इंडेक्स

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भारत में सेंसेक्स और निफ्टी दो सबसे महत्वपूर्ण शेयर मार्केट इंडेक्स हैं। 

ये दोनों बेंचमार्क इंडेक्स है। इसका मतलब है, ये भारत के पूरे शेयर बाजार के इंडेक्स को दर्शाने के लिए एक स्टैंडर्ड पॉइंट है। 

आगे बढ़ने से पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है कि इंडेक्स क्या है? 


इंडेक्स क्या होता है?

स्टॉक मार्केट इंडेक्स को समझने के लिए सबसे पहले स्टॉक एक्सचेंज के बारे में समझना होगा। 

स्टॉक एक्सचेंज एक ऐसी जगह है, जहां शेयर, बॉन्ड, डेरिवेटिव, कमोडिटीज जैसी सभी ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज लिस्टेड होती हैं।

इन सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग (खरीद और बिक्री) करने के लिए, इन सभी कंपनियों को पहले स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होना पड़ता है।

और फिर, भारतीय सिक्योरिटीज और एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) द्वारा इनको मॉनिटर किया जाता है। 

भारत में दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं: 

इन दोनों के अलावा, भारत में कुछ अन्य एक्सचेंज भी है जैसे कि कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज, मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड आदि।

भारत में सेबी द्वारा कुल 9 मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज हैं।

भारत में एक शेयर मार्केट इंडेक्स अपने रेस्पेक्टिव स्टॉक एक्सचेंज का एक इंडिकेटर है। 

दोनों एक्सचेंज पर हजारों कंपनियां लिस्टेड हैं, लेकिन इंडिकेटर केवल कुछ टॉप परफॉर्मिंग कंपनियों को मॉनिटर करता हैं।

यह मार्केट की रियल पोजीशन को दिखने के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि मार्केट के सभी कंपनियों को ट्रैक करना मुश्किल है।   

चूँकि, किसी भी देश की बड़ी और अच्छी कंपनियां ही इकोनॉमी और देश की वित्तीय स्थिति के बारे में एक प्रदान करती हैं, इसलिए इंडेक्स केवल इन्हें कंपनियों को ट्रैक करती है।

हम इसके बारे में आगे बात करेंगे कि किस तरह अलग अलग मेथड के माध्यम से कंपनियों को रेस्पेक्टिव इंडेक्स में शामिल किया जाता है।

चलिए, अब इंडेक्स के अलग-अलग प्रकार के बारे में समझते हैं। 


स्टॉक मार्केट इंडेक्स के प्रकार

यहाँ आपको निम्नलिखित इंडेक्स दिए गए हैं, जो इस प्रकार है:

चलिए, अब एक-एक करके इन पर चर्चा करते हैं। 


बेंचमार्क इंडेक्स: S&P बीएसई सेंसेक्स, टॉप 30 बेस्ट-परफॉर्मिंग शेयर और निफ्टी 50, टॉप 50 परफॉर्मिंग शेयर का समूह है, जो बीएसई और एनएसई के इंडिकेटर हैं।

इन्हे बेंचमार्क इंडेक्स माना जाता है, क्योंकि ये सटीकता के साथ जानकारी प्रदान करते है और जिन कंपनियों का चयन करते है, उन्हें रेगुलेट करने के लिए सबसे अच्छे तरीके का इस्तेमाल करते हैं।

इस प्रकार, मार्केट की सामान्य गतिविधियों के बारे में जानने के लिए एक रेफेरेंस के रूप में सबसे बेहतर विकल्प है।

फन फैक्ट: बीएसई से पहले S & P को जोड़ा गया है, क्योंकि 2013 में S & P और बीएसई के साथ एक पार्टनरशिप की गयी, जिसमे इंडेक्स की गणना, लाइसेंस देने के तरीके को और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्धता जतायी गयी।  

S & P डॉव जोंस इंडेक्स, इंडेक्स बेस्ड कॉन्सेप्ट डाटा और रिसर्च के लिए दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल रिसर्च है। 


सेक्टोरल इंडेक्स: दोनों एक्सचेंज, एनएसई और बीएसई के पास कुछ इंडिकेटर हैं, जो एक विशेष शेयर मार्केट सेक्टर के तहत आने वाली कंपनियों के इंडेक्स को मापते हैं।

