मार्जिन ट्रेडिंग

शुरुआती स्तर के निवेशकों के लिए मार्जिन ट्रेडिंग (Margin Trading) एक कॉम्प्लेक्स कॉन्सेप्ट माना जाता है।

मार्जिन ट्रेडिंग के साथ कुछ जोखिम जुड़े है, जिसके कारण नए ट्रेडर्स या निवेशकों के मन में यह आवधारणा बनी है।

लेकिन, क्या इसका मतलब यह है की आप नए ट्रेडर के लिए मार्जिन ट्रेडिंग सही नहीं हैं?

जी नहीं!

ऐसा बिलकुल नहीं है।

चलिए इसके बारे में बात करने से पहले, आपको ट्रेडिंग से जुडी कुछ आवधारणा के बारे में स्पष्ट कर देते हैं।

ट्रेडिग एक जोखिम से भरा हुआ बिज़नेस है। इसलिए, आपको ट्रेडिंग करने के लिए पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता होती है। 

उदाहरण के लिए, यदि कोई ट्रेडर एक कंपनी के 1000 शेयर खरीदना चाहता है जो ₹200 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे है तो उसे ₹2,00,000 की मूल राशि की आवश्यकता होती है। 

यहाँ आप देख सकते है की आपको ट्रेडिंग करने के लिए ₹2 लाख की पूँजी जरुरत पड़ रही है, जो एक बड़ा अमाउंट है। 

साथ ही, आपको इसमें जुड़ी जोख़िम को भी ध्यान रखना होगा, जिसे आप किसी भी रूप से अनदेखा नहीं कर सकते है। यहाँ पर एक ट्रेडर अपनी सारी पूँजी केवल एक ही ट्रेड में गवां सकता है। 

इस प्रकार, एक रिटेल ट्रेडर को ट्रेड करने के लिए पर्याप्त कैपिटल के साथ-साथ जोख़िम को भी ध्यान रखना होता है।

हालाँकि, बड़े कॉर्पोरेशन और ट्रेडिंग घराने के पास इतनी कैपिटल होती है की वो जोखिम का वहन कर सकते है, लेकिन यह एक आम निवेशक के लिए संभव नहीं है, जो की अपनी पूरी ज़िन्दगी की सेविंग ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट में लगाते है।

और, यहीं पर मार्जिन ट्रेडिंग खेल में आता है।


Margin Trading Meaning in Hindi

मार्जिन ट्रेडिंग में स्टॉकब्रोकर से ऋण लेकर सिक्योरिटीज की खरीददारी की जाती है।

इस प्रक्रिया का उपयोग करके, ट्रेडर्स ज्यादा से ज्यादा सिक्योरिटीज (ऐसेट) खरीदने में सक्षम हो जाता है, जिसका इस्तेमाल वह किसी भी समय कर सकता है।

मार्जिन ट्रेडिग, ट्रेडर या निवेशकों को आवश्यक लिवरेज प्रदान करती है।

हालांकि, मार्जिन ट्रेडिंग में हाई प्रॉफिट और रिटर्न के साथ भारी नुकसान की भी संभावना अधिक होती है।

एक मार्जिन ट्रेडर को इन दोनो पहलुओं के लिए अच्छी तरह से अच्छी तरह से तैयार होना चाहिए।

एक ब्रोकरेज कंपनी जिसने कम रेट पर पैसा उधार लिया था लेकिन वे उसी पैसे को किसी अन्य ट्रेडर्स को हाई रेट पर उधार देकर मुनाफ़ा कमाते है।

इसके साथ ही, वे उनके द्वारा ख़रीदी गयी सिक्योरिटीज को कोलैटरल (गिरवी) के रूप में अपने पास रखते है।

हालाँकि, इसकी कोई गरंटी नहीं है की ट्रेडर को इन सब के अंत में प्रॉफिट हो। इसके परिणामस्वरूप, ट्रेडर को अनुमान से अधिक नुक़सान भी हो सकता है।

मार्जिन ट्रेडिंग में बहुत रिस्क होने के कारण मार्जिन ट्रेडिग को सेबी जैसे विभिन्न संस्थो द्वारा नियंत्रित किया जाता है और उनके ऐसे कई नियम और क़ानून होते है जिन्हें हमें पालन करना होता है।  


Margin Trading Definition in Hindi

मार्जिन ट्रेडिंग की तकनीकी परिभाषा इस प्रकार है:

