आप्शनस ट्रेडिंग क्या होती है?

जब हम ट्रेडिंग के बारे में सोचते है तो हमारे पास कई आप्शनस (विकल्प) उपलब्ध होते है, और प्रत्येक विकल्प के कुछ भले और बुरे पहलू होते है। ट्रेडिंग के कई तरीक़ों में दीर्घकालिक अवधि के लिए निवेश करने पर लाभ होता है,  जबकि कई अन्य अल्पकालिक अवधि पर भी निवेश पर लाभ प्रदान करते है।

ऐसे ट्रेडिंग करने के तरीक़ों में आप्शन ट्रेडिंग शामिल है। आप्शनस डेरिवेटिव उत्पादों की तरह होते है जिनकी प्रतिभूतियों की क़ीमत उनकी आधारभूत संपत्ति पर निर्भर करती है।

आप्शन ट्रेडिंग कॉंट्रैक्ट का एक ऐसा रूप है जिसमें आप्शन के ख़रीदार को किसी स्पष्ट मूल्य और स्पष्ट  समय पर अपने आप्शन को इस्तेमाल करने का अधिकार होता है। साथ ही साथ हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए की आप्शन ट्रेडिंग में ख़रीदार के पास आप्शनस को इस्तेमाल करने का केवल अधिकार होता है वह इस आप्शन को इस्तेमाल करने के लिए बाध्य नहीं है।

 यह पूरी तरह से उसी पर निर्भर करता ही की बाज़ार के मूल्य पर उसको अपनी प्रतिभूतिया बेचनी है या कुछ और प्रतिभूतिया ख़रीदनी है। और इस कॉंट्रैक्ट में प्रवेश करने के लिए एक शुल्क या प्रीमीयम भी लिया जाता, जिसमें से शुल्क कभी वापिस नही होता। इस आप्शन ट्रेडिंग में पूर्व निर्धारित मूल्य को स्ट्राइक मूल्य कहा जाता है और पूर्व निर्धारित समय को एक्स्पाइरी डेट (समाप्ति तिथि) कहा जाता है।


आप्शन ट्रेडिंग मार्केट में जोखिम को कम करने का एक शानदार तरीक़ा है।

आप्शन का ख़रीदार मार्केट में एक निश्चित दिशा में जाने के लिए कॉंट्रैक्ट में प्रवेश कर सकता है, और उसके बाद यदि उसका अनुमान सही हो जाता है और वह मुनाफ़ा कमाता है तो वो अपने नुक़सान को सीमित करने के लिए इस आप्शन का उपयोग कर सकता है।

लेकिन अगर उसका अनुमान सही नहीं होता तो वह अपनी पूँजी को सुरक्षित रकने और कॉंट्रैक्ट शुल्क का भुगतान करने के लिए आप्शन का प्रयोग नहीं करना चुन सकता है।

उदाहरण के लिए, एक आप्शन ट्रेडर के पास IBM के शेयर मौजूदा मूल्य के साथ है लेकिन उसे लगता ही की ये थोड़े महँगे है, और मार्केट जल्द ही नीचे आने वाले है। तो इस मामले में वह ₹157 प्रति शेयर बेचने के आप्शन में प्रवेश करता है और साथ ही उसमें में ₹2 प्रति शेयर का प्रीमीयम भी देता है।

जैसा की अनुमान है, अगर अब मार्केट में ₹153 तक की भी गिरावट होती है तो भी ट्रेडर अपने शेयरों को ₹157 में ही बेच  सकता है जिसे उसे कम नुक़सान उठाना पड़ता है क्यूँकि अगर वो ऐसा नही करता तो वह अपने शेयरों को ₹153 में ही बेचने में सक्षम होता।

वही दूसरी तरफ़, यदि मार्केट में किसी भी तरीक़े से तेज़ी आती है ओर शेयर की क़ीमत ₹ 162 हो जाती है तो भी वह अपने आप्शन का उपयोग ना करके अपने शेयरों को ₹ 162 (वर्तमान बाजार मूल्य) पर बेच सकता है जिसके लिए उसे केवल ₹ 2 प्रीमीयम का भुगतान करना होता है।

आप्शन ट्रेडिंग में दो पार्टियाँ शामिल होती है- आप्शन के ख़रीदार और आप्शन के विक्रेता