जैसे, NSE Pharma और S&P BSE Healthcare जैसे इंडेक्स, फार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए अपने संबंधित एक्सचेंज के इंडिकेटर हैं।इसका एक और उदाहरण Nifty PSU Bank और S&P BSE PSU इंडेक्स है, जो सभी लिस्टेड पब्लिक सेक्टर बैंक के इंडिकेटर हैं।

यह ज़रूरी नहीं है कि दोनों एक्सचेंज के पास सभी सेक्टर के लिए समान इंडेक्स होंगे। लेकिन देखा जाये तो आमतौर पर यह सामान ही होते है।


मार्केट कैप बेस्ड इंडेक्स: कुछ इंडेक्स कंपनियों को बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) के आधार पर चयन करते हैं।

जैसा कि हम जानते हैं कि मार्केट कैप, किसी भी पब्लिक ट्रेडेड कंपनी की मार्केट वैल्यू होती है।

NSE Smallcap 50 और S&P BSE Smallcap जैसे इंडेक्स केवल उन कंपनियों का एक समूह है, जिनका बाजार पूंजीकरण कम होता है।

इसी तरह NSE Midcap 100 और S & P BSE Midcap अन्य इंडेक्स भी हैं।

अन्य इंडेक्स: S & P BSE 100, S & P BSE 500, NSE 100 जैसे कुछ अन्य इंडेक्स भी हैं, जो तुलनात्मक रूप से बड़े इंडेक्स हैं और इन इंडेक्स पर पर बड़ी मात्रा में शेयर लिस्टेड होती हैं।


इंडेक्स कैसे बनाते हैं?

अभी तक, हम यह समझ चुके है कि इंडेक्स मूल रूप से अच्छे स्टॉक का एक ग्रुप है, क्योंकि ये देश की इकॉनमी को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है और इसलिए मार्केट को समझने के लिए इन कंपनियों के स्टॉक का परफॉरमेंस को ट्रैक किया जाता है।

हालाँकि, हमें यह भी जानना होगा कि भारत में स्टॉक मार्केट इंडेक्स शेयरों का चयन कैसे करता है।

इंडेक्स वैल्यू तक कैसे पहुँचते हैं: जब एक इंडेक्स जैसे कि सेंसेक्स या निफ्टी ऊपर या नीचे जाता है, इसका मतलब है कि उन इंडेक्स वाले शेयरों ने बेहतर या खराब प्रदर्शन किया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि केवल एक कंपनी के स्टॉक से इंडेक्स प्रभावित होती है।

मान लीजिये, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), जो निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में सूचीबद्ध है। 

अब, यदि किसी एक ट्रेडिंग सेशन के दौरान RIL के स्टॉक में 4% की ग्रोथ होती है। लेकिन, अब ये जरुरी नहीं कि इंडेक्स में भी 4 परसेंट की वृद्धि होगी। 

क्योंकि, इंडेक्स में अन्य स्टॉक भी हैं जो ऊपर या नीचे गए हैं और इंडेक्स की मूवमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।

कोई भी ऐसा दिन जरुरी नहीं की मार्केट के सभी सेक्टर में तेजी हो।

इंडेक्स की टोटल वैल्यू केवल मिड-कैप वैल्यू के आधार पर नहीं जोड़ा जा सकता है, क्योंकि इंडेक्स में सभी शेयर का एक समान वजन (Weightage) नहीं होता हैं।

वेटेज यानी वजन का मतलब होता है कि उस स्टॉक का इंडेक्स में दूसरे शेयरों की तुलना में कितना महत्व है।

अब सवाल यह आता है कि चुने हुए स्टॉक पर यहाँ वेटेज कैसे तय किया जाता है?