मार्जिन ट्रेडिंग एक तरह का अतिरिक्त फंड है जो आपने स्टॉक ब्रोकर से ट्रेडिंग करने के लिए उधार के रूप में लेते हैं। इसी प्रक्रिया को मार्जिन ट्रेडिंग कहते है।

यह फंड एक ट्रेडर अपने ट्रेडिंग अकाउंट में प्रॉफिट बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करता हैं।

इस “अतिरिक्त” फंड को ऋण(Loan), क्रेडिट (Credit) या एक अग्रिम राशि(Advance) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह आपको एक विशिष्ट इंटरेस्ट रेट पर दिया जाता है।

आप अपने स्टॉक ब्रोकर से कितना मार्जिन ले सकते हैं – यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इन फैक्टर्स में शामिल है – शेयर की अस्थिरता (Volatility of Stocks), जिसमें आप निवेश करने जा रहे है। इसके अलावा आपकी ट्रेडिंग हिस्ट्री जाएगी।

हालाँकि एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए की अगर आप मार्जिन ट्रेडिंग का सही इस्तेमाल नहीं करते तो आपकी पूरी पूँजी भी डूब सकती है।

यह उनलोगों को विशेष रूप से ध्यान रखना होगा, जो अपने ट्रेड के लिए पर्याप्त रिसर्च व एनालिसिस नहीं करते।

चूँकि, मार्जिन ट्रेडिंग में जोखिम भी बहुत है, इसलिए मार्जिन ट्रेडिंग को सेबी जैसी नियामक संस्था द्वारा नियंत्रित की जाती है। इसके साथ कई तरह के नियम और विनिमय भी निर्धारित किये गए है।


भारत में मार्जिन ट्रेडिग की प्रक्रिया

भारत में ट्रेडिग के लिए मार्जिन (या लीवरेज)का उपयोग करने के लिए निम्नलिखित कुछ बुनियादी चरणों का पालन करना होगा। जो नीचे सूचीबद्ध हैं:

  • ट्रेडर अपने ब्रोकर के साथ एक मार्जिन अकाउंट खोलता है और उसमें एक न्यूनतम धनराशि रखता है जिसे मिनिमिम “मार्जिन मनी” (Margin Money) भी कहा जाता है।
  • मार्जिन अकाउंट खुलने के बाद, ट्रेडर ट्रेडिंग करना शुरू कर सकता है और अधिक सिक्योरिटीज खरीदने के लिए ब्रोकर कुछ पैसे भी उधार ले सकता है।
  • हालांकि, ट्रेडर को सिक्योरिटीज के खरीद मूल्य (Purchased Price) का एक निश्चित प्रतिशत प्रारंभिक मार्जिन (Initial Margin) अपने और ब्रोकर के साथ खोले गए मार्जिन अकाउंट में जमा करवाना होता है।
  • ट्रेडिग के दौरान, प्रत्येक सेशन के बाद ट्रेड किए हुए सभी शेयरों स्क्वेर ऑफ़ (Square Off Meaning in Hindi) किया जाना चाहिए। 
  • इसका मतलब अगर एक ट्रेडर ने शेयर खरीदे है तो उन्हें प्रत्येक सेशन के अंत में बेचा जाना चाहिए और अगर बेचे है तो खरीदे जाने चाहिए।
  • इसी के साथ-साथ लाभ या हानि के आधार पर शेयरों के एक मेंटेनेंस मार्जिन (Maintenance Margin) को भी बनाए रखा जाना चाहिए, जो ट्रेडर्स को स्क्वेरिग ऑफ़ (Squaring Off) के बाद भी कुछ न्यूनतम राशि प्रदान करे।
  • यदि मेंटेनेंस मार्जिन पूरा नहीं हुआ है, तो ब्रोकर द्वारा अपर्याप्त मार्जिन फंड के कारण ट्रिगर द्वारा मार्जिन कॉल किया जाता है।
  • ट्रेड के बाद प्रत्येक ऑर्डर को डिलीवरी में परिवर्तित कर दिया जाता है, जो सीधे ब्रोकर के अकाउंट में यह सुनिश्चहित करने के लिए जाते है की उसके क़र्ज़ का भुगतान हो गया है।
  • इसके बाद ब्रोकर के पास शेयरों को ख़रीदने तथा ब्रोकर की फीस और अन्य शुल्कों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन (कैश) होना चाहिए।

