिटरी से एफिलिएशन के बारे में ब्रोकर के साथ जांच करने का सुझाव दिया जाता है।

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एनएसडीएल कैसे काम करता है?

एनएसडीएल भारतीय फाइनेंशियल मार्केट को निवेशकों, ब्रोकर, बैंक और सभी प्रकार के सिक्योरिटी से जुड़ी सेवाएं प्रदान करता है।

इस डीपी (Depository Participent) के साथ आप डिपॉजिटरी खाता भी खोल सकते हैं।

डिपॉजिटरी अकाउंट तीन प्रकार के होते हैं:

  • बेनेफिशरी अकाउंट
  • क्लीयरिंग मेंबर अकाउंट और
  • इंटरमीडिएट अकाउंट

ऊपर दिए हुए तीनों खातों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाएं नीचे दी गई हैं:

पहला डीमैटिरियलाइज़ेशन है जिसके द्वारा एक निवेशक भौतिक प्रमाणपत्रों (कागज के बने प्रमाणपत्रों) को इलेक्ट्रॉनिक बैलेंस में परिवर्तित कर सकता है।

इसके लिए निवेशक को प्रमाणपत्रों को नष्ट करने और उन्हें डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट(DP) को सौंपने की जरूरत होती है जो उसकी जानकारी एनएसडीएल को प्रदान कराता है और इससे जुड़े सभी दस्तावेजों को ‘आर एंड टी‘ एजेंट को भेजता है।

एनएसडीएल की रिक्वेस्ट को अधिकारियों द्वारा कन्फर्म होने के बाद वह सिक्योरिटीज (शेयर, बांड, नकदी) को डिपॉजिटरी के खाते में जमा करता है।

दूसरी प्रक्रियारिमेटेरियलिजेशन है, इस प्रक्रिया में निवेशक अपने सिक्योरिटीज (शेयर, बांड, नकदी) को फिजिकल सर्टिफिकेट (कागज से बने प्रमाणपत्रों) को इलेक्ट्रॉनिक रूप में परिवर्तित कर सकता है यह प्रक्रिया डीमैटिरियलाइज़ेशन के विपरीत पूरी की जाती है।

एनएसडीएल डीमैट खाताधारकों के लिए ‘एसएमएस’ अलर्ट जैसी सेवाएं प्रदान करता है ताकि वे एनएसडीएल प्राधिकरण (Authority) द्वारा लेनदेन प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

‘एनएसडीएल’ द्वारा प्रदान की जाने वाली आखिरी सर्विस एनएसडीएल ‘सीएएस’ (कंसोलिडेट अकाउंट स्टेटमेंट) है, जो सिक्योरिटी मार्केट में सभी सिंगल और जॉइंट रूप में किए गए निवेश की जानकारी प्रदान करता है।

एनएसडीएल द्वारा प्रदान की जाने वाली कुछ अन्य सेकंडरी लेवल की सर्विस की जानकारी नीचे दी गई है:

  • एनएसडीएल के द्वारा मार्केट ट्रांसफर की अनुमति है जिसमें सिक्योरिटीज (शेयर, बांड, नकदी) को बेचा जा सकता है।
  • मार्केट से अलग हटकर किए गए ट्रेड को क्लीयरिंग कार्पोरेशन द्वारा खत्म नहीं किया जाता है।
  • इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर,  सिक्योरिटीज को एक डिपॉजिटरी से दूसरे में ट्रांसफर करने की अनुमति देता है।
  • ट्रांसमिशन एक ट्रांस के अलावा अन्य शेयरों के अवमूल्य है।
  • कॉरपोरेट एक्शन कंपनियों द्वारा निवेशकों को दिया जाने वाला लाभ है। 

इसमें वैल्यू एडेड सर्विस, प्लेज या हाइपोथेटिकेशन ऑफ सिक्योरिटीज, ऑटोमेटिक डिलीवरी आउट इंस्ट्रक्शन, डिवाइड एंड डिस्ट्रीब्यूशन, लेंडिंग एंड बोरोइंग तथा सार्वजनिक मुद्दे शामिल है।


एनएसडीएल उदाहरण

NSDL का कांसेप्ट देश में काफी पुराना है।

इस कारण से ट्रेडिंग के पेपर बेस्ड सेटलमेंट ने देश में बहुत उथल-पुथल मचाई मतलब कि कागजों पर आधारित कामकाज के तरीकों से निपटना बड़ा मुश्किल था।

इसलिए, अगस्त 1996 में डिपॉजिटरी एक्ट लाया गया जिससे नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की नींव के साथ ट्रेडिंग सही गति से होने लगी।

डिपॉजिटरी सिस्टम का मुख्य उद्देश्य सिक्योरिटीज को डिपॉजिटरी अकाउंट में रखना है। यह उसी तरह है जैसे बैंक फंड्स को बैंक अकाउंट में रखता है। 