मुख्य रूप से दो कारक हैं जिनके द्वारा स्टॉक चुने जाते हैं:

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन: यदि स्टॉक चयन रणनीति के लिए मार्केट कैप को आधार माना जाता है, तो जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण सबसे अधिक होगा, उन कंपनियों को इंडेक्स में एक साथ रखा जाता है।

स्टॉक्स का भार उनके फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन (Free Float Market Captilization) पर तय होता है, जितना बड़ा मार्केट कैपिटलाइजेशन होगा उतना ज्यादा इंडेक्स में वेटेज होगा।

इंडियन इंडेक्स मुख्य रूप से फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन को ही पैरामीटर मानते हैं। 

फ्री फ्लोट मिड-कैप, फुल मिड-कैप से कैसे अलग है: मार्केट कैप, कंपनी द्वारा जारी किए गए आउटस्टैंडिंग शेयर की कुल वैल्यू है। 

फ्री फ्लोट मार्केट कैप, जिसे इंडेक्स स्टॉक का वजन मापने के लिए उपयोग करते हैं, इसमें प्रमोटर के शेयर को शामिल नहीं करते हैं।

उदाहरण के लिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के पास 20 अप्रैल के क्लोजिंग डेटा के रूप में सबसे अधिक फ्री-फ्लोट मार्केट कैप है, इसलिए सेंसेक्स बनाने वाले अन्य शेयरों की तुलना में RIL के स्टॉक का अधिक वेट होगा। 

इसलिए, यदि RIL के शेयर में पॉजिटिव या नेगेटिव मूवमेंट होता है, तो इसका अन्य स्टॉक की तुलना सेंसेक्स के इंडेक्स पर भी अधिक प्रभाव पड़ेगा।

कीमत: दुनिया में कुछ ऐसे इंडेक्स भी हैं जो एक इंडेक्स में शेयरों को वेटेज देने के लिए प्राइस का उपयोग करते हैं।

इसका एक उदाहरण जापान का  निक्केई 225 इंडेक्स है। अधिक स्टॉक प्राइस वाली कंपनियों के पास अधिक वेटेज होता है और यह कम वैल्यू वाले शेयरों की तुलना में इंडेक्स को अधिक प्रभावित करता है।

इस पूरी प्रक्रिया के द्वारा, ये इंडेक्स, स्टॉक्स का चयन करता है। 


इंडेक्स शेयर बाजार में क्या काम करता है?

इंडेक्स का मुख्य काम निवेशकों के लिए ट्रेड को आसान बनाना है।

मान लीजिये शेयर बाजार में आपके पास ऐसी केटेगरी नहीं हैं और यह एक ऐसा बाज़ार है, जहां एक्सचेंज में सूचीबद्ध सभी शेयर खरीद के लिए हैं। 

वहीं आपको यह नहीं पता कि किस स्टॉक में हाई मिड-कैप है और कौन से स्टॉक की वैल्यू कम है और कौन से स्टॉक “बेहतर” है।

यह वह जगह है जहां शेयर मार्केट इंडेक्स की बहुत जरुरत होती है। 

वे आपको सभी शेयर्स में होने वाले उतार-चढ़ाव को एक जगह दिखाता है। जिससे आपको उनकी प्राइस को जानने के लिए यहाँ वहाँ नहीं देखना पड़ता। 

यहां कुछ कारण बताए गए हैं कि इंडेक्स स्टॉक मार्केट में निवेश करने के लिए एक महत्वपूर्ण कॉम्पोनेन्ट है:

ग्रुप बनाना: जैसा कि ऊपर बताया गया है कि सभी स्टॉक एक साथ समूहबद्ध होते हैं और एक निश्चित रणनीति द्वारा चुने जाते हैं। जैसे कि इस मामले में फ्री-फ्लोट मिड-कैप, सबसे बेस्ट स्टॉक्स को एक ही स्थान पर दिखाता है।

उदाहरण: एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स में 30 शेयर का संग्रह है, एसएंडपी बीएसई 100, 100 शेयरों का कलेक्शन है और एसएंडपी बीएसई 500, 500 शेयरों का संग्रह है।

ये इंडेक्स आपको एक जगह पर मिड-कैप के माध्यम से टॉप शेयरो को देखने में मदद करते हैं।

कभी-कभी आप यह देखना चाहते होंगे कि एक कौन सा सेक्टर अच्छा परफॉर्म कर रहा है?

उदाहरण के लिए, वर्तमान समय में जहां एक महामारी (Corona) ने पूरी दुनिया को जकड़ लिया है और शेयर बाजार नीचे हैं। अब आप जानना चाहते होंगें कि हेल्थ सेक्टर कैसा परफॉर्म कर रहा है।

हालांकि, निफ्टी फार्मा और एसएंडपी बीएसई हेल्थकेयर जैसे समूहित सूचकांक आपके लिए यह काम करते हैं।

स्टॉक और बाजार के प्रदर्शन का आकलन: यह न केवल आपके स्टॉक को चुनने में मदद करता है, बल्कि इसके बाद की प्रक्रिया में भी आपको गाइड करता है।

अधिक इंडेक्स होने से आपको जवाब खोजने में मदद मिलती है कि क्या कोई शेयर बेंचमार्क स्टॉक मार्केट इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है?