उपरोक्त  बातों से बता चलता है की मार्जिन ट्रेडिंग एक प्रक्रिया है, जिसके जरिये एक रेगुलर रिटेल ट्रेडर अतिरिक्त प्रॉफिट कमा सकता है, अगर वह अपने ट्रेडिंग फैसले को लेकर आश्वस्त है।

जब तक आप ब्रोकर का मार्जिन अमाउंट रखते है तो आपको ब्रोकर को एक इंटरेस्ट देना पड़ता है, जो ब्रोकर के लिए पैसा कमाने का एक साधन होता है।

इसी समय, दोनों पक्ष (ब्रोकर और ट्रेडर) कुछ जोखिम भी उठाते हैं, जहां ब्रोकर आपको एक प्रकार का ऋण प्रदान करता है और आपके ट्रेडिंग कॉल पर भरोसा करता है।

ब्रोकर खुद को सुरक्षित रखने के लिए, आपको द्वारा खरीदे गए शेयरों को कोलैटरल (गिरव) के रूप में रखता है।

वहीं आप एक ट्रेडर के रूप में, ब्रोकर से ट्रेड करने के लिए एक फंड उधार लेते है, जो आप खुद से वहन करने में सक्षम नहीं होते।

SEBI New Margin Rules in Hindi

ट्रेडर्स अभी तक ब्रोकर्स के द्वारा दिए गए मार्जिन का उपयोग कर इंट्राडे ट्रेडिंग में मुनाफा कमा रहा था, लेकिन 2020 दिसंबर में सेबी एक नया नियम लेकर आया जिसके चलते मार्जिन फंडिंग हर तिमाही में 25% तक घटती रही और अब सितम्बर 01, 2021 से मार्जिन पूरी तरह से ख़तम करने की घोषणा की गई हैं।

इस नए नियम का असर इंट्राडे ट्रेडर्स की  ट्रेडिंग में देखने को तो मिलेगा ही लेकिन इसके साथ स्टॉकब्रोकर्स को भी भारी नुकसान होगा।

हालांकि इस नए नियम के विरुद्ध स्टॉकब्रोकर, Wisdom Capital के सीईओ श्रीमान देब मुख़र्जी ने कोर्ट केस किया लेकिन उनको हर बार एक नई तारिख दे दी गई।

इसके साथ ANMI ने सेबी को पत्र लिखा लेकिन तब भी सेबी शांत रहा।

सेबी तक अपनी आवाज़ पहुंचाने के लिए A Digital Blogger ने सब ट्रेडर्स के साथ मिलकर #NoTradingDay movement शुरू किया है जिसके अंतर्गत 1 सितम्बर 2021 को ट्रेड न करने का निर्णय लिया गया है।


मार्जिन ट्रेडिंग का उदाहरण

आइए वास्तविक जीवन से एक उदाहरण लेते है:

मनमोहन, जो की मुंबई में एक इंटरमेडिएट लेवल का एक ट्रेडर है और उसके पास ₹20,000 /- रूपये की पूँजी है। वह अपनी इस पूँजी के साथ मार्जिन अकाउंट खुलवाता है और फिर ₹80,000/- रुपयों उधार लेता है।  

अब, यहाँ ₹20,000 उसकी इनिशियल मार्जिन है। 

वह अपने अकाउंट में रखे ₹1,00,000 /- का उपयोग करके IBM के 500 शेयर खरीदता है जिनका मूल्य ₹ 170/- प्रति शेयर है। 

इस तरह, मनमोहन ₹ 85,000/- का कुल निवेश करता है जो वह मार्जिन ट्रेडिग के बिना नहीं कर सकता था।

अब, यहाँ दो परिदृश्य बाहर निकल कर आते हैं। 

पहले परिदृश्य में, यदि शेयरों की कीमत ₹190 प्रति शेयर तक जाती है, तो वह ₹10,000 का लाभ कमाता है। यह मनमोहन द्वारा किये हुए पैसे के निवेश पर 50% का लाभ होता है।  

यह मार्जिन ट्रेडिंग का एक पक्ष दिखाता है, जहां ट्रेडर को लाभ होता है, जो वह बिना मार्जिन मनी के नहीं कर सकता था। 