जिस प्रकार एक बैंक खाते में एक-दूसरे के पैसे का लेन-देन होता है उसी प्रकार सिक्योरिटीज का भी सामान्य खातों में लेन-देन किया जाता है।

भौतिक प्रक्रिया में अलग-अलग प्रकार के दस्तावेजों को रखने की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन हो गया है।

इससे समय, पैसा, एनर्जी  इत्यादि की बचत होती है। यह बात भी साफ़ है कि कागज़ी कार्रवाई और प्रमाण पत्रों की तुलना में डिपॉजिटरी के ट्रांजेक्शन कोस्ट(लागत) कम है।


एनएसडीएल के लाभ

एनएसडीएल में खाता रखने के ऐसे बहुत सारे लाभ है जिनका आप फायदा उठा सकते हैं। तो, आइए उन पर एक नज़र डालते हैं –

  • तत्काल फंड ट्रांसफर और सिक्योरिटीज के पंजीकरण का विकल्प उपलब्ध है क्योंकि इसके खरीदार और विक्रेता दोनों ही सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक रूप में खरीदते और बेचते हैं।
  • एनडीएसएल की शुरुआत से पहले फंड ट्रांसफर और सिक्योरिटीज के पंजीकरण में 2 से 4 महीने लगते थे लेकिन अब इसे डिपॉजिटरी द्वारा खरीददार के खाते में तुरंत ट्रांसफर कर दिया जाता है।
  • कम कागजी कार्रवाई की आवश्यकता होती है क्योंकि सभी डेटा ऑनलाइन उपलब्ध होते हैं और कुछ ही क्लिक में इसे एक्सेस किया जा सकता है। 
  • यह एक अच्छी डिलीवरी सिस्टम है क्योंकि सिक्योरिटीजके बारे में सभी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध है। जिससे किसी को कोई परेशानी होती है।
  • इसमें निवेशक के खाते में बोनस ट्रांसफर करने का भी नियम है।
  • सिक्योरिटीज को ट्रांसफर या बेचने पर हमेशा ‘स्टैंप ड्यूटी’ देने की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर का मामला नहीं है।

एनएसडीएल की कमियां 

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, कुछ सकारात्मक होते हैं और कुछ नकारात्मक होते हैं। 

ठीक इसी प्रकार एनडीएसएल से जुड़े कुछ मुद्दे हैं जिनके बारे में हमें जानकारी होनी चाहिए जैसे :

  • सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। इसलिए, धोखाधड़ी की संख्या आमतौर पर बढ़ रही है क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का फिजिकल जांच नहीं की जाती है। प्राइवेसी के कुछ मुद्दों के आधार पर ऑनलाइन लेन-देन में हैकिंग के मामले बढ़ रहे हैं।
  • प्रैक्टिकल रूप से सिंगल डिपॉजिटरी की स्थापना कभी संभव नहीं है।
  • हालांकि यह ट्रांसफर सिस्टम एक अच्छा सिस्टम है और इसने निवेशकों और कंपनियों को विभिन्न रूपों में बहुत मदद की है, लेकिन कई डिपॉजिटरी सिस्टम समानता के साथ बहुत सारी समस्याओं का सामना करते हैं।
  • कई शेयरधारकों को लग रहा है कि पार्टिसिपेंट्स ने अपने खाते को रखने के लिए ग्राहकों से अधिक लागत ली है। यह मुख्य रूप से देश में कई डिपॉजिटरी की उपस्थिति के कारण है।
  •  ऐसा नहीं है कि इसे सेबी के द्वारा ही अत्यधिक प्रभावशाली ढंग मैनेज किया जाता है। लेकिन इसे चलाने वाली संस्था द्वारा भी इसको मैनेज किया जाता है।
  • यह अभी भी कई कंपनियों के लिए एक अनिवार्य नियम नहीं है क्योंकि वे इसे एक ऑप्शन के रूप में रखते हैं।

निष्कर्ष

अगस्त 1996 में स्थापित एनएसडीएल भारत की पहली और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी में से एक है।

इसे देश की फाइनेंशियल ग्रोथ के लिए स्थापित किया गया था और यह इंटरनेशनल प्लेटफार्म पर नेशनल ढांचे (National Structure) को दर्शाती है।

इन सिक्योरिटीज को इंडियन कैपिटल मार्केट में डीमैटिरियलाइज़्ड तरीके से नियंत्रित किया जाता है।

इसने भारत में अब तक किए जा रहे पेपर आधारित लेन देन के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। 

क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक तरीकों की तुलना में पेपर आधारित प्रक्रिया तेज गति से काम नहीं करती है। 

एनएसडीएल देश के कैपिटल मार्केट में निवेशकों और ब्रोकर को सपोर्ट करता है जिससे उनकी क्षमता को बढ़ाने, रिस्क को कम करने और खर्चे कम करने में मदद मिलती है।

यदि आप एनएसडीएल या किसी अन्य रेगुलेटरी द्वारा स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग या निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आगे के कदम उठाने में हम आपकी सहायता करेंगे:

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