इसमें ख़रीदार को अपने आप्शन को इस्तेमाल करने या ना करने का पूरा अधिकार होता है, लेकिन यदि ख़रीदार इसको बेचने का फ़ैसला कर ले तो विक्रेता इसे बेचने के लिए बाध्य होते है। एक आप्शन कॉंट्रैक्ट को लिखना और बेचना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन सही समय पर सही क़दम उठाए जाने पर इसमें बहुत लाभ भी हो सकता है।


आप्शन ट्रेडिंग को दो अलग अलग तरीक़ों से किया जा सकता है:

यूरोपीय: यूरोपीय आप्शन ट्रेडिंग में, आप्शन का इस्तेमाल केवल एक्स्पाइरी डेट((समाप्ति तिथि) पर ही किया जा सकता है,जो एक पूर्व निर्धारित समय है।

अमेरिकी: अमेरिकी आप्शन ट्रेडिंग  में, आप्शन का इस्तेमाल आप्शन की को खरीद और उसकी एक्स्पाइरी डेट((समाप्ति तिथि) के बीच कभी भी किया जा सकता है।

लेकिन हमें यह ध्यान देना चाहिए की  कि भारत में आप्शन ट्रेडिंग करने के लिए केवल यूरोपीय तरीक़ा ही उपलब्ध है।

जैसा कि चर्चा की गई है, एक आप्शन ट्रेडर अपनी प्रतिभूतियों को खरीदने या उन्हें बेचने के आप्शन को ही खरीद सकता है। अब यह उस पर निर्भर करता है, क्यूँकि आप्शन ट्रेडिंग दो प्रकार से हो सकती है:

कॉल आप्शन: कॉल आप्शन दो पार्टियों के बेच एक तरह का डेरिवटिव कॉंट्रैक्ट होता है,जिसमें कॉल आप्शन के ख़रीदार को अपने आप्शन का इस्तेमाल करके किसी विशेष संपत्ति को एक स्पष्ट अवधि और स्पष्ट मूल्य पर ख़रीदने का अधिकार होता है। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए की कॉल आप्शन के ख़रीदार को संपत्ति  ख़रीदने का केवल अधिकार होता है वह उसके लिए बाध्य नहीं होता।

उदाहरण के लिए, यदि Wipro का स्टॉक ₹273  प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहा है और ट्रेडर ₹275 प्रति शेयर ख़रीदबे के लिए कॉल आप्शन कॉंट्रैक्ट में प्रेवश करता है तो कॉल आप्शन के ख़रीदार को ₹275 प्रति शेयर पर ही स्टॉक ख़रीदे का अधिकार है यह मूल्य स्ट्राइक प्राइस कहलाता है।  

ट्रेडर इस कॉंट्रैक्ट की एक्स्पाइरी डेट (समाप्ति तिथि) जो की 30 अप्रैल को मौजूदा स्टॉक मूल्य के बावजूद स्ट्राइक मूल्य पर ख़रीद सकता है।

इसलिए, इस मामले में, अगर शेयर की कीमत ₹280 प्रति शेयर  तक बढ़ भी जाती है, तो भी ट्रेडर ₹275 प्रति शेयर पर शेयर खरीद सकता है जब तक उके द्वारा लिए गये कॉल आप्शन की समयसीमा समाप्त नहीं हो जाती है।

पुट आप्शनपुट आप्शन एक आप्शन कॉंट्रैक्ट है जिसमें खरीदार को अपनी आधारभूत वित्तीय उपकरणों को भविष्य में  निर्धारित समय के दौरान निर्धारित मूल्य पर बेचने का अधिकार होता है।, इस तरीक़े से प्रतिभूतियों का मालिक अपनी प्रतिभूतियों के बिक्री मूल्य को पूर्व में निर्धारित करके मार्केट में होने वाली गिरावट के ख़िलाफ़ ख़ुद को सुरक्षित कर सकता है।  

अगर प्रतिभूतियों की क़ीमत एक्स्पाइरी डेट (समाप्ति तिथि) से पहले स्ट्राइक मूल्य से नीचे आती है तो ट्रेडर अपने वर्तमान बाज़ार मूल्य की जगह अपने स्ट्राइक मूल्य पर इन प्रतिभूतियों को बेच कर इसमें होने वाले नुक़सान कम कर के उससे बच जाता है।