लेकिन दूसरे परिदृश्य में, यदि उसकी सिक्योरिटीज की क़ीमत ₹150/- प्रति शेयर हो जाती है तो भी वह मार्जिन कॉल प्राप्त होता है जिसे उसे ₹10,000/- का ही नुक़सान होगा।

ये नुकसान उसे ब्रोकर को उसकी फ़ीस और अन्य शुल्कों साथ देना होता है।

यह  मार्जिन ट्रेडिग के नकारात्मक पक्ष को दिखाता है, क्योंकि अगर उसने कम पैसा निवेश किया था तो उसे भारी नुकसान नहीं हुआ होगा।


Margin Trading Facility in Hindi

मार्जिन ट्रेडिंग के सुविधा ज्यादातर भारत में पंजीकृत स्टॉकब्रोकर प्रदान करते है।

हालाँकि, ब्रोकर द्वारा प्रदान की जाने वाली मार्जिन अमाउंट एक ब्रोकर से दुसरे ब्रोकर में अलग हो सकती है।

कुछ स्टॉकब्रोकर गहन शोध करने के बाद अपने ग्राहकों को सभी ट्रेडिंग सेगमेंट में हाई एक्सपोज़र प्रदान करते है। उदाहरण के लिए, एंजेल ब्रोकिंग अपने ग्राहकों को इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए 48 गुणा तक एक्सपोज़र प्रदान करता है।

जबकि कुछ स्टॉकब्रोकर जैसे शेयरखान उसी सेगमेंट में न्यूनतम 10 गुणा का मार्जिन देते है।

इसके अलावा, कुछ स्टॉकब्रोकर इस सुविधा को डिफ़ॉल्ट रूप से प्रदान करते हैं।

जबकि अन्य मामलों में, आपको अपने अकाउंट में मार्जिन ट्रेडिंग को एक्टिवेट करने के लिए एक रिक्वेस्ट देना होगा।

इस प्रकार, आप सुनिश्चित करें कि खाता खोलने की प्रक्रिया के दौरान आपको स्टॉकब्रोकर एग्जीक्यूटिव से अपेक्षित विवरण जरूर प्राप्त करे या यदि आप डीमैट खाता ऑनलाइन खोलने जा रहे हैं तो ग्राहक सहायता को कॉल करें।


मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग

अब तक, आप समझ चुके हैं कि मार्जिन ट्रेडिंग कैसे काम करती है, तो अब बात फंडिंग की करते है।

आप वास्तव में अपने अकाउंट और अपने ट्रेड में मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग का लाभ कैसे उठाते हैं?

खैर, यह स्वचालित है!

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपको कुछ भी नहीं करना है, जब तक कि आपके अकाउंट में मार्जिन ट्रेडिंग एक्टिवेट हो गई है।

(उपरोक्त अनुभाग में उल्लिखित अनुभाग के अनुसार डिफ़ॉल्ट या पोस्ट अनुरोध के अनुसार)

जब आप अपने स्टॉकब्रोकर द्वारा प्रदान किए गए किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, तो उपलब्ध मार्जिन और एक्सपोज़र वैल्यूज को डिफरेंशियल के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा, मार्जिन फंडिंग वैल्यू भी ट्रेड टाइप, निवेश उत्पाद और सेगमेंट के आधार पर भिन्न होता है।


मार्जिन ट्रेडिंग एक्सचेंज

सेबी रेगुलेशन के तहत, मार्जिन ट्रेडिंग की सुविधा भारत के अधिकांश प्रमुख स्टॉक मार्केट एक्सचेंज द्वारा प्रदान की जाती है, जिसमें शामिल हैं:

याद रखें, 95% से अधिक खुदरा शेयर बाजार निवेश ऊपर सूचीबद्ध एक्सचेंजों द्वारा कवर किए जाते हैं। इस प्रकार, यदि आपका स्टॉकब्रोकर इन एक्सचेंजों का सदस्य है, तो आप अपने ट्रेडों में मार्जिन का आसानी से उपयोग कर पाएंगे।

यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपना डीमैट अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकर सदस्यता विवरणों की जांच करें।


मार्जिन ट्रेडिंग के नियम

मार्जिन ट्रेडिंग के लिए कुछ नियम तय किये गए हैं जिन्हें आपको अपने सभी मार्जिन-आधारित ट्रेड में पालन करने की जरुरत है। हालांकि, इन नियमों की सूची ज्यादा बड़ी नहीं है।

यदि आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो आपको पैसों का बहुत अधिक नुकसान हो सकते हैं।

ये नियम निम्नलिखित हैं:

  • आपको अपने ट्रेडिंग खाते में मिनिमम मार्जिन अमाउंट बनाए रखने की आवश्यकता है। इसके पीछे का कारण यह है की शेयर बाजार वोलेटाइल है।
  • आपको कभी नहीं पता चलता है की आपके निवेश के मूल्य में कब और क्या बदलाव आया है। इस प्रकार, एक मिनिमम मार्जिन अमाउंट जरूर रखना चाहिए।
  • आप प्लेस किये गए इंट्राडे ट्रेड को डिलीवरी ट्रेड में बदल सकते हैं और अपने डीमैट खाते में स्टॉक को होल्ड कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।
  • ट्रेडिंग सत्र समाप्त होने से पहले आपको अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो ब्रोकर आपके पोजीशन एक ऑटो स्क्वायर-ऑफ करेगा।
  • लेकिन यह ऑटो स्क्वायर बाजार मूल्य पर किया जाएगा जो आपके ट्रेड के लिए सही नहीं होता।

मार्जिन स्टॉप-लॉस 

अपने मार्जिन-आधारित ट्रेड में स्टॉप-लॉस प्लेस करना केवल एक सुझाव नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य शेयर मार्केट टिप्स की तरह है।

यह उस ट्रेडिंग ऑर्डर प्रकार पर निर्भर करता है जिसे आप प्लेस कर रहे हैं और इसके आधार पर आपका स्टॉप-लॉस कैलकुलेशन किया जाता है।

अपने ट्रेड में इसका उपयोग करने का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि यह हमेशा आपके संभावित नुकसान को सीमित करेगा।

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, मार्जिन ट्रेडिंग में नुकसान भी हो सकता है। इस प्रकार, आप स्टॉप-लॉस के साथ संभावित नुकसान से बच सकते हैं।

आइए इसका एक त्वरित उदाहरण लें कि यह कैसे काम करता है।

उदाहरण के लिए, आप ICICI के 10 शेयरों को खरीदना चाहते हैं जो वर्तमान में ₹550 पर ट्रेड कर रहे हैं।

जबकि आप आप अपने स्टॉक को लेकर बुलिश हैं, तो आप संभावित नुकसान को कम करना चाहते हैं और स्टॉक से बाहर निकलते हैं यदि स्टॉक की कीमत आपकी अपेक्षाओं के विपरीत जाती है।

इस प्रकार, आप ₹540 पर स्टॉप-लॉस लगाते हैं।

इसका मतलब है कि शेयर की कीमत जब वास्तव में ₹540 तक पहुँच जाती है, एक आपका ट्रेड स्वतः ही पूरा हो जाता है और आप (550 – 540) X 10 यानी ₹100 का नुकसान उठाते हुए अपनी पोजीशन से निकल जाते हैं।

हालाँकि, यदि शेयर की कीमत 560 तक पहुँच जाती है, तो आप स्टॉप लॉस को ₹550 तक ले जा सकते है, जिससे आपका ट्रेड बिना किसी लाभ-हानि स्थिति में रहता है।

आप अपने ट्रेडों में ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस का भी उपयोग कर सकते हैं जो स्वचालित रूप से आपके लाभ पर प्रतिशत के स्तर पर काम करता है।


मार्जिन ट्रेडिंग फीस 

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, जब आप मार्जिन ट्रेडिंग का उपयोग कर रहे हैं तो आप स्टॉकब्रोकर से “ऋण” लेते हैं।

और जब आप ऋण लेते हैं, तो आपको प्रिंसिपल अमाउंट पर “इंटरेस्ट” देना होता है।

अब, शेयर बाजार के संदर्भ में, यह इंटरेस्ट रेट एक ब्रोकर से दूसरे ब्रोकर में भिन्न होती है।

हालांकि, यह ग्राहक को पता होता है कि उसे प्राप्त लाभ पर कितना इंटरेस्ट रेट देना होगा।

मान लें कि आपका स्टॉकब्रोकर 18% की इंटरेस्ट रेट वसूल रहा है।

मान लीजिये, आप ब्रोकर से ₹90 हजार  का “लोन” लेकर ₹1 लाख का ट्रेड कर रहे हैं और अपने ट्रेडिंग खाते से ₹10 हजार का उपयोग कर रहे हैं।

इस प्रकार, इन ₹90 हजार के लिए 18% पर पूरे वर्ष के लिए इंटरेस्ट रेट होगा: ₹90 X 18% = ₹16200 /प्रति वर्ष

यदि आप प्रति दिन इंटरेस्ट अमाउंट की गणना करते हैं तो यह ₹16200/365 या ₹44.30 हो जाएगा।

यदि आप T + 5 की पोजीशन ले रहे हैं (T + 3 या T + 10 हो सकता है), तो आप ₹44.30 X 5 अर्थात् ₹1221.5 का भुगतान करेंगे।

इसे आपके मार्जिन ट्रेडिंग शुल्क के रूप में देखा जा सकता है!


क्या मार्जिन ट्रेडिग करना सही है या गलत?

इस सवाल का जवाब देने के लिए, एक ट्रेडर को दोनों पक्षों पर ध्यान देना होगा। आप मार्जिन ट्रेडिंग की खूबियों और कमियों को समझ कर सही आकलन कर सकते है।

चलिए सबसे पहले मार्जिन ट्रेडिंग के फायदों के बारे में बात करते है।


मार्जिन ट्रेडिंग के लाभ 

आइए मार्जिन ट्रेडिग के उपयोग से शेयर मार्केट में ट्रेडर्स को होने वाले कुछ फ़ायदों की बात करते है:

  • मार्जिन ट्रेडिग अपने ट्रेडर्स को मुनाफ़ा कामने के लिए सक्षम बनाने में बहुत उपयोगी साबित हुआ है। इसमें ट्रेडर्स अपनी क्षमता से अधिक सिक्योरिटी को ख़रीदने में सक्षम हो जाते है और फिर उन से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाते है।
  • इसमें ट्रेडर्स नए-नए ट्रेडिग अवसरों का लाभ उठा सकते है, क्योंकि उन्हें अपनी फंड के बारे में अधिक चिन्ता नहीं करनी पड़ती।
  • वे हेजिग (बचाव-व्यस्था)  द्वारा अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने में भी सक्षम होते हैं।

मार्जिन ट्रेडिग में जोखिम 

चलिए अब यह हम आपको मार्जिन ट्रेडिग से संबिधित कुछ चिंताओं से अवगत करवाते है:

  • अगर ट्रेडिग सही नहीं जाती है तो मार्जिन ट्रेडिग से बड़े नुक़सान हो सकते है।  
  • अगर सिक्योरिटीज की कीमत अचानक गिरती है और मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए ट्रेडर को नकदी (कैश) की व्यवस्था करनी पड़ती है तो उसे पहले मार्जिन कॉल का भुगतान करना आवश्यक होता है।
  • यदि ट्रेडर मार्जिन कॉल को पूरा करने में असमर्थ है, तो ब्रोकर सुरक्षा के रूप में रखी गई सिक्योरिटीज को उसी समय  बेचने की मांग की करता है फिर जिससे ट्रेडर को और नुकसान पहुंच सकता है।
  • ट्रेडर को उधार लिए हुए पैसों पर हाई इंटरेस्ट रेट का भी भुगतान करना पड़ता है।

निष्कर्ष 

अब निष्कर्ष पर आते हैं, मार्जिन ट्रेडिग अपेक्षाकृत जोखिम भरा दावं है। निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गयी है:

मार्जिन ट्रेडिंग तभी करे, जब आप अपनी कैपिटल, जोखिम क्षमता, और निवेश लक्ष्य को निर्धारित कर लें।

इसका उपयोग अनुभवी ट्रेडर को करना चाहिए जो इसमें शामिल जोखिमों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं

इसे हाई नेट वर्थ (High Net Worth) वाले निवेशकों द्वारा करना चाहिए, जो नुकसान उठाने में सक्षम होते है।

और हाँ, मार्जिन ट्रेडिग का रास्ता चुनने से पहले आपको बहुत सावधानी बरतनी होगी।


यदि आप अपने ट्रेड में मार्जिन का उपयोग शुरू करना चाहते है या बस एक डीमैट खाता खोलना चाहते हैं  तो नीचे दिए गए फॉर्म में अपना कुछ मौलिक विवरण भरें।

फॉर्म भरने के बाद, आपके लिए एक कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी:

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मार्जिन ट्रेडिग
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