क्या एक स्टॉक दूसरे शेयर की तुलना में जोखिम भरा है?

क्या यह इंडेक्स में सूचीबद्ध अन्य लोगों की तुलना में बेहतर या खराब प्रदर्शन कर रहा है?

क्या स्टॉक ने अपने सेक्टर से संबंधित स्टॉक से बेहतर या बुरा प्रदर्शन किया है?

इंडेक्स इन सभी सवालों को जानने का एक शानदार तरीका है कि स्टॉक व्यक्तिगत और तुलनात्मक रूप से कैसा प्रदर्शन करता है।

इंडेक्स के पास शेयर की बहुत अधिक जानकारी है जैसे कि प्राइस हिस्ट्री, वॉल्यूम में परिवर्तन, एक शेयर से दूसरे शेयर की तुलना, सेक्टर प्रदर्शन, वोलैटिलिटी, और मार्केट कितना ग्रो कर रहा है?

यदि 30 या 50 सर्वश्रेष्ठ कंपनियों का कलेक्शन, अपट्रेंड या डाउनट्रेंड दिखा रहा है, तो इंडेक्स बताता है कि स्टॉक मार्केट सामान्य रूप से कैसे कर रहा है।

निवेशक की भावना को दर्शाता है:

इंडेक्स  YTD प्रदर्शन (वर्ष से तारीख) *
निफ्टी 50  14895.65         +105.70 (0.71%)
एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स  50,614.29         +358.54 (0.71%)

यदि हम उपरोक्त टेबल की बात करें, तो हम देख सकते हैं कि कैलेंडर वर्ष 2020 में, निफ्टी 50 +105.70 (0.71%) और सेंसेक्स +358.54 (0.71%) बढ़ गया है।

यह निवेशक की भावना के बारे में बताता है। कोरोनावायरस ने निवेशकों के भरोसे और ग्लोबल इकॉनमी  को हिला दिया था। लेकिन हाल ही में पास हुए बजट ने लोगों को फिर से खुश कर दिया है। 

वर्तमान में, बाजार एक सकारात्मक निवेशक सेंटीमेन्ट का संकेत दे रहा है। 

इंडेक्स के ना होने से आप एक झटके में इस आंकड़े को प्राप्त नहीं कर पाएंगे और 1,000 कंपनियों की सूची से अच्छा और खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के बारे में नहीं जान पाएंगें।


निष्कर्ष

इंडेक्स, शेयर बाजार के लिए एक जरुरी साधन है।

इंडेक्स एक सूचकांक है जो काफी सारे शेयर की कीमतों में होने वाली मूवमेंट पर लगातार अपनी नज़र बनाए रखता है। 

इसकी अनुपस्थिति में, शेयर बाजार में अच्छे शेयर के बारे में जानने के लिए निवेशकों की भीड़ लगी रहती है। शेयर मार्केट इंडेक्स, निवेशक के लिए ट्रेडिंग को आसान बनता है।

इंडेक्स होने से आपका वर्कलोड कम होता है और स्टॉक मार्केट में पहला कदम आसान होता है।

जब आप निवेश की बात करते हैं तो आपको बहुत सी चीज़ें जानने की जरुरत होती है।  

सेंसेक्स में 30 सर्वश्रेष्ठ कंपनियां हो सकती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे 30 कंपनियां आपके लिए सही है।

आप कम जोखिम क्षमता रखते होंगें लेकिन सेंसेक्स पर सूचीबद्ध स्टॉक में बहुत जोखिम हो सकता है।

निवेश पोर्टफोलियो सभी निवेशकों के लिए सही नहीं हो सकता है।


यदि आप भी शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं तो डीमैट खाता खोलें:

डीमैट खाता खोलने के लिए नीचे दिए फॉर्म को देखें:

यहाँ अपना बुनियादी विवरण भरें और उसके बाद आपके लिए कॉलबैक की व्यवस्था की जाएगी। 

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