हालाँकि अगर उसकी प्रतिभूतियों की क़ीमत उतनी की उतनी रहती है या बढ़ जाती है तो वो अपने आप्शन का इस्तेमाल ना करके आगे होने वाले फ़ायदे को चुन सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि IBM के शेयर ₹190 प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहे है और ट्रेडर ₹185 प्रति शेयर के मूल्य अपने स्टॉक को पुट आप्शन में ख़रीदता है तो उसे ₹5 प्रति शेयर का प्रीमीयम भी भरना होता ही। लेकिन जब अर्निंग रिपोर्ट जारी होती है तो जल्द ही शेयरों का मूल्य ₹170 प्रति शेयर तक चला जाता है।

तो भी पुट आप्शन के ख़रीदार को अपने IBM के शेयर ₹185 प्रति शेयर बेचने का अधिकार होता है। इस प्रकार उसे ₹15 प्रति शेयर का लाभ मिलता है जिसमें से अगर ₹5 प्रति शेयर का प्रीमीयम घट भी दे तो भी ₹10 प्रति शेयर के साथ मुनाफ़े में है।


आप्शन ट्रेडिंग के लाभ:

आप्शन ट्रेडिंग से होने वाले कुछ बड़े लाभों के बारे में यह बताया गया है:

अनुमान: आप्शन ट्रेडिंग अनुमान लगाने का एक प्रभावी तरीक़ा है। आप्शन कांट्रैक्टस का उपयोग करके, ट्रेडरस  भारी मुनाफा कमा सकते हैं और अपने नुकसान को भी सीमित कर सकते हैं।  

आप्शन को बचाव-वयस्था (हेजिग) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

मौजूदा पोर्टफोलियो से आय: निवेशक जो लंबी अवधि के लिए प्रतिभूतियां रखते हैं, वे भी आप्शन कॉंट्रैक्टस लिखकर अपनी होल्डिगस पर आय कमा सकते है लेकिन ये बहुत रिस्की होता है। लेकिन अगर इसे अच्छी तरह से संभाला ना जाए तो ये सामान्य आय से भी अधिक प्रीमियम के रूप में दे सकता है।

लेवरिज (लाभ): आप्शन कॉंट्रैक्ट लागत में उल्लेखनीय कमी को कम करने में मदद करते है। जो छोटे बजट के ट्रेडरस के लिए आकर्षक होता है। आम तौर पर आप्शन ट्रेडिंग में ट्रेड करने के आवश्यक निवेश की लागत स्टॉक ट्रेडिंग में निवेश किए गए निवेश का 3-4% होता है।

टैक्स मैनज्मेंट (लगान प्रबंधन): आप्शन ट्रेडिंग करों के प्रबंधन में भी बहुत मदद करता है क्योंकि पूरे पूंजीगत लाभ पर चुकाया गया कर केवल प्रीमियम पर चुकाए गए कर से  बहुत अधिक होता है।

एक व्यक्ति जो कुछ शेयर रखता है और जानता है कि कीमतों में गिरावट आ रही है, तो वह अपने स्टॉक को बेच सकता है और बाद में कम कीमत पर खरीद सकता है; लेकिन ऐसा करने पर उसे स्टॉक की बिक्री से पूंजीगत लाभ पर भारी कर चुकाना पड़ता है। इसलिए इसके बजाए वो पुट आप्शन का इस्तेमाल करता है और केवल पुट आप्शन ट्रेड पर ही करो का भुगतान करता है।

और अब एक अंतिम निर्देश के रूप में,  आप्शन ट्रेडिंग अल्पकालिक निवेश से लाभ को अधिकतम करने और रिस्क्स को सीमित करने के लिए ट्रेडिंग का एक स्मार्ट और कारगर तरीका है। यदि अच्छी तरह से संभाला जाए तो यह आप्शन ट्रेडिंग ट्रेडर को असीमित लाभ के साथ साथ उसके पूंजी संरक्षण में भी मदद कर सकता है।

इसलिए, यदि आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग के साथ तेज़ी से आगे बढ़ना चाहते हैं, और विशेष रूप से डेरिवेटिव ट्रेडिंग में तो बस नीचे दिए गए फ़ॉर्म में अपनी मौलिक विवरण भरे जिसके तुरंत बाद ट्रेडिंग शुरू करने के लिए हम आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था करेंगे:

स्टॉक ब्रोकर का सुझाव

